Diwali festival in Hindi – दिवाली कैसे मनाएँ, दिवाली 2016 पर विशेष

हम में से हर कोई रोशनी के उत्सव दिवाली को बड़े ही उल्लास के साथ मनाता है। यह रोशनी या प्रकाश का उत्सव है जिसमें हर कोने के अंधेरे को रोशनी से दूर किया जाता है ताकि कोई भी जगह अंधकार के वश में न रहे, यहाँ अंधकार का आशय बाहरी अंधकार और भीतरी अर्थात मन के अंधकार से भी है। भीतरी अंधकार का आशय अज्ञान और अहंकार से है।

दीपावली का महत्व – दिवाली मनाने का कारण (Diwali manane ka karan)

यह बात हर कोई जानता है की दीपावली क्यों मनाई जाती है? (Dipawali kyu mania jati hai?) यह कथा हमारे इतिहास में वर्णित है कि, भगवान श्रीराम चन्द्र ने अपने वनवास काल के दौरान अहंकारी रावण का वध कर माता सीता को मुक्त किया था। चौदह वर्षों का वनवास पूर्ण कर जब वे अपने नगर अयोध्या पहुंचे तो उनके नगर के लोगों ने पूरे नगर को दुल्हन की तरह सजा कर प्रकाशमान किया और अपने प्रिय राजा के लौटने की खुशी में दिवाली मनाई। दिवाली मनाने की परंपरा की शुरुआत भी यहीं से मानी जाती है।

दिवाली मनाने के जुड़ी एक और कथा इस प्रकार है, श्री कृष्ण ने दीपावली के एक दिन पहले पापी राक्षस नरकासुर का वध किया था। नरकासुर एक पापी व दुष्ट दैत्य था जो अपनी शक्ति के बल पर अनेक देवताओं को परेशान करता था, अपने बल के मद में चूर वह ऐसे अनेक अधर्म करता था, नरकासुर ने सोलह हज़ार कन्याओं को बंदी बनाकर रखा था। परंतु उसे यह शाप था कि उसकी मृत्यु किसी स्त्री के हाथो होगी। सभी देवों ने भगवान श्री कृष्ण से निवेदन किया कि वे नरकासुर का संहार कर उनकी रक्षा करें। तब भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा को अपना सारथी बना कर नरकासुर का संहार किया और उन सभी बंदी कन्याओं को भी दैत्य के चंगुल से मुक्त किया। इस वजह से नरक चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाता है और लोगों ने इसके अगले दिन उल्लास के साथ दीपक जलाकर दिवाली का उत्सव भी मनाया।

दिवाली मनाने का तरीका हिन्दी में (How to celebrate Diwali in Hindi)

पाँच दिनों के उत्सव दिवाली की तैयारी कई दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। लोग दिवाली के पहले ही अपने घरों की साफ सफाई शुरू कर देते हैं। दीवारों की रंगाई व पुताई भी शुरू हो जाती है। घर का हर सदस्य इस बात को लेकर बहुत सोच विचार करता है की इस बार घर की दीवारों को किस रंग से रंगा जाये की घर ज़्यादा सुंदर लगे। साल भर से जमा पुरानी चीजों को बाहर निकाल कर घर की सफाई की जाती है।

दिवाली व धनतेरस की खरीददारी (Dhanteras and Diwali Buying)

धनतेरस का मतलब? दिवाली के पहले ही खरीददारी की शुरुआत भी हो जाती है। अक्सर लोग दिवाली के पहले घर के लिए नई चीज़ें जैसे, फर्नीचर, इलेकट्रोनिक उपकरण, सजावटी समान आदि खरीदते हैं। धनतेरस का दिन खरीदी का एक विशेष दिन होता है। धनतेरस पर क्या खरीदें, कई लोग मुहूर्त देखकर सोने, चाँदी या अन्य धातु की वस्तुएं खरीदते हैं।

दिवाली का त्यौहार – विभिन्न धर्मों के साथ दीपावली का महत्व (Diwali celebration for different cultures)

वैसे तो दीपावली को हिंदुओं का एक खास और प्रमुख त्यौहार माना जाता है पर देश के विभिन्न कोनों में अलग अलग धर्म को मनाने वाले लोग भी इसे उतने ही उल्लास और हर्ष के साथ मानते हैं। भले ही दिवाली मनाने के कारण उनके लिए अलग हों, पर भारत के दक्षिण हिस्से को छोडकर लगभग हर राज्य में दिवाली का त्यौहार अपनी खास वजह के साथ खुशी के रूप में मनाया जाता है।

सिक्खों के लिए दिवाली का महत्व (Diwali Sikhism festival – Sikh dharam me deepawali ka mahatav)

सिक्ख समुदाय के लोग भी बड़े उत्साह के साथ दिवाली मानते हैं, सिक्खों कि पवित्र स्थली स्वर्ण मंदिर का शिलान्यास इसी दिन किया गया था, इस दृष्टि से सिक्ख समुदाय के लिए यह दिन खास होता है। इसके अलावा सिक्खों के छठे गुरु हरगोबिन्द जी को इसी दिन जेल से रिहा किया गया था। उनके अनुयायिओं ने इस खुशी को दिवाली के रूप में मनाया।

जैन समुदाय के लिए दिवाली का महत्व (Why Jains celebrate Diwali? – diwali ka mahatva)

जैन मतावलंबियों के अनुसार चौबीसवे तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी को इस दिन मोक्ष की प्राप्ति हुई थी, जैन लोग इस दिवस को निर्वाण दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं।

दिवाली कैसे मनाई जाती है? (Diwali manane ka tarika in Hindi)

रोशनी के साथ दिवाली खुशियाँ बांटने का एक पर्व है। दिवाली के दिन शाम से ही घर के हर कोने को प्रकाश द्वारा आलोकित किया जाता है जिसके लिए विभिन्न प्रकार की रंगीन लाइटों द्वारा भी विशेष सजावट की जाती है। घर के दरवाजों को फूल की मालाओं से सजाया जाता है। इस तौहार में गेंदे के फूलों का बड़ा महत्व होता है। चूंकि इस मौसम में ही गेंदे के फूल खिलने शुरू होते हैं और इस पीले नारंगी फूलों के साथ आम के पत्तों का तोरण दरवाज़े पर लगाया जाता है। कई लोग इस दिन दरवाजे के दोनों ओर केले के पत्ते भी लगाते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिवाली के उत्साह में किसी प्रकार की कोई कमी दिखाई नहीं देती। अपने घर से दूर रहकर नौकरी करने या बाहर शहरों में पढ़ने वाले लोग इस त्यौहार पर अपने घर आते हैं। महिलाएं अपने घर के आँगन की लिपाई कर उस में रंगोली बनती हैं। दिवाली के त्यौहार पर रंगोली का अपना एक विशेष महत्व है।

शाम के समय लोग नए कपड़े पहन कर लक्ष्मी पूजा की तैयारियों में लग जाते हैं। कई तरह से फूलों और भोग के साथ माँ लक्ष्मी की पूजा आराधना की जाती है। पश्चिम बंगाल में दिवाली (Bangal me diwali) की रात को महानिशा अर्थात माँ काली की पूजा भक्ति भाव के साथ की जाती है। इसके अलावा देश के अन्य हिस्सों में लक्ष्मी पूजा के साथ गणेश और सरस्वती की पूजा का भी विधान है। लोग देवी देवता की आराधना कर माँ लक्ष्मी से सदा घर में रहने का निवेदन करते हैं। इसके पश्चात दीपदान और पटाखे जलाए जाते हैं। पूजा स्थान के साथ घर के हर कोने में दीपक जलाने की परंपरा होती है। पूजा के बाद भोग प्रसाद का वितरण किया जाता है और लोग अपने आस पड़ोस तथा करीबी संबंधियों को मिठाई के साथ दीपावली की शुभकामना देते हैं। इस अवसर पर बच्चे अपने बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और बड़े इसके बदले उन्हें आशीर्वाद स्वरूप भेंट इत्यादि भी देते हैं।

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