5 ways to strengthen your liver – लीवर को मजबूत करने के 5 प्रभावी उपाय

लीवर हमारे शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और ज़रूरी अंग है। पुरानी चीनी मान्यता के अनुसार अगर कोई चिकित्सक यह जान ले कि, लीवर को कैसे अनुकूल स्थिति में लाया जा सकता है तो वह किसी भी रोग का इलाज कुशलता से कर सकता है।

लीवर के कार्य (Functions of liver)

केवल इतना ही नहीं बल्कि लीवर हमारे शरीर का एक ऐसा अंग है जो सबसे ज़्यादा मेहनती काम करता है, यह शरीर द्वारा ग्रहण किए गए भोजन को ऊर्जा में परिवर्तित करने का महत्वपूर्ण काम करता है। इसके साथ ही लीवर मल्टी टास्किंग कार्य भी कुशलता के साथ कर शरीर को कई तरह से लाभ प्रदान करता है। यह अवशोषित किए गए भोजन से पोशाक तत्वों को अलग कर शरीर के पाचन प्रणाली तक पहुंचाने का भी काम करता है और अपशिष्ट पदार्थों को अलग कर शरीर से बाहर निकालने में योगदान देता है। यह रक्त की अशुद्धियों को भी दूर करने में मदद करता है। प्राचीन चिकित्सकों का मानना है कि, किसी भी अंग में उपस्थित रोग को दूर करने के पहले सर्वप्रथम लीवर की चिकित्सा की जानी चाहिए उसके बाद ही अन्य अंगों का इलाज किया जाना चाहिए।

अगर हमारा लीवर सही और संतुलित तरीके से काम नहीं करता तो इसकी वजह से कई तरह की अन्य परेशानियाँ और असुविधा शरीर में नजर आती है। पाचन तंत्र में गड़बड़ी की वजह से शरीर को कई तरह कि समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अगर लीवर सुचारु कार्य न करे तो इसका प्रभाव सीधे तौर पर पाचन पर पड़ता है और पाचन क्रिया प्रभावित होती है। इसके साथ ही शरीर के अन्य अंगों पर भी इसके प्रभाव नकारात्मक रूप से दिखाई देते हैं और लीवर की सही कार्य प्रणाली हमारे शरीर के मेटाबोलिस्म को भी बढ़ाने व नियंत्रण में रखने का कार्य करती है। हमारे शरीर में मौजूद हार्मोन्स के स्तर को संतुलित रखने में भी लीवर की कार्य प्रणाली का बहुत योगदान है। यह हमारे रक्त को साफ कर उनकी अशुद्धियों को दूर करता है। पाचन को बेहतर करता है और ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करते हुये हमारे स्किन को भी भीतर से बेहतर करने का काम करता है। अगर आप अपने शरीर में किसी तरह की सूजन, थकान, हार्मोन्स के असंतुलन या कब्ज़ आदि का सामना कर रहे हैं और यह समस्याएँ लगातार बनी हुई है तो आपको अपने लीवर की सेहत पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है। अपने शरीर के भीतर अपशिष्ट अवयवों या टॉक्सिन तत्वों को बाहर कर आप लीवर को बेहतर होने में सहायता कर सकते हैं। जब लीवर की सेहत बेहतर होगी तो अन्य समस्याएँ अपने आप धीरे धीरे सुधरने लगेंगी।

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ज्वलनरोधी भोजन का सेवन करें (Eat An-anti-inflammatory diet)

जितना हो सके अपने आहार में फाइबरयुक्त भोजन को स्थान दें। लीवर को हेल्दी रखने के लिए अतिरिक्त शुगर और टॉक्सिन वाली चीजों से बचें। ऐसा माना जाता है कि, उच्च फाइबरयुक्त पदार्थ लीवरके सुधार में मदद करती है और अगर किसी वजह से लीवर डैमेज जैसी कोई शिकायत हो तो यह फाइबरयुक्त चीज़ें, जल्दी सुधार में सहायक होती हैं। जैसा कि आपको पता ही है कि लीवर का एक प्रमुख कार्य शरीर से टॉक्सिन को बाहर निकालना है, अगर लीवर की सेहत ठीक न हो तो यह अपने कार्यों को बाली भांति करने में असमर्थ हो जाएगा और हमारे शरीर में टॉक्सिन का स्तर बढ़ने लगेगा। इसका परिणाम यह होता है कि पेट में जलन, बदहज़मी और प्रभावित प्रतिरोधक क्षमता जैसी समस्याएँ सामने आती हैं। इन समस्याओं के साथ प्रभावित व्यक्ति को लीकी गट सिंड्रोम (leaky gut syndrome), फूड एलर्जी और सेंसिटिविटी आदि समस्या का भी सामना करना पड़ता है।

ऐसे कोई भी भोज्य पदार्थ जिनमें शुगर मौजूद होता है जैसे मीठे  स्नैक्स, मीठे पेय पदार्थ या कोल्डड्रिंक्स, रिफाइंड अनाज के दानें या बीज आदि लीवर पर सामान्य से अधिक दबाव बनाते हैं और इन्हें पचने में भी अधिक परिश्रम की आवश्यकता होती है। जब आप जरूरस्त से ज़्यादा मीठे पदार्थों का सेवन करते हैं तो इस शुगर (sugar) तत्व को ग्लोकोज में परिवर्तित करने के लिए लीवर को बहुत ज़्यादा मेहनत की ज़रूरत पड़ती है। इस शुगर लेवल के बढ़ जाने से इंसुलिन हॉरमोन ग्लाइकोजेन्स (glycogens) को लीवर में संग्रहीत करने की कोशिश करने लगता है। दूसरी तरफ लीवर कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को भी संतुलित रखने का प्रयास कर रहा होता है, इस वजह से ही शरीर के रक्त में ग्लूकोजेन प्रवाहित होता है और जिसके कारण हमें ऊर्जा का अनुभव होता है। प्रोसेस्ड फूड (processed food) जैसे मीट आदि के साथ रिफाइंड वेजीटेबल ऑइल, हाइड्रोजनीकृत तेल, आर्टिफ़िशियल स्वीटनर्स लीवर को डैमेज करने के लिए जिम्मेदार होते हैं, इसीलिए इनके सेवन से बचना ही बेहतर होता है।

लीवर को स्वस्थ और संतुलित रखने के लिए जितना हो सके हेल्दी फूड का सेवन करना चाहिए। अधिक से अधिक तरल और प्राकृतिक पेय पदार्थ का सेवन लीवर को लाभ पहुंचाता है। ताजे फल, हरी सब्जियाँ, ओर्गेनिक उत्पाद प्राकृतिक वसा लीवर के लिए बहुत फायदेमंद होती है। अगर प्रोटीन की बात की जाए तो डिब्बाबंद मांस या फ़्रोजेन चीजों कि जगह ताजे मांस व अंडों का प्रयोग किया जाना चाहिए। केज फ्री एग्स (cage free eggs) के प्रयोग से भी दूर रहना चाहिए। इन सभी चीजों को पचाने के लिए लीवर को अतिरिक्त मेहनत करने की ज़रूरत पड़ती है और उस पर दबाव ज़्यादा पड़ता है। अगर आप नॉनवेजिटेरियन हों तो ताजे या फ्रेश सी फूड का प्रयोग करें। ऐसे कई भोज्य पदार्थ भी हैं तो शरीर के इन टॉक्सिन तत्वों को बाहर निकालने में लीवर की मदद करते हैं। ऐसे पदार्थों का सेवन कर आप अपने शरीर की अशुद्धियों को बाहर कर स्वस्थ रह सकते हैं। अपने खाने के साथ ऐसी चीजों को सम्मिलित करें जो एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हो। अपने नियमित जीवन से प्रदूशंजनित कारकों को कम करने का प्रयास करें जो लीवर की सेहत को प्रभावित करते हैं।

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भोजन को पर्याप्त रूप से पकाएँ (Properly prepare your food)

जब आप अपने लिए भोजन पकाते हैं तो कुछ खास बातों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी होता है। अपने आहार से पोषण रहित चीजों को कम करने या हटाने के दौरान इस बात को ध्यान में रखें कि ये पदार्थ न केवल पोषण रहित होते हैं बल्कि यह टॉक्सिन युक्त भी होते है और शरीर में बेवजह जमा होकर लीवर को प्रभावित करते हैं। कुछ एंटीन्यूट्रीएंट हमारे लिए बहुत फायदेमंद होते हैं जो मुख्य रूप से अनाज, सूखे मेवों, बीजों व फलीदार पदार्थों में पाये जाते हैं, ये सभी लीवर की कार्यक्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसके अलावा भोजन को पकाने के पहले अगर अच्छी तरह से धोया या साफ न किया जाए तो भी यह लीवर की अस्वस्थता का कारण बन सकता है और भोजन को पर्याप्त परिमाण में पकाने की भी ज़रूरत होती है।

इस असुविधा से बचने के लिए सूखे अनाज, दालों, फलियों आदि को पकाने के पहले पानी में भिगो लें। ऐसा करने से यह अच्छी तरह भीग कर आसानी से पक जाते हैं। भोजन को अत्यधिक पकाना भी हानिकारक होता है इससे टॉक्सिन की मात्रा बढ़ जाती है और भोजन में मौजूद ज़रूरी पोषक भी नष्ट हो जाते हैं। भोजन को कम आंच पर धीमे धीमे पकाना चाहिए, खास तौर पर मीट या मांस को पकाते समय हमेशा कम आंच का प्रयोग कर पर्याप्त रूप से पकाना चाहिए और इसे किसी धातु की परत वाले बर्तन में पकाना और रखना चाहिए। प्लास्टिक या फाइबर आदि के बर्तन में गरम पदार्थ रखने से उस बर्तन में मौजूद केमिकल भोजन में मिल जाते हैं जो नुकसानदायक होता है।

लीवर की सेहत के लिए ऑर्गेनिक और देसी अंडे व मांस का सेवन (Choose organic crops and Grass-heads, Cage free and wild animals)

आपका आहार कितना फायदेमंद है यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कैसी गुणवत्ता का भोजन ले रहे हैं। आप जो भी खाते हैं चाहे वह सब्जियाँ हो या फल या मांस, अंडे इत्यादि। इन सभी का केमिकलरहित होना बहुत ज़रूरी है, ऑर्गेनिक उत्पादों का महत्व आज के समय में बहुत अधिक है जो हामरे स्वास्थ्य और खासकर लीवर के लिए बहुत महत्व रखता है। पिंजरे में बंद मुर्गियाँ जो खास हॉरमोन या इंजेक्शन आदि पर निर्भर रहती है, उनका सेवन सेहत की दृष्टि से लाभकारी नहीं होता, इसी तरह ऐसी ही मुर्गियों के अंडे भी सेहत के लिए हानिकारक होते हैं। इसकी तुलना में देसी या स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाले मुर्गे-मुर्गियाँ और उनसे प्राप्त होने वाले अंडे सेहत के लिए बेहतरीन माने जाते हैं क्योंकि वे किसी भी तरह से सिंथेटिक हॉरमोन, केमिकलयुक्त उपचारों या टॉक्सिन से मुक्त होते हैं।

लीवर को बेहतर बनाने वाले विकल्प लें (Use liver boosting supplements, liver health supplements)

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लीवर की कुछ खास व निश्चित कार्यप्रणाली होती है। ये कार्य प्रणाली भोजन को पचाने, रक्त की सफाई करने और ब्लड सर्कुलेशन को सही रखने में भी मददगार होती है। कुछ ऐसे प्राकृतिक हर्ब्स होते हैं जो लीवर की इस कार्य प्रणाली को सुचारु रखने में हमारी सहायता करती है। ये हर्ब्स हमारे मेटाबोलिस्म को बढ़ाने, प्रोटीन जैसे आवश्यक तत्व, पोषण, वसा और प्राकृतिक एंटीबायोटिक्स प्रदान करने का भी कार्य करते हैं। प्रोटीन युक्त भोजन या पदार्थों में मौजूद एमिनो एसिड को लीवर द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है जो हमारे शरीर को ऊर्जा देने का कार्य करता है। इसके साथ ही कई विषैले तत्व मूत्र के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाते हैं। कुछ ऐसे फायदेमंद हर्ब्स या औषधियाँ हमारे आस पास ही मौजूद हैं जो लीवर की सुरक्षा का काम करती है इनमें घर में सामान्य तौर पर पाई जाने वाली तुलसी (basil), पहाड़ी इलाकों में पाई जाने वाली दूधी या बरन की जड़ (dandelion root), जंगली जीरा (bupleurum) आदि लीवर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। यह हमारे शरीर के हार्मोन्स के स्तर को संतुलित रखते हैं तथा लीवर की कार्यप्रणाली को बेहतर कर शरीर से टॉक्सिन या विषैले पदार्थों को बाहर निकाल देते हैं। तुलसी के पौधे में वैसे ही अनेक तरह के लाभ होते हैं। तुलसी बैक्टीरिया का नाश करने वाला एक पूज्यनीय पौधा है। इसके अलावा यह संक्रमण आदि से भी रक्षा करता है। वहीं दूधी की जड़ का आयुर्वेद में भी विशेष महत्व है जो मूत्रवर्धक होती है। यह ब्लड शुगर को भी संतुलित करता है और लीवर को बेहतरीन ढंग से कार्य करने हेतु प्रेरित करता है। इसके सेवन से टॉक्सिन बाहर निकल जाता है और शरीर की भीतरी सफाई के साथ प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर होती है। जंगली जीरा एक औषधीय पौधा है जो कब्ज, डायरिया आदि को ठीक करने में मदद करता है। लीवर की कार्यक्षमता को बढ़ाने के साथ यह पौधा लीवर इन्फेक्शन को भी सुधारने में सहायक माना जाता है।

अपने शरीर को लगातार सक्रिय रखें (Move your body more)

हर किसी के शरीर में सही ब्लड सर्कुलेशन या रक्त का संचरण सभी रोगों से मुक्ति के लिए अनिवार्य माना जाता है। चलने फिरने या सक्रिय रहने से लीवर को भी अपना काम करने में सहायता मिलती है। धीमे ब्लड सर्कुलेशन से कई तरह की अनचाही बिमारियाँ हमारे शरीर में घर कर लेती है। फिजिकल एक्टिविटीज़ हमारे शरीर में रक्त की पंपिंग को सुचारु करने में मदद करता है। लीवर में रक्त के संचरण की क्षमता और बेहतर हो जाती है जो नसों से होता हुआ मांसपेशी, शरीर के अन्य हिस्सों और दिमाग तक पहुंचता है। रेगुलर एक्सरसाइज, पोषक तत्व, प्रोटीन और रक्त पाचन तंत्र तक पहुँच कर अन्य अंगों को भी प्रभावित करते हैं।

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