How to recognize breast cancer – self exam for the breast cancer – स्वयं करें ब्रेस्ट कैंसर की जांच, ब्रेस्ट सेल्फ एक्जाम का तरीका

ब्रेस्ट सेल्फ एक्जाम (Breast self exam) ब्रेस्ट कैंसर के प्राथमिक एक जांच प्रक्रिया है जिसमें आप स्वयं अपने स्तनों की जांच कर पता लगा सकती हैं कि कहीं आप ब्रेस्ट कैंसर जैसी खतरनाक समस्या की चपेट में तो नहीं हैं। ब्रेस्ट कैंसर के प्रथम चरण में इस जांच द्वारा आप समस्या का पता लगा सकती हैं ताकि इस शुरुआती अवस्था में ही उपचार द्वारा इसे ठीक किया जा सके।

आज के समय में हर महिला वर्ग में ब्रेस्ट कैंसर या स्तनों के कैंसर के प्रति जागरूकता आवश्यक है। इस बात को भी स्वीकार करना बेहद ज़रूरी है कि यह भी अन्य रोगों की तरह ही है और इसे स्वीकारने में किसी तरह की शर्मिंदगी नहीं होनी चाहिए। कुछ खास लक्षणों के माध्यम से आप स्तन कैंसर की पहचान कर सकती हैं।

इस तरह करें अपने स्तनों की जांच (Tips for performing BSE)

स्तनों के आकार और बनावट में नियमितता को परखने के लिए महीने में एक बार इस जांच को करना बेहतर होता है। माहवारी के आखिरी दिन का समय इस जांच के लिए सबसे अनुकूल होता है, इस दिन को नोट कर अगली जांच एक महीने बाद करें।

अगर आपके स्तन में किसी तरह की गांठ या उभार हो तो घबराएँ नहीं, क्योंकि कई बार यह समस्या आम होती है कई महिलाओं को बगल के पास या स्तन के ऊपरी भाग में किसी तरह का मांसपिंड सा उभार या गांठ आदि होता है। इसके अलावा निचले हिस्से में दरदरा सा अनुभव होता है जो छोटे छोटे दानों के रूप में होता है, यह उस गांठ का ही हिस्सा हो सकता है। लेकिन अगर आपको अपने स्तनों में कुछ अलग किस्म की अनुभूति होती है जो आरामदायक नहीं होती और कुछ लक्षण एक महीने से अधिक समय तक बने रहते हैं तो आपको बिना देर किए डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

ब्रेस्ट सेल्फ एक्जाम के 5 चरण (Five steps of breast self exam/BSE in Hindi)

चरण 1 – एक आईने के सामने सीधे खड़े हो जाएँ और अपनी हथेलियों को कूल्हों पर रखें। अपने स्तनों के आकार और रंग पर गौर करें। सामान्य और स्वस्थ स्तनों में कोई सूजन आदि नहीं होती और दोनों एक समान होते हैं। अगर इनमें कोई उभार या गड्ढे आदि दिखाई दें या स्तन अपनी विपरीत या भीतर की ओर जाता दिखे अथवा इनमें किसी तरह की लालिमा, सूजन या रैश आदि हो तो चिकित्सक से संपर्क करें।

चरण 2 अपने हाथों को ऊपर उठाते हुये इन्हीं लक्षणों को दोबारा परखें।

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चरण 3 – जांच करें कि, किसी तरह का श्वेत, पीला या पारदर्शी तरल निप्पल से बाहर तो नहीं आ रहा।

चरण 4 – अब लेट कर स्तनों की जांच करें, पीठ के बल लेट जाएँ और अपने दाहिने स्तन को बाएँ हाथ की उंगली से, तथा बाएँ स्तन पर दाहिने हाथ की उँगलियों से परखें। अपनी उँगलियों के सिरे को स्तनों पर गोल घुमाते हुये जाँचे कि, कहीं कोई उभार या कोई असामान्य स्थिति तो नहीं महसूस हो रही।

चरण 5 – जब खड़े होकर और बैठ कर स्तन की लगभग पूरी जांच हो चुकी हो तो इस अंतिम चरण को अपनाना चाहिए जिसमें बहते पानी या शावर के नीचे आप स्तन की जांच कर किसी प्रकार की गांठ या असामान्य उभार को चिकनाई की वजह से आसानी से पकड़ सकती हैं।

इन पाँच चरणों में नीचे दिये गए बदलावों को नोट करें

  •  स्तनों के आकार या बनावट में किसी भी तरह के बदलाव का वर्णन करें।
  • ब्रेस्ट के किसी हिस्से में गड्ढे आदि का विवरण करें।
  • ब्रेस्ट में किसी तरह की सूजन जो खास तौर पर एक तरफ हो, उसके बारे में बताएं।
  • स्तनों में सिकुड़न, जो एक तरफ में ही हो, इसके बारे में बताएं।
  • अधिकांश महिलाओं का एक स्तन दूसरे की तुलना में थोड़ा बड़ा होता है, अगर आकार में अचानक ज़्यादा वृद्धि हो तो इसे अंकित करें।
  • निप्पलों का विपरीत दिशा में घुमाव
  • स्तन की त्वचा लाल, पपड़ीदार, ब्रेस्ट में सूजन
  • निप्पलों से किसी तरह का पारदर्शी या लाल स्त्राव
  • निप्पलों की बनावट में बदलाव

अधिकतर महिलाएं स्वयं जांच या BSE द्वारा ब्रेस्ट कैंसर की जांच कर सकती हैं जो आवश्यक भी है।

ब्रेस्ट कैंसर से कैसे बचें? (How to prevent from Breast cancer in Hindi)

अगर आपके परिवार या आस पास किसी को ब्रेस्ट कैंसर है तो यह आपके लिए भी एक खतरे की घंटी की तरह है। आपको इसके लिए बचाव के तौर पर शुरुआत में ही कदम उठाने चाहिए। अगर आप बीस वर्ष की आयु पार कर चुकी हैं तो प्रत्येक महीने ब्रेस्ट सेल्फ एक्जाम करनी चाहिए, ताकि ब्रेस्ट कैंसर की आशंका को पहचाना जा सके।

सेल्फ ब्रेस्ट एक्जाम फॉर ब्रेस्ट कैंसर हिन्दी में (Self exam and detection of breast cancer)

दृश्य जांच (Visual examination)

आईने के सामने खड़े होकर या बिन आइने के ही अगर आप स्तनों में किसी तरह का बदलाव महसूस कर रही हैं तो आपको इसके लिए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आपण एब्रेस्ट के आकार, बनावट, रंग पर लंबे समय तक ध्यान देते रहें। अगर माहवारी न होने के बावजूद इसमें किसी तरह की सूजन, जलन या किसी अन्य तरह की समस्या हो तो यह खतरनाक हो सकता है।

स्पर्श द्वारा जांच (Touching examination)

सीधे लेट जाएँ और अपने दोनों स्तनों को विपरीत हाथों से स्पर्श करें, अतः दाहिने स्तन को बाए हाथ से और बाए स्तन को दाहिने हाथ से स्पर्श करें। अपनी उँगलियों का प्रयोग करते हुये स्तनों पर इसे 2 मिनट या इससे ज़्यादा देर तक गोल घुमाएँ। इससे अपने दोनों स्तनों की गोलाई को मापने की कोशिश करें, और अंदाजा लगाएँ की इनकी गोलाई में कोई विशेष अंतर तो नहीं है। अगर बड़ा अंतर महसूस हो तो डॉक्टर से मिलें।

वंशानुगत कारक (Genetic factors)

अगर आपके परिवार में आपसे बड़ों को जैसे, माँ या बड़ी बहन आदि किसी को ब्रेस्ट कैंसर की बिमारी हो तो आपको भी सतर्क रहने की ज़रूरत है। इसके अलावा अपने बड़ों से पूछकर यह भी पता लगाएँ कि किसी अन्य को भी यह समस्या तो नहीं थी, अगर आपके परिवार में ब्रेस्ट कैंसर की समस्या रही है तो आपको खास तौर पर इससे सतर्क रहने की आवश्यकता है, इसके लिए अगर आपको बार बार डॉक्टर से परामर्श के लिए जाना पड़े तो इसमें कोताही न बरतें।

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