Tips in hindi – Changes in your body during third trimester – तीसरी तिमाही के दौरान शरीर में आए परिवर्तन

गर्भावस्था के हर चरण में आपको किसी न किसी प्रकार के परिवर्तन का सामना करना पड़ता है। क्योंकि आपके साथ माँ जैसा एक इतना बड़ा तमगा जुड़ने वाला होता है, अतः आपको अपने जीवन में आ रहे नए मेहमान की फ़िक्र लगी रहती है। तीसरी तिमाही गर्भावस्था की वो अवस्था है जब आप बच्चा पैदा करने के लिए बिलकुल तैयार रहती हैं। इस समय हर सुबह बिस्तर से उठने के लिए भी आपको अतिरिक्त परिश्रम करना पड़ता है। आपने पहली तिमाही में एक थकान का अनुभव किया होगा जिसका अनुभव आपको फिर से एक बार तीसरी तिमाही में होता है। तीसरी तिमाही में होने वाले परिवर्तनों में बच्चे की हरकतों को महसूस करना मुख्य होता है। बच्चे के पेट में लात मारने की प्रक्रिया महसूस करना काफी रोमांच और हर्ष से भरा होता है।

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में सोने में परेशानी (Difficulty in sleeping)

क्योंकि बच्चा तीसरी तिमाही में बढ़ने की प्रक्रिया में रहता है, अतः आपका पेट बड़ा हो जाता है और आपको सोने में परेशानी होती है। क्योंकि एक महिला बच्चे के बढ़ने के साथ ही अच्छे से सो नहीं पाएगी, अतः यह प्रक्रिया भी तीसरी तिमाही में उसके लिए काफी बड़ा परिवर्तन होती है। एक बार बच्चे के तीसरी तिमाही में बड़ा हो जाने पर गर्भवती महिला की नसों एवं धमनियों पर काफी दबाव पड़ता है। जो महिलाएं पेट के बल सोने की अभ्यस्त हैं, उन्हें इस स्थिति में काफी परेशानी का सामना करना पडेगा। ऐसे में अगर आपके घुटनों के बीच में एक तकिया रख दिया जाए तो इससे आपको काफी आराम मिलेगा। बैठते समय भी अगर आप अपनी पीठ के पीछे तकिया रख लें तो काफी आराम पा सकती हैं।

पहली तिमाही में शरीर में आने वाले परिवर्तन

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में देखभाल, कुछ दर्द भरे परिवर्तन (Some painful changes)

आप तीसरी तिमाही में गर्भावस्था की वजह से गर्भाशय पर पड़ रहे दबाव के फलस्वरूप पैरों में ऐंठन की शिकार हो सकती हैं। आपके पैरों में एक बेचैनी सी होती है जिसकी वजह से आपको निरंतर अपने पैरों को हिलाना पड़ता है। तीसरी तिमाही की गर्भावस्था का एक और परिवर्तन आपकी निचली छाती में जलन होना है। इससे आपको एसिडिटी का अनुभव हो सकता है। इस अवस्था में कोई आम गैस दूर करने वाली दवाई लेना आपके लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। अपने डॉक्टर से बात करें और उनसे पूछें कि इस स्थिति में क्या कोई चबाने वाली गैस की दवा ली जा सकती है या नहीं।

बच्चे की मुद्रा और मूत्र की समस्या (Baby position and urination, pregnancy me dekhbhal)

बच्चे के आपके पेट के अंदर हलचल करने से ही आपके मूत्र विसर्जन का समय जुड़ा हुआ है। जैसे जैसे पेट में बच्चा बढ़ता रहता है, वैसे वैसे मूत्र विसर्जन करने की मात्रा बढ़ती जाती है। आपको ऐसे कमरे में रहना पड़ता है जिसके पास ही बाथरूम हो क्योंकि एक गर्भवती महिला ज़्यादा दूर चलकर नहीं जा सकती है। कुछ महिलाएं इस अवस्था में अपने मूत्र को रोक लेती हैं क्योंकि उनके लिए बार बार बाथरूम जाना काफी परेशानी भरा हो सकता है। पर ये कोई अच्छी बात नहीं होती। अगर आप ज़्यादा देर अपने मूत्र को रोकेंगी तो इससे आपको किडनी की समस्या भी हो सकती है।

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में देखभाल में बुरे सपने (Nightmare and dreams)

क्योंकि एक माँ अपने बच्चे को लेकर बहुत अधिक चिंतित रहती है, अतः वह सारा दिन अपने बच्चे की सुरक्षा के बारे में ही सोचती रहती है। बच्चा पैदा होने के दौरान भी उसे किसी अनहोनी के होने का ख़तरा बना रहता है। ऐसी चिंताएं आमतौर पर आपके मन के किसी कोने में बस जाती हैं जो कि रात के वक्त बुरे सपने के रूप में आपको नज़र आती हैं। यह स्थिति महिलाओं के सामने गर्भावस्था के पहले नहीं आती है। पहली और दूसरी तिमाही के दौरान भी एक महिला को ऐसे ख्याल नहीं आते। पर जैसे ही महिला तीसरी तिमाही में प्रवेश करती है तो बच्चे होने का समय नज़दीक आने लगता है। इससे गर्भवती महिला काफी डर सी जाती है और काफी बुरे स्वप्न देखने लगती है। इस अवस्था में बुरे स्वप्न आने का एक और कारण गर्भवती महिला द्वारा किसी और महिला की कहानी सुन्ना है जिसके साथ उसका बच्चा पैदा होते समय कुछ भयानक हुआ हो।

क्या गर्भावस्था के दौरान रुट कैनाल पद्दति का प्रयोग सही ?

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में सेक्स जीवन में परिवर्तन (Change in sex life)

हर विवाहित दंपत्ति को अपना वैवाहिक जीवन सुखद बनाने के लिए नियमित रूप से काम क्रिया में लिप्त होना चाहिए। जिस तरह खाना और सोना हमारे लिए आवश्यक है, ठीक उसी प्रकार सम्भोग की प्रक्रिया भी उतनी ही ज़रूरी है। पर गर्भवती होने के बाद रोज़ाना सम्भोग की क्रिया में लिप्त होना संभव नहीं हो पाता। इस समय आपके काम जीवन में काफी परिवर्तन आते हैं। तीसरी तिमाही में आने के बाद एक गर्भवती महिला को सम्भोग की क्रिया से अरूचि होने लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वह महिला इस समय पूरी तरह अपने अजन्मे बच्चे को इस दुनिया में लाने के बारे में सोच सोचकर चिंतित रहती है। पर गर्भावस्था के एक निर्धारित समय तक आप सम्भोग की क्रिया को जारी रख सकती हैं। आप अपने डॉक्टर से पूछ सकती हैं कि क्या आप सम्भोग की इस क्रिया को तीसरी तिमाही में भी जारी रख सकती हैं। इसका जवाब निश्चित रूप से ना ही होगा।

हेमोर्रोइड्स (Hemorrhoids se garbhavastha ki dekhbhal)

हेमोर्रोइड्स हमारे मलाशय की वरिकोस (varicose) नसों को कहा जाता है। हेमोर्रोइड्स आपके मलाशय (anus) से बाहर निकल सकते हैं तथा खुजली, दर्द तथा कई बार रक्तपात के भी ज़िम्मेदार हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में आपके लिए यही अच्छा होगा कि आप किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह करें। ऐसी स्थिति उत्पन्न होने के कई कारण हो सकते हैं। इसमें से एक तीसरी तिमाही के चक्र का दबाव है, जिसके अंतर्गत आपके शरीर का बढ़ता गर्भाशय इसके पीछे की बड़ी नसों पर काफी दबाव डाल देता है। इसके फलस्वरूप इस भाग के रक्त संचार में काफी धीमापन आ जाता है।

गर्भपात के प्रारंभिक लक्षण क्या हैं

गर्भावस्था के हॉर्मोन्स (hormones) भी आपकी नसों की दीवारों के ढीला पड़ने तथा बाद में सूज जाने का कारण बन सकते हैं। कब्ज़ होने की स्थिति में भी आप पेट को साफ़ करने के लिए ज़रुरत से ज्यादा जोर लगाती हैं। इससे द्रव्य सोखने की क्षमता भी बढ़ जाती है।

रक्तस्त्राव (Bleeding)

तीसरी तिमाही के दौरान आपको रक्तस्त्राव के लक्षण भी दिख सकते हैं। इसमें गर्भनाल (placenta) भी शामिल है। इस स्थिति में गर्भनाल नीचे की ओर उग आती है तथा गर्भाशय को ढक देती है। गर्भनाल के गर्भाशय की दीवार से अलग होने को प्लेसेंटल अब्रप्शन (placental abruption) या प्री टर्म लेबर (preterm labor) कहा जाता है।

ब्रैक्सटन हिक्स कॉन्ट्रैक्शन्स (Braxton hicks contractions)

आपको यह लग सकता है कि पेट में उठने वाली हलकी मरोड़ें आपके गर्भाशय को बच्चे के जन्म के समय होने वाली असली पीड़ा के बारे में अहसास दिलाने का अभ्यास मात्र है। यह मरोड़ें आमतौर पर लेबर के दौरान उठने वाली मरोड़ों की तरह दर्दनाक नहीं होते, पर ये काफी कुछ लेबर की तरह लग सकते हैं और धीरे धीरे उसी तरफ बढ़ने लगते हैं। असल मरोड़ें समय के साथ धीरे धीरे पास आती जाती हैं एवं ये काफी दर्दनाक, कठोर और थका देने वाली होती हैं।

प्रेग्नेंसी स्पेशल केयर टिप्स, पीठ का दर्द (Backaches me garbhavastha ki dekhbhal)

आपके पेट में आपका बच्चा निरंतर रूप से बढ़ता रहता है, जिसकी वजह से आपके वज़न में काफी वृद्धि होने लगती है। जैसे जैसे आपके बच्चे का वज़न बढ़ने लगता है, वैसे वैसे गर्भावस्था के हॉर्मोन्स आपके कूल्हों के भाग की हड्डियों के बीच के जोड़ों को सुकून प्रदान करता है। इस प्रक्रिया के फलस्वरूप जो दबाव पड़ता है, वह आपकी पीठ पर काफी वज़न डाल देता है। अतः हमेशा ऐसी कुर्सियों का प्रयोग करें जो अच्छी हों तथा जिनसे आपकी पीठ को सहारा प्राप्त हो। आप अपने दर्दभरे प्रभावित भाग पर गर्मी प्रदान करने वाले पैड्स (heating pad) या बर्फ के पैक्स लगाएं। इससे आपको काफी आराम प्राप्त होगा। निचले और समतल जूते पहनने की कोशिश करें। इससे आपको पीठ के दर्द से छुटकारा पाने में काफी आसानी होगी। इसके साथ अगर अन्य कोई निशानियाँ या लक्षण दिखाई दें तो आपको डॉक्टर (doctor) से सलाह करनी चाहिए।

थाइरोइड का महिलाओं की गर्भावस्था पर प्रभाव

प्रेग्नेंसी स्पेशल केयर टिप्स – माँ के शरीर में तीसरी तिमाही के दौरान होने वाले अन्य परिवर्तन (Some other changes in the body of mother during third trimester)

  • इस समय माँ के शरीर के तापमान में वृद्धि दर्ज होती है, क्योंकि इस स्थिति में माँ के अन्दर पलने वाला भ्रूण ताप उत्पन्न करता रहता है। ऐसा होने की वजह से माँ को भी काफी गर्मी लगती है।
  • इस समय रक्त चाप (blood pressure) काफी कम हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपका भ्रूण आपकी मुख्य नस पर काफी दबाव डालता है, जिससे रक्त वापस ह्रदय की तरफ चला जाता है।
  • ऐसी स्थिति में आपके हाथों, पैरों और चेहरे पर बाल उगने शुरू हो जाते हैं। ऐसा होने का मुख्य कारण बालों के फोलिकल्स (follicles) के हॉर्मोन्स का प्रभावित होना है। इस समय बाल भी काफी खुरदुरे हो जाते हैं।
  • इस समय माँ के निपल (nipple) से कोलोस्ट्रम (colostrum) या दूध निकलने लगता है।
  • चेहरे के काले धब्बे तथा रंजकता के भाव इस समय और भी ज़्यादा दिखने लगेंगे।
  • इस समय मूत्राशय में अतिरिक्त दबाव पड़ने की वजह से मूत्र का अंतराल (urinary frequency) काफी कम हो जाता है।
  • टखनों, हाथों और चेहरे पर सूजन हो सकती है क्योंकि इस समय माँ के अन्दर द्रव्य को सोखने की क्षमता रहती है।
  • पेट, जाँघों, पृष्ठ भाग तथा स्तनों पर इस समय स्ट्रेच मार्क्स (stretch marks) दिखने लगते हैं।
  • इस समय, खासकर पेट पर, सूखी और खुजली वाली त्वचा की सृष्टि होती है क्योंकि त्वचा लगातार बढती और खिंचती रहती है।
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