Ear infections in babies – बच्चों में कान का संक्रमण

यदि आप यह पता लगाना चाहते हैं कि आपके बच्चे के कानों में संक्रमण (या कोई अन्य बीमारी) है या नहीं, तो उसके स्वभाव में हो रहे बदलावों पर ध्यान दें।

यदि आपका बच्चा चिडचिडा हो जाता है या सामान्य से अधिक रोने लगता है तो इस समस्या की जड़ तक पहुंचने का प्रयास करें।  यदि उसे बुखार हो जाता है (चाहे वह कम हो या उच्च), तो यह भी आपके सामने एक बड़ा लक्षण है। आमतौर पर कान का संक्रमण सर्दी खांसी या साइनस (sinus) के संक्रमण के बाद होते हैं, अतः इस बात का भी ध्यान रखें।

आप इन लक्षणों पर भी ध्यान दे सकते हैं :

  • आपका बच्चा अपने कानों को खींचने या पकड़ने लगता है। यह इस बात का संकेत है कि उसे पीड़ा हो रही है।  (कई बार आपका बच्चा हर प्रकार के कारणों की वजह से या कई बार बिना किसी कारण के भी अपने कानों को खींचने लगता है। अतः आपका बच्चा अन्य प्रकार से स्वस्थ लग रहा है, तो हो सकता है कि वह कान के संक्रमण का शिकार ना हो)।
  • दस्त या उल्टी – कान के संक्रमण का ज़िम्मेदार जीवाणु आपके आँतों की प्रणाली को भी प्रभावित कर सकता है।
  • भूख ना लगना – कान के संक्रमण से पेट की गड़बड़ियाँ भी हो सकती हैं। इससे आपके बच्चे को निगलने एवं चबाने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। आप इस बात पर ध्यान दे सकते हैं कि शुरूआती कुछ घूँट भरने के बाद वह स्तनों या बोतल से अपना मुंह हटा लेता है।
  • कान से पीले या सफ़ेद द्रव्य का निकलना – यह ज़्यादातर बच्चों के साथ नहीं होता है, परन्तु यह संक्रमण का सबसे बड़ा लक्षण है। यह इस बात का भी संकेत है कि बच्चे के कान के पर्दे में एक छोटा सा छेद पैदा हो रहा है।  (चिंता ना करें – एक बार संक्रमण के ठीक होते ही यह भी ठीक हो जाएगा)
  • बदबू – आपको अपने बच्चे के कान से एक प्रकार की बदबू आती महसूस होगी।
  • सोने में परेशानी – सोने से कान का संक्रमण और भी पीड़ादायक हो सकता है।

How common are ear infections in babies? – बच्चों में कान का संक्रमण कितना आम है ?

अमेरिका में कान का संक्रमण बच्चों को सामान्य रूप से होने वाली बीमारियों की सूची में (सामान्य सर्दी खांसी के बाद) दूसरे स्थान पर आता है। करीब आधे बच्चों में 1 वर्ष की आयु के होने तक कम से कम एक बार कान के संक्रमण की समस्या देखी जाती है, एवं अधिकतर बच्चों को उनके तीसरे जन्मदिन तक यह समस्या अपना शिकार बना चुकी होती है।

What causes ear infections in babies? – बच्चों में कान का संक्रमण होने के कारण

कान का संक्रमण बैक्टीरिया या वायरस  (bacteria or virus) की वजह से हो सकता है।  यह तब होता है जब आपके बच्चे के कान के पर्दे के पीछे के हिस्से में द्रव्य की उत्पत्ति होती है एवं इसके बाद यह भाग संक्रमित हो जाता है।

सामान्य तौर पर इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाला कोई भी द्रव्य यूस्ताचियन ट्यूब (eustachian tube) के माध्यम से काफी आसानी से बाहर निकल जाता है, जो कान के बीच के हिस्से को नाक एवं गले से जोड़ती है।  परन्तु यूस्ताचियन ट्यूब के बंद होने की स्थिति में – जो सामान्य तौर पर सर्दी, sinus के संक्रमण या एलर्जी (allergy) के दौरान होता है – द्रव्य कान के बीच के हिस्से में फंसकर रह जाता है।

जीवाणु अँधेरे, गर्म एवं गीले स्थानों पर पनपना पसंद करते हैं, अतः पस से भरा कान का मध्य भाग इनके पनपने के लिए काफी उपयुक्त क्षेत्र है।  जैसे जैसे संक्रमण और भी गंभीर होता जाता है, कान के पर्दे में एवं के पीछे की सूजन एवं जलन भी गंभीर होती जाती है, जिसके फलस्वरूप स्थिति और भी पीड़ादायक बन जाती है।

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जब आपके बच्चे का शरीर संक्रमण से लड़ने का प्रयास करता है तो इस स्थिति में उसे बुखार आ सकता है।  इस स्थिति का डॉक्टरी नाम – दर्दनाक रूप से सूजा हुआ कान का मध्य भाग, द्रव्य का जमा होना, लाल कान का पर्दा, एवं कई बार बुखार – एक्यूट ओटिटिस मीडिया (acute otitis media (AOM) है।

प्रशामक (pacifier) का प्रयोग शिशुओं एवं बच्चों के कान के मध्य भाग में संक्रमण के खतरे में वृद्धि कर सकता है।  एक शोध के अनुसार, प्रशामक का प्रयोग ना करने वाले बच्चों में कान के संक्रमण की स्थिति 33 प्रतिशत कम देखी गयी।

बच्चे कान के संक्रमण से काफी खतरे में रहते हैं क्योंकि उनका यूस्ताचियन ट्यूब छोटा (करीब आधा इंच) एवं हॉरिजॉन्टल (horizontal) होता है। जैसे जैसे बच्चे बड़े होते रहते हैं, उनके ट्यूब की लंबाई तिगुनी एवं सीध लिए हुए हो जाती है, जिससे कान का द्रव्य आसानी से बाहर आ सकता है।

When to call the doctor if your baby has an ear infection – बच्चे के कान के संक्रमण की स्थिति में डॉक्टर को कब बुलाएं

डॉक्टर को कान के संक्रमण का पहला संकेत मिलते ही बुलाएं।  डॉक्टर को आपके बच्चे के कानों के अन्दर ओटोस्कोप (otoscope) नामक यंत्र से देखने की आवश्यकता महसूस होगी। लाल, लटका हुआ एवं द्रव्य निकलता हुआ कान का पर्दा संक्रमित होता है।

डॉक्टर इस बात की जांच कर सकता है कि क्या कान का पर्दा प्नयूमटिक ओटोस्कोप (pneumatic otoscope) नामक उपकरण की प्रतिक्रिया के तौर पर हिलता है या नहीं, जिसके फलस्वरूप कान के अन्दर हल्की सी हवा छोड़ी जाती है। यदि यह हिल नहीं रहा है तो यह एक और संकेत है कि द्रव्य कान के मध्य भाग में जमा हो रहा है एवं संक्रमित है।

What’s the treatment for an ear infection in a baby? – बच्चों के कान के संक्रमण का उपचार क्या है ?

कान के अधिकतर संक्रमण खुद ही ठीक हो जाते हैं, परन्तु गंभीर परिस्थितियों में आपको एंटीबायोटिक्स (antibiotics) का प्रयोग करना पड़ सकता है।  अमेरिकन अकादमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स (American Academy of Pediatrics (AAP) डॉक्टरों एवं अभिभावकों को इस बात पर विचार विमर्श करने के लिए कहती है कि क्या लक्षणों के हल्के होने की स्थिति में प्रतीक्षा करना बेहतर है या एंटीबायोटिक्स शुरू कर देना चाहिए।

सालों से, एंटीबायोटिक्स कान के संक्रमण के विरुद्ध प्रथम उपचार हुआ करता था, परन्तु अब डॉक्टर इनका अधिक संभलकर प्रयोग करने की सलाह देते हैं। अधिक एंटीबायोटिक्स का सेवन भी चिंता का कारण है क्योंकि इससे बच्चे एंटीबायोटिक प्रतिरोधी संक्रमण के खतरे में रहते हैं।

यदि आपका शिशु कम से कम 6 महीने का है, तो आपका डॉक्टर यह प्रस्तावित करेगा कि आप उसके संक्रमण के फलस्वरूप होने वाले दर्द को कम करने के लिए उसे एसिटामिनोफेन (acetaminophen) या आईब्रुफेन (ibuprofen) दें।  (अपने बच्चे को कभी भी एस्पिरिन (aspirin) ना खिलाएं, क्योंकि इससे उसे रेयेस सिंड्रोम (Reye’s syndrome), जो एक असामान्य परन्तु जानलेवा बीमारी है, का ख़तरा हो सकता है)

यदि आपके बच्चे की हालत खराब हो रही है या उसकी स्थिति कुछ दिनों के बाद भी सुधरती नहीं है तो अपने डॉक्टर से संपर्क करने में संकोच ना करें।  यदि आपके बच्चे की तबियत में 48 से 72 घंटों में कोई सुधार नहीं आता, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक्स शुरू करना चाहेंगे एवं आपको दोबारा परीक्षण के लिए आने को कहेंगे।

यदि एंटीबायोटिक लेने के बाद भी आपके बच्चे की तबीयत में कुछ दिनों बाद भी सुधार नहीं दिखता, तो डॉक्टर दवाई बदलकर बच्चे का दोबारा परीक्षण कर सकते हैं।

यदि आपका डॉक्टर एंटीबायोटिक्स प्रस्तावित करता है तो सुनिश्चित करें कि अपने बच्चे को इसकी पूरी खुराक दें। आपको कुछ हफ़्तों बाद कान का एक और परीक्षण करवाना होगा जिससे कि डॉक्टर यह पता लगा सके कि दवाइयों ने अपना काम किया अथवा नहीं।

How to prevent future ear infections – भविष्य में होने वाले कान के संक्रमणों से बचाव के उपाय

कान के संक्रमण संक्रामक नहीं होते, परन्तु इनसे पूर्व या साथ होने वाले श्वसन संक्रमण संक्रामक होते हैं। जीवाणुओं की बढ़त को कम करने का सबसे अच्छा तरीका अपने एवं अपने शिशु के हाथों को बार बार धोना है – एवं टॉयलेट (toilet) के इस्तेमाल, डायपर (diaper) बदलने के बाद एवं खाना खाने या बनाने के बाद भी हाथ धोना ना भूलें।

आप नीचे दिए गए सुझावों का भी पालन कर सकती हैं :

  • बच्चे का टीकाकरण करवाएं – टीकाकरण से कई ऐसी बीमारियों की रोकथाम की जा सकती है जिनसे कान का संक्रमण होता है। उदाहरणस्वरुप, एचआईबी (Hib) टीके ने बच्चों में कान के संक्रमण की संख्या कम करने में काफी मदद की है, एवं न्यूमोकोकल (pneumococcal) टीका भी इनकी रोकथाम में सक्षम है।

यदि आपका शिशु, खासकर हर फ्लू (flu) की स्थिति के बाद, बार बार कान के संक्रमण का शिकार होता है, तो अपने डॉक्टर से बात करके तय करें कि क्या आपके बच्चे को वार्षिक फ्लू टीका दिया जाना चाहिए अथवा नहीं।  (केवल 6 महीने या इससे अधिक आयु के बच्चे ही फ्लू का टीका ले सकते हैं)

  • अपने शिशु को न्यूनतम छः महीनों तक स्तनपान करवाएं – पीडियाट्रिक्स पत्रिका में प्रकाशित अमेरिकी केंद्र के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम तथा खाद्य एवं औषधि प्रशासन (S. Centers for Disease Control and Prevention and the Food and Drug Administration) के एक शोध के अनुसार, जिन बच्चों को पहले छः महीने स्तनपान करवाया जाता है, उनमें कान के संक्रमण से प्रभावित होने की संभावना कम होती है। असल में, फार्मूला (formula) का सेवन करने वाले शिशुओं में कान का संक्रमण होने की संभावना 70 प्रतिशत अधिक होती है।

कुछ चिकित्सक, जैसे ओटोलर्यनोलोजिस्ट (otolaryngologist) रोबर्ट रुबेन, मानते हैं कि माएं स्तनपान के माध्यम से अपने शरीर की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने वाले एंटीबाडीज (antibodies) का स्थानांतरण अपने शिशुओं में करती हैं।  हालांकि इन एंटीबाडीज का प्रभाव छः महीनों के बाद कम होने लगता है।

  • बच्चे को तम्बाकू के धुएं से दूर रखें – शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि धूम्रपान करने वाले अभिभावकों के बच्चों में कान के संक्रमण एवं सुनने की समस्याओं के विकसित होने की संभावना अधिक होती है।

धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के साथ रह रहे बच्चे के कान के मध्य भाग में संक्रमण एवं सुनने की समस्या होने की संभावना 37 प्रतिशत ज़्यादा होती है।  यह प्रतिशत 62 प्रतिशत तक पहुँच जाता है यदि घर में माँ धूम्रपान करती हो। माँ के धूम्रपान करने की स्थिति में बच्चों के कान के मध्य भाग की समस्याओं के लिए शल्य क्रिया करवाने की संभावना उन बच्चों के मुकाबले 86 प्रतिशत अधिक होती है, जिनके घर में कोई धूम्रपान नहीं करता।

किसी धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के साथ एक सप्ताह भी समय बिताना एक बच्चे के लिए काफी हानिकारक होता है एवं इससे उसके कान के संक्रमण से शिकार होने की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं।  तम्बाकू का धुआं प्रतिरोधक क्षमता को दबाता है, जिससे बच्चे के लिए संक्रमण से लड़ना और भी कठिन हो जाता है। अपने घर में लोगों को धूम्रपान ना करने दें एवं अपने बच्चे को धुएं के वातावरण से दूर रखें।

Can ear tubes help with repeated ear infections in babies? – क्या बच्चों के कान में बार बार हो रहे संक्रमण की स्थिति में कान की ट्यूब मददगार साबित होती है ?

जिन शिशुओं को एकाधिक बार कान का संक्रमण हो चुका है – जो असल में एक ही संक्रमण होता है पर एंटीबायोटिक उपचार के बावजूद कई महीनों तक बरक़रार रहता है – वे कान का ट्यूब प्राप्त करने के उपयुक्त उम्मीदवार हो सकते हैं। यह प्रक्रिया अमेरिका के 6,70,000 बच्चों पर हर साल पूरी की जाती है।

कान में ट्यूब डालने की प्रक्रिया सामान्य एनेस्थीसिया (anesthesia) देने के बाद शुरू की जाती है। एक ओटोलर्यनोलोजिस्ट बच्चे के कान के पर्दे में छोटा सा छेद करके इसमें एक छोटे ट्यूब का प्रवेश करवाता है। यह ट्यूब दबाव छोडती है एवं एक निकास का कार्य करते हुए हवा अन्दर करके द्रव्य को बाहर छोडती है जिससे बैक्टीरिया पनप नहीं पाते।

रुबेन कहते हैं, “यह एक कृत्रिम यूस्ताचियन ट्यूब होती है जो असल यूस्ताचियन ट्यूब के अपनी सामान्य कार्य प्रणाली पर लौटने तक कान को सांस लेने का अवसर देती है। ”

आपके बच्चे का डॉक्टर शल्य क्रिया का यह उपाय प्रस्तावित करता है क्योंकि जिस बच्चे के कान में काफी मात्रा में द्रव्य का जमाव हो (या रिसाव के साथ ओटिटिस मीडिया हो), उसके बार बार कान के संक्रमण एवं ना सुन पाने की समस्या का शिकार होने की काफी अधिक संभावना होती है।

इसके अलावा, हालांकि शोध अनिर्णायक हैं, परन्तु कुछ विशेषज्ञों के अनुसार कान में काफी मात्रा में द्रव्य जमा होने के फलस्वरूप ना सुनने की समस्या होने से भाषा का विकास होने में भी काफी समय लगता है।

रुबेन एक शोध का हवाला देते हैं जिसके अंतर्गत काफी मात्रा में कान की समस्याओं से पीड़ित बच्चों को कुछ सालों बाद कुछ ख़ास ना सुनने की बीमारियों से ग्रस्त पाया, खासकर तब जब वे कक्षा जैसी शोरगुल वाली जगह पर संभाषण सुनने का प्रयास कर रहे थे।

इसके अलावा, वह कहते हैं, “इनमें से कुछ बच्चों के  – खासकर वो जिनका विकास देर से हुआ है एवं जिन्हें विशेष भाषा की समस्या है – बर्ताव से जुडी समस्याओं , के शिकार होने की संभावना काफी अधिक है। ” रुबेन कहते हैं कि बच्चे के ना सुन पाने की समयसीमा एवं समस्या की गंभीरता काफी महत्वपूर्ण कारक हैं।

एएपी सुनने की क्षमता के एक नियत सीमा से अधिक  क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में, कान के मध्य भाग में संरचनात्मक क्षति होने की स्थिति में एवं कान के मध्य भाग में निरंतर संक्रमण एवं द्रव्य के जमाव से पीड़ित बच्चों के लिए ट्यूब प्रस्तावित करती  है।

आपको क्या करना चाहिए ? अपने डॉक्टर से सलाह करें एवं अपने बच्चे एवं अपने लिए होने वाले लाभ एवं नुकसान की आपस में तुलना करें।

Are ear infections in babies ever serious? – क्या बच्चों में कान का संक्रमण गंभीर होता है ?

ऐसा बिल्कुल हो सकता है। एक गंभीर या बिना इलाज किया हुआ संक्रमण आपके बच्चे के कान के पर्दे को काफी क्षति पहुंचाकर इसे फाड़ भी सकता है।  ऐसा आमतौर पर नहीं होता एवं ये काफी जल्दी ठीक हो जाते हैं, पर अपने बच्चे के डॉक्टर से यह सुनिश्चित करने के लिए सलाह करना आवश्यक है कि संक्रमण पूरी तरह ठीक हो गया है एवं कान के पर्दे की भी मरम्मत हो रही है।

बार बार कान का संक्रमण होने की स्थिति में बहरेपन एवं आघात की समस्या भी सामने आती है।  कुछ विशेष मामलों में, कान के संक्रमण का इलाज ना करने पर मस्तोईडाईटिस (mastoiditis) , जो कि कान के पीछे की हड्डी में हुआ संक्रमण होता है, या मैनिंजाइटिस (meningitis) की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

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