Foods that helps in production of breast milk – स्तन के दूध की उत्पत्ति में सहायक सर्वश्रेष्ठ भोजन

बच्चे के जन्म के बाद माँ के लिए यह ज़रूरी होता है कि उनके स्तन का दूध सही प्रकार से उत्पन्न हो। स्तन के दूध की ज़्यादा उत्पत्ति होने से बच्चा दूध अच्छे से पी पाएगा और उसके जीवन की स्वस्थ शुरुआत होगी। अगर आपको लगता है कि स्तनों से सही प्रकार से दूध उत्पन्न नहीं हो रहा है तो आपको स्तनों/ब्रेस्ट में दूध बढ़ाने का कोई तरीका ढूंढ़ना पडेगा।

इस समय महिला को ऐसे भोजनों का सेवन करना चाहिए जिससे उनके स्तनों का दूध बढे। हालांकि किसी भी प्रकार का भोजन ग्रहण करने से पहले उस महिला को अपने डॉक्टर से सलाह करनी चाहिए।

आजकल कम उम्र की माएं अपने बच्चों की पोषक ज़रूरतें अपने दूध से पूरे नहीं कर पाती। आजकल महिलाएं खराब स्तर का दूध स्तनों,स्त्री छाती से उत्पन्न करती हैं। वे 50 से 75% दूध उत्पन्न करती तो हैं पर इतना दूध वे विभिन्न कारणों से अपने बच्चे को पिला पाने में असमर्थ रहती हैं।

स्तन के दूध के अच्छे से उत्पन्न ना हो पाने के कारण दुःख, क्रोध, शारीरिक परिश्रम, डर, बच्चे से लगाव का अभाव, सूखी चीज़ों का सेवन, उपवास तथा गर्भावस्था की एक और स्थिति होते हैं।

अपने खानपान का ध्यान रखें (Take care about the food you eat)

कम उम्र की महिलाओं को अपने स्तनों का दूध बढ़ाने के लिए अपने आहार में दलदल और जंगल में उगने वाली सब्ज़ियाँ, फल, दूध, अनाज, घी, तेल, लहसुन, अंगूर का रस, प्याज, मटन, मटन का सूप तथा ऐसे पेय पदार्थ जो खट्टे मीठे हों, शामिल करना चाहिए।

जीवनशैली (Lifestyle)

छोटे स्तनों को बड़ा प्रतीत करवाने के नुस्खे

सही खानपान के अभाव में ना सिर्फ स्तनों का दूध कम होता है बल्कि अन्य कई सारी स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। अपने सोने की आदत तथा खाने की आदत पर ध्यान दें तथा अच्छे से विश्राम करें और खुश रहे।

खाने की मात्रा को बढ़ाएं (Increase the feeding frequency)

आप अपने खाना खाने की मात्रा को बढ़ाने के लिए दिन में हर दो घंटे में दूध पियें और रात को हर 4 घंटे में दूध पियें। तब तक दूध ना पिलाएं जब तक आपके स्तनों में दूध न भर जाए।

बारी बारी से एक स्तन से दूध पिलाएं (Switch nursing)

बच्चे को दूसरे स्तन का दूध पिलाने से पहले उसे पहले स्तन से दूध पी लेने दें। दूध पिलाने के बाद अपने बच्चे को 5 से 10 मिनट तक उठाकर रखें जिससे कि बच्चे के अंदर अटका हवा का गुब्बारा फूट जाए। इससे बच्चे को और ज़्यादा दूध पीने में आसानी होगी।

स्तनों का दूध बढ़ाने के लिए भोजन (Foods to increase the breast milk production)

मेथी के बीज (Fenugreek seeds)

मेथी के कुछ बीज लें और उसे पाउडर का रूप दें। इस पाउडर को 2 चम्मच लें और इसे एक चम्मच दलिये के साथ मिलाएं तथा इस रोज़ खाएं। आप दलिये की जगह चावल की लप्सी भी खा सकती हैं।

सौंफ (Fennel se stan ka dudh badaye)

सौंफ में थोड़ी मात्रा में एस्ट्रोजन के गुण होते हैं जो कि स्तनों/ब्रेस्ट में दूध की मात्रा बढ़ाते हैं। सौंफ का प्रयोग करके सिर्फ चाय बनाएं और इसे रोज़ पियें। एक कप पानी में दो चम्मच सौफ डालें और इसे उबाल लें। 3 से 4 मिनट तक इसे उबलने दें तथा इस मिश्रण को रोज़ पियें।

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स्तनों का दूध बढाने के लिए जई (Oats)

अगर आप सुबह काफी जल्दी में हैं, तो जई इस समय का सबसे अच्छा नाश्ता साबित होता है। यह बनाने में आसान है क्योंकि इसमें कुछ ही मिनट लगते हैं। स्तनपान की शुरुआत करने से पहले अपने खानपान में ओट्स को अवश्य शामिल करें। ओट्स कैल्शियम, फाइबर (calcium, fiber) तथा पोषक पदार्थों से भरपूर होते हैं। ये आपके वज़न को घटाने में, रक्तचाप तथा कोलेस्ट्रोल (blood pressure and cholesterol) कम करने एवं दूध का सही उत्पादन करने में सहायता करते हैं। अगर आपको जई के दलिए का सादा स्वाद पसंद नहीं है तो जई का उपमा या पुलाव बनाने का प्रयास करें। जई का आटा शरीर के अन्य कई कामों, जैसे दुग्ध पान (lactation) को सही प्रकार से संपन्न करने में भी आपकी सहायता करता है। जई के आटे से उसे सुकून मिलता है, जिससे उसके शरीर को ऑक्सीटोसिन (oxytocin) छोड़ने में काफी सहायता मिलती है। यह दूध के उत्पादन से जुड़ा हुआ एक हॉर्मोन (hormone) होता है।

जीवंती या लेप्टाडेनिया रेट्युकुलाटा (Jeevanthi or leptadenia retuculata)

जीवंती के पौधे में दूध को बढ़ाने वाले गुण होते हैं। यह एक आयुर्वेदिक उपचार है। लेप्टाडेन नामक एक दवाई में इस पौधे के अंश होते हैं और यह बाज़ार में पाया जाता है। इस दवाई को दिन में 2 टेबलेट के हिसाब से 3 बार खाएं।

जंगली शतावर (Wild asparagus)

जंगली शतावर का पाउडर बनाकर उसे दूध में मिलाकर पियें। इससे स्तन/ब्रेस्ट के दूध में बढ़त होती है तथा इसकी क्वालिटी भी अच्छी होती है। एक चम्मच सूखे और जंगली शतावर को दो चम्मच दूध में पिलाकर पियें। अच्छे परिणामों के लिए इस मिश्रण को रोज़ाना पियें। आप ज़्यादा बेहतर परिणामों के लिए इस मिश्रण में पिप्पली चूर्ण भी मिला सकती हैं।

स्तनों का दूध बढाने के लिए पालक (Spinach)

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पालक एक बेहतरीन घरेलू उपचार है तथा कुछ ख़ास विटामिन्स (vitamins) और खनिजों के लिए आपको इसकी काफी ज़रुरत पड़ती है। पालक कैल्शियम, आयरन, विटामिन ए और के तथा फोलेट (calcium, iron, Vitamin A, K, and folate) का काफी अच्छा स्त्रोत होता है। फोलेट उन महिलाओं के लिए काफी आवश्यक होता है, जो गर्भवती होती हैं। पालक जैसी गाढ़ी पत्तेदार सब्ज़ियों में फाइटोएस्ट्रोजन (phytoestrogen) होता है, जिसकी मदद से स्तनों के तंतुओं (tissues) के स्वास्थ्य में सुधार होता है तथा दूध का उत्पादन भी बढ़ता है। बीट के पत्तियाँ और पालक डेटॉक्सिफायिंग कारकों (detoxifying agents) से भरपूर होती हैं, जिनमें पौधों के कुछ खास केमिकल्स (chemicals) भी शामिल होते हैं। ये स्तन कैंसर (breast cancer) रोकने में सहायक होते हैं। आप रोटी के लिए तैयार आटे में भी पालक का मिश्रण कर सकती हैं और इनसे पराठे बना सकती हैं।

जीरा (Cumin seeds can help in producing milk)

जीरा दूध पिलाने वाली माओं के लिए काफी फायदेमंद होता है। ये दूध की उत्पत्ति को अंजाम देने के लिए सबसे बेहतरीन उत्पाद है। अगर आप कब्ज़ के शिकार हैं तो जीरा आपकी मदद कर सकता है। इससे आपका हाज़मा सही रहता है और आप सारा दिन अच्छे से खा सकते हैं। यह एसिडिटी, सूजन तथा अपच को सही करने का काफी बढ़िया इलाज है। जीरे में लौह पदार्थ होता है जिससे शरीर को शक्ति मिलती है। इसकी वजह से गर्भावस्था के बाद आपको आम कमज़ोरी का सामना नहीं करना पडेगा। भारतीय व्यंजन बनाने के लिए भी जीरे की ज़रुरत पड़ती ही है। आप इसे भूनकर सलाद, चटनी और रायते में भी डाल सकते हैं।

स्तनों का दूध बढाने के लिए मेथी (Methi can really help with milk production)

मेथी का प्रयोग सदियों से बच्चों को दूध पिलाने वली माओं द्वारा किया जाता रहा है। डॉक्टरों का भी यही कहना है कि अगर आप मेथी का प्रयोग भोजन बनाते समय करें तो इससे दूध के उत्पादन में काफी वृद्धि होती है। आप सुबह उठकर एक गिलास मेथी युक्त पानी भी पी सकती हैं। इसके लिए रातभर मेथी को भिगोकर रखें। मेथी कैल्शियम, आयरन, खनिजों और विटामिन्स से भरपूर होती है। लेकिन अतिरिक्त मेथी का सेवन ना करें क्योंकि इससे आप बीमार पड़ सकती हैं। इसका कारण यह है कि मेथी अतिरिक्त मेथी के सेवन से शरीर में पानी की कमी होती है।

स्तनों का दूध बढाने के लिए दालें (Pulses)

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दालें विभिन्न रंगों जैसे पीले और लाल में उपलब्ध होती हैं और ये प्रोटीन (protein) और आयरन का बेहतरीन स्त्रोत मानी जाती हैं। मसूर की दाल आपके स्तनों में दूध का उत्पादन बढाने में सहायक सिद्ध होती है। इसका प्रयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाने, जैसे सांबर, रसम तथा अन्य दक्षिण भारतीय खाद्य पदार्थ बनाने में किया जाता है।

स्तनों का दूध बढाने के लिए लहसुन (Garlic can produce enough milk)

लहसुन दूध पिलाने वाली माओं के लिए काफी फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमें दूध का उत्पादन बढाने के कई गुण मौजूद होते हैं। सालों से लहसुन स्तनों का दूध बढाने के लिए जाना जाता है। शोधों से साबित हुआ है कि जो माएं लहसुन का सेवन करती हैं, वे अपने बच्चे को लम्बे समय तक दूध पिला सकती हैं। आप कच्चे लहसुन का भी सेवन कर सकती हैं और इसे दालों या भारतीय सब्जियों में मिलाकर भी खा सकती हैं। इससे भोजन का स्वाद काफी अच्छा हो जाता है तथा इसी के साथ आपके पास बच्चे को पिलाने के लिए दूध की ज़्यादा मात्रा होती है। इसीलिए माओं को रोजाना लहसुन खाने की सलाह दी जाती है। सुबह लहसुन के एक टुकड़े का सेवन करने से बच्चे को दुग्धपान कराने में कोई समस्या पेश नहीं आती।

स्तनों का दूध बढाने के लिए पानी और रस (Water and juices)

काफी मात्रा में पानी और रस का सेवन करें, क्योंकि इससे दूध के उत्पादन में वृद्धि होती है। तरल पदार्थों का सेवन करने से हर बार बच्चे को पिलाने के लिए आपके पास दूध की ज्यादा मात्रा होती है। ये आपको शरीर में पानी की कमी होने से भी बचाते हैं और स्तनपान के दौरान शरीर से निकले द्रव्य की पूर्ती करते हैं।