7 things that you need to know about fever in babies – बच्चों में बुखार : 7 बातें जो आप नहीं जानते

Fever is a rectal temperature of 100.4°F or higher – बुखार 100.4° एफ या अधिक का रेक्टल तापमान होता है। आपका शिशु लाल गालों के साथ जगता है एवं उसकी त्वचा काफी गर्म है ।आप उसका तापमान एक डिजिटल रेक्टल थर्मामीटर (thermometer) से लेते हैं, यह यह 99.9 डिग्री फ़ारेनहाइट आता है । क्या यह समय दवाई लेने या डॉक्टर को बुलाने का है ? शायद नहीं । तकनीकी रूप से, हम इसे बुखार भी नहीं कह सकते । 100.4 डिग्री से कम के रेक्टल तापमान को शिशुओं में भी काफी सामान्य माना जाता है।

बच्चों का तापमान वयस्कों की तरह किसी भी कारण से थोड़ा सा बढ़ सकता है, जिसमें शारीरिक थकान से लेकर गर्म पानी से स्नान एवं अधिक कपड़े पहनने का कारण भी शामिल है । यहाँ तक कि दिन के समय का भी इसपर प्रभाव पड़ता है, क्योंकि शरीर का तापमान दोपहर के समय बढ़ता है एवं सुबह सुबह कम हो जाता है ।अतः जब तक रेक्टल तापमान 100.4 डिग्री या इससे अधिक ना हो, तो आप यह मान सकते हैं कि आपके शिशु को बुखार नहीं है ।

नोट: लू लगने को कई बार बुखार मान लिया जाता है ।यह समस्या तब पैदा होती है जब शरीर का तापमान जोखिम भरे स्तर तक बढ़ जाता है (उदाहरंस्वरूप बच्चे को गर्म एवं उमस भरे वातावरण में काफी अधिक कपड़े पहनाना) । जब बाहर मौसम गर्म हो, तो अपने बच्चे को हल्के एवं ढीले कपड़े पहनाएं एवं उसे कभी भी एक मिनट के लिए भी बंद कार में अकेला ना छोड़ें ।

Rectal temperatures are the most accurate – रेक्टल तापमान सबसे सही होता है

आप शायद अपने बच्चे का तापमान लेने के लिए डिजिटल रेक्टल थर्मामीटर का इस्तेमाल करने से पहले कई बार सोचेंगे, पर अपने शिशु या 3 वर्ष की आयु से कम के किसी भी बच्चे का सही तापमान प्राप्त करने का यह श्रेष्ठ तरीका है । (कभी भी कांच के थर्मामीटर का प्रयोग ना करें । यदि कांच क्षतिग्रस्त है तो इसके अन्दर की ज़हरीली मरकरी (mercury) आपके बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है )

“केवल रेक्टल थर्मामीटर ही सही एवं मूल तापमान बता सकते हैं”कहना है टाइस गेन्स का, जो न्यू जर्सी में आपातकालीन कक्ष के फिजिशियन (physician) हैं । “कांख के माध्यम से तापमान बताना, माथे के थर्मामीटर एवं कान के थर्मामीटर के माध्यम से भी आप बिल्कुल सही तापमान का पता नहीं लगा सकते”।

ये अन्य प्रकार के थर्मामीटर काफी कम या काफी अधिक तापमान प्रदान कर सकते हैं, अतः डिजिटल रेक्टल थर्मामीटर का प्रयोग ना करने से आपको कई बार बुखार का पता नहीं चलता, या फिर इससे आपको अतिरिक्त तनाव का सामना करना पड़ता है जिसके फलस्वरूप आपको अनावश्यक रूप से आपातकालीन कक्ष में भी जाना पड़ सकता है ।

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Bacterial or viral fever? The difference matters – बैक्टीरियल या वायरल बुखार ? अंतर का पता लगाएं

वायरल बुखार तब होता है जब आपके बच्चे का शरीर किसी वायरस (virus) के फलस्वरूप हुई बीमारी से लड़ रहा हो, चाहे यह आँतों का संक्रमण, फ्लू (flu), या सामान्य सर्दी खांसी ही क्यों ना हो, कहना है कैरी ब्राउन का, जो लिटिल रॉक, अर्कांसस के अर्कांसस चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल में शिशु रोग विशेषज्ञ हैं । वायरल बुखार तीन दिनों के अन्दर कम हो जाते हैं । इस स्थिति में एंटीबायोटिक्स (antibiotics) आवश्यक नहीं हैं क्योंकि इनका वायरस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता ।

दूसरी तरफ बैक्टीरिया के फलस्वरूप हुआ बुखार बैक्टीरियल संक्रमण के फलस्वरूप होता है, जैसे कान का संक्रमण (जो बैक्टीरियल या वायरल दोनों हो सकता है), या मूत्रमार्ग का संक्रमण, बैक्टीरियल मैनिंजाइटिस (bacterial meningitis) या बैक्टीरियल निमोनिया (pneumonia) । बैक्टीरियल संक्रमण वायरस के मुकाबले कम मात्रा में होते हैं – एवं ये ज़्यादा गंभीर भी होते हैं क्योंकि इनका इलाज ना करने पर गंभीर बीमारी का ख़तरा उत्पन्न हो सकता है। बैक्टीरियल बीमारियों का इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक्स की आवश्यकता पड़ती है।

सुनिश्चित करें कि आपके शिशु को चिकित्सकीय सहायता प्रदान करने के लिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें यदि :

  • आपका शिशु 3 महीने की आयु से छोटा है एवं उसका रेक्टल तापमान 100.4 डिग्री फारेनहाइट या इससे अधिक है।
  • आपके शिशु की आयु 2 वर्ष से कम है एवं उसका बुखार 24 घंटों से लम्बे समय तक रहता है।
  • आपके शिशु की आयु 2 वर्ष या इससे अधिक है एवं उसका बुखार तीन दिनों से भी ज़्यादा समय तक रहता है।

अमेरिकन अकादमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स (American Academy of Pediatrics) के अनुसार 3 महीने से कम आयु के बच्चों में, 100.4 डिग्री या अधिक का रेक्टल तापमान जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर के ध्यान में लेकर आना चाहिए।

अपने बच्चे के डॉक्टर को तुरंत सूचना दें कि आपका बच्चा 3 महीने से कम की आयु का है एवं उसे बुखार है। यदि आप अपने बच्चे के डॉक्टर तक पहुँच नहीं पा रहे हैं तो किसी आपातकालीन देखभाल क्लिनिक (clinic) या आपातकालीन कक्ष में लेकर जाएं, भले ही आधी रात क्यों ना हो।  जब तक डॉक्टर प्रस्तावित ना करे तब तक अपने बच्चे को कोई दवा ना दें – आप निश्चित ही अपने बच्चे की जांच से पूर्व किसी भी लक्षण को ढकना नहीं चाहेंगे।

इस जल्दबाज़ी के दो कारण हैं। ब्राउन के अनुसार, पहला यह है कि शिशुओं में रक्त की धारा एवं मुख्य तंत्रिका तंत्र के बीच कोशिकाओं की सुरक्षा परत काफी पतली होती है। इसका अर्थ यह है कि  बैक्टीरियल संक्रमणों में बैक्टीरिया इस पार आकर काफी तेज़ी से क्षति पहुंचा सकता है।

इसके अलावा, आपातकालीन कक्ष के फिजिशियन गेंस के अनुसार, कम उम्र के बच्चे बड़ी उम्र के बच्चों की तरह गंभीर संक्रमण के लक्षण नहीं दिखाते। एक कम उम्र के बच्चे को पूर्ण रूप से गंभीर रक्त का संक्रमण (सेप्सिस (sepsis) हो सकता है, पर उसमें इसके सामान्य लक्षण नहीं दिखेंगे।

यदि बुखार वायरल है तो सेप्सिस की चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। पर समस्या यह है कि सिर्फ शारीरिक परीक्षण के माध्यम से बैक्टीरियल बुखार एवं वायरल बुखार के बीच अंतर पता कर पाना असंभव है। अतः बुखार से ग्रस्त एक नवजात शिशु को रक्त, मूत्र, एक्सरे (X-rays) या मल जांच की आवश्यकता इस बात का पता लगाने के लिए पड़ती है कि उसे किसी प्रकार का बैक्टीरियल संक्रमण है या नहीं।  (असल परीक्षण आपके शिशु की आयु एवं लक्षणों पर निर्भर करते हैं)

बुखार से ग्रस्त एक नवजात शिशु को मैनिंजाइटिस, जो कि एक गंभीर संक्रमण है जिसके फलस्वरूप मस्तिष्क एवं मेरुदंड को संरक्षित करने वाले सुरक्ष मेम्बरेंस (membranes) में सूजन आ जाती है, का परीक्षण करवाने के लिए स्पाइनल टैप (spinal tap) की भी आवश्यकता पड़ सकती है।

Treat the symptoms, not the number – संख्या का नहीं, लक्षणों का इलाज करें

कई अभिभावकों को लगता है कि बुखार जितना तेज़ हो, बच्चा उतना ही बीमार होता है, पर यह बात हमेशा सच साबित नहीं होती। 103 डिग्री के तापमान से ग्रस्त शिशु भी कई बार पूर्ण रूप से स्वस्थ एवं खेलकूद में रत दिखाई पड़ता है, जबकि 101 के तापमान से जूझने वाला शिशु चिड़चिड़ा, थका हुआ एवं ध्यान की मांग करने वाला प्रतीत हो सकता है।

क्या इसका अर्थ है कि यदि आपका बुखार से पीड़ित शिशु स्वस्थ दिख रहा है, तो उसे बुखार कम करने के माध्यमों की आवश्यकता नहीं है ? जी हाँ। जैसा कि शिशु रोग विशेषज्ञ एवं एएपी प्रवक्ता जेनिस सलिवन कहती हैं, “बेचैनी का इलाज करें, बुखार का नहीं। ”

ध्यान रखें कि बुखार असल में शरीर की संक्रमणों से लड़ने में सहायता करता है।  बुखार के माध्यम से जीवाणु शरीर में नहीं रह पाते एवं यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी कार्य पर लगाता है, जैसे सफ़ेद रक्त कोशिकाएं जो आक्र्मणकारी वायरस एवं बैक्टीरिया से लड़ती हैं।

अपने बच्चे के लक्षणों एवं व्यवहार पर ध्यान देकर पता लगाएं कि वह कितना बीमार है, एवं इन लक्षणों की सहायता लेकर उसके डॉक्टर से उपचार की सलाह लें। गेंस का कहना है, “लक्षणों की ओर ध्यान देना काफी अधिक महत्वपूर्ण है”। “उदाहरणस्वरूप, सुस्ती एवं थकान तापमान से अधिक बीमारी के लक्षण हैं। ”

Fever is a healthy response – बुखार एक स्वस्थ प्रतिक्रिया है

भले ही आपने कुछ भी सुना हो, परन्तु बुखार से आपके बच्चे के मस्तिष्क को कोई हानि नहीं पहुँचती।

गेंस कहते हैं “बुखार अपने आप में कोई भी नुकसान नहीं पहुंचाता”। यहां तक कि शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाने की प्रतिक्रया में कुछ बच्चों में देखे जाने वाले बुखार आधारित मरोड़ भी करीब करीब हमेशा हानिरहित होते हैं।  (कुछ ख़ास स्थितियों में, बच्चे मरोड़ की स्थिति में थूक या उल्टी अंदर खींच सकते हैं एवं एस्पिरशन निमोनिया (aspiration pneumonia) का शिकार होते हैं, या फिर ठोस सतहों पर गिरकर या चोट खाकर खुद को चोटिल कर सकते हैं) बुखार कम करने के माध्यम बुखार को कम करने में मदद कर सकते हैं, परन्तु ये बुखार आधारित मरोड़ों को उठने से रोक नहीं सकते।

जब आप बुखार से ग्रस्त अपने बच्चे को गोद में झूला रहे होते हैं एवं बेचैनी आने लगती है, तो यह याद करने का प्रयास करें कि बुखार एक लक्षण है कि उसकी प्रतिरोधक प्रणाली अच्छे से काम कर रही है।  ज़ाहिर तौर पर डॉक्टर को बुलाना आवश्यक है, परन्तु बुखार से ग्रस्त अधिकतर बच्चे खुद ही ठीक हो जाते हैं।

जैसा कि गेंस समझाते हैं, चाहे यह वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण से, या प्रतिरक्षा के साइड इफेक्ट (side effect) से हुआ हो, शरीर का बढ़ता हुआ तापमान प्राकृतिक प्रतिरोधक प्रतिक्रया होती है। अतः इस बात को मानकर चिंतामुक्त रहें कि आपके शिशु की प्रतिरक्षा प्रणाली वही कर रही है जो उसे करना चाहिए।

Use medications judiciously – दवाइयों का संभलकर प्रयोग करें

आईबूप्रोफेन (ibuprofen) (उन बच्चों के लिए जिनकी आयु न्यूनतम 6 माह है) एवं एसिटामीनोफेन (acetaminophen) जैसी दवाइयां अस्थायी रूप से बुखार कम करके बेचैनी से मुक्ति दिलाती हैं। परन्तु इनके प्रयोग के बाद अपने बच्चे के शरीर के तापमान को कम करने के लिए स्पंज (sponge) के माध्यम से उसे स्नान करवाएं। अपने बच्चे की त्वचा, खासकर उसके माथे एवं बगलों को पोंछने के लिए हल्के गर्म पानी (85 से 90 डिग्री) का प्रयोग करें। यह घरेलू नुस्खा काफी प्रभावी सिद्ध होता है।

अपने बच्चे को अच्छा महसूस करवाने का एक और तरीका उसके शरीर में पानी की कमी ना होने देना है, अतः उसे काफी मात्रा में स्तनपान करवाएं या फार्मूला (formula) का प्रयोग करें।

अपने बच्चे को हल्के कपड़े पहनाने एवं वातावरण को ठंडा रखने से भी काफी मदद प्राप्त होगी।  उदाहरणस्वरूप, यदि कमरा गर्म एवं घुटन भरा है तो तो पंखे का प्रयोग हवा का बहाव सामान्य रखें।

यदि आपका शिशु अभी भी बेचैनी का अनुभव कर रहा है तो बुखार कम करने वाली दवाइयां अच्छा विकल्प साबित हो सकती हैं। डॉक्टर की अनुमति के बिना अपने 3 महीने से छोटे शिशु को दवाइयां ना दें, एवं अपने बच्चे पर बुखार कम करने के माध्यम का प्रयोग करते समय इन महत्वपूर्ण सुरक्षा नियमों का पालन करें:

  • यदि आपका बच्चा 2 वर्ष से छोटा है तो सही खुराक के लिए अपने शिशु रोग विशेषज्ञ या औषधि विक्रेता से संपर्क करें।
  • यदि आपके बच्चे की आयु 3 से 6 महीने के बीच में है तो आप उसे एसिटामीनोफेन दे सकते हैं पर आईब्रूफेन नहीं।
  • 6 माह की आयु के बाद अधिकतर बच्चे एसिटामीनोफेन या आईब्रूफेन दोनों का सेवन कर सकते हैं।
  • खुराक आपके बच्चे की आयु से नहीं, बल्कि उसके वज़न से तय की जाएगी।
  • अपने बच्चे को एस्पिरिन (aspirin) ना दें क्योंकि इसे रेयेस सिंड्रोम (Reye’s syndrome) से जोड़कर देखा जाता है, जो कि एक असामान्य परन्तु गंभीर (एवं कई बार जानलेवा) स्थिति है।

एएपी के अनुसार यदि आपका शिशु शान्ति से सो रहा है तो उसे बुखार की दवा देने के लिए जगाने की कोई आवश्यकता नहीं है।  इसकी बजाय, उसे सोने दें – एवं खुद भी थोड़ा आराम कर लें।

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