Tips in hindi – Body changes in first trimester – पहली तिमाही में शरीर में आने वाले परिवर्तन

आपकी गर्भावस्था के प्रमाण के बाद आपके मूत्र की जांच होते ही आपकी पहली तिमाही शुरू हो जाती है।इस स्थिति में महिलाएं उलटी करने के भाव तथा अन्य तकलीफों से ग्रस्त रहती हैं। पहली तिमाही ३ महीने की होती है और यह सबसे खतरे वाला समय रहता है।

यह वह समय है जब गर्भपात की संभावना सबसे ज़्यादा रहती है। मासिक धर्म के छूटने के साथ ही काफी तेज़ी से गर्भावस्था का प्रमाण मिलता है। महिलाएं इस समय अपने पैरों एवं शरीर के अन्य भागों में ऐंठन का अनुभव कर सकती हैं। कई महिलाएं इस स्थिति में रक्तपात का भी अनुभव करती हैं।

गर्भवती होने के बाद शरीर पर दिखने वाले प्रभाव (Some visible changes in body)

पहली तिमाही में आपका शरीर काफी परिवर्तनों से गुज़रता है। आप काफी थकान का अनुभाव कर सकती हैं जबकि आपका शरीर गर्भावस्था के बाद आए परिवर्तनों से सामंजस्य बिठाने का प्रयास करता है। पहले कुछ हफ़्तों में थकान कुछ ज़्यादा रहती है। यह वह समय होता है जब एक गर्भवती महिला को सुबह और रात में काफी ज़्यादा नींद की आवश्यकता होती है। इस तिमाही में आपने जो शक्ति गंवाई है वह अगली तिमाही में वापस आ जाती है।

तीसरी तिमाही के दौरान शरीर में आए परिवर्तन

गर्भावस्था की पहली तिमाही – भावनात्मक लक्षण (Emotional symptoms)

इस तिमाही में महिलाएं कई तरह के भावनात्मक परिवर्तनों का अनुभव करती हैं। यह वह समय है जब उनके स्वभाव में भी परिवर्तन देखा जाता है। इस समय पतियों को अपनी पत्नियों का ज़्यादा ख्याल रखने की आवश्यकता होती है। अगर आपकी बीवी को आधी रात को भी कुछ खाने की इच्छा हुई तो आपको उसकी इच्छा पूरी करनी पड़ती है। आपको समझना पड़ेगा कि ये बातें आपकी बीवी नहीं बल्कि अजन्मा बच्चा बोल रहा है जिसे इन चीज़ों की ज़रुरत है। सुबह की बीमारी पहली तिमाही में महिलाओं द्वारा सहन किये गए परिवर्तनों में से एक सुबह की बीमारी भी है। १० में से ८ गर्भवती महिलाएं इस समय चक्कर और उलटी आने की समस्या का शिकार होती हैं। कुछ महिलाएं खाली पेट में ज़्यादा बीमार महसूस करती हैं।

पहली तिमाही के परिवर्तन – मॉर्निंग सिकनेस (Morning sickness)

मॉर्निंग सिकनेस उन शरीर में होने वाले उन कई परिवर्तनों में से एक है, जिसका सामना पहली तिमाही के दौरान एक गर्भवती महिला को करना पड़ता है। हर 10 में से 8 गर्भवती महिलाएं अपनी गर्भावस्था की पहली तिमाही में मतली (nausea) और उलटी की समस्या पेश आने का शिकार होती हैं। कई महिलाएं ऐसी भी होती हैं, जिनका पेट जब भी खाली रहता है, तो वे काफी बीमार अनुभव करने लगती हैं।

गर्भावस्था की पहली तिमाही – कब्ज़ (Constipation – pregnancy me dekhbhal)

क्या गर्भावस्था के दौरान रुट कैनाल पद्दति का प्रयोग सही ?

पहली तिमाही में महिलाओं में होने वाले परिवर्तनों में से एक कब्ज़ भी है। क्योंकि गर्भधारण और भ्रूण में एक नए आगमन की वजह से हाज़मे की प्रणाली ठीक से काम नहीं करती अतः इस दौरान कब्ज़ की समस्या हो सकती है। ज़्यादा आयरन का सेवन करने पर भी कब्ज़ की समस्या हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार हर गर्भवती महिला के शरीर में पर्याप्त मात्रा में आयरन और विटामिन होना चाहिए। शरीर में कब्ज़ की वजह से ही आयरन जम जाता है।

गर्भवती होने के बाद त्वचा के टोन में परिवर्तन (Changes in skin tone)

गर्भावस्था के पहले 3 महीनों के दौरान महिलाओं की त्वचा के टोन में काफी परिवर्तन आता है। आप काफी खूबसूरत लगेंगी और आपके चेहरे पर एक चमक आएगी। क्योंकि इस दौरान त्वचा में रक्त संचार अधिक होता है, अतः चेहरा दमकता हुआ सा प्रतीत होता है। लोग इस गर्भावस्था की चमक कहते हैं। इस समय गर्भावस्था के होर्मोन चेहरे पर अतिरिक्त तेल का संचार करते हैं। इस दौरान तेल अधिक होने से एक्ने की समस्या भी होती है।

स्तनों के आकार में परिवर्तन (Changes in breast formation)

इस समय स्तनों का आकार भी बदलता है क्योंकि शरीर के हॉर्मोन्स महिलाओं को स्तनपान के लिए तैयार कर रहे होते हैं । इन लक्षणों के साथ महिलाएं स्तनों का नरम होना एवं उनमें सूजन आना महसूस कर सकती हैं । महिलाओं के स्तन के आसपास इस स्थिति में छोटी सूजन होना काफी सामान्य बात है । आप यह भी देख सकती हैं कि गर्भावस्था के समय महिलाओं के स्तन सामान्य से बड़े हो जाते हैं।

गर्भ निरोध – परिवार नियोजन के उपाय

गर्भवती महिला की देखभाल – शिराओं का दिखना (Visibility of veins)

यह लक्षण अपनी पहली तिमाही में प्रवेश करने वाली स्त्रियों के लिए काफी चौंकाने वाला होता है ।वे गर्भावस्था के समय अपने स्तनों,पेट एवं शरीर के अन्य भागों में नीले रंग की शिराएं आराम से देख सकती हैं । कुछ महिलाएं इससे भयभीत हो जाती हैं पर इस स्थिति में शरीर के मध्य भाग से कई शिराओं का उत्पन्न होना आम बात है ।

योनि में परिवर्तन (Vaginal changes – garbhavastha ki dekhbhal)

आप पाएंगी किआपके योनि कि रेखाएं कम संवेदनशील और मोटी हो गयी हैं। पहली तिमाही में महिलाओं कि योनि से एक पतला और सफ़ेद द्रव्य का निकलना भी आम बात है ।इस समय आपकी योनि से हल्का रक्त भी निकल सकता है।

पहली तिमाही के परिवर्तन – चक्कर आना (Dizziness)

गर्भावस्था की अवस्था में एक महिला के रक्त की नसें काफी चौड़ी हो जाती हैं और उसका रक्त चाप (blood pressure) भी काफी कम हो जाता है। इससे आपको सिर में हल्का दर्द होने या चक्कर आने की समस्या भी हो सकती है। इन समस्याओं से बचने के लिए ज़्यादा लम्बे समय तक खड़ी ना रहें। सोयी या बैठी हुई अवस्था से अगर आप खड़ी होना चाहती हैं, तो इस प्रक्रिया का पालन काफी धीरे धीरे करें। अगर चक्कर आने के समय आप खड़ी अवस्था में हैं तो अपनी बाईं ओर मुंह करके लेटने की कोशिश करें।

गर्भधारण के सबसे अहम लक्षण

पहली तिमाही के परिवर्तन – बार बार मूत्र लगने का भाव (Frequent urination)

आपको बार बार पेशाब करने की आवश्यकता महसूस होगी। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि आपका बढ़ता हुआ गर्भाशय इस स्थिति में आपके मूत्राशय के ऊपर दबाव डालने लगता है। इस समय मूत्राशय पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की वजह से खांसने या छींकने के समय भी आपका मूत्र निकल सकता है।

पहली तिमाही के परिवर्तन – पेट का फूलना (Growing belly)

इस समय आप अपने पेट को काफी फूलता हुआ महसूस कर सकती हैं, क्योंकि आपका बच्चा और आपका गर्भाशय, दोनों ही बड़े हो रहे होते हैं। इस समय आपके कमर का भाग चौड़ा होने लगता है। हालांकि अगर आपका स्वास्थ्य गर्भावस्था के पहले भी अच्छा था, तो इस परिवर्तन का आभास आपको दूसरी तिमाही से पहले नहीं होगा।

गर्भवती महिला की देखभाल – सिर में हल्का दर्द (Light headache)

गर्भावस्था के दौरान आपके शरीर को सामान्य से ज़्यादा काम करना पड़ता है, जिससे कि अतिरिक्त रक्त का उत्पादन हो सके जो आपके गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास के काम आता है। इस प्रक्रिया के फलस्वरूप आप सिर भारी होने या चक्कर आने का अनुभव कर सकती हैं। इन लक्षणों का मुख्य कारण भूख लगना, कमजोरी या तनाव होना आदि हो सकते हैं।

गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण – सीने में जलन (Heartburn)

गर्भावस्था के समय सुन्दर लगने के नुस्खे

गर्भावस्था के हॉर्मोन्स (Pregnancy hormones) शरीर में भोजन तोड़ने की प्रक्रिया को काफी धीमा कर देते हैं। इससे आपके शरीर को पोषक तत्व अपने शरीर में सोखने के लिए ज़्यादा समय मिल जाता है। हमारे शरीर में कुछ मांसपेशियां ऐसी होती हैं जो भोजन को तोड़ने के काम में आपकी सहायता करती हैं। यह एक काफी धीमी और आरामदायक प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत आपके पेट में भोजन लम्बे समय तक रहता है। इस प्रक्रिया के फलस्वरूप आपके सीने में जलन भी हो सकती है।

पहली तिमाही के परिवर्तन -थकान (Fatigue)

थकान का होना पहली तिमाही के दौरान होने वाला सबसे आम लक्षण है। इस समय प्रोजेस्टेरोन (progesterone) हॉर्मोन का स्तर काफी बढ़ जाता है, जिसकी वजह से गर्भावस्था के शुरूआती दौर में आपको काफी नींद भी आ सकती है। इसका एक तरीका यह है कि आप जितना हो सके आराम करने का प्रयास करें। अपनी रोजाना की जीवनशैली में तेज़ चहलकदमी को अवश्य शामिल करें, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान यही आपका एकमात्र व्यायाम होगा।

गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण – भोजन के प्रति रुचि (Craving)

जब आप गर्भावस्था के समय से गुज़र रही होती हैं तो आपको किसी खास प्रकार की गंध के प्रति संवेदनशीलता महसूस करती हैं। किसी भोजन के प्रति रुचि गर्भावस्था के समय काफी सामान्य होती है। इस समय ख़ास भोजनों के प्रति लगाव का मुख्य कारण हार्मोनल परिवर्तन (hormonal changes) हो सकता है। यह स्थिति खासतौर पर पहली तिमाही के दौरान उत्पन्न होती है, क्योंकि इस समय हार्मोनल परिवर्तन सबसे ज़्यादा होते हैं।

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पहली तिमाही के परिवर्तन – वज़न का बढ़ना (Weight gain)

इस समय आपका बच्चा बिलकुल छोटा सा रहता है, जिसका अर्थ यह है कि आपको पहली तिमाही में सिर्फ 3 से 4 किलो की बढ़ोत्तरी ही दर्ज करनी होती है। अगर आप भूख न लगने की समस्या से पीड़ित हैं तो दो किलो वज़न तो आपका यूँ ही कम हो जाएगा। वज़न में सबसे ज़्यादा वृद्धि दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान देखी जाती है, अतः तब तक हल्का और पौष्टिक भोजन करें।

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