Changes in your body during second trimester in hindi – दूसरी तिमाही के दौरान शरीर में होने वाले परिवर्तन

एक बार जब कोई महिला पहली तिमाही को पूरा करके दूसरी तिमाही में जाती है तो उसके शरीर में कई और परिवर्तन आने लगते हैं। आपने पहली तिमाही में निश्चित ही चक्कर आने तथा उलटी आने के भाव का अनुभव किया होगा।

लेकिन दूसरी तिमाही में ये सारे लक्षण कम हो जाएंगे। गर्भवती महिला खुद को दूसरी तिमाही में ज़्यादा ऊर्जावान अनुभव करती है। यह वह समय है जब अपने आने वाले बच्चे के स्वागत की तैयारी में उसके शरीर में स्फूर्ति आ जाती है।

प्रेग्नेंसी स्पेशल केयर टिप्स में वज़न बढ़ना (Weight gain)

आमतौर पर जो परिवर्तन दूसरी तिमाही में हर महिला में देखा जाता है वो है वज़न का बढ़ना। क्योंकि बच्चा दूसरी तिमाही के पहले दिन से ही पेट में बढ़ना शुरू कर देता है, अतः माँ का वज़न भी स्वाभाविक रूप से बढ़ना शुरू हो जाता है। यह वह समय है जब आपको बड़े मातृत्व वाले कपड़ों की आवश्यकता होगी।

दूसरी तिमाही के परिवर्तन में बच्चे का पेट में हिलना (Baby movement)

गर्भावस्था के दौरान हर्बल उपचार

जब आप अपने बच्चे को पेट में हिलता हुआ महसूस करती हैं तो यह आपके जीवन का काफी यादगार क्षण होता है। आप इसका अनुभव या तो दूसरी तिमाही की शुरुआत में ही कर सकते हैं या फिर तिमाही के बीच में। यह बात सच है कि आपका बच्चा पेट में पहली तिमाही से हिलता डुलता है पर तब आपको इसकी कोई जानकारी नहीं होती। आप यह बदलाव दूसरी तिमाही में ही महसूस कर सकती हैं।

प्रेग्नेंसी स्पेशल केयर टिप्स में स्तनों में परिवर्तन (Changes in breast)

आपने पहली तिमाही के समय से ही अपने स्तनों में काफी परिवर्तन देखा होगा। आपने स्तनों के आकार में वृद्धि तथा उनके मुलायम होने तथा वहाँ सूजन पड़ने जैसा अनुभव भी किया होगा। परन्तु दूसरी तिमाही (pregnancy me dekhbhal) में आप ये सब लक्षण नहीं देखेंगी, बल्कि आपके स्तनों कि सूजन और नरम होने का भाव इस समय ठीक हो जाएगा। पर स्तनों का आकार इस तिमाही में भी बड़ा ही रहता है क्योंकि महिलाओं का शरीर इस स्थिति में स्तनपान के लिए तैयार हो रहा होता है।

इस स्थिति में स्तन के पास कि त्वचा काले रंग की हो जाती है। इस समय स्तनों के पास की छोटी सूजन साफ दिखने लगती है। ये सूजन काफी आवश्यक होती है क्योंकि ये तेल की ग्रन्थियां होती हैं जो स्तनों के दूध को सूखने से रोकती है। इस समय आपके स्तनों से एक पीला द्रव्य भी निकलता है जिसे कोलोस्ट्रम कहते हैं।

दूसरी तिमाही के परिवर्तन में स्ट्रेच मार्क्स (Stretch marks)

पहली तिमाही में शरीर में आने वाले परिवर्तन

इस स्थिति में पेट तथा स्तन आदि पर स्ट्रेच मार्क्स काफी आसानी से दिख जाते हैं। क्योंकि आपकी त्वचा के फाइबर काफी लचीले होते हैं अतः इसके फटने की संभावना रहती है। कुछ महिलाएं इसे लेकर काफी चिंतित रहती हैं क्योंकि ये दाग बच्चा होने के कई दिनों बाद तक भी रहते हैं। पर इसे हटाने का एक अच्छा तरीका भी है। अगर आप जैतून, एलोवेरा, बादाम, नारियल या अन्य तेलों को अपने स्तनों या अन्य भागों पर लगाती हैं तो इससे स्ट्रेच मार्क्स ठीक भी होते हैं और बाद में भी नहीं होते। आप अपने डॉक्टर से भी स्ट्रेच मार्क्स हटाने की औषधि के सम्बन्ध में बात कर सकती हैं।

दूसरी तिमाही के परिवर्तन में त्वचा के अन्य परिवर्तन (Other skin changes)

त्वचा में अन्य परिवर्तन जैसे पेट कि त्वचा का सूखा पड़ना तथा खुजलाना, पेट के बीच में एक काली रेखा का होना जो कि पेट के बीचोंबीच से होते हुए योनि तक जाती हो। इसके अलावा हाथ खुजलाना, सूर्य कि रौशनी सहन ना कर पाना तथा चेहरे पर काले धब्बे पड़ना। इनकी चिंता ना करें क्योंकि बच्चा होने के बाद ये दाग अपने आप चले जाएंगे।

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में सेक्स में रुचि आना (Interest in sex)

कई महिलाओं के मन में यह प्रश्न रहता है कि क्या गर्भावस्था के समय के दौरान या बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उनकी सेक्स में रुचि बनी रहेगी या नहीं। यह तथ्य हर महिला की स्थिति में अलग अलग हो सकता है। कुछ महिलाएं, जो ऊर्जा में कमी, मॉर्निंग सिकनेस (morning sickness) तथा स्वभाव में चिड़चिड़ेपन की शिकार होती हैं, इस समय सेक्स की प्रक्रिया में कोई भी रूचि महसूस नहीं करती हैं। पर कई अन्य महिलाओं की स्थिति में सेक्स करने की प्रबल इच्छा गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में वापस आ जाती है।

पहली तिमाही के दौरान देखभाल के नुस्खे

दूसरी तिमाही के परिवर्तन में दर्द और सूजन (Pain and puffiness)

एक गर्भवती महिला के अन्दर इस स्थिति में जो अन्य परिवर्तन आते हैं, वे हैं हाथों और पैरों में सूजन आकर उनका फूल जाना, एवं पैरों और शरीर के अन्य कई हिस्सों में दर्द का अनुभव होना।

दूसरी तिमाही के परिवर्तन में पैरों की सूजन (Swelling feet)

गर्भावस्था के दौरान पैरों और टखनों की सूजन आपके सुबह उठने के बाद ही चली जानी चाहिए। अगर ये सूजन पूरी तरह आराम करने के बाद भी कम ना हो तो अपने डॉक्टर से अवश्य संपर्क करें। कुछ महिलाओं को इस समय ऐसा लगता है कि उन्हें काफी सर्दी लगी है तथा उनकी नाक पूरी तरह बंद है। वहीँ कुछ अन्य महिलाओं पर की गयी शोध से यह पता चला है कि इस समय उनको मतली की समस्या होने या चक्कर आने में काफी कमी आती है, वे अपने शरीर में काफी ऊर्जा का अनुभव करती हैं तथा उनके मूत्राशय (bladder) पर पड़ने वाला दबाव भी काफी कम हो जाता है। एक बार जब कोई महिला पहली तिमाही (garbhavastha ki dekhbhal) के चक्र से बाहर आ जाती है तो उसका गर्भपात (miscarriage) होने की संभावनाएं भी काफी कम हो जाती हैं।

दूसरी तिमाही में गर्भावस्था के लक्षण में पीठ के निचले हिस्से में दर्द

अगर आपको गर्भावस्था के दौरान पीठ के निचले हिस्से में दर्द की समस्या हो, तो उतने और बैठने के समय सही मुद्रा का पालन करके ही इसका आधा इलाज किया जा सकता है। पीठ के निचले हिस्से के अपने दर्द का उपचार करने के लिए पेट की मांसपेशियों को खींचें, कूल्हों को कसकर भींच लें और अपने आसन पर जमकर बैठ जाएं। सीधी पीठ वाली कुर्सियों पर बैठने का प्रयास करें, छोटी हील (low heal) के जूते पहनें तथा बिस्तर में अपनी बाईं तरफ सोयें और सहारे के लिए अपने ऊपरी पैर के नीचे एक तकिया रख लें। ज़्यादा भारी सामान उठाने या खींचने का प्रयास ना करें।

तीसरी तिमाही के दौरान शरीर में आए परिवर्तन

दूसरी तिमाही के परिवर्तन में सांस लेने में परेशानी (Shortness of breath)

दूसरी तिमाही के दौरान रोज़मर्रा के सामान्य काम, जैसे बाथरूम तक चलकर जाने में भी आपकी सांस फूलने लगती है। जैसे जैसे आपके गर्भाशय में वृद्धि होती है, यह फेफड़ों को काफी हद तक ढक लेता है, जिससे कि हवा को बाहर जाने या अन्दर आने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सांस लेने में परेशानी दूसरी तिमाही के समय के दौरान और भी ज़्यादा गंभीर रूप धारण कर लेती है।

दूसरी तिमाही के परिवर्तन में मूत्राशय और किडनी में संक्रमण (Bladder and kidney infections)

इस समय कई प्रकार के हार्मोनल परिवर्तन (hormonal changes) होते हैं, जिसकी वजह से मूत्र का प्रवाह धीमा हो जाता है। इसके अलावा आपका बढ़ता हुआ गर्भाशय रास्ते में आने लगता है, जिसकी वजह से मूत्राशय और किडनी में होने वाले संक्रमण का ख़तरा बढ़ जाता है। अगर आपको मूत्र की निकासी के दौरान किसी प्रकार के दर्द का अनुभव हो रहा है, या फिर बुखार तथा पीठ में दर्द की अनुभूति हो रही है, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। अगर इसका सही समय पर इलाज ना किया गया तो मूत्राशय से जुड़े संक्रमणों की वजह से गर्भधारण के दौरान होने वाली मुसीबतों में भी काफी बढ़ोत्तरी हो सकती है।

दूसरी तिमाही में गर्भावस्था के लक्षण में मसूड़ों से खून निकलना (Bleeding gums)

गर्भधारण के लिए बचे दिनों की गणना

इस समय आधे से ज्यादा गर्भवती महिलाएं सूजे और नर्म मसूड़ों की समस्या का शिकार होती हैं। हॉर्मोन के परिवर्तन आपके मसूड़ों में ज्यादा खून भेजते हैं, जिससे वे काफी संवेदनशील हो जाते हैं। बच्चे के जन्म के बाद इनकी अवस्था पहले जैसी हो जाती है। इस समस्या से ग्रस्त महिलाओं की समय से पहले लेबर (labor) में जाने तथा कम वज़न वाले बच्चे को जन्म देने की काफी संभावना बन जाती है।

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