How to read general body language – कैसे पहचानें सही बॉडी लैंग्वेज, सामान्य शारीरिक भाषा पढ़ने का तरीका

किसी की शारीरिक मुद्रा या बॉडी लैंग्वेज को समझने में सक्षम हो पाना उस करीबी या हमारे प्रिय के प्रति हमारी संवेदनशीलता या केयर की भावना को जताने में मददगार होता है, सही बॉडी लैंग्वेज को पहचानकर हम अपने करीबी की मन में चल रही उथल उथल को भी बिना सुने भी पहचान सकते हैं। प्रोफेशनल के साथ साथ पर्सनल लाइफ में भी यह आपके आस पास के लोगों की भावनाओं को समझने में आपकी मदद करता है।

बॉडी लैंग्वेज की सही पहचान करना सीखने के पहले हम कुछ बेसिक नियमों पर चर्चा करने जा रहे हैं। किसी के मस्तिष्क में छिपी बात को समझ या पढ़ पाना एक उलझन भरा काम है। गलत पूर्वानुमान किसी की मदद करने की बजाय उसे हानि या दुख भी पहुंचा सकता है, तो किसी की भी शारीरिक मुद्रा या हाव भाव को पढ़ने के पहले बहुत सतर्क रहें और बड़ी सावधानी के साथ किसी को बॉडी लैंग्वेज को पढ़ें।

क्योंकि शारीरिक भाषा में कोई शब्द नहीं बोले जाते और इसमें अवचेतन मन के द्वारा चल रही शारीरिक क्रियाओं को पढ़कर समझने की कोशिश करनी पड़ती है। किसी भी व्यक्ति की बॉडी लैंग्वेज को पगने के पहले इन नियमों का पालन करना ज़रूरी है।

बॉडी लैंग्वेज पढ़ने का पहला नियम – सम्पूर्ण पर दें ध्यान (The first rule – Consider the whole picture)

जब भी आप किसी के बॉडी लैंग्वेज के बारे में कल्पना करें तो उसके पूरे बाहरी व्यक्तित्व और हरकतों पर नज़र डालें। जब वह व्यक्ति कुछ अलग तरह के संकेत दे रहा हो तो इसका मतलब यह हो सकता है कि, वह अपने आप को विशिष्ट समझ कर ऐसा कर रहा हो। या यह भी हो सकता है कि वह अपनी भावनाओं के प्रति कुछ ज़्यादा ही लापरवाह हो या किसी और उलझन में हो, इसीलिए किसी भी व्यक्ति की बॉडी लेंग्वेज पढ़ने के पहले उसके पूरे हाव भाव और भंगिमा की अच्छी तरह गणना कर लें।

जब भी आप किसी की शारीरिक भाषा को पढ़ने की कोशिश कर रहे हों तो उसके आस पास के समाज और संस्कृति पर भी पूरी नज़र रखें। किसी के भी शारीरिक भाषा के प्रदर्शन में इनका विशेष योगदान होता है। यह प्रभाव व्यक्ति के बाहरी व्यक्तित्व और भाषाई शैली पर भी पड़ता है। यह सभी जानकारियाँ आसानी से उपलब्ध नहीं होती लेकिन आप इसे व्यक्तियों के शारीरिक हाव भाव पहचानने की क्रिया और अनुभव के आधार पर पा सकते हैं। इसीलिए किसी के भी शारीरिक भाषा को जानने के लिए केवल ऊपरी जानकारी के आधार पर ही अवलोकन न करें और पूरी पृष्ठभूमि को जान लें।

दूसरा नियम – परस्पर भेद (The second rule – Consider individual differences)

बॉडी लैंग्वेज जानने का दूसरा महत्वपूर्ण नियम यह है कि आपको इस बात का सटीक आभास होना चाहिए कि प्रत्येक व्यक्ति दूसरे से भिन्न होता है, हर किसी कि अपनी पृष्ठभूमि और संस्कृति आदि होती है जिसके आधार पर वह व्यवहार करता है। एक व्यक्ति कि शारीरिक भाषा पढ़ लेने के बाद दूसरे के बारे में पूरी जानकारी शुरुआती बिन्दु से एकत्र करें। यह सभी के लिए अलग अलग करना अनिवार्य है, ज़रूरी नहीं कि जो नियम एक पर लागू हुआ वही सब पर हो।

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यह बात अपने दिमाग में रखना बहुत ज़रूरी है की कुछ लोग पूरी तरह ईमानदार नहीं होते और अपनी भावनाओं को छिपाने में बड़े ही माहिर होते हैं, ऐसे लोग अपनी शारीरिक भाषा को भी अच्छी तरह लोगों से छिपा कर रख सकने में सफल हो जाते हैं। तो ऐसे लोगों के लिए विशेष रूप से सतर्क रहकर आपको अपना काम करने की आवश्यकता है ताकि वो अपने झूठे शारीरिक हाव भावव से आपका भरोसा न जीत पाएँ और आप उनकी अनकही बातों को भी समझ जाएँ।

उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति बात करते हुये आपसे नज़रें नहीं मिला रहा है तो समझ लीजिये कि उसके जुबान में कुछ और दिमाग में कुछ और है। इसके अलावा बात करते वक़्त उसकी फाल्के बार बार झपक रही हों, होंठ और जुबान सूख रही और हथेली पसीने से भीगी हो तो यह निश्चित है कि सामने वाला व्यक्ति आपसे झूठ बोल रहा है। यह कुछ संकेत हैं जो साफ तौर पर बताते हैं कि सामने खड़ा व्यक्ति आपके प्रति ईमानदार नहीं है और जो भी बोल रहा है वह झूठ है। यह सभी चिंता और आंतरिक भय की निशानियाँ हैं।

तीसरा नियम – सांस्कृतिक परिवर्तनों का ध्यान रखें (The third rule – Consider cultural differences)

बॉडी लैंग्वेज पढ़ते समय यह भी ध्यान में रखें कि, सांस्कृतिक भेदभाव या भिन्नता भी इस पर विशेष प्रभाव डालती है। हो सकता है कि जो आपकी संस्कृति के लिए सामान्य हो वही अन्य दूसरे किसी समाज के लोगों के लिए बहुत ही नई और अलग बात हो। किसी भी समाज और संस्कृति का गहरा प्रभाव हमारे आचरण और शारीरिक भाषा पर भी पड़ता है। जैसे कुछ जगहों में हाथ से छूकर बात करने का मतलब एक दोस्तीनुमा व्यवहार का प्रदर्शन होता है वहीं कुछ जगह यह बहुत खास माना जाता है और इस व्यवहार को गंभीर भी माना जाता है, इसी प्रकार फ़िनलैंड में यह संस्कृति प्रचलित है की आपस में बातचीत करने के दौरान आपको अपनी अखें मिलाये रखनी पड़ती है जो विश्वस्त होने का प्रतीक है परंतु दूसरी तरफ जापान में यही व्यवहार गुस्सा दिखाने का एक संकेत है जिसे अच्छा नहीं माना जाता।

तो जब भी आपको अमौखिक संकेत मिलें तो अपने दिमाग में इस स्थान या समाज विशेष के लोगों के बारे में पूरी पृष्ठभूमि एकत्र करने के बाद ही अपना अवलोकन सामने रखें।

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