Top foods for infants, children aged between 1-2 years – शिशु और 1 से 2 साल तक के बच्चों के लिए श्रेष्ठ आहार

1 से 2 साल के बच्चे अपने खाने की आदत को शिशुपन से छोड़कर अपने माँ-बाप की तरह बनाना शुरू करते है। वे अपने हाथो से खाने की आदत को सीखते है और फिर जब वे 15 से 18 महीने के होते है तब अपनी थाल से खुद खाना सीखना पसंद करते है।

एक साल के बालक का भोजन, बच्चे साल में 3 से 5 इंच तक ही बढ़ पाते है। और इनकी इस उम्र में बहुत से बदलाव होते है, जैसे की भोजन व्यवहार को सिखने से लेकर अनेक प्रकारों के खान पान के स्वाद तक। माता – पिता यहाँ पर एक महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व निभाते है, जो अपने बच्चों को बोतल से पिलाने की आदत को दूर करते है और दूसरे आहार जो बच्चों के सेहत के लिए अच्छे हो उस से परिचय कराते है।

स्तन के दूध से बहुत से पोषण उपलब्ध होते है, लेकिन अब यह सही समय है की अपने बच्चों को आप वास्तविक खाने का स्वाद कराए। उनकी साइज़ और उम्र के अनुसार आपको इनके खाने की प्रक्रिया इस तरह निभानी चाहिए जिस से बच्चों को दिन में 1000 से 1400 तक की कैलोरी प्राप्त हो। माता- पिता को प्रयास करना चाहिए कि वो अपने बच्चों को रोज़ अनेक प्रकार के पोषण दे।

अगर आप एक दिन इसका प्रयोग करना भूल जाए तो चिंतित ना होए क्योंकि आपके पास बहुत से मौके है जिसमे आप उस पोषण की कमी की पूर्ति कर सकते है। डॉक्टर के परामर्श की भी आवश्यकता अनिवार्य है क्योंकि वे आपके बच्चे के सेहत अनुसार खान- पान का निर्णय करते है।

बच्चों को वह खाना दे जो अनेक पहलुओं में समावेश करे (The food which must be feed to toddlers comprise of several aspects)

1. डाइट प्लान में वह खाना बच्चों का चुने जो बहु कार्य हो (Find toddler foods that multitask)

स्तनपान कब और कैसे बंद करें?

अगर आपका बच्चा केवल एक समय पर एक ही व्यंजन खाना पसंद करता है, तब आप अपने बच्चे की आहार में अनेक पोषण तत्वों को मिला सकते है। आपको ज्यादातर अपने बच्चे की सेहत को लेकर सोचना चाहिए, उनके आहार में स्ट्रिंग चीस (string cheese), पीनट बटर (peanut butter) और अनाज से बनी रोटी (whole grain bread) जोड़े। इस तरह आपके बच्चे को बहुत से पोषण (nutrients) प्राप्त होते है।

2. डाईट चार्ट में अपने बच्चे के लिए ड्रिंक्स बनाए (Make drinks for toddler real)

अपने बच्चे के आहार में ड्रिंक्स भी आवश्यक है। जूस को ज्यादा ना अपनाए। आप उनके आहार में दूध जोड़ सकते है। 2 कप दूध काफी होता है आपके बच्चे को ज्यादा समय तक भरपूर रखने के लिए। आप उनको पानी भी पिलाने की आदात डालते रहे, उसमे कुछ बूँद जूस भी मिला सकते है। इस से आपके बच्चे की प्यास भी मिट जायेगी और साथ ही उनका पेट भी भर जाएगा।

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3. डाइट टिप्स है समझदारी से नाश्ते का प्रयोग करें (Snack wisely)

जब आपके बच्चे को बहुत से गतिविधियों के बाद उनकी ताकत को दोबारा प्राप्त करना हो तो, नाश्ते के प्रयोग से यह संभव है। पर मीठे कुकीज़ (sugary cookies) और नमकीन नाश्ता यह नहीं दे सकते, इसके लिए आपको उन्हें फल, कटे हुए गाजर के टुकड़े और मल्टी ग्रेन मफिन्स (multigrain muffins) देनी चाहिए। आप और भी अनेक पदार्थ दे सकते है जैसे की नट्स (nuts), एप्पल सॉस, पीनट बटर, व्होल ग्रेन सेरल (whole grain cereal), राइस केक (rice cake) और अन्य।

4. चीजों को बदलते रहे (Change things up in bacho ka food)

बच्चों का आहार, खाने में एकरसता अपनाने से अच्छा आप बच्चे को अलग रंग , स्वाद और आकार प्रदान करने वाले पोषण दे। अपनी रोटियों को बदले और उनके आहार में कुछ केले के टुकड़े मिलाए या एप्पल के भी टुकड़े को मिला सकते है। अगर चाहे तो दही को भी उनके आहार में मिलाकर उन्हें दुसरे स्वाद का अनुभव कराए।

5. खाने की क्वालिटी पर ध्यान दे ना की मात्रा पर (Go for quality over quantity)

जब बात कैलोरी पर आये तब पोषण से भरे खाने पर ध्यान देना चाहिए। बेहतर होगा कि आप अपने बच्चे को सही मात्रा में पोषण से भरपूर , ज्यादा कैलोरी वाला खाना दे ना कि एक सार आहार को रखने वाला खाना , जो आपके बच्चे की सेहत पर ज्यादा असर नहीं दिखाएगा।

6. खाने के आहार पर ध्यान दे (Look at the big picture)

बच्चों का खाना, खान पान को लेकर ज्यादा चिंतित ना होए , केवल यह ध्यान रखे की आपका बच्चा पूरे दिन में क्या खा रहा है। आपका लक्ष्य यह होना चाहिए की आपके बच्चे को खाने के द्वारा प्रोटीन (protein) , कैल्शियम (calcium) , मिनरल्स (minerals) , विटामिन C (vitamin C) , सभी रंग के फल और सब्जियां , सभी अनाज (whole grain) , फैट (fats) , आयरन से भरपूर (iron rich) खाना प्राप्त होता रहे। आप बस इतना ध्यान रखिए की यह सब आपको एक साथ करने की ज़रुरत नहीं है।

आपके बच्चे को एक खाना बार – बार खाने में पसंद हो तो चिंतित ना होए , यह प्राकृतिक है। आपके बच्चे को अनेक प्रकार के खेल और गतिविधियों में उलझाए रखिए। इस से बच्चे स्वस्थ रूप में बढ़ते है।

खाने के चुनाव को इसलिए इतनी कम उम्र में तय किया जाता है ताकि बच्चे को अलग प्रकार के सेहतमंद खाने और स्वाद से परिचय करा सकें। उनकी खुराक कम होती है क्यूंकि उनका पेट छोटा होता है इसलिए यह अनिवार्य है कि आप अपने बच्चे को पोषण से भर पूर खाना दे और उनके शरीर को स्वस्थ रूप में बढ़ने दे। मिठाई और कम कैलोरी वाले खाने को कम ही दे अगर आपका बच्चा 1 से 2 साल का है।

बच्चों की डाइट में दूध (milk) – बच्चे की सेहत के लिए आवश्यक है क्यूंकि दूध में कैल्शियम (calcium) और विटामिन D (vitamin D) होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। बच्चों को ताज़ा और शुद्ध दूध देना चाहिए , ना कि स्किम्ड (skimmed) या बिना फैट का। दूध में मौजूद फैट शरीर को प्राकृतिक तरह से बढ़ने में सहायता करता है और साथ ही दिमाग को भी तेज़ बनाता है और बढ़ाता भी है। 12 से 18 महीने की उम्र सही है बच्चे को कप से दूध पिलाने के लिए।

खाना और पोषण (Food and nutrition)  – हर बच्चा एक व्यक्ति है और हर बच्चे को एक ही रास्ते पर चलना है और वो भी एक ही व्यवस्था में, लेकिन अपनी खुद की गति में। कभी बच्चे बहुत सी कुशलताओं (skills) को जल्दी सीख जाते है और फिर कुछ समय के लिए शांत पड़ जाते है। बच्चे लगातार बढ़ते और सीखते जाते है, पर आसान बहाव के स्वरुप में नहीं।

अपने बच्चे को सुलाने के कुछ असरदार तरीके

खाने की आदते (Eating habits) – एक साल की उम्र से बच्चे को स्वस्थ भोजन खाना चाहिए और वो भी सभी घर के लोगों के साथ बैठ कर। इस उम्र से बहुत से बच्चो को विशेष खाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। बच्चे के शरीर का बढ़ना दूसरे साल से थोडा कम हो जाता है। उनकी भूख इस उम्र में ज्यादा नहीं होती इसलिए बच्चे अपनी पसंद नापसंद को प्रदर्शित करने योग्य होते है। बच्चे के छोटे से पेट को कम मात्रा में दिन में 5 से 6 बार खाना चाहिए होता है।

बच्चे की आहार की योजना उनके एक साल के होने से शुरू करें (Planning meals from the first year)

इस उम्र में कितनी मात्रा में खाना चाहिए, यह हर बच्चे का अलग रहता है और दिन ब दिन भी बदलता है । यह परिणाम उनके शरीर के बढ़ने और गतिविधियों के कारण होता है । यहाँ नीचे दिए गए मार्गदर्शक से आप अपने बच्चे को समय से समय क्या खिलाए की जानकारी प्राप्त कर सकते है

  • अनाज (Grains ho bachon ka food) अनाज से ताकत मिलती है जो उसमे मौजूद कार्बोहाइड्रेट्स (carbohydrates) के कारण है। अनाज में सभी प्रकार के अनाज जैसे की वाइट ब्रेड (white bread) , सेरल (cereal) , चावल (rice) , पास्ता (pasta) , नूडल्स (noodles) , क्रैकर्स (crackers) , किशमिश की ब्रेड (raisin bread) , सूखे बिस्कुट (dry biscuit) , और फ्रूट बन (fruit bun)।
  • फल और सब्जियां (bacho ka khana me vegetables and fruits) : फल और सब्जियां विटामिन , मिनरल और फाइबर से भरपूर होते है। बच्चों का डाइट चार्ट में इस उम्र में अनेक प्रकार के कच्चे और पके सब्जियों को खाने की आदत डालनी चाहिए। ताज़ा फल बहुत अच्छे माने जाते है, लेकिन सूखे, पैक्ड और फ्रोज़न (frozen) किये फल भी अच्छे होते है। जैसे की छोटा सेब (apple) , केला (banana) , संतरा (orange) और अन्य। रोज़ एक डार्क हरी सब्जी और एक संतरा या फल आवश्यक आहार के लिए चुने।
  • दूध , दही , पनीर , क्रीम मिल्क (Milk , yogurt , cheese full cream milk) : यह पदार्थ स्तन के दूध के बजाय दे सकते है। पनीर में सैचुरेटेड फैट (saturated fat) ज्यादा पाया जाता है , जो बड़ों के लिए तो अच्छा नहीं है लेकिन बच्चों के लिए ताकत प्रदान करता है। पनीर में विटामिन B2 होता है जो प्रोटीन , फैट और कार्बोहाइड्रेट्स (carbohydrates) को एनर्जी में बदलता है। दही से कैल्शियम , प्रोटीन और फॉस्फोरस (phosphorus) मिलता है जो हड्डी और दांतों को मजबूत बनाता है।

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  • मीट , फिश , पोल्ट्री , अंडे , नट्स (bachon ka khana me ho meat, fish, poultry, eggs, nuts) : बच्चों के लिए फूड चार्ट में मीट और बतायी गइ अन्य पदार्थ आयरन और प्रोटीन से भरपूर होते है, और यह बच्चे की आहार में आवश्यक मिलाये। नट्स ज्यादातर बच्चो को नहीं देना चाहिए क्यूंकि इसके कारण उन्हें खांसी हो सकती है।
  • पानी एक ड्रिंक है और इसमें आप थोडा जूस मिला कर दे सकते है। स्तन दूध भी सेहत के लिए बढ़िया है।

बच्चे को पौष्टिक और स्वस्थ आहार दे (Help the child to eat a nutritious and healthy diet by)

  • बच्चे के हर खाने और नाश्ते के समय पर ध्यान दे और उनके रूटीन और खाने की मात्रा का भी ख़ास ख़याल रखें।
  • खाना और नाश्ता दिखने में बढ़िया होने चाहिए और यही नहीं वे अनेक प्रकार के रंगों और आकार में होने चाहिए।
  • अपने बच्चे को घर के दुसरे व्यक्तियों के साथ खाने की आदात डाले। बच्चे दुसरो को देख जल्दी सीखते है और नई आदतों को तुरंत पकड़ लेते है।
  •  अपने बच्चे की पसंद ना पसंद को महत्व दे। उन्हें दो फल और सैंडविच (sandwich) में से एक चुनने दे, उन पर ज़बरदस्ती दबाव ना डालें।
  • बच्चो को अस्वस्थ खाना ना दे। उन्हें केवल सेहतमंद और पौष्टिक खाना दे।
  • बच्चो को खाने के लिए ज्यादा समय दे जैसे की खाने के लिए आधा घंटा और नाश्ते के लिए दस मिनट।
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