Bleeding during pregnancy – गर्भावस्था के दौरान खून निकलना और उनके कारण

सिर्फ अपने ड्रेस के पिछले भाग में खून के धब्बे लगे देखना किसी भी गर्भवती महिला के लिए कोई चिंता की बात नहीं है। बल्कि गर्भावस्था (garbhavastha) के दौरान कुछ और बातें हैं जिनका ख्याल रखना अनिवार्य होता है। चिंता करना अथवा डर जाना किसी भी गर्भवती महिला के लिए मुश्किलें ही बढ़ाता है। गर्भावस्था (garbhavastha) के सप्ताह, गर्भावस्था के दौरान खून निकलने के कई कारण हो सकते हैं।(light bleeding during pregnancy)

अमेरिकन प्रेगनेंसी एसोसिएशन के अनुसार, सभी गर्भवती महिलाओं में से 20 से 30 प्रतिशत महिलाओं को गर्भ के प्रारंभिक काल में रक्तप्रवाह सामान्य होता है और उनमे से ज़्यादातर महिलाएं स्वस्थ प्रसव का अनुभव करती हैं।

गर्भावस्था के दौरान सावधानियां में गर्भावस्था के पूर्व काल में रक्तप्रवाह (Bleeding during implantation)

कुछ महिलाएं अपने गर्भावस्था के प्रारंभिक काल में गुलाबी अथवा भूरे रंग के रक्तप्रवाह (brown spotting during pregnancy 1st trimester) को अनुभव करतीं हैं। यह प्रक्रिया प्रसव ग्रहण करने के 6 से 12 दिनों के भीतर होता है। इस प्रक्रिया (रक्तप्रवाह) को अंडे के रोपण के बाद का रक्तप्रवाह जाना जाता है। इसके पीछे विज्ञान का तथ्य यह है कि जब माँ के बच्चेदानी में अंडा प्रवेश करता है तब रक्त कोष्ठक टूट जाता है और रक्त प्रवाहित होने लगता है। यह रक्त प्रवाह प्रायः गर्भवती महिलाओं को कुछ घंटों के लिए ही होता है पर कुछ मामलों में यह प्रवाह कुछ दिनों तक भी चल सकता है।

गर्भाशय-ग्रीवा में खुजली होना (Irritation in cervix)

गर्भवती महिलाओं को नींद लाने में सहायता करने के लिए कुछ तरीके

गर्भाशय-ग्रीवा महिलाओं के गुप्त अंग का एक ज़रूरी अंग होता है जो कि प्रभावित होता है जब भी गर्भवती महिलाओं के गर्भ में किसी प्रकार की गड़बड़ या जटिलता होती है। गर्भ के समय गर्भाशय-ग्रीवा में रक्त का प्रवाह तेज़ हो जाता है, क्यूंकि रक्त का प्रवाह तेज़ होता है तो गर्भाशय-ग्रीवा उस समय अधिक संवेदनशील होती है। यह भी संभव है कि कई बार खुजली करते वक्त गर्भवती महिला को उभार का पूर्णतः एहसास होता है तथा वो उभार को साफ़ तौर पर देख सकती हैं। रक्त प्रवाह किसी भी औषधीय कारण अथवा सम्भोग के कारण भी हो सकता है।

प्रेग्‍नेंसी केयर में अस्थानिक गर्भावस्था (Ectopic pregnancy)

कुछ महिलाओं में अस्थानिक गर्भ धारण करना बहुत आम बात है। यह तब होता है जब अंडा महिला के बच्चेदानी की जगह कहीं और रोपित हो जाता है। ऐसे समय में संभव है कि अंडा महिला के गर्भाशय नाल में रोपित हुआ हो। ऐसा होना आम नहीं है तथा संभवतः गर्भवती को रक्त प्रवाह का सामना करना पड़ सकता है। संभव है कि गर्भवती महिला को मरोड़ तथा पेट के निचले हिस्से में असहनीय दर्द का अनुभव करना पड़ सकता है। अस्थानिक गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण होता है। अगर डॉक्टर ऐसे गर्भावस्था के लक्षण देखता है तो उनके पास इस गर्भ को निकलने के अलावा और कोई उपाय नहीं होता। तब उस गर्भवती महिला के पास गर्भपात के अलावा और कोई विकल्प नहीं होता है।

प्रेग्‍नेंसी केयर में गर्भनाल में दिक्कत (Problems with placenta)

महिलाओं को दूसरे अथवा तीसरे गर्भ के समय गर्भनाल में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे समय में गर्भनाल, गर्भाशय से अलग हो जाती है। ऐसे समय में महिला को पेट में मरोड़ और रक्त प्रवाह (heavy bleeding during pregnancy) हो सकता है। यह आमतौर पर गर्भ के बारहवें हफ्ते में अनुभव किया जाता है। क्यूंकि गर्भनाल आमतौर पर महिलाओं की गर्भाशय- ग्रीवा का अधिकतर अथवा आधा भाग घेरता है, गर्भनाल में दिक्कत किसी भी महिला जो कि गर्भ की आशा करतीं हैं के लिए काफी खतरनाक तथा भयानक साबित हो सकता है।

गर्भावस्था के दौरान सावधानियां (Garbhavastha me savdhaniya) – समय से पहले लेबर (Premature labor)

गर्भावस्था के दौरान कुछ स्वास्थ्य समस्याए

समय से पहले लेबर की समस्या तब उत्पन्न होती है, जब आपका शरीर समय से पहले ही बच्चे को जन्म देने की प्रक्रिया को शुरू कर देता है। यह समस्या आमतौर पर 20वें हफ्ते के बाद, या तय समयसीमा से 3 हफ्ते पहले उत्पन्न हो सकती है। शोधों से यह पता चला है कि ऐसा एक उपचार मौजूद है, जिसके अंतर्गत प्रोजेस्टेरोन का इंजेक्शन (progesterone injection) लेने से गर्भाशय की मांसपेशियों को काफी आराम प्राप्त होता है। एक और उपचार ऐसा है जिसे इंट्रावेनस विथ मैग्नीशियम (intravenous with magnesium) के नाम से जाना जाता है। यह भी गर्भाशय की मांसपेशियों को काफी मात्रा में सुकून प्रदान करता है। इस उपचार के लिए आप टर्बुटेलिन (terbutaline) नामक दवाई का भी प्रयोग कर सकती हैं।

गर्भाशय ग्रीवा के पोलिप्स (Cervical polyps)

गर्भाशय ग्रीवा के पोलिप्स एक ऐसी समस्या होती है, जो आमतौर पर पेल्विक (pelvic) की परीक्षा के दौरान सामने आती है। यह एक तरह की बढ़त होती है, जो एस्ट्रोजन (estrogen) के स्तर में बढ़ोत्तरी होने, रक्त की धमनियों के बंद हो जाने और गर्भाशय ग्रीवा में सूजन या जलन (pregnancy me hone wali problem) हो जाने की वजह से उत्पन्न होती है। ये पोलिप्स एक सामान्य तरह की प्रक्रिया के द्वारा शरीर से निकाली जा सकती है, और यह बच्चे के लिए किसी भी रूप में हानिकारक सिद्ध नहीं होती है। ये गर्भावस्था के शुरूआती दौर में खून निकलने का एक कारण है और कई बार पहली तिमाही (first trimester) के बाद गर्भपात हो जाने की वजह से भी होता है।

प्रेग्नेंसी में प्रॉब्लम है गर्भपात (Miscarriage)

गर्भपात गर्भावस्था के शुरूआती दौर में खून निकलने का सबसे मुख्य कारण साबित होता है। यह मुख्यतः गर्भावस्था की पहली तिमाही में होता है और इसका मुख्य कारण भ्रूण में क्रोमोजोम (chromosome) से जुड़ी किसी प्रकार की असामान्यता का होना होता है। आनुवांशिक कमियों (genetic abnormalities), संक्रमण, दवाइयों, हार्मोनल (hormonal) प्रभावों, भ्रूण के स्वरुप में गड़बड़ी तथा प्रतिरोधक असामान्यताओं की वजह से भी गर्भपात की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इस समस्या के सबसे अच्छे समाधानों में मुख्य हैं खून निकलने के समय पूरी तरह आराम करना, सेक्स की प्रक्रिया में सम्मिलित न होना और अपने गुप्तांग से निकलने वाले द्रव्य की जांच करना। इसके मुख्य लक्षण हैं लगातार खून निकलना, दर्द में वृद्धि होना, बुखार, कमजोरी तथा चक्कर आना।

दूसरी तिमाही यानि गर्भावस्था का चौथा महीना

गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय ग्रीवा को क्षति पहुंचना (Uterine rupture)

गर्भाशय नाल को चोट या क्षति पहुँचने का मुख्य कारण शरीर में पहले हुई किसी शल्य क्रिया के फलस्वरूप मांसपेशियों में कमजोरी आ जाना होता है। इसके मुख्य कारण हैं शरीर के सी सेक्शन या फाइबरोइड (C-section or fibroid) को शल्य क्रिया द्वारा निकाल देने की प्रक्रिया को अंजाम देना। यह प्रभावित भाग गर्भावस्था के समय के दौरान टूट या फट सकता है, और इससे बच्चा माँ के पेट में ज़बरदस्ती जा सकता है। ऐसी हालत में यही अच्छा होगा कि तुरंत ही सी सेक्शन की शल्य क्रिया को अंजाम दिया जाए, क्योंकि यह माँ और बच्चे दोनों की जान बचाने में सक्षम होता है।

प्रेग्नेंसी में प्रॉब्लम, मोलर गर्भावस्था (Molar pregnancy)

मोलर गर्भावस्था एक काफी कम सुनी जाने वाली समस्या है। यह तब सामने आती है, जब एक फर्टिलाइजड अंडा (fertilized egg) बढ़कर बच्चे के भ्रूण की जगह एक मोल (mole) में परिणत हो जाता है। भले ही यह गर्भावस्था सामान्य नहीं मानी जा सकती, पर फिर भी इस स्थिति में आपको सामान्य गर्भावस्था के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। चूषण (suction) या खुरचने (curettage) की प्रक्रिया की मदद से इस मोल को शरीर से अलग किया जा सकता है।

गर्भावस्था के दौरान वासा प्रेविया (Vasa previa)

यह एक काफी अजीब और अनूठी स्थिति होती है, जिसके अंतर्गत अम्बिलिकल कॉर्ड (umbilical cord) या प्लेसेंटा (placenta) में स्थित एक बढ़ते बच्चे के रक्त की धमनियां गर्भनाल के पास से गुज़रती हैं। यह स्थिति काफी खतरनाक और भयावह होती है, क्योंकि रक्त की यह धमनियां फट भी सकती हैं, जिससे गर्भ में पल रहे बच्चे का काफी खून निकल सकता है और उसे ऑक्सीजन (oxygen) की भी काफी कमी महसूस होने लगेगी। रक्त की इन कोशिकाओं को काफी नुकसान पहुँच सकता है, जिसके फलस्वरूप हेमरेज (hemorrhage) भी हो सकता है। इस समय माँ अगर लेबर में चली जाए तो उसके लिए यही अच्छा होगा कि बच्चे का जन्म सिजेरियन (cesarean) प्रक्रिया के माध्यम से ही हो।

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