What are the skin conditions during pregnancy? Tips in Hindi – गर्भावस्था के दौरान त्वचा में होने वाले बदलाव

यह बात तो सभी जानते हैं कि गर्भावस्था के दौरान एक महिला के शरीर में कई बदलाव होते हैं। इस समय महिलाओं के बड़े पेट के अलावा जो सबसे बड़ा बदलाव देखा जाता है वह उनकी त्वचा पर होता है। इस समय त्वचा पर कई बदलाव होते हैं और अगर त्वचा आधारित कोई समस्या पहले से हो तो वह काफी बढ़ जाती है।

त्वचा में आने वाले बदलाव गर्भावस्था के समय शरीर में होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों की वजह से होते हैं। हॉर्मोन के बदलाव तथा बच्चे को पेट में रखने के लिए त्वचा का खिंचाव अत्याधिक बदलाव ले आते हैं।

गर्भावस्था में त्वचा की देखभाल स्ट्रेच मार्क्स से (Stretch marks)

ये मार्क्स पेट, हिप्स तथा जाँघों पर गर्भावस्था के अंतिम भागों में देखे जा सकते हैं। ये दिखने में लाल या गुलाबी दाग की तरह होते हैं जो कि आपके पेट और स्तनों पर फैले रहते हैं। स्ट्रेच मार्क्स को हटाने का कोई स्थाई उपचार नहीं है, पर व्यायाम तथा विटामिन ए से युक्त लोशन लगाने पर स्ट्रेच मार्क्स को टाला या कम किया जा सकता है। ज़्यादातर समय ये स्ट्रेच लाइन्स डिलीवरी के बाद धूमिल होकर हलकी चमकीली रेखाओं की तरह दिखते हैं। जेनेटिक्स इस बात को निर्धारित करते हैं कि ये स्ट्रेच मार्क्स कितनी मात्रा में होंगे तथा किस समय होंगे।

गर्भवती महिलाओं के लिए खास टिप्स हैं वेरीकोस नसें (Varicose veins hai garbhavastha ki samasya)

ये वे नीली तथा बैंगनी रंग की नसें हैं जो गर्भावस्था के दौरान आपके पैरों पर दिखाई देती हैं। इनके त्वचा पर उभरने का मुख्य कारण बच्चे की ओर जाने वाला रक्त का अतिरिक्त संचार होता है। ये नसें कई बार काफी दर्दभरी और असहनीय होती हैं। आनुवंशिकता (heredity) इन नसों को उभारने का एक मुख्य कारण है। वेरीकोस नसों से बचने के कुछ तरीके निम्नलिखित हैं: –

गर्भावस्था के समय सुन्दर लगने के नुस्खे

  • लम्बे समय तक बैठने या खड़े होने से परहेज करें।
  • चलने फिरने से रक्त को वापस ह्रदय में जाने में सहायता मिलती है।
  • पैरों को जितना हो सके ऊपर उठाकर रखें।
  • स्टॉकिंग्स नसों की सुरक्षा करती है और उन्हें फूलने से रोकती है।
  • विटामिन सी का सेवन करें। इससे आपकी नसें लोचदार और स्वस्थ रहेंगी।
  • अतिरिक्त वज़न बढ़ने पर नज़र रखें।

प्रेगनेंसी के दौरान त्वचा की देखभाल पिम्पल और एक्ने से (Pimple breakouts and acne)

कई गर्भवती महिलाएं अपनी गर्भावस्था के 9 महीनों में किसी न किसी स्तर के एक्ने की शिकार अवश्य होती हैं। अगर किसी को गर्भावस्था के पहले कोई समस्या थी तो गर्भावस्था के दौरान वे और भी चिड़चिड़ी हो जाती हैं। गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त हॉर्मोन्स के उत्पादन से तेल की ग्रन्थियां काफी तेल निकालती हैं जिससे त्वचा पर पिम्पल्स तथा एक्ने की समस्या जन्म लेती है। गर्भावस्था के दौरान त्वचा की इस समस्या को कम करने के लिए चेहरे को हर रोज़ सुबह और शाम किसी सौम्य साबुन से क्लीन्ज़ करें। त्वचा को नरम रखने के लिए किसी आयल फ्री मॉइस्चराइज़र का प्रयोग करें।

गर्भावस्था के दौरान त्वचा की देखभाल खुजली वाली त्वचा से (Itchy skin)

एक गर्भवती महिला की त्वचा आमतौर पर बढ़े हुए पेट से पैरों के नीचे तक खुजली से काफी ग्रस्त रहती है। इस खुजली का मुख्य कारण पेट के फैलने की वजह से त्वचा का खिंचना है। अगर गर्भावस्था के अंतिम समय में खुजली के साथ मतली, उलटी तथा थकान भी हों तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यह कोलेस्टॉसिस (cholestasis) का लक्षण हो सकता है जो लिवर की कार्य क्षमता से जुड़ा होता है। डॉक्टर्स इस बीमारी को ब्लड टेस्ट की मदद से जांचते हैं और दवाइयों की मदद से इसका आसानी से इलाज किया जा सकता है। इस अवस्था में हाथों और पैरों में भी काफी खुजली हो सकती है। इससे शरीर पर लाल दाग हो जाते हैं जो कि डिलीवरी के बाद खुद ब खुद चले जाते हैं।  और खुजली वाली स्थिति पेट की जगह को मॉइस्चराइस करने से और भी ज़्यादा गंभीर हो सकती है। खुजली दूर करने वाली क्रीम या लैक्टो कैलामाइन भी इस अवस्था से छुटकारा दिला सकते हैं। दलिये से नहाने पर खुजली से छुटकारा मिल सकता है।

गर्भावस्था के बाद बाल झड़ने से रोकने के उपाय

त्वचा का काला पड़ना (Skin darkening)

इसे गर्भावस्था का मास्क या मेलिस्मा भी कहा जाता है। ये गहरे रंग के धब्बे होते हैं जो आमतौर पर माथे तथा गालों पर उभरते हैं। इनके होने का मुख्य कारण उच्च रंजकता (high pigmentation) होता है। आप गर्भावस्था के मास्क को अच्छे सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल करके दूर कर सकते हैं।

गर्भावस्था में त्वचा की देखभाल स्पाइडर वेंस से (Spider veins hai pregnancy me hone wali problem)

ये रक्त की पतली तथा लाल धमनियां होती हैं जो बाहर तक दिखती रहती हैं। इनके होने का मुख्य कारण रक्त संचार में वृद्धि होती है। स्पाइडर वेंस से कोई दर्द नहीं होता और ये आपकी छाती, चेहरे, गले और छाती के ऊपरी भाग पर उभरते हैं। ये आनुवांशिक (hereditary) भी हो सकता है। इन्हें दूर करने का कोई भी ठोस उपाय नहीं है। ये डिलीवरी के बाद खुद ही चले जाते हैं।

गर्भवती महिलाओं के लिए खास टिप्स हैं लीनिया नाइग्रा (Linea nigra)

यह एक काली रेखा होती है जो नाभि से गुप्तांग की हड्डियों तक फैली रहती है। यह वह रेखा है जो हमेशा से ही उसी जगह रहती है पर गर्भावस्था के चौथे और पांचवे महीने में हॉर्मोन्स की असमानता की वजह से ये काला और नज़र में आने वाला बन जाता है। इसको ठीक करने का भी कोई उपाय नहीं है और यह गर्भावस्था के बाद खुद ही चली जाती हैं।

गर्भावस्था के दौरान त्वचा की देखभाल स्किन टैग्स से (Skin tags)

स्किन टैग्स त्वचा की काफी छोटी और ढीली बढ़त होती है जो आमतौर पर गर्भावस्था के समय बाँहों के नीचे या स्तनों पर देखी जा सकती है। ये आमतौर पर डिलीवरी के बाद गायब हो जाती है।

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