Best precautions and diet have to follow during pregnancy – गर्भावस्था के दौरान अच्छी डाइट और बचाव उपाय

गर्भावस्था एक महिला के जीवन का सबसे खुशियों भरा समय होता है। यह वह समय होता है, जब एक नया जीवन माँ के गर्भ में सांसें लेने लगता है। इस अवस्था में ग्रहण किया गया भोजन गर्भ में पल रहे बच्चे के पोषण का मुख्य स्त्रोत होता है।

गर्भावस्था के पहले तीन महीने काफी महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इसी समय आपके बच्चे के शरीर के सारे भागों का सही प्रकार से विकास होना शुरू होता है। ख़ास बचाव के उपायों तथा पोषक आहार की गर्भावस्था के समय काफी आवश्यकता होती है।

गर्भावस्था में देखभाल के लिए मछली और सीफ़ूड (Fish and seafood)

ये कई पोषक तत्वों के कम फैट वाले बेहतरीन स्त्रोत होते हैं। मछली और सीफ़ूड काफी मात्रा में पोषण प्रदान करने में मदद करते हैं, तथा ये खानपान का एक प्रभावी हिस्सा बन सकते हैं। लेकिन गर्भावस्था के दौरान मछलियों तथा सीफ़ूड के सेवन में कुछ समस्याएं भी आ सकती हैं, क्योंकि इनके कई प्रकारों में मर्क्युरी की काफी अधिक मात्रा पाई जाती है। इस बारे में अपने डायटीशियन से सलाह करना आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प होगा।

अल्कोहल से हमेशा ही परहेज करना चाहिए, क्योंकि यह एक प्रकार का नशा है। गर्भावस्था के दौरान शराब का ख़तरा इतना गंभीर होता है कि इससे आपको फेटल अल्कोहल सिंड्रोम हो सकता है। इस सिंड्रोम की वजह से बच्चों को कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं, जैसे : –

  • बच्चों का विकास काफी धीमी गति से होता है।
  • चेहरे की आकृति का बिगड़ जाना।
  • सीखने की प्रक्रिया में समस्या होना।

गर्मियों में गर्भावस्था से जुड़े बचाव के उपाय

यह बात भी जानने योग्य है कि कई औषधियों में भी अल्कोहल की मात्रा होती है। गर्भावस्था के दौरान ऐसी दवाइयों का प्रयोग करने से पहले इनके सुरक्षित होने के बारे में अच्छे से जांच कर लें।

गर्भावस्था में देखभाल के लिए नियमित व्यायाम (Regular exercise)

आपके लिए अपने शरीर को स्वस्थ रखना काफी आवश्यक है, अतः नियमित व्यायाम का सहारा लें।  चहलकदमी करना इस स्थिति में काफी प्रभावी व्यायाम साबित होता है एवं यह आपके तनाव को भी पूरी तरह दूर करता है। योग की कुछ ख़ास मुद्राएं भी आपको तनाव से मुक्ति दिलाने में काफी कारगर साबित हो सकती हैं।

गर्भावस्था में खानपान में कैफीन (Caffeine)

कैफीन का असर हर व्यक्ति में अलग अलग तरीके से होता है। इससे जलन, सोने में परेशानी, बेचैनी, नर्वस होना, दिल की धड़कनों में असमानता आदि कई समस्याएं हो सकती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि कैफीन के सेवन से प्रीमैच्योर या सामान्य से छोटे बच्चों का जन्म होने तथा जन्म में कई तरह की दिक्कतें होने की समस्याएं सामने आती हैं। इनसे बचाव के एक उपाय के तौर पर कैफीन युक्त पेय पदार्थों का कुछ महीनों तक सेवन न करें।

फाइबर युक्त भोजन का सेवन (Add fiber rich foods)

फाइबर से युक्त भोजनों में मुख्य हैं अंकुरित अनाज, सीरियल (cereal), पालक एवं फलीदार सब्जियां। इनका सेवन करने से आपको कब्ज़ की समस्या से छुटकारा मिलेगा, जिससे आपके पेट की कार्यशीलता सामान्य बनी रहेगी। भारी भोजनों से परहेज करें तथा सही मात्रा में संतुलित आहार करने का प्रयास करें। स्ट्रॉबेरी (strawberry) जैसे फल फोलिक एसिड (folic acid) से भरपूर होते हैं जो कि स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छा होता है। गर्भावस्था के दौरान एक बार बड़ा आहार करने की बजाय थोड़े थोड़े अंतराल में कम भोजन करने का प्रयास करें। इससे आपका पेट भरा रहेगा तथा आप स्वस्थ रहेंगी।

सिगरेट (Cigarette)

गर्भावस्था के दौरान कितनी बार डॉक्टर से जांच करवाएं?

सिगरेट का प्रभाव किसी भी मनुष्य पर बहुत हानिकारक होता है, और अगर गर्भावस्था के वक़्त धूम्रपान किया गया तो इसका प्रभाव माँ और बच्चे दोनों के लिए काफी जानलेवा हो सकता है। जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करती हैं, उनके द्वारा जन्म दिए गए बच्चों का वज़न उन बच्चों से कम होता है, जिनका जन्म धूम्रपान न करने वाली महिला के गर्भ से हुआ है। कम वज़न वाले बच्चों को अन्य प्रकार की समस्याएं भी घेर सकती हैं, जैसे इन्फेक्शंस, गर्माहट पाने में असमर्थता, भोजन करने में परेशानी आदि।

फ़ूड एड्डीटिव्स (Food additives)

ज़्यादा प्रोसेस किये गए भोजन और एयरटेड पेय पदार्थों से दूर रहें। सोडियम नाइट्रेट से युक्त खाद्द पदार्थ, जैसे क्यूर्ड मीट, जिसमें हैम और बेकन शामिल हैं, से परहेज करें। ये पदार्थ कार्सिनोजनिक या कैंसर के कारण बनने वाले पदार्थ होते हैं। फल और सब्ज़ियों को काटने से पहले अच्छे से धो लें, जिससे कि इनसे पेस्टिसाइड्स अच्छे से साफ़ हो जाएं।

औषधियां और जड़ीबूटियां (Medications and herbs)

गर्भावस्था के दौरान ली जाने वाली औषधियों का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर या फिजिशियन से इनकी जांच अवश्य करवा लें। कुछ दवाइयाँ और जड़ीबूटियां आपके बच्चे को नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। कई तत्वों से युक्त दवाइयों से सावधान रहें क्योंकि इनमें कई ऐसे पदार्थ होते हैं, जो आपके बच्चे को काफी हानि पहुंचा सकते हैं।

फेटल साल्वेंट सिंड्रोम – जन्म के समय की समस्याएं (Fetal solvent syndrome – Major birth defects)

केमिकल्स के संपर्क में आने पर जन्म के समय किसी प्रकार का विकार (defects) हो सकता है। अगर आप भी ऐसी समस्या से जूझ रही हैं, या किसी प्रकार के केमिकल के संपर्क में आयी हैं तो तुरंत ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

हमेशा खुद को किसी ना किसी कार्य में व्यस्त रखें तथा अपने खानपान का भी उचित ध्यान रखें। सही रूप से व्यायाम करने पर भी गर्भावस्था में काफी लाभ मिलता है। आपका स्वास्थ्य आपके बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। किसी बात पर ज़्यादा तनाव ना लें या गुस्सा न करें, क्योंकि भावनाओं पर नियंत्रण न होने से सीधे आपके स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है।

गर्भावस्था के समय आदर्श पोषण

गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य – गर्भावस्था के दौरान पालन करने योग्य बचाव उपाय (Precautions to follow during pregnancy or garbhavastha me kya khana chahiye)

  • कच्ची मछली, मांस या पोल्ट्री (poultry) उत्पादों का सेवन करने से संक्रमण या परजीवी बीमारी (parasitic disease) का खतरा उत्पन्न हो जाता है। भोजन पकाने से बैक्टीरिया और पैरासाइट्स (bacteria and parasites) पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। दूध, जिसे पाश्चरीकृत (pasteurized) ना किया गया हो, भी आपको बीमार कर सकता है।
  • सॉना और हॉट टब (saunas and hot tubs) से परहेज़ करें जो शरीर के तापमान से अधिक तापमान बरकरार रखता है। इनसे आवश्यकता से अधिक गर्मी उत्पन्न हो सकती है जिससे बच्चे के विकास पर बुरा असर पड़ता है।
  • बिल्ली के मल (cat feces) से दूर रहे, क्योंकि इससे टोक्सोप्लास्मोसिस (toxoplasmosis) की समस्या उत्पन्न हो सकती है। यह स्थिति बिल्ली के मल, पौधों की मिट्टी और कच्चे या अधपके मांस में पाए जाने वाले परजीवी की वजह से उत्पन्न होती है। अगर गर्भावस्था के समय माँ इससे संक्रमित हो गयी, तो यह परजीवी उसके बढ़ते बच्चे के मस्तिष्क को हानि पहुंचाने की क्षमता रखता है।
  • केमिकल्स (chemicals) के संपर्क में आने से बचें, क्योंकि यह आपके बच्चे में जन्म से ही दोष की सृष्टि कर सकता है। इन केमिकल्स में घरेलू सफाई के सामान, कीटनाशक, हेयर डाई (hair dye), नेलपॉलिश (nail polish) आदि मुख्य है।

गर्भावस्था की समस्याएं के लिए कुछ अन्य बचाव उपाय और चिंताएं (Other precautions and concerns – garbhavastha ki samasya)

Rh नेगेटिव माएं (Rh negative mothers)

अगर माँ का रक्त Rh नेगेटिव और बच्चे का रक्त Rh पॉजिटिव है, तो इससे दोनों के Rh में असमानता की सृष्टि होती है। जैसे जैसे बच्चे की लाल रक्त कोशिकाएं माँ के शरीर में प्रवेश करती हैं, तो शरीर Rh कारक से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ (antibodies) का उत्पादन करता है, जिससे अगला बच्चा प्रभावित होता है। ऐसी स्थिति आने पर डॉक्टर द्वारा ख़ास चिकित्सा उपलब्ध करवाई जाती है।

प्रीइक्लेम्पसिया (Preeclampsia)

गर्भावस्था के दौरान हर्बल उपचार

इसे गर्भावस्था की वजह से पैदा हुआ हाइपरटेंशन (Hypertension) या टोक्सीमिया (toxemia) भी कहा जाता है। यह 5% स्थितियों में पाया जाता है तथा पहली, जुड़वा बच्चों या कई बच्चों वाली तथा किशोर गर्भावस्था एवं मधुमेह से ग्रस्त महिलाओं को अपना शिकार बनाता है। अगर इसे नज़रअंदाज़ किया गया तो यह माँ एवं बच्चे के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है। अगर गर्भवती महिला को धुंधली नज़र, सिरदर्द, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, तेज़ी से वज़न का घटना या तेज़ी से सूजन आना आदि समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है तो ऐसी अवस्था में तुरंत डॉक्टर से बात की जानी आवश्यक है।

जेस्टेशनल मधुमेह (Gestational diabetes)

इस प्रकार का मधुमेह गर्भावस्था के समय ही होता है तथा यह माँ और बच्चे दोनों के लिए ही समस्याएं खड़ी कर सकता है। इससे आकार में बड़े बच्चे या समय से पहले बच्चे के जन्म, बच्चे में जॉन्डिस (jaundice) या निम्न शुगर (sugar) के लक्षण या मृत बच्चे के जन्म जैसी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। इस स्थिति में माँ को भी कई परेशानियां हो सकती हैं, जैसे उच्च रक्तचाप (high pressure), किडनी में संक्रमण (kidney infection), सांस लेने में तकलीफ आदि। इसके साथ ही सीज़ेरियन (caesarean) रूप से बच्चे को जन्म देने की नौबत भी आ सकती है। इस समय खानपान सही रखने, व्यायाम करने तथा शुगर की मात्रा की जांच की काफी ज़रुरत होती है।