Chicken pox ke lakshan, karan – चिकन पॉक्स के लक्षण, कारण

चिकन पॉक्स बचपन में होने वाली एक काफी सामान्य बीमारी है जो शरीर की किसी विशेष नस के जीवाणु द्वारा संक्रमित हो जाने के कारण होती है। इस बीमारी के समय आपकी त्वचा पर गुलाबी मुहांसों जैसे दाग उभरते हैं जो सारे शरीर पर पैदा होते हैं। हालांकि ये सबसे पहले कान के पीछे या शरीर के ऊपरी हिस्से में होते हैं एवं धीरे धीरे शरीर के अन्य हिस्सों में फैलते हैं। एक बार जब शरीर इन एंटीबाडीज (antibodies) से प्रतिरक्षित हो जाता है तो इस परेशानीदायक एवं पीड़ादायक बीमारी से छुटकारा प्राप्त किया जा सकता है।

यह बीमारी आमतौर पर बचपन में होती है एवं बच्चे इन गुलाबी दागों पर हो रही खुजली एवं चिड़चिड़ेपन से अपना धैर्य खो देते हैं एवं इन दागों को फोड़ देते हैं, जिनसे इनके अन्दर का द्रव्य बाहर आ जाता है। यह काफी सामान्य है एवं चिकन पॉक्स के दोबारा होने की संभावना भी रहती है एवं हानिकारक दाने भी निकल सकते हैं। ये दाने और कुछ नहीं बल्कि संक्रामक जीवाणु हैं जो चिकन पॉक्स पूरी तरह ठीक हो जाने पर भी आपकी नसों के निचले हिस्से पर मौजूद रहते हैं। अतः सुरक्षित रूप से प्रतिरोधकता सुनिश्चित करने के लिए चिकन पॉक्स ठीक करना काफी आवश्यक है। ऐसी स्थिति में चिकन पॉक्स ठीक करने के लिए कुछ प्राकृतिक उपाय एवं तरीके प्रयुक्त करना श्रेयस्कर रहता है।  

चिकन पॉक्स होने के कारण (Causes of chicken pox)

चिकन पॉक्स डाइट

चिकन पॉक्स वरिसेला ज़ोस्टर (Varicella Zoster) नामक जीवाणु की उपस्थिति की वजह से होता है। यह जीवाणु काफी संक्रामक होता है एवं छूने एवं खांसने से भी फ़ैल सकता है। यह एक संक्रामक या छुआछूत की बीमारी है।

  • यदि आप संक्रमित व्यक्ति के काफी नज़दीकी शारीरिक संपर्क में आते हैं तो आपके निश्चित रूप से चिकन पॉक्स से संक्रमित होने की संभावना रहती है।
  • यदि आप संक्रमित व्यक्ति की चीज़ें प्रयोग करते या छूते हैं।
  • यदि संक्रमित व्यक्ति रोकथाम का कोई सटीक उपाय अपनाए बिना खांसता या छींकता है।
  • यदि आप फोड़ों में से निकलते द्रव्य को छूते हैं या संक्रमित व्यक्ति के फोड़ों से निकलते द्रव्य को गलती से छू लेते हैं तो यह निश्चित रूप से फैलता है।

अतः चिकन पॉक्स की रोकथाम करना एवं इसे फैलने से रोकना काफी आवश्यक है। हालांकि इसके लिए टीके उपलब्ध हैं, परन्तु फिर भी 14 वर्ष से अधि आयु के वयस्कों के लिए इससे संक्रमित होने की काफी अधिक संभावना होती है एवं इस रोग से उबरने में करीब 14 से 24 दिनों का समय लगता है। गर्भवती महिलाओं में चिकन पॉक्स होने की सम्भावना पहली एवं तीसरी तिमाही में अथवा गर्भावस्था के 15वें एवं 30वें सप्ताह में अधिक होती है। गर्भवती महिलाएं एवं उनके बच्चे जन्म के दो दिनों तक चिकन पॉक्स के प्रति असंवेदनशील होते हैं।

चिकन पॉक्स के लक्षण (Symptoms of chicken pox)

  • 102 से 103 डिग्री तक तेज़ बुखार।
  • सिरदर्द, खांसी, छींक आना एवं गले में खराश जैसा कि फ्लू (flu) की स्थिति में होता है।
  • भूख ना लगना।
  • सारे शरीर में लाल धब्बे या दाग।
  • सम्पूर्ण शरीर में थकान का भाव।

चिकन पॉक्स की स्थिति में क्या करें (Dos in chicken pox)

चिकन पॉक्स (छोटी माता) को कारण

  • बच्चों के चिकन पॉक्स से प्रभावित होने की स्थिति में धैर्य रखें एवं अपने बच्चों को शांत करने का प्रयास करें।
  • पुराने मोज़ों के जोड़े में दलिया डालें एवं रात को अपने बच्चे के सोते समय उसके हाथों में बाँध दें। इस पौष्टिक खाद्य पदार्थ के गुण चिकन पॉक्स को दूर करेंगे।
  • यदि आपका बच्चा 1 वर्ष से अधिक या कम आयु का है तो डॉक्टर के निर्देशानुसार उसे पिटरीटॉन सिरप (Pitriton syrup) अवश्य पिलाएं। खुद अपनी इच्छा से कोई दवा ना दें एवं अपने डॉक्टर से पहले सलाह कर लें। यह सिरप आपके बच्चे की नींद आने में मदद करता है।
  • संकेतों एवं लक्षणों को काफी गंभीरता से लें एवं शरीर में हो रही खुजली एवं अन्य परेशानी को नज़रंदाज़ ना करें
  • हल्के गर्म पानी में एक बड़ा चम्मच बेकिंग सोडा (baking soda) मिश्रित करें एवं इस पानी से अपने बच्चे को दिन में कम से कम 2 से 3 बार नहलाएं। नहलाने के बाद उसके बदन को अच्छे से पोंछ लें। इससे शरीर के दाग एवं खुजली को दूर करने में सहायता मिलेगी।
  • बच्चे शरीर के फोड़ों को ना कुरेदें, इसके लिए उनके हाथों के नाखून काटकर रखें एवं उनके हाथों में दलिए से भरे मोज़े बाँध दें। फोड़े कुरेदने से बदसूरत घाव बन जाएंगे एवं बीमारी फैलने की संभावना और भी बढ़ जाएगी।
  • मरीज़ पर कड़ी नज़र रखें क्योंकि प्रतिरोधक क्षमता के कमज़ोर होने पर वह काफी कमज़ोर अनुभव करेगा। लक्षणों के दूर होने के लिए अंततः शुरूआती 3 से 4 दिनों तक उन्हें आपकी देखभाल की आवश्यकता होगी। इससे काफी थकान भी हो सकती है एवं अतिरिक्त कमजोरी की वजह से मरीज़ बेहोश भी हो सकता है।
  • खुजली एवं जलन को दूर करने के लिए बिस्तर पर नीम की पत्तियां बिछाएं।
  • अपने बच्चे को लम्बे समय तक नहलाएं एवं इसके लिए पानी में नीम की पत्तियां या नीम की पत्तियों के साथ आवश्यक तेल मिश्रित करीं जिससे कि उनके जलन से प्रभावित भागों को आराम मिले एवं यह धीरे धीरे कम हो।
  • काफी मात्रा में पानी पिएं।
  • ढीलेढाले एवं आरामदायक कपड़े पहनें और पेस्टल (pastel) हल्के रंग की चादरों का प्रयोग करें।
  • फोड़ों पर डॉक्टरों एवं त्वचा रोग विशेषज्ञों के परामर्शानुसार प्राकृतिक लोशन लगाएं।
  • बीमारी दूर ना होने तक संक्रमित व्यक्ति को बाकी सबसे अलग रखें।
  • हमेशा हाथ एवं चादर तथा संक्रमित व्यक्ति द्वारा प्रयुक्त सभी चीज़ों को एंटी-बैक्टीरियल (anti-bacterial) साबुन से धोएं।
  • लाल दाग इस बीमारी में आमतौर पर खुजली का कारण बनते हैं। अतः मरीज़ के बिस्तर पर नीम की पत्तियों का छिड़काव करें जिससे वह हमेशा इन पत्तियों के संपर्क में रह सके। यह त्वचा की सभी समस्याओं में आराम प्रदान करती है।

चिकन पॉक्स के दाग कैसे मिटाएँ

  • इन पत्तियों का प्रयोग एक बार सभी फोड़ों के सूख जाने के बाद नहाते समय भी किया जा सकता है। इसके लिए स्नान करने से एक दिन पहले नहाने के पानी में थोड़ी सी नीम की पत्तियों एवं ताज़ी हल्दी मिश्रित करें। इस प्रकार लम्बा सनान करने के लिए मरीजों के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल श्रेयस्कर होगा।
  • अन्य दिनों में दो गिलास पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा मिश्रित करके इससे स्पंज बाथ (sponge bath) लें। इससे भी खुजली एवं दाग को दूर करने में सहायता प्राप्त होगी।
  • मरीजों को ऐसी स्थिति में सामान्य से अधिक पानी पीना चाहिए। चिकन पॉक्स के दौरान शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए।
  • अधिक आराम के लिए हल्के रंग के ढीलेढाले कपड़े पहनें।
  • चादरें भी आरामदायक रंगों की होनी चाहिए। मरीज़ द्वारा इस्तेमाल किये जा रहे हर परिधान एवं अन्य वस्तुओं को नियमित रूप से डिसइंफेक्टेंट (disinfectants) एवं एंटी बैक्टीरियल साबुन से धोएं जिससे जीवाणु संक्रमित ना हों।
  • भरपूर आराम करने से चिकन पॉक्स के समय प्रतिरोधक क्षमता की मजबूती की प्रक्रिया तेज़ होगी।
  • अपने खानपान विशेषज्ञ के निर्देशानुसार खानपान की आदतों का सख्ती से पालन करें।

चिकन पॉक्स की स्थिति में क्या ना करें (Don’ts in chicken pox)

  • चिकन पॉक्स के दौरान कसे हुए कपड़े ना पहनें क्योंकि ये आपकी त्वचा को काफी नुकसान पहुंचाएंगे एवं खुजली में वृद्धि करेंगे। इसके बदले सूती के कपड़े पहनें क्योंकि इनमें हवा की आवाजाही आसानी से होती है एवं आपकी त्वचा के फोड़ों को सूखने का समय मिलता है। इससे आपके शरीर पर अतिरिक्त पसीने का जमाव भी नहीं होता। परन्तु लम्बे एवं ढके हुए कपड़े पहनें जिससे कि त्वचा पर सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत रहे एवं आपकी त्वचा सूखी एवं गन्दगी से दूर रह सके। इससे फोड़े भी ढके रहेंगे एवं इनके फूटने की संभावना पर भी लगाम लगेगी।
  • चिकन पॉक्स काफी संक्रामक रोग होता है अतः किसी प्रकार के तौलियों, कपड़ों या बर्तन को साझा करना अच्छी बात नहीं है। ऐसा करने से यह बीमारी काफी तेज़ी से फ़ैल सकती है एवं अन्य लोगों में मौजूद संक्रमण एवं बीमारियाँ भी दूसरों में फ़ैल सकती हैं। क्योंकि यह बीमारी आपकी प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करती है, अतः इससे आपकी अन्य बीमारियों से ग्रस्त होने की काफी संभावना बढ़ जाती है। जब तक आप पूरी तरह ठीक नहीं हो जाते, अपनी निजी चीज़ों को किसी के साथ ना बाँटें।
  • यदि आपको ठंडा भोजन पसंद है तो आपके लिए बुरी खबर यह है कि चिकन पॉक्स होने की स्थिति में आपको इसे अपने खानपान से दूर करना होगा। ठंडा भोजन आपके शरीर को ठंडा कर देता है। हालांकि इससे आपके शरीर के चिड़चिड़ेपन को दूर करने में सहायता मिलती है , परन्तु प्रतिरोधक क्षमता कम होने कारण इससे शरीर में ठण्ड लगने एवं अन्य बीमारियों से ग्रस्त होने की भी संभावना बढ़ती है। यदि आप सावधान नहीं रहे तो आपको निमोनिया (pneumonia) भी हो सकता है। अतः अपने खानपान पर थोड़ी सख्ती बरतना आवश्यक है।
  • अपने फोड़ों को ना खुरचें या इनपर खुजली ना करें। इससे यह बीमारी शरीर के अन्य भागों में फैलेगी एवं बदसूरत दागों की सृष्टि करेगी।
  • शुरुआती कुछ दिनों तक मरीज़ को आपके ध्यान एवं देखभाल की काफी आवश्यकता होती है, अतः इस समय उनकी देखभाल में कोई कमी ना रखें। अपने बच्चे को बाहर जाने या किसी से मिलने ना दें, अन्यथा यह बीमारी आसानी से फैलेगी। यह काफी संक्रामक बीमारी है।

फोड़ों एवं दाग के ठीक हो जाने तक स्नान ना करें। किसी भी हालत में मेडिकेटिड (medicated) साबुनों का प्रयोग ना करें।

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