Hindi tips for pregnant women to follow – गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के लिए सर्वोताम सुझाव

हर अभिभावक की चाह होती है कि उनका बच्चा जन्म के पहले और बाद में भी पूरी तरह स्वस्थ रहे। पर सिर्फ आपके चाहने भर से ही आपके बच्चे का स्वास्थ्य अच्छा नहीं हो सकता है। इसकी बजाय माँ बनने वाली महिला जब दूध पिलाने वाली स्थिति में आ जाए तो उसे अपना अच्छे से ख्याल रखना चाहिए माँ के द्वारा उठाया गया एक गलत कदम दोनों के लिए ख़तरा बन सकता है।

जब भी कोई महिला अपने पहले बच्चे को जन्म देती है, उसके लिए उस समय पालन करने वाले हर नियम क़ानून का जानना ज़रूरी नहीं है। इस लेख में ऐसी ही कुछ बातों के बारे में चर्चा की जाएगी, जिनका पालन आपको गर्भावस्था के समय करना चाहिए।

गर्भावस्था ऐसी अवस्था है जब एक महिला औरत बनती है और वह माँ बनने की राह पर होती है। गर्भावस्था के सप्ताह, पहली बार गर्भ रहना उस औरत के जीवन में नया मोड़ लाता है और वह अपने पेट के बच्चे की देखभाल करने के लिए तैयार हो जाती है।

निचे कुछ सुझाव दिए गए हैं जो इस अवस्था में लाभकारी हैं।

बच्चे के जन्म से पहले विटामिन्स (Vitamins for prenatal period)

जब आप गर्भावस्था के काल से गुज़र रही होती हैं तो आपके शरीर को काफी मात्रा में पोषक पदार्थों और विटामिन्स की ज़रुरत होती है, जिससे आप और आपका बच्चा स्वस्थ रहते हैं। इस समय में स्वस्थ रहने के सबसे पहले कदम के तौर पर बच्चे के जन्म के पहले वाले विटामिन्स का सेवन शुरू कर दें। गर्भावस्था के पहले महीने में आपके बच्चे का न्यूरल कोर्ड (neural chord), जो बाद में जाकर मस्तिष्क का रूप लेता है और रीढ़ की हड्डी का विकास होता है। अतः आपको इस समय पर्याप्त मात्रा में विटामिन्स लेने की आवश्यकता है।

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द्रव्यों का सेवन (Fluid intake)

एक गर्भवती महिला को किसी सामान्य महिला की तुलना में कहीं ज़्यादा द्रव्यों का सेवन करने की ज़रुरत होती है। अतः काफी मात्रा में पानी, फलों के रस और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करें। आप काफी सब्जियों और थोड़े से चिकन (chicken) का मिश्रण करके सूप (soup) भी तैयार कर सकती हैं। क्योंकि आपके अन्दर पलने वाला बच्चा ठोस आहार ग्रहण नहीं कर सकता, अतः इस समय तरल आहार का सेवन करें।

बिना सलाह के आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन ना करें (No herbs without consultation)

कुछ लोगों की यह गलत धारणा है कि आयुर्वेदिक दवाइयां हमेशा ही सुरक्षित और प्रभावी सिद्ध होती हैं। पर गर्भावस्था के काल के दौरान यह बात हमेशा सही साबित नहीं होती। कई बार आयुर्वेदिक उपचार काफी खतरनाक हो सकते हैं और आपके गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। अतः अगर आप अपनी गर्भावस्था के काल में हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह किये बिना किसी भी आयुर्वेदिक दवाई का सेवन ना करें।

आयरन युक्त भोजन (Food rich in iron)

गर्भावस्था वह समय है, जब आपके रक्त से बच्चे के शरीर का विकास होता है। इस समय के दौरान शरीर से अतिरिक्त रक्तस्त्राव होता है। आपके शरीर को आयरन की आवश्यकता होती है, जिसकी पूर्ति आपको गर्भावस्था के समय में करनी होती है। आप अपने डॉक्टर से सलाह करके आयरन टॉनिक (iron tonic) ले सकती हैं, या फिर प्राकृतिक रूप से शरीर में आयरन का संचार कर सकती हैं। उदाहरण के तौर पर एक गर्भवती महिला को रोजाना एक केला खाने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह आयरन और मैग्नीशियम (magnesium) से भरपूर होता है जो कि काफी ज़रूरी भी है। पालक और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियों में भी आयरन की मात्रा पाई जाती है।

प्रोटीन युक्त भोजन (Food rich in protein)

गर्भवती महिलाओं के लिए आहार

गर्भवती महिलाओं को अपने गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन्स की भी आवश्यकता होती है। आपको अखरोट और बादाम आदि में पाए जाने वाले स्वास्थ्यकर प्रोटीन की आवश्यकता होती है। आप स्वस्थ रहने के लिए चिकन और अंडे का सेवन भी कर सकती हैं। परतु गर्भावस्था के दौरान लाल मांस से परहेज करें क्योंकि इसमें काफी मात्रा में वसा होता है, जिसे आपका शरीर इस समय अच्छे से पचा नहीं पाता।

व्यायाम (Exercise se grabhawastha me dekhbhal)

गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के समय के दौरान काफी कार्यशील रहना चाहिए और एक जगह बैठे नहीं रहना चाहिए। थोड़ी सी चहलकदमी और हल्का व्यायाम करने से गर्भावस्था काल के दौरान शरीर स्वस्थ रहता है। सामान्य स्वास्थ्य के साथ साथ रोज़ाना व्यायाम करने से आप अपने तनाव का स्तर भी काफी कम कर सकती हैं। पर इस बात का ध्यान रखें कि कूदने जैसा कड़ा व्यायाम ना करें। अगर आपके शरीर में ज़्यादा हलचल हुई तो आपका बच्चा काफी असहज महसूस करेगा।

गाड़ी चलाने के दौरान सेफ्टी बेल्ट (Safety belts during drive)

कई गर्भवती महिलाएं अपने गर्भावस्था के काल के दौरान खुद ही गाड़ी चलाकर दफ्तर जाना पसंद करती हैं। हमेशा गाड़ी चलाते वक़्त सेफ्टी बेल्ट पहनें क्योंकि इसके बिना काफी नुकसान हो सकता है। जब आप गाड़ी चलाती रहती हैं तो आपको ऐसी मुद्रा में रहना चाहिए जिससे बच्चे को कोई नुकसान ना पहुंचे। बच्चे की गोद के भाग को अपने पेट के निचले हिस्से में रखें और इसे जितना नीचे हो सके उतना नीचे रखें।

प्रेग्‍नेंसी केयर के लिए संतुलित आहार लें (Balanced meal)

नियमित रूप से और संतुलित आहार लें। आहार साफ़ सुथरा हो इस बात की जांच कर लें। बाहर का खाना कम करें।

गर्भावस्था (garbhavastha) का दौरान हॉर्मोन में होने वाले बदलाव के कारण कब्ज होना आम बात है। इससे राहत पाने के लिए फल, सब्जियां, तंतु से भरे पदार्थ जैसे गेहू और साबुत अनाज (pregnancy me kya khaye) से बना ब्रेड खाएं।

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गर्भावस्था के दौरान धुम्रपान और शराब से दूर रहें (Stay away from smoking and alcohol)

धुम्रपान पूरी तरह से बंद करें और शराब लेना कम करें। कई महिलाओं का ये मानना है की रेड वाइन थोड़ी मात्रा में पी जा सकती है पर हो सके तो इससे भी परहेज करें। ज्यादा कॉफ़ी पीना भी सही नहीं है पर सुबह एक कप पिने से कोई नुकसान नहीं होता।

नियमित रूप से जांच और स्कैन करा लें (Routine check up)

अगर आपको खून बहता दिखे तो डॉक्टर से जरुर ये बात कहें। आपको जो विटामिन की गोलियां और टॉनिक दिए जाएँ उन्हें नियमित रूप से लें।

प्रेग्‍नेंसी केयर के लिए व्यायाम (Excercise se pregnancy ki dekhbhal)

ज्यादा भारी व्यायाम करने से बचें। साधारण हलकी कसरत जैसे चलना उपयुक्त होता है। आज कल ऐसे व्यायाम सिखाये जाते हैं जो एक औरत को तंदुरुस्त रखकर बच्चे के जन्म के समय की तकलीफ कम करते हैं।

गर्भावस्था के दौरान अच्छे गाने सुने (Listen good music)

अच्छे गाने सुनने से आपके पेट के बच्चे का स्वास्थय सुधरता है। यह जरुरी है की गाने उदासी भरे न हो। अच्छी किताबें जैसी चुटकुलोंवाली किताबें पढने से भी आप तनाव से मुक्त रहती है।

त्वचा की देखभाल (Skin care)

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हॉर्मोन की संख्या में बदलाव के कारण महिलाओं की त्वचा बदलने लगती है। त्वचा की सही देखभाल से आपकी त्वचा उजली हुई रहेगी। हानिकारक रसायनों से भरे हुए उत्पादों का इस्तेमाल न करें। ज्यादा मात्रा में पानी पियें और धुप में जाने से पहले सनस्क्रीन लगाएं।

सोने का तरीका (Sleeping position)

पीठ पर सोने से आपकी रीड की हड्डी पर ज्यादा बोझ पड़ता है। बायीं करवट पर सोने से गर्भ को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलता है। सोते समय भी संगीत सुनने से या कोई अच्छी किताब पढने से लाभ मिलता है।

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