Baby’s stimulation technique inside the mother womb – मां के गर्भ के अंदर बच्चे की उत्तेजना तकनीक

माँ दुनिया में एक नया जीवन लाती है। मां का पेट, पेट में पल रहे बच्चे के लिए एक खेल के मैदान की तरह है। अजन्मे बच्चे के 10 हफ्तों के गर्भावस्था के बाद गर्भ घूमने के चिन्ह और गर्भावस्था के 23 सप्ताह के बाद बच्चा बाहर की आवाजों के प्रति प्रतिक्रिया देता है। कई संस्कृतियों में यह माना जाता है कि गर्भावस्था के दौरान बच्चे और मां के बीच भावनात्मक सम्बंध हो जाता है।

आधुनिक शोधों ने इस पुरानी विचारधारा को स्वीकार किया है कि जन्म से पहले ही बच्चा बाहरी दुनिया से जुड़ा हुआ होता है। मां अगर खुश है तो बच्चा भी खुश होगा और अगर चिंतित है तो वह भी परेशान हो जायेगा।

माँ को हमेशा बच्चे को दुनिया से परिचय कराना चाहिए। आप बहुत आसानी से कुछ महीने बाद ही, जब वह जन्म लेने जा रहा हो तो, कुछ संकेतों के माध्यम से बाहरी दुनिया से परिचय करा सकती हैं।  एक अजन्मे बच्चे को भी कुछ तकनीकों के साथ दुनिया के लिए शुरू किया जा सकता है। यह उसके चारों ओर एक प्यारा और आरामदायक वातावरण पैदा करेगा।

गर्भावस्था में देखभाल – गर्भ में बच्चे के लिये उत्तेजक की तकनीक (Technique of stimulating baby in the womb)

पहली तिमाही में शरीर में आने वाले परिवर्तन

गर्भ में बच्चे का विकास – बच्चे से बात करें (Speaking to baby)

यह सत्य है कि बच्चे की सुनने की क्षमता सीमित होती है लेकिन भीड़ की आवाज़ में भी वह आपकी आवाज़ पहचान लेता है। इसलिये सभी मांओं को यह सलाह दी जाती है कि शांति की आवाज़ में वे बातें करें। आप उससे उम्मीदों के बारे में बात कर सकती है या उसे उत्तेजित रखने के लिये गुनगुना या गा सकती है। दूसरा तरीका है कि अपने पेट को सहलाते रहे जब भी आप उससे बात करती हैं। आप अपने बच्चे के प्रत्युतर को हर बात पर देख सकती है।

हल्का संगीत (Light music – pregnancy me dekhbhal)

आप गर्भावस्था की अवधि के दौरान अपने बच्चे के लिए बहुत सुखदायक और नरम संगीत सुन सकती हैं। यह काफी दिलचस्प है  कि; गर्भाशय में बच्चा आसानी से कुछ दबे हुए सुरों को सुन सकता हैं। ज्यादा प्रभावी परिणाम के लिये हेडफोन को पेट पर रख दें।

गर्भ में बच्चे का विकास – पिता और भाई के बीच संचार (Maintain communication between dad and sibling)

मां के साथ, पिता और सहोदरों के बीच संचार भी महत्वपूर्ण है। चूंकि एक पिता का भी उसके जीवन में एक प्रभावी हिस्सा होगा इसलिये पिता को भी बच्चे से बात करनी चाहिए।

गर्भ में भ्रूण का विकास – उत्तेजना के लिए प्रकाश (Light for stimulation)

गर्भधारण के सबसे अहम लक्षण

प्रकाश आपके अपने बच्चे को प्रोत्साहित करने के लिए अद्भुत माध्यम है। आप अपने बच्चे को प्रोत्साहित करने के लिए अपने पेट में टॉर्च लगा सकते हैं। माता पिता भी बच्चे को प्रेरित रखने के लिए प्रकाश का उपयोग करें। माताओं को बिना किसी व्यवधान के रात मे सोना चाहिये जब आपके गर्भ में एक बच्चा हो। तनाव से एक गर्भवती महिला को बचना चाहिए।

इस बात को समझें कि एक बच्चा अपनी माँ के गर्भ में क्या क्या सुन सकता है (Understand what babies may hear in the mother’s womb)

माँ को इस बात पर ध्यान देने की आवश्यकता है कि उनका बच्चा ढोल नगाड़ों की अचानक आवाज़ आने पर उछल पड़ता है। गर्भ में पल रहे बच्चे की सुनने की क्षमता 23वें हफ्ते तक विकसित हो जाती है। इसके बाद वह बाहर से आ रही आवाजों पर प्रतिक्रया करने लगता है। छठवें महीने के पूरे होने के बाद से ही एक बच्चा बाहर की दुनिया के प्रति जागरूक रहता है और वहाँ चल रही गतिविधियों से प्रभावित भी होता है। बच्चे पाश्चात्य संगीत सुनकर गुस्से में आ जाते हैं और जोर से पैर पटकते हैं, और वहीँ शास्त्रीय संगीत सुनकर शांति से चुप हो जाते हैं।

इस बात को समझें कि आपका बच्चा क्या महसूस कर रहा है (Understand what your baby may sense)

माँ के गर्भ में पल रहा बच्चा ना सिर्फ किसी आवाज़ के प्रति प्रतिक्रया देता है, बल्कि अलग अलग प्रकार के स्वाद और दृश्यों के बारे में भी उसे जानकारी रहती है। अगर आप अम्नियोटिक (amniotic) द्रव्य में कोई मीठा पदार्थ मिश्रित कर देते हैं तो इस द्रव्य का सेवन करने की एक बच्चे की गति दोगुनी हो जाती है। अगर आप इसमें कोई खट्टा तत्व मिलाते हैं तो उसके इसका सेवन करने की गति काफी धीमी हो जाती है। आप ऐसे परिवर्तन चौथे महीने की शुरुआत में महसूस कर सकते हैं। इस समय तक बच्चा बाहर के अपरिचित वातावरण के प्रति भी प्रतिक्रया देने लगता है। पांचवे महीने तक आपका बच्चा माँ के पेट के पास रोशनी के जलने बुझने को देखकर भी चौंकने की प्रतिक्रिया देता है।

गर्भावस्था के दौरान आने वाले विभिन्न सपने

यह समझें कि बच्चा क्या सोच रहा है (Understand what baby may think)

कई शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया है कि एक गर्भवती महिला के विचार और भावनाएं उसके अजन्मे बच्चे के भावनात्मक पहलू को काफी हद तक प्रभावित करते हैं। आपके कुछ सोचने और आपके बच्चे के कुछ महसूस करने में कहीं ना कहीं कुछ तो सम्बन्ध होता है। 6 महीने की गर्भावस्था अवधि पूरी करने पर आपका अपने बच्चे से काफी लगाव हो जाता है। वैज्ञानिक तौर पर ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपकी भावनाओं से जुड़े हुए हॉर्मोन्स (hormones) प्लेसेंटा (placenta) से होते हुए आपके बच्चे तक चले जाते हैं। अतः गर्भावस्था के दौरान जितना हो सके खुश रहने का प्रयास करें। तनाव, चिंता और भावनात्मक चीज़ों से दूर रहें, क्योंकि इससे आपके बच्चे पर असर पड़ सकता है।

अपने अजन्मे बच्चे के साथ सम्बन्ध स्थापित करें (Link bond with your unborn baby)

आमतौर पर माँ की भावनाएं प्लेसेंटा पार नहीं करती, पर उसके हॉर्मोन (hormone) पार करते हैं। जिन माओं को काफी तनाव होता है, वे कैटेचोलैमाइंस (catecholamines) नामक तनाव के हॉर्मोन का उत्पादन करती हैं। इससे भावनाओं पर प्रभाव पड़ता है। इससे होता यह है कि गर्भ में पल रहे बच्चे को गंभीर रूप से तनाव का अहसास होता है, क्योंकि उसकी प्रणाली ऐसी बनी है जो माँ के साथ प्रतिक्रया करती है। जिन बच्चों का जन्म पहले से ही बुरी तरह प्रभावित स्नायु तंत्र के साथ होता है, उन्हें आगे जाकर भावनात्मक और पेट की समस्याओं के रूप से और भी ज़्यादा मुश्किलें आती हैं।

  • 10 सप्ताह बाद मां को अपने बच्चे से नरमी से बात करना चाहिये इसका कम्पन्न बच्चे के मस्तिष्क तक पहुंचता है।
  • नरम संगीत गर्भ में एमनियोटिक द्रव के माध्यम से बच्चे के कान तक पहुँच सकता है।
  • मां की आती हुई आवाज़ गर्भ में बच्चे (garbhavastha ki dekhbhal) को प्रोत्साहित कर सकती हैं। इसलिए आप कहानी पढ़े, बात करें और गीत गायें अपने अजन्मे बच्चे के लिये।
  • कहानियों पढ़ने पर बच्चा आवाज़ को सुनकर उत्तेजित होता है।
  • गर्भ में बच्चे मां के द्वारा खाये हुए भोजन का स्वाद पाते है। विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि बच्चा जन्म के बाद ऐसे ही स्वाद का विकास करता है।
  • गंध की अनुभूति भी अजन्मे बच्चे के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • गर्भ में बच्चा घूमता है और पैर चलाता है। मां पेट पर सहलाने के द्वारा अनुभूति को उत्तेजित कर सकती है।
  • माँ अजन्मे बच्चे के बारे में सोच कर और उसके काल्पनिक चित्र को बनाकर, प्यार, स्नेह और गर्मजोशी को बच्चे को महसूस करा सकती है।
  • माता का भावनात्मक जीवन भी बच्चे के भावनात्मक विकास में एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तनाव और मां का संकट मानसिक रूप से अजन्मे बच्चे को परेशान कर सकता है। यह भी बच्चे को शारीरिक रूप से चोट कर सकता हैं और समय से पहले कम वजन के बच्चे के जन्म का खतरा होता है।
  • दुनिया में एक मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ बच्चे को लाने के लिये, उसे वातावरण में उपस्थित जहर से दूर और एक पौष्टिक संतुलित आहार खाना चाहिए।

Subscribe to Blog via Email

Get Hindi tips to your inbox everyday