How to treat depression after pregnancy / delivery – गर्भावस्था के बाद डिप्रेशन का इलाज कैसे करें

डिलीवरी या गर्भावस्था के बाद नयी माँ का डिप्रेशन (depression) में जाना सामान्य सी बात है। दुखी महसूस करना, अपने आप को व्यर्थ समझना और समय समय पर रोना, यह सब डिलीवरी के बाद हॉर्मोन की मात्रा शरीर में बदलने के कारण सामान्य है, इस बदलाव को बेबी ब्लूस (baby blues) कहा जाता है। डिप्रेशन के लक्षण एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति पर निर्भर होते है, यह बेबी ब्लूस भी हो सकता है या कोई गंभीर डिप्रेशन का कारण भी बन सकता है। कभी कभी तो नयी माँ प्रसवोत्तर स्य्कोसिस (postpartum psychosis) का शिकार भी बन सकती है जिनके लक्षण बहुत ही गंभीर होते है। अच्छी बात यह है की यह सब प्रकार के डिप्रेशन का इलाज दवा और परामर्श (counselling) से हो सकता है। बेहतर होगा की डिप्रेशन का इलाज शुरुआत लक्षणों से ही कर लें ना की उनके बढ़ने का इंतज़ार कर अपनी सेहत से खेले।

डिलीवरी के बाद डिप्रेशन का क्या कारण हो सकता है? (What causes depression after delivery?)

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में 2 हॉर्मोन जैसे एस्ट्रोजन (estrogen) और प्रोजेस्ट्रोन (progestrone) की मात्रा ज्यादा होती है और डिलीवरी के बाद इनकी मात्रा अचानक से गिर जाती है जो बच्चे के जनम के 3 दिन बाद अपने आप संतुलित हो जाती है। यह अचानक से होरमोन की गिरावट नयी माँ के शरीर में हार्मोनल संतुलन को असंतुलित कर देते है जिस से डिप्रेशन बनता है। लेकिन कितनी मात्रा में इन 2 हॉर्मोन की गिरावट, डिप्रेशन को बनाती है इसका सही से अनुमान नहीं लगाया जा रहा है। पोस्टपार्टम डिप्रेशन बच्चे के जनम के 4 हफ़्तों में इन 3, बेबी ब्लूस, डिप्रेशन या स्य्कोसिस (psychosis) में से किसी एक के कारण बन सकता है।

ज्यादातर नयी माँ बेबी ब्लूस को एक या दुसरे प्रकार में अनुभव करती है लेकिन दस में से कोई एक महिला डिप्रेशन का शिकार बनती है। हज़ार में से कोई एक महिला प्रसवोत्तर स्य्कोसिस (postpartum psychosis) से गुज़रती है। प्रसवोत्तर स्य्कोसिस (postpartum psychosis) बहुत ही गंभीर समस्या है जिसमे आत्महत्या (suicide) या शिशु हत्या की आशंका ज्यादा होती है। यह बच्चे के जनम के 48 घंटो के या 2 हफ्तों के अंतर्गत में अचानक से हो जाता है।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षण (The symptoms of postpartum depression)

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नयी माँ नीचे दिए गए लक्षणों को मामूली या गंभीर अवस्था में अनुभव कर सकती है। पोस्टपार्टम डिप्रेशन के सामान्य लक्षण है:

  • नींद ना आना
  • कम भूख लगना
  • अपने बच्चे और पार्टनर से दूर होना
  • गंभीर मिजाज़ (mood swings)
  • लगातार दुखी रहना
  • चिडचिडाहट या बेचैनी
  • बार बार रोना
  • अधिक चिंता
  • डर
  • अपराधी या नाकाबिल महसूस करना
  • आत्महत्या का विचार करना
  • निराशा
  • अधिक थकान

अगर यह लक्षण 1 से 2 दिन से ज्यादा रहे तो इन्हें सामान्य सा बेबी ब्लूस समझ कर टालना मत बल्कि इनका तुरुन्त इलाज करना शुरू करें।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन के खतरनाक कारकों (The risk factors of postpartum depression – delivery ke baad ka depression)

सभी नयी माँ पोस्टपार्टम डिप्रेशन का शिकार नहीं होती बल्कि इनके पीछे कुछ कारकों (factors) होते है, जिनसे यह स्तिथि बच्चे के जनम के बाद उत्पन्न होने के अवसर ज्यादा होते है। सबसे ज्यादा सामान्य खतरनाक काराकों में से कुछ नीचे दिए गए है,

  • डिप्रेशन का इतिहास गर्भावस्था से पहले या बाद
  • परिवार में डिप्रेशन का इतिहास
  • डिलीवरी के समय उम्र, जवान महिलाए बड़ी उम्र की महिलाओं से पोस्टपार्टम डिप्रेशन या पोस्टपार्टम स्य्कोसिस का शिकार ज्यादा जल्दी बनती है
  • गर्भावस्था को लेकर आपके विचार और क्या उनको परिवार में स्वीकार किया जाता है या नहीं
  • विवाहिक जीवन में कलह या परिवार में कोई समस्या
  • समाज और परिवार से कम सहायता

अगर ऊपर दिए गए में से कुछ लक्षण आप में है तो ज़रूरी नहीं की आपको पोस्टपार्टम डिप्रेशन है लेकिन यह लक्षणों से आपको यह समस्या होने के जोखिम ज्यादा है। अगर इन में से कोई भी लक्षण आपके साथ हो रहे है तो बिना देरी किये अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करें। ताकि डॉक्टर आवश्यक परिमाण कर पाए जिन से आपकी बेबी ब्लूस की अवस्था पोस्टपार्टम डिप्रेशन में ना बदल जाए।

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पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इलाज (Treating postpartum depression)

अगर डिलीवरी के 1 से 3 दिन के अंतरिक्त आपको पोस्टपार्टम डिप्रेशन हो गया है और आप अब भी अस्पताल में है तो तुरुन्त अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करें और इसका इलाज करवा ले। वैसे भी एंटी डिप्रेसंट नयी माँ के लिए हानिकारक है वो भी जब वे अपने बच्चे को स्तन से दूध पिलाती हो। इस दौरान के लिए कुछ विशेष दवा है जिनका प्रयोग किया जा सकता है लेकिन बेहतर होगा की पहले डॉक्टर से इस बारे में विस्तार से परामर्श ले लें।

पर ज्यादातर पोस्टपार्टम डिप्रेशन डिलीवरी के 2 से 3 दिन के बाद होता है जब आप अस्पताल से जा चुकी है और अपने घर पर लौट चुकी हो। इस डिप्रेशन के इलाज के लिए आप नीचे दिए गए सुझाव को अपना सकती है, अगर कोई सुधार नहीं हो रहा तो आप अपने डॉक्टर को कॉल कर उनकी सहायता ले सकती है। इन सुझाव से आप गर्भावस्था के बाद के डिप्रेशन का इलाज कर सकती है।

प्रसव के बाद की देखभाल में पर्याप्त रूप से नींद ले (Sleep adequately)

डिलीवरी के बाद भी माँ का शरीर सुधार की अवस्था (recovery phase) में रहता है और केवल बच्चे को ही नहीं बल्कि माँ को भी पर्याप्त रूप से नींद की आवश्यकता होती है। सही से सोने से और आराम से, माँ का स्वास्थय सुधरता है और साथ ही इस से डिप्रेशन के लक्षण जैसे चिडचिडाहट, मूड स्विंग्स, दुःख और अन्य का इलाज हो सकता है। घर में कुछ भी हो, उस पर कम ध्यान दे कर अपने आप को पर्याप्त रूप से नींद दे क्योंकि इस कारण आप अपने शरीर और नसों को आराम देती है और साथ ही मान्सिक समस्या से भी दूर रहती है।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इलाज  के लिए व्यायाम करें (Do exercises)

सभी प्रकार का व्यायाम माँ के लिए सही नहीं है जिस ने कुछ दिनों पहले ही बच्चे को जनम दिया हो लेकिन कुछ व्यायाम जैसे फ्रीहैण्ड एक्सरसाईस (freehand excercise) और बिना अपने आप को थकावट महसूस कराए धीरे से दौड़ना या चलना का उपयोग कर सकते है। व्यायाम से ब्रेन में सेरोटोनिन बनता है। सेरोटोनिन (serotonin) मूड को बेहतर बनाता है। इसलिए रोजाना व्यायाम करने से आप डिलीवरी के बाद उत्पन्न हुए डिप्रेशन का इलाज कर सकती है और अपने शरीर में अच्छा महसूस करवाने वाले हॉर्मोन को बढ़ा सकती है।

अपने आहार पर ध्यान दे (Focus on what you eat)

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आप क्या खाते है, आप वैसा ही महसूस करते है। इसलिए इस दौरान अपने आहार पर ध्यान दे। ज्यादा हरी सब्जियाँ, ताज़े फल और अनाज को अपने आहार में मिलाये और अपने मूड को बेहतर बनाए। इन खानों में विटामिन और मिनरल भरे पड़े है जिस से ब्रेन में मौजूद सेरोटोनिन को बढ़ाया जा सकता है। ओमेगा 3 फैटी एसिड (omega 3 fatty acid) भी मूड को बेहतर बनाने के लिए माना जाता है इसलिए अच्छा होगा की आप अपने आहार में फैटी फिश, नट्स और बीज का उपयोग करें और अपने आप को डिप्रेशन के दौर से बहार निकालें।

इस दौरान शराब और कैफीन (caffeine) को अपने आप से दूर रखें क्योंकि इन से आपका मूड खराब हो सकता है और आप डिप्रेशन की ओर जा सकते है। और यह भी ध्यान रखें की आपके रोजाना के आहार में नियमित रूप से प्रोटीन हो क्योंकि कम प्रोटीन डिप्रेशन को बढ़ा सकता है।

अपने रिश्तों को समय दे (Give time to your relationships hai postpartum depression ka ilaj)

घर में नया सदस्य आने से आपके जीवन की नयी राह शुरू होती है और इस दौरान आवश्यक है की आप अपने पार्टनर के साथ रिश्ते को महत्व दे ना की उन्हें टालें। अपने साथ ऐसे व्यक्ति का होना जिस के साथ आप जिमेदारियों को बाँट सकें और जो आपकी समस्या को समझ सकें, इस से आप डिप्रेशन के दौर से आसानी से निकल सकती है। इसलिए बेहतर होगा की अपने पार्टनर, परिवार और दोस्तों को समय दे जिस से आप डिलीवरी के बाद उत्पन्न हुए डिप्रेशन का इलाज कर सकती है।

गर्भावस्था के बाद देखभाल, अपने आप को संतुष्ट रखें (Pamper yourself)

नए जन्मे बच्चे और शरीर जो अभी भी सुधार में है, इन कारण यह मुमकिन नहीं की आप शौपिंग पर जा सकें और अपने मूड को बेहतर बना सकें लेकिन चिंतित ना होए क्योंकि आप अपने मूड को घर बैठे बेहतर बना सकती है। अपने मन पसंद गाने को सुने, लम्बे समय तक आरामदायक बबल बाथ (bubble bath) ले, वो सब करें जिनसे आपको ख़ुशी मिलती हो जैसे किताब पढ़ना या पौधों का ख़याल रखना, इन सब से आप अपने मूड को बेहतर बना सकती है।

प्रसव के बाद डिप्रेशन, अपनी समस्या को बांटे (Share your problems)

अगर आप डिलीवरी के बाद डिप्रेशन से गुज़र रही है तो यह महतवपूर्ण होगा की आप अपनी समस्या को किसी नज़दीकी व्यक्ति से बांटे। आप अपने पार्टनर, दोस्त या माँ या बहन से बात कर सकती है। अपनी समस्या को किसी ख़ास से बांटने से आप अच्छा महसूस कर सकेंगी और ज़रुरत पड़ने पर सहायता भी प्राप्त कर सकेंगी। इसलिए अकेले समस्या से गुजरने से अच्छा होगा की आप इसे किसी की साथ बाँट ले। यह सब से आप बेहतर महसूस करना शुरू कर देंगी।

गर्भावस्था के दौरान कितनी बार डॉक्टर से जांच करवाएं?

कब नयी माँ को पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लिए मेडिकल की सहायता लेनी चाहिए (When a new mother should seek medical help for postpartum depression)

यह बहुत महत्वपूर्ण सुझाव है क्योंकि ज्यादातर नयी माँ सोचती है की समय के साथ डिप्रेशन दूर हो जाएगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं होगा। जब तक आपको ना पता हो की कब आपको मेडिकल की सहायता से इलाज करना चाहिए, तब तक डिप्रेशन को अपने आप सुधारना सही नहीं है बल्कि इस से समस्या गंभीर हो सकती है।

अगर आपके डिप्रेशन के लक्षण 2 हफ्तों से ज्यादा तक है तो आपको समय व्यर्थ किये बिना डॉक्टर के पास जाना चाहिए। अगर नयी माँ किसी भी प्रकार से अपने जीवन को संभाल नहीं पा रही है, अपनी रोज़मरा जिंदगी की देखभाल नहीं कर पा रही है तो सही यह होगा की उनका जल्द से जल्द मेडिकल सहायता द्वारा इलाज करवाया जाए। ज्यादा डरना, घबराना, चिंतित हो उठाना और मरने के बारे में सोचना या बच्चे को नुक्सान पहुंचाना, यह सब लक्षण देखते ही उन्हें तुरुन्त डॉक्टर के पास ले जाए।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन के उपलब्ध इलाज (Treatments available for postpartum depression)

ज्यादातर 3 प्रकार के इलाज का सुझाव दिया जाता है जब पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इलाज किया जा रहा हो, यह ज्यादातर अवस्था पर निर्भर रहते है। स्य्कोथेरेपी (psychotherapy), दवा या कोई हार्मोनल थेरेपी (hormonal therapy) का सुझाव दिया जाता है। इन में से सही प्रकार की थेरेपी का सुझाव डॉक्टर ही बता सकते है और चाहे तो एक से ज्यादा थेरेपी का भी सुझाव दे सकते है ताकि पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इलाज जल्द से जल्द हो सकें।

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