Chicken pox in Hindi – चिकन पॉक्स (छोटी माता) को कारण, लक्षण, दवा & इलाज

चिकन पॉक्स(Chicken pox) एक फैलने वाली बीमारी है, जिसके पैदा होने का मुख्य कारण वैरीसेला जोस्टर (varicella-zoster) नामक वायरस (virus) होता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से हवा, थूक, म्यूकस (mucus) या किसी प्रभावित व्यक्ति के फोड़े फुंसियों से निकले द्रव्य से फ़ैल सकता है। संक्रमण वाला यह समय रैशेस (rashes) होने के 2 से 3 दिन पहले शुरू हो जाता है और तब तक चलता है, जब तक फोड़े फुंसियों के अंश सूखकर गिर ना जाएं।

चिकन पॉक्स (चेचक)के वायरस से संक्रमित होने के 15 से 20 दिनों के बाद आपके सारे शरीर पर खुजली के साथ लाल दाग और फोड़े फुंसी हो जाते हैं। चिकन पॉक्स के लक्षण, छोटी माता (choti mata) बीमारी के अन्य लक्षण हैं बुखार, थकान, भूख ना लगना और मांसपेशियों में दर्द रहना।

यह एक सामान्य बीमारी है जो नवजात बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को अपना शिकार बनाती है। इस बीमारी से बचने का एक सामान्य टीका है, जिसे ज़्यादातर लोगों को दिया जाता है।

चिकन पॉक्स (छोटी माता/choti mata) एक सामान्य संक्रमण है जो स्वस्थ बच्चों और व्यस्कों के लिए ज़्यादा घातक नहीं होता। इस संक्रमण के फलस्वरूप त्वचा पर छोटे छोटे दाग हो जाते हैं जिससे काफी खुजली होती है। कभी कभी यह काफी दर्दनाक भी हो जाता है तथा इसके साथ बुखार और सिरदर्द की समस्या भी होती है।

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चिकन पॉक्स के कारण (Causes of chicken pox)

  • चिकन पॉक्स होने का सबसे सामान्य कारण एक व्यक्ति के शरीर में इस बीमारी का शिकार होने के 2 दिन के बाद दाग धब्बों का आना है।
  • चिकन पॉक्स के फ़टे दानों के संपर्क में आने पर आपको भी ये बीमारी हो सकती है।
  • प्रतिरोधक क्षमता का कमज़ोर होना
  • हर्पीस जोस्टर (herpes zoster) की वजह से यह बीमारी हो सकती है।
  • हवा में पैदा होने वाली पानी की बूँदों से भी चिकन पॉक्स की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

चिकन पॉक्स के लक्षण (Symptom of chicken pox)

  • चिकन पॉक्स के सामान्य फोड़े निकलने से पहले द्रव्य भरे फोड़े निकलना
  • बुखार
  • थकान
  • लाल और खुजली वाले दाने
  • फ़टे फोड़ों पर पपड़ी जैसी परत आना
  • भूख ना लगना
  • सिरदर्द।

चिकन पॉक्स के घरेलू उपचार (chicken pox ke gharelu upchar)

कफ के उपचार के घरेलू नुस्खे

1. किसी डॉक्टर से सलाह करने के बाद पेरासिटामोल या एसेटामीनोफेन जैसी दवाइयाँ लें जिससे बुखार और दर्द कम होता है। दवाई के बारे में पढ़े बिना तथा डॉक्टर से सलाह किये बिना कोई भी दवाई ना लें।

2. अगर आपको अपनी खुजली से ज़्यादा ही पीड़ा और दर्द हो रहा है तो दुकान से एंटीहिस्टामिन्स लें। अगर यह स्थिति दवाई से ठीक न हो तो किसी डॉक्टर की सलाह लें। वह आपको सही मात्रा में एंटीहिस्टामिन्स की खुराक देगा।

3. चिकन पॉक्स का उपचार / छोटी माता का इलाज (choti mata ka ilaaj), शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए काफी पानी पीते रहें।

4. छोटी माता का इलाज (choti mata ka ilaaj) अपने खानपान में केवल हलके भोजन शामिल करें। नमकीन, तीखे, एसिड युक्त या ज़्यादा गर्म खाने से दूर रहे क्योंकि अगर आपके मुंह में छाले हैं तो इससे काफी हानि होगी।

5. कसे हुए कपडे ना पहनें क्योंकि इससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है। हलके सूती के कपडे पहनें जो शरीर के तापमान को सामान्य रखते हैं।

6. अगर आपकी त्वचा में काफी जलन तथा पीड़ा हो रही हो तो त्वचा पर कैलामाइन लोशन लगाएं। इससे त्वचा को सुकून मिलेगा और आपको अपनी पीड़ा से मुक्ति।

7. अगर आप अपने घाव बुरी तरह खुजला देते हैं तो आपके घाव खुल जाते हैं जिन्हें ठीक होने में काफी समय लगता है। इससे संक्रमण भी हो सकता है। अतः अपने नाखून काटकर रखें और बच्चों के हाथ मोज़े या दस्तानों से ढककर रखें।

8. छोटी माता का घरेलू उपचार, अगर आपको इससे आराम मिले तो ठन्डे पानी से नहाएं। पानी में थोड़ा बेकिंग सोडा या दलिया डालें जिससे दर्द और खुजली से आराम मिलेगा।

9. किसी गंभीर समस्या की स्थिति में डॉक्टर को दिखाएँ।

10. चिकन पॉक्स की रोकथाम, बिना किसी डॉक्टर को दिखाए खुद की चिकित्सा करने का प्रयास न करें।

चिकन पॉक्स के घरेलू उपाय (chicken pox)

शहद (Honey)

चिकन पॉक्स हों एपर शरीर में लाल लाल दानें हो जाते हैं जिनमें खुजली और जलन होती रहती है. इस जगह पर दानों के बाद काले दाग भी पड़ जाते हैं, इसके इलाज के लिए दानों की जगह पर शुद्ध शहद का प्रयोग बहुत उपयोगी होता है. इससे त्वचा विकार दूर होता है और दाग भी हलके होते हुए धीरे धीरे ख़त्म हो जाते हैं.

बेकिंग सोडा (Baking soda)

बेकिंग सोडा चिकन पॉक्स के फलस्वरूप होने वाली खुजली और जलन को दूर करने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक गिलास पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा घोल लें और इस मिश्रण का प्रयोग अपने शरीर के प्रभावित भाग पर अच्छे से करके सूखने के लिए छोड़ दें।

नीम की पत्तियां (Margosa or neem leaves)

तुरंत उपचार के लिए भारतीय नीम का प्रयोग करीबन हर घर में किया जाता है। नीम की पत्तियों में एंटीवायरल (antiviral) गुण होते हैं, जो प्रभावी रूप से चिकन पॉक्स का इलाज करके इसे ठीक करते हैं। ये आपके फोड़ों को सुखाने में काफी मदद करता हैं और इस बीमारी के समय होने वाली खुजली को भी काफी कम कर देता है। इस उपचार के लिए मुट्ठीभर नीम के पत्ते लें और इन्हें पीसकर एक सौम्य पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट का प्रयोग चिकन पॉक्स के फोड़ों पर करें। इन पत्तों को नहाने के गर्म पानी में डाल दें और इन्हें कुछ देर तक उबलने दें। इसके बाद नीम के पत्ते डले हुए इस पानी से स्नान कर लें। इससे आपको काफी बेहतरीन परिणाम प्राप्त होंगे।

नीम चिकन पॉक्स का इलाज में काफी कारगर साबित होता है, क्योंकि इसमें एंटीवायरल गुण (antiviral properties) होते हैं। यह फोड़े फुंसियों को सुखाने में काफी सहायता करता है और आपको खुजली से भी पूरी तरह निजात दिलाता है। नीम का प्रयोग करने का सबसे असरदार तरीका यह है कि ताज़ी नीम की पत्तियों को पीस लें और इनका प्रयोग अपने फोड़ों पर करें। आप नीम की पत्तियों को पानी में डुबोकर इस पानी से स्नान भी कर सकते हैं।

गाजर और धनिये के पत्ते (Carrot and coriander leaves)

गाजर और धनिये के पत्ते दोनों की ही तासीर काफी ठंडी होती है, अतः इन दोनों का प्रयोग चिकन पॉक्स को ठीक करने तथा इसके दाग धब्बे दूर करने के लिए किया जा सकता है। चिकन पॉक्स की बीमारी के दौरान वे शरीर को आतंरिक रूप से ठंडक प्रदान करने में काफी प्रभावी साबित होते हैं। गाजर और धनिये की पत्तियों को मिश्रित करके एक सूप (soup) तैयार करें। इससे आपको त्वरित रूप से ठीक होने में काफी सहायता मिलती है। ये एंटीऑक्सीडेंट्स (antioxidants) से भी भरपूर होते हैं तथा इसी वजह से इनके प्रयोग से शरीर को जल्दी ठीक होने में काफी मदद मिलती है। एक गाजर को काटें और धनिये को भी छोटे छोटे टुकड़ों में काट लें। इन्हें आधे कप पानी में कुछ देर के लिए उबालें और फिर इस मिश्रण को छान लें। इसे कुछ देर तक ठंडा होने दें। रोज़ाना इस मिश्रण का एक महीने तक हल्की गर्म अवस्था में सेवन करें। इससे आपको अपनी गंभीर बीमारी से तेज़ी से उबरने में काफी मदद मिलेगी।

छोटी माता के उपाय, यह सूप चिकन पॉक्स के उपचार में काफी प्रभावशाली साबित होता है, क्योंकि यह एंटी ऑक्सीडेंट्स (antioxidants) से भरपूर होता है, जो इस बीमारी से ठीक होने के समय में आपकी काफी सहायता करते हैं। इस सूप को तैयार करने के लिए कुछ गाजरों को थोड़े से धनिये के पत्तों के साथ मिश्रित करके पानी में उबाल लें। अगर आपको बेहतरीन परिणाम प्राप्त करने हैं, तो एक महीने तक इस सूप का सेवन रोज़ाना अवश्य करें। इससे चिकन पॉक्स से बचने के लिए मदद मिलेगी।

त्वचा पर लगी चोट ठीक करने के घरेलू नुस्खे

सूरजमुखी का फूल (Marigold flower)

चिकन पॉक्स के दौरान चेहरे पर होने वाली खुजली से निजात दिलाने का यह काफी बेहतरीन उपाय साबित होता है। चिकन पॉक्स का आयुर्वेदिक उपचार, सूरजमुखी के फूलों तथा हैजेल (hazel) की पत्तियों को पानी में मिश्रित करें और इन्हें रातभर के लिए छोड़ दें। इन दोनों पदार्थों को पीसकर इनका एक पेस्ट (paste) बनाएं तथा त्वचा की खुजली से तुरंत निजात प्राप्त करने के लिए इसका प्रयोग अपने फोड़े फुंसियों तथा रैशेस पर करें।

विटामिन इ और चन्दन का तेल (vitamin E oil and sandalwood oil)

चिकन पॉक्स से बचने के लिए इस तेल से बेहतर तरीका शायद ही कोई हो। इनमें से किसी भी तेल को दिन में दो बार लगाएं और चिकन पॉक्स के दौरान पैदा हुए लालपन, खुजली और फुंसियों में हुए दर्द से छुटकारा पाएं। इन तेलों से वो दाग भी होने से बचते हैं, जिनकी उत्पत्ति आमतौर पर चिकन पॉक्स के फोड़ों से होती है। ऐसा इसलिए संभव होता है क्योंकि इसमें ऐसे कंपाउंड्स (compounds) होते हैं, जिनकी मदद से धब्बे हलके होते हैं और त्वचा को सुकून मिलता है।

जई के आटे से स्नान (Oatmeal bath)

चिकन पॉक्स का इलाज, यह चिकन पॉक्स से पैदा हुई खुजली को दूर करने का एक काफी प्रसिद्ध घरेलू उपाय है। चिकन पॉक्स से बचने के लिए जई के आटे को पीसकर एक महीन पाउडर का रूप दे दें और इसे गुनगुने पानी से भरे पानी के टब (bath tub) में मिश्रित कर दें। अब इस पानी में अपने शरीर को 20 मिनट तक डुबोकर रखें। आपको इस विधि के द्वारा चिकन पॉक्स के दर्द और खुजली से काफी आराम मिलेगा।

मलाशय को साफ़ करने के घरेलू नुस्खे

उनके लिए नुस्खे/उपचार जिनका प्रतिरक्षा तंत्र कमज़ोर है

उनके लिए नुस्खे जिनका प्रतिरक्षा तंत्र कमज़ोर है अगर आपको इस संक्रमण के लक्षणों के बारे में पता चला है तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। जितनी जल्दी आप इस संक्रमण का इलाज करेंगे, इसका असर उतना ही कम भयानक होगा।

इन सभी उपायों के साथ अपने आस पास और शरीर की भी सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बढाने के लिए रोग के बाद भी सतर्क रहे और सुबह शाम सैर करें, इसके अलावा हलके व्यायाम और योग आदि का सहारा लें, यह प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करता है. ताज़ा भोजन लें और अस्वस्थकर भोजन से बचे रहे.