Common habbits that helps in kidney damage – किडनी डैमेज को बढ़ावा देने वाली आदतें

किडनी (Kidney) बीन्स के दानें के समान होती है जो शरीर का एक खास अंग है. किडनी शरीर के जहरीले तत्वों को फ़िल्टर कर रक्त को शुद्ध बनाती है. शरीर से अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने में भी किडनी की ज़रूरत पड़ती है. यह शरीर में मिनरल्स के स्तर को सही रखने और लाल रक्त कणिकाओं तथा ब्लड प्रेशर के उचित क्रियान्वयन में भी मदद करता है.

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए किडनी का सही तरीके से काम करना बहुत ज़रूरी है. अगर किडनी का क्रियान्वयन ठीक नहीं हो रहा हो तो कुछ सामान्य लक्षणों के माध्यम से इसकी जांच की जा सकती है. पेशाब के रंग और मात्रा में बदलाव, उल्टी, चक्कर आना, कमजोरी, श्वसन की समस्या, थकान, साँसों में बदबू आदि ऐसे ही कुछ लक्षण हैं जिनके द्वारा पता किया जा सकता है कि किडनी की सेहत पर प्रभाव पड़ रहा है और उसकी क्रियाप्रणाली सही नहीं चल रही.

इन आदतों से होती हैं किडनी डैमेज की समस्या (Here are some common habits that may harm your kidney)

प्रोसेस्ड फ़ूड (Processed food)

ऐसे लोग जो अधिक मात्रा में प्रोसेस्ड फ़ूड का सेवन करते हैं उन्हें यह समस्या हो सकती है क्योंकि प्रोसेस्ड फ़ूड में फास्फोरस और सोडियम की बहुत अधिक मात्रा होती है. ये किडनी पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं.

स्मोकिंग (Smoking)

स्मोकिंग हाइपरटेंशन को बढ़ावा देता है इसके अलावा इससे हृदय गति बढती है और रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है. स्मोकिंग से कई रक्त नलिकाएं भी सिकुड़ने लगती हैं जो कई तरह की परेशानियों का कारण है. अगर आप स्मोकिंग की बुरी आदत से दूर रहते हैं तो काफी हद तक किडनी के रोगों से बच सकते हैं.

अल्कोहल (Alcohol)

अल्कोहल शरीर के लिए नुकसानदायक होता है, यह तो हम सभी जानते हैं. ऐसे लोग जो दिन में 4 से 5 ड्रिंक लेते हैं उन्हें किडनी से जुड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है. इसीलिए अधिक मात्रा में अल्कोहल लेने से बचना चाहिए.

लम्बे समय तक बैठना (Sitting for long period of time)

लम्बे समय तक बैठना या एक ही मुद्रा में बैठकर काम करना, किडनी की तकलीफों को आमंत्रण देता है. किडनी की अच्छी सेहत के लिए शारीरिक व्यायाम और चलना फिरना ज़रूरी है. शरीर की सक्रियता मेटाबोलिस्म के स्तर को बढ़ाती है जो रोगमुक्त रखने में मदद करता है.

अधिक मांसाहार (Too much meat)

एनिमल प्रोटीन की एक निश्चित मात्रा शरीर के लिए फायदेमंद होती है लेकिन अगर आप ज़रूरत से ज्यादा इसका इस्तेमाल करते हैं तो यह आपकी किडनी पर बुरा प्रभाव डाल सकती है. अगर आप मांसाहारी हैं तो भी आपको संतुलित रूप से सब्जियों के साथ इसका प्रयोग करना चाहिए.

ज़रूरत से ज्यादा पानी ना लें (Not taking enough amount of water)

जल ही जीवन है और पानी की अधिक से अधिक मात्रा शरीर को निरोग रखने में सहायक होती है लेकिन आप किसी तरह से किडनी के रोग से ग्रसित हैं तो आपको कम मात्रा में ही पानी पीना चाहिए खास तौर पर किडनी स्टोन या पथरी में एक निश्चित मात्रा में पानी पीने की सलाह डॉक्टर द्वारा ली जा सकती है.

विटामिन बी6 की कमी (Vitamin B6 deficiency)

सेहतमंद और संतुलित आहार किडनी के लिए बेहतर होता है. शरीर में विटामिन बी6 की कमी की वजह से किडनी स्टोन की समस्या आ सकती है. इसकी कमी को पूरा करने के लिए संतुलित मात्रा में लिवर, फिश, स्टार्चयुक्त सब्जियां जैसे आलू, शकरकंद आदि का प्रयोग कर सकते हैं. सिट्रिक एसिड से रहित फलों का सेवन भी किया जा सकता है.

मैंग्निशियम की कमी (Magnesium deficiency)

कैल्शियम के अवशोषण के लिए  शरीर में मैंग्निशियम की सही मात्रा ज़रूरी है. इसकी कमी से शरीर में कैल्शियम की अधिकता और स्टोन की परेशानी उत्पन्न हो सकती है.

समय पर मूत्रत्याग न करना (Not emptying your bladder on time)

पेशाब को रोके रखना भी किडनी को नुकसान पहुंचाता है. इस आदत की वजह से संक्रमण और किडनी फेल जैसी समस्याएँ तक आ सकती हैं.

सोडियम की अधिकता (Consumption of too much sodium)

अधिक सोडियम किडनी के लिए घातक है. यह हाई ब्लड प्रेशर को भी बढ़ावा देता है और हार्ट को प्रभावित करता है. किडनी की सुरक्षा के उपाय में कम सोडियम का प्रयोग पहला कदम है.

कैफीन (caffeine)

कैफीन की अल्प मात्रा जहाँ शरीर को फायदे पहुंचाती है वहीँ इसकी अतिरिक्त मात्रा से किडनी को नुकसान पहुंचता है. इसका सीधा संबंध ब्लड प्रेशर और किडनी डैमेज है.

कम नींद (Lack of sleep)

6 से 8 घंटे की नींद सेहत के लिए बहुत अच्छी होती है. नींद के दौरान उत्तकों को पुनर्जीवित होने की क्षमता मिलती है जो आंतरिक अंगों की सुरक्षा करता है और किडनी डैमेज और रक्त चाप से शरीर को बचाता है.

सामान्य इन्फेक्शन को अनदेखा ना करें (Don’t ignore common infections)

कुछ बैक्टीरिया या फंगस शरीर को प्रभावित कर सर्दी, खांसी और किडनी डैमेज तक का कारण बन सकते हैं. इनके शुरूआती लक्षण बहुत सामान्य होते हैं लेकिन इन्हें नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए.

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