Baby care: Using kajal or surma to a new-born baby’s eyes is safe or not? – बच्चों की देखभाल: नवजात बच्चों की आंखों में काजल या सूरमा का उपयोग करना सुरक्षित है या नहीं?

सभी उम्र की ज्यादातर महिलायें काजल को प्रथम सौंदर्य प्रसाधन के रूप में प्रयोग करती हैं। आंखों को आत्मा की खिड़की कहा जाता है और हर कोई इसे संवारना चाहते है। काजल का प्रयोग आंखो की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाने के लिये किया जाता है। विभिन्न प्रकार के काजलों के कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ब्राण्ड है।

भारतीय परम्पराओं में काजल का प्रयोग (Common beliefs of Indian families to apply kajal to a baby)

नवजात शिशु की आंखो में काजल का प्रयोग करना पुरानी भारतीय परम्परा रही है। यह विश्वास किया जाता है कि नवजात के आंखो में काजल (surma kaise lagaye) का प्रयोग उसे बुरी नज़रो से बचा कर रखेगा। काजल को सूरमा के नाम से भी जाना जाता है। पुरानी महिलाओ के अनुसार काजल से नवजात की आंखें चमकीली और आकर्षक हो जायेंगी। काजल सूर्य की तेज रोशनी से आंखों की सुरक्षा करता है और संक्रमण से बचाता है। यह आधुनिक सोच से परे है।

काला सुरमा – नवजात को काजल से खतरे (Dangers from kajal for new-born baby’s eyes)

  • काजल को घी या अरण्डी तेल के साथ दीपक की कालिख को इकट्ठा कर एक मोटा लेप तैयार कर बनाया जाता है। बाल्ररोग विशेषज्ञ नवजात की आंखो में काजल के प्रयोग को वर्जित करते है।
  • स्नान के दौरान काजल को आंखों से जब धोया जाता है ते इससे आंखों व नाक के पास संकीर्ण होकर संक्रमण फैलाता है।
  • उंगलियो से काजल लगाने पर कॉर्निया के घायल होने की सम्भावना रहती है।
  • काजल लगाने के तरीके, काजल के लेप का अधिक होना बच्चों की आंखों के लिये हानिकारक है।
  • काजल के अधिकतम प्रयोग से आंखो में अतिरिक्त काला पत्थर जैसा पदार्थ इकट्ठा हो जाता है। यह बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास में हानि पहुंचा सकता है।
  • शीशे की विषाक्तता, रक्ताल्पता, अकड़ और मंद बुद्धि को बढ़ा सकती है।
  • काजल लगाने के तरीके, अँगुलियो से काजल लगाते समय, अँगुलियो का गंदा होना या असामान्य रूप से नाखूनों से युक्त होना बच्चों की आंखो को नुकसान पहुंचा सकता है।

घर पर काजल को कैसे बनायें (How to make kajal at home?)

भारतीय घरों में काजल को बनाने की कई विधि है। यहां काजल बनाने की कुछ सामान्य घरेलू विधियों को बताया जा रहा है-

  • एक स्वच्छ, सफेद, पतला मलमल का कपड़ा ले और चंदन के लेप में भिगोकर छाव में सुखा लें। भिगोने और सुखाने की इस प्रक्रिया को दिन में तीन से चार बार करें।
  • शाम के समय कपड़े को रोल कर पतली बत्ती बना लें और इसे मिट्टी के दिये में अरण्डी तेल से भरकर जला दे।
  • लहसुन रस लगे पीतल की थाली से इसे इस प्रकार ढ़क दें कि दिये को जलने के लिये ऑक्सीजन मिलती रहे और दिये को जलने में सहायता मिले।
  • अगली सुबह पीतल की प्लेट से इस कार्बन पाउडर को हटा कर एक डिब्बी में ले लें। इसमें कुछ बूंदें घी या अरण्डी के तेल को डालकर अच्छे से मिलायें। यह कई दिनो तक भंडारित करके रखा जा सकता है।
  • कुछ घरो में काजल घी या सरसो तेल में बत्ती को जलाकर और मिट्टी या पीतल के कटोरे में काजल को इकट्ठा करके बनाया जाता है। इसमें भी घी की कुछ बूंदे भी अच्छे से मिलायी जाती है।

काजल लगाने के फायदे, घरेलू काजल अगर स्वच्छता से बनाया जाता है तो इसका चिकित्सकीय मूल्य होता है और आंखो के लिये नुकसानदायक भी नहीं होता है।

नवजात शिशु के लिये काजल का उपयोग (Options for use of kajal for a new-born baby)

भारतीय महिलाओं के लिये बुरी नज़रो से बचाने के लिये वर्षों की परम्परा से रोक पाना कठिन समस्या है। यह विश्वास किया जाता है कि बच्चों के आस पास बहुत सारी बुरी नज़रे रहती है जिसे काजल लगाकर रोका जा सकता है। इसीलिये भारतीय महिलाये नवजात के माथे पर, कान के पीछे या पैरों के नीचे काजल का काला टीका लगाती है। इस तरह से काजल के प्रयोग से त्वचा पर संक्रमण होने की सम्भावना रहती है। एलर्जी से बचाव के लिये यह जरूरी होता है कि बाज़ार के बजाय घर पर बनाये हुये काजल का प्रयोग करना चाहिये यह अधिक महत्तवपूर्ण होगा।

नवजात की कमजोर आंखों के लिये काजल का प्रयोग हानिकारक है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से आपको बच्चो की आंखो में काजल लगाने से बचना चाहिये।

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