Alexander technique to treat back pain – पीठ के दर्द से निपटने की “एलेक्सेंडर” विधि

पीठ का दर्द आज के दिन में उन लोगों की आम समस्या बन गयी है जो सारा दिन काम करते हैं। सिर्फ यही नहीं बल्कि वे व्यक्ति जो सारा दिन कुर्सी पर बैठ बैठ कर अपना काम करते हैं वो भी पीठ के इस दर्द के शिकार हैं। पीठ के इस दर्द को दूर भगाने की कई विधियां जैसे स्प्रे एवं क्रीम बाज़ार में उपलब्ध है, पर हर व्यक्ति पर इनका पूरा असर नहीं होता। अतः पीठ दर्द (peeth me dard) एवं अन्य कई बीमारियों जैसे तनाव, सांस लेने में तकलीफ और टेनिस एल्बो से निपटने के लिए काफी लोग एलेक्सेंडर विधि का प्रयोग करते हैं।

यह विधि एक ऑस्ट्रेलियाई कलाकार फ्रेडेरिक मैथ्यूज़ एलेक्सेंडर के नाम पर रखी गयी है जिन्हें गले की एवं सांस लेने में समस्या पेश आती थी। इससे निपटने के लिए उन्होंने यह विधि इज़ाद की जिसमें शरीर के संतुलन की तरफ ध्यान देकर एक स्वस्थ जीवन बिताने की मंशा ज़ाहिर की गयी है।

शरीर के विभिन्न भागों के असंतुलित होने से हमें रोज़ाना के काम करने में तकलीफ होती है एवं हम शारीरिक रूप से भी कमज़ोर होते जाते हैं। यह एक स्वयंसेवी विधि है जो हमें शरीर के खराब आसनों के बारे में बताती है और इनके कारण स्वास्थ्य पर होने वाली दुश्वारियों से भी अवगत कराती है। यह तकनीक हमें सकारात्मक रवैया रखने और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देती है। इसके अनुसार जितनी जल्दी हम अपनी गलतियों के बारे में समझते हैं, उतनी ही जल्दी ये गलतियां ख़त्म होती हैं।

पीठ दर्द के कारण – सिर को संतुलित रखना (Balancing head)

गर्भावस्था के दौरान पीठ में दर्द के कारण

सिर हमारे शरीर का सबसे ऊपरी भाग होता है एवं इसका वज़न करीब 5 किलो तक होता है। सिर के सही तरह से संतुलित होने से सारे शरीर पर सकारात्मक असर पड़ता है और इसके असंतुलित होने की स्थिति में गले की मान्स्पेशियों पर 5 किलो का अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इन मान्स्पेशिओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने से सिर पीछे की तरफ ज़्यादा झुक जाता है और सारे शरीर को असंतुलित कर देता है।

पीठ के दर्द का इलाज – व्यायाम का महत्त्व (Put stress on exercises)

शरीर की मुद्रा को संतुलित करने के लिए कुछ व्यायामों का भी प्रयोग किया जा सकता है। आईने के सामने सीधे होकर बैठें और बार बार देखते रहे कि आपका सिर सीधी मुद्रा में है या नहीं। इसके अलावा भी पीठ दर्द और टेनिस एल्बो से निपटने के लिए कुछ और व्यायाम किये जा सकते हैं।

एलेक्सेंडर विधि के कुछ उदाहरण (Alexander technique)

पीठ दर्द के लक्षण, एक विधि के अंतर्गत गर्दन की मांसपेशियों को धीरे धीरे छोड़ें और ठुड्डी को छाती तक लेकर जाएं। अब मांसपेशियों पर ज़्यादा ज़ोर ना देते हुए सिर को ऊपर की तरफ उठाएं और इसे तब तक करें जब तक कि आप खुद को आईने में सीधा देखते हुए ना भांप लें।

एक और तकनीक ड्रमर्स के लिए है जो की न्यूटन के तीसरी विधि से प्रेरित है। इस तकनीक का उद्देश्य शरीर और गुरुत्वाकर्षण के बीच सम्बन्ध स्थापित करना है।

पीठ दर्द के उपाय – स्वयंसेवी कार्यक्रम (Self help program – peeth dard ke upay)

सूर्य नमस्कार आसन, स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं।

आप एक एलेक्सेंडर तकनीक पर आधारित स्वयंसेवी कार्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं जो शरीर की विभिन्न बीमारियों को दूर करने में सहायक होता है। ये सारी बीमारियां आपके शरीर के असंतुलित होने की वजह से होती हैं और इस तकनीक की मदद से आप अपंने शरीर को संतुलित अवस्था में पहुंचा सकते हैं।

पीठ दर्द के लिए योगासन – सही तरह बैठने की विधि (Proper sitting posture – peeth dard ka upchar)

पीठ दर्द के लिए योगासन, किसी व्यक्ति के बैठने के अंदाज़ पर उसका पीठ दर्द और टेन्डोनाइटिस जैसी बीमारियों से दूर रहना निर्भर करता है। हमारे बैठने वाली हड्डियां दो गोलाकार हड्डियां होती हैं जो कि हमारे पृष्ठ भाग की मांसपेशियों में होती हैं। इन दोनों हड्डियों के बिना हम ठीक तरह से बैठ नहीं सकते। अगर आप इन हड्डियों को महसूस करना चाहते हैं तो तो हाथ के बल बैठने की कोशिश करें। एलेक्सेंडर तकनीक न्यूटन की तीसरी विधि पर आधारित है। अपनी रीढ़ को स्थिर रखें जिससे कि बाकी शरीर का संतुलन बना रहे।

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