How does swine flu effect pregnancy – स्वाइन फ्लू का गर्भावस्था पर प्रभाव

स्वाइन फ्लू का नाम ऐसा इसलिए है क्योंकि यह बीमारी सुअरों को नियमित रूप से प्रभावित करती है। यह लोगों को उन लोगों के संपर्क में आने से होती है जो सुअरों के सीधे संपर्क में आते हैं। यह साँसों की प्रणाली (respiratory system) को प्रभावित करने वाली संक्रामक बीमारी है। हाल ही में फ़ैल रहा स्वाइन फ्लू एक मनुष्य से दुसरे मनुष्य को प्रभावित कर रहा है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण (Symptoms of Swine Flu)

स्वाइन फ्लू का किसी व्यक्ति पर कम असर पड़ सकता है, तो वहीँ अन्य लोगों में यह काफी गंभीर हो सकता है और ज़्यादा गंभीर मामलों में यह मृत्यु का कारण भी बन सकता है। स्वाइन फ्लू के लक्षण आम तरह की फ्लू के जैसे ही हैं। इनमें मुख्य है थकान, तेज़ बुखार, सिर में दर्द, कफ तथा मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द। इससे ग्रसित होने पर उलटी, दस्त और पेट में दर्द भी हो सकता है।

गर्भावस्था और स्वाइन फ्लू (Pregnancy and Swine flu)

गर्भवती महिलाएं किसी भी प्रकार के फ्लू- चाहे वो स्वाइन फ्लू हो या मौसमी फ्लू, से होने वाली बीमारी और इसके फलस्वरूप हो सकने वाली मौत के खतरे में ज़्यादा रहती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के वक़्त जब भ्रूण (fetus) विकसित होता है तो इससे माँ के फेफड़ों की कार्यक्षमता पर काफी असर पड़ता है। इससे निमोनिया होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। गर्भवती महिला की प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव आने से भी उसके फ्लू जैसे इन्फेक्शन से ग्रसित होने की संभावना बढ़ जाती है।

थाइरोइड का महिलाओं की गर्भावस्था पर प्रभाव

गर्भवती महिलाओं तथा उसके साथ रहने वाले अन्य लोगों को भी सुरक्षा के लिए स्वाइन फ्लू का टीका ले लेना चाहिए। अगर इसका टीका उपलब्ध नहीं है तो स्वाइन फ्लू के फैलने की स्थिति में एक गर्भवती महिला को भीड़भाड़ वाली जगह से बचना चाहिए।

गर्भवती महिला का स्वाइन फ्लू के लिए उपचार (Treatment for swine flu in a pregnant woman)

जिस महिला को स्वाइन फ्लू होने का शक हो, उसे गर्भावस्था के किसी भी समय पर दवाइयाँ लेनी शुरू कर देनी चाहिए। इस स्थिति में महिलाओं  उपचार लेना भी शुरू कर देना चाहिए क्योंकि इस समय इस बीमारी के और बढ़ने की काफी संभावना होती है। जहां तक शोध हुआ है, तो इस दवाई के गर्भवती महिला पर किसी प्रकार के हानिकारक प्रभाव की अभी तक किसी भी प्रकार की खबरें नहीं आई हैं। ये दवाइयाँ किसी डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही लेनी चाहिए। इस स्थिति में मरीज़ को काफी मात्रा में पानी पीना चाहिए।

स्वाइन फ्लू का इलाज – स्वाइन फ्लू से निपटने के उपाय (Ways to avoid swine flu)

  • अगर आस पड़ोस में स्वाइन फ्लू की बीमारी फ़ैल रही है तो एक गर्भवती महिला द्वारा एंटी वायरल वैक्सीन लेना काफी आवश्यक है। इससे उन्हें इस बीमारी से दो हफ़्तों में सुरक्षा (immunity) मिल जाएगी।
  • खाने से पहले, छींकने के बाद तथा टॉयलेट का प्रयोग करने के बाद हाथ अवश्य ही अच्छे से धोएं।
  • अगर आपको गंभीर रूप से खांसी और सर्दी है, तो छींकने और खांसने के लिए साफ़ टिश्यू पेपर का ही प्रयोग करें।
  • स्लैब, खिलौने, लकड़ी की सतह, दरवाज़े के नॉब्स और रसोई के काउंटर्स रोज़ाना साफ़ तौलिये और डिसइंफेक्टेंट से साफ़ करें। वायरस और बैक्टीरिया में ठोस सतहों पर 8 से 10 घंटे ज़िंदा रहने की काबिलियत होती है।
  • गर्भवती महिलाओं को स्वाइन फ्लू से ग्रस्त व्यक्तियों से कम से कम 6 फ़ीट दूर रहना चाहिए।
  • स्वस्थ खानपान बनाए रखें। प्रचुर मात्रा में ताज़े फल, सब्ज़ियाँ और साबुत अनाज वाले भोजन का सेवन करें। आपके भोजन में मिनरल्स तथा एंटी ऑक्सीडेंट विटामिन्स जैसे विटामिन सी होना चाहिए जिससे आपको इन्फेक्शनस से लड़ने की ताकत मिले।

गर्भावस्था के सबसे शर्मनाक लक्षण

गर्भावस्था की समस्याएं – गर्भवती महिलाओं को स्वाइन फ्लू से जुड़ी सलाह (Swine flu advice for pregnant women se swine flu se bachav)

गर्भवती महिलाओं की प्रतिरोधक क्षमता इस स्थिति में अच्छे से काम नहीं करती, अतः उनके स्वाइन फ्लू से ग्रस्त होने की काफी अधिक संभावना रहती है। स्वाइन फ्लू से ग्रसित होने पर एक गर्भवती स्त्री को काफी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। अगर इस स्थिति में महिला में फ्लू के सामान्य लक्षण जैसे थकान, तेज़ बुखार, सिर में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, उलटी और दस्त दिखाई दें तो उसे तुरंत ही अपने डॉक्टर से सलाह करनी चाहिए। ज़्यादातर महिलाएं एक हफ्ते के अंदर इस समस्या से निजात पा लेती हैं। पर कई बार, ज़्यादातर तीसरी तिमाही के समय, महिलाएं कई तरह की गंभीर समस्याओं जैसे फेफड़ों में इन्फेक्शन, सांस लेने में तकलीफ तथा शरीर में पानी की कमी से गुज़रती हैं। इन सब से बच्चे का समय से पहले जन्म (premature labor) तथा बच्चा गिरने की दुर्घटना (miscarriage) भी हो सकती है।

गर्भवती महिलाओं को स्वाइन फ्लू तथा अन्य सभी प्रकार के फ्लू वायरस से सुरक्षा दिलाने वाले मौसमी फ्लू टीके की मदद लेनी चाहिए। इस टीके से माँ या बच्चे किसी को भी कोई ख़तरा नहीं होता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए स्वाइन फ्लू से बचाव के उपाय (Special precautions for pregnant women to reduce the chances of catching flu)

  • अनावश्यक घूमने फिरने तथा भीड़ भाड़ वाली जगहों में जाने से परहेज करें।
  • छींकते तथा खांसते वक़्त रुमाल या टिश्यू का इस्तेमाल करें।
  • छींकने में प्रयोग हुए टिश्यू को पूरी तरह खराब करके सावधानी से फेंकें।
  • गर्म पानी और साबुन की मदद से बार बार हाथ धोएं।
  • घर के सारी ठोस सतहों को पानी से अच्छी तरह धोकर वायरस से मुक्त रखें।

गर्भावस्था के दौरान त्वचा में होने वाले बदलाव

गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य – एंटी वायरल्स और पेन किलर्स (Antivirals and painkillers se swine flu ka ilaaj)

एंटी वायरल औषधियों जैसे रेलेंज़ा और टामीफ्लू का प्रयोग करें। रेलेंज़ा का प्रयोग करने के लिए एक डिस्क के आकार का औज़ार प्रयोग में लाएं। यह गर्भवती महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद है क्योंकि यह आसानी से आपके गले और फेफड़े तक पहुँचता है और इसका खून या प्लेसेंटा पर कोई असर नहीं होता। टामीफ्लू उन गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद है जिन्हें अस्थमा या सांस लेने में तकलीफ हो। इस दवाई के कुछ हलके साइड इफेक्ट्स भी हैं, पर स्वाइन फ्लू के प्रकोप की तुलना में ये कुछ भी नहीं हैं। गर्भावस्था के दौरान पेरासिटामोल बुखार कम करने तथा दर्द दूर करने की सबसे कारगर औषधि है।