Dental problems during pregnancy, Is it safe to do root canal during pregnancy? – क्या गर्भावस्था के दौरान रुट कैनाल पद्दति का प्रयोग सही?

एक गर्भवती महिला को काफी पहले से दांतों की समस्या हो सकती है। कुछ महिलाओं को यह समस्या गर्भावस्था के दौरान होती है तो वहीँ कइयों को यह समस्या पहले से होती है। डेंटिस्ट आपको हमेशा ही इस स्थिति में दांतों की अच्छी देखभाल करने के लिए कहते हैं, क्योंकि ऐसा न करने पर बच्चे पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। अगर आप अपने बच्चे से प्यार करती हैं, तो कम से कम उसके लिए अपने दांतों का ख्याल अवश्य रखें।

गर्भावस्था की समस्याएं – गर्भावस्था में दांतों की समस्या के खतरे (Danger of teeth problem in pregnancy)

अगर गर्भावस्था के समय दांतों की सही देखभाल ना की गयी तो कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं। नीचे ऐसी ही कुछ समस्याओं का उल्लेख है।

गर्भ निरोध – परिवार नियोजन के उपाय

  • अगर कोई गर्भवती महिला मसूड़ों की समस्या या कैविटी से परेशान है तो इससे जन्म के समय बच्चे का वज़न कम होने की संभावना काफी ज़्यादा होती है।
  • अगर आप एक गर्भवती महिला हैं और आपको कैविटी की समस्या है तो आपका बच्चा समय से पहले या प्री मैच्योर हो सकता है।
  • अगर आप मसूड़ों की समस्या या कैविटी से पीड़ित हैं तो आप अपने बच्चे को भी बैक्टीरिया से ग्रस्त करवा सकती हैं।

पिछले 10 से 15 सालों में हुए शोधों के मुताबिक़ ज़्यादातर गर्भवती महिलाएं दांतों की सही देखभाल नहीं करती तथा मसूड़ों और दांतों की समस्या से पीड़ित पायी गयी हैं। इससे मसूड़ों की बीमारी पर भी प्रभाव पड़ता है और यह पेरिओडोंटल (periodontal) बीमारी का रूप ले सकती है। इससे कई और समस्याएं भी उत्पन्न होंगी, जैसे हड्डियों और टेंडन का खराब होना, जलन तथा इन्फेक्शन। इसके अलावा आप अन्य गंभीर समस्याओं जैसे कार्डिओवैस्कुलर बीमारियों, पैंक्रिएटिक कैंसर तथा अल्ज़ाइमर्स से भी पीड़ित हो सकती हैं।

गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य – दांतों और मसूड़ों की समस्याओं के कारण (Reasons behind the tooth and gum problems)

शोध के अनुसार जिन महिलाओं के शरीर में काफी उच्च मात्रा में प्रोजेस्टेरोन तथा हॉर्मोन्स की मात्रा होती है, उनमें मसूड़ों की बीमारी होने की संभावना भी ज़्यादा होती है। ऐसी महिला को मसूड़ों की कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं। जो गर्भवती महिला गर्भधारण के पहले से पीरियोडोनटाईटिस (periodontitis) की समस्या से ग्रस्त है, उनका बच्चा डिलीवरी के समय लो बर्थ रेट तथा कम वज़न का हो सकता है।

परिवार नियोजन, खतरे, स्तनपान एवं दूसरी गर्भावस्था का सही समय

हम दांतों को रोज़ाना ब्रश करते हैं ताकि खाने से हमारे दांतों में आए बैक्टीरिया हमारे मसूड़ों और दांतों को काफी प्रभावित करते हैं। कुछ बैक्टीरिया इतने शक्तिशाली होते हैं कि वे दांतों पर हमला करके प्लाक का रूप ले लेते हैं। इस प्लाक को तुरंत हटाना अनिवार्य है, अन्यथा यह मसूड़ों की जलन या जिंजीवाइटिस का रूप ले लेता है। अगर आप अपने दांतों और मसूड़ों का उपचार नहीं करेंगे तो ये बैक्टीरिया आपके मुंह में मौजूद हड्डियों को बुरी तरह खराब कर देंगे। गर्भवती महिलाओं को अपने दांतों का विशेष ख्याल रखना चाहिए क्योंकि ऐसा न करने से आपके अजन्मे बच्चे पर काफी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

गर्भावस्था में देखभाल – गर्भावस्था के दौरान रुट कनालिंग (Root canalling during pregnancy se garbhavastha ki samasya)

कुछ महिलाएं और उनके रिश्तेदार इस बात से आशंकित रहते हैं कि गर्भावस्था के वक्त रुट कनाल करवाना सही होगा या नहीं। गर्भावस्था के विभिन्न चरण होते हैं। अगर आप बिना किसी समस्या के चेयर पर लम्बे समय तक रह सकती हैं तो रुट कनालिंग में कोई समस्या नहीं आएगी। पर आमतौर पर महिलाएं इस क्रिया में पीड़ा महसूस करती हैं क्योंकि उनका पेट काफी बड़ा हो जाता है और लम्बे समय तक एक ही जगह पर रहना काफी तकलीफदेह हो सकता है।

अगर आप दूसरी तिमाही में हैं तो रुट कनालिंग कोई समस्या है ही नहीं। कुछ महिलाओं को दांतों के इलाज के समय बुरे सपने आते हैं और अन्य कई तरह की समस्याएं होती हैं। पर अगर आप अपनी गर्भावस्था के दौरान मज़बूत बनी रह सकती हैं तो रुट कनालिंग काफी आसान हो जाता है।

गर्भावस्था के दौरान एक्सरे सुरक्षित नहीं होता क्योंकि इससे बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। पर अगर आपका डेंटिस्ट अनुभवी है और बिना एक्सरे के भी काम कर सकता है तो रुट कनालिंग या दांतों की अन्य समस्याएं पूरी तरह दूर की जा सकती हैं।

गर्भवती महिलाओं को नींद लाने में सहायता 

रुट कनालिंग के खतरे (Risk of root canalling se pregnancy me hone wali problem)

गर्भावस्था के वक़्त रुट कनालिंग करने से भ्रूण पर कोई ख़तरा नहीं होता। पर आपको पहली बार में ही दांतों की जांच करनी पड़ती है। रुट कनालिंग की प्रक्रिया के दौरान रेडिएशन काफी कम और मुंह की तरफ होना चाहिए। पेट में किसी भी प्रकार से रेडिएशन नहीं होना चाहिए। इस पद्दति का एक ख़तरा बच्चे पर पड़ने वाला प्रभाव है। तनाव से दूर रहने के लिए हलके एंटीबायोटिक्स लें।

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