Signs of labor in Hindi – प्रसव के लक्षण

लेबर पेन या प्रसव पीड़ा के शुरू होने का कोई सही समय निश्चित नहीं होता है। जिस प्रकार किसी भी शिशु के गर्भ में रहने की अवधि अनिश्चित होती है, वह आठ माह में भी जन्म ले सकता है या फिर उसे जन्म लेने में नौ माह से कुछ दिन ज्यादा भी लग सकते हैं, उसी प्रकार लेबर पेन या फिर प्रसव पीड़ा के शुरू होने का भी कोई निश्चित समय नहीं है। 

मुझे कैसे पता चलेगा कि मैं प्रसव पीड़ा में हूं? (how I will know that I’m in labor pain)

लेबर और डिलीवरी के दौरान दर्द से छुटकारा 

दरअसल आपका शरीर आपके बच्चे के जन्म से एक माह पहले से आपको प्रसव पीड़ा के लिए तैयार करने लगता है। इस दौरान आपका शरीर जन्म के समय होने वाली पीड़ा के लिए खुद को तैयार कर रहा होता है। जैसे जैसे प्रसव का समय नज़दीक आता जाता है, नए नए लक्षण नज़र आने लगते हैं। 

प्रसव के लक्षण (Signs of labor) 

बच्चे का नीचे खिसक जाना (Baby drops down side) 

अगर आप पहली बार शिशु को जन्म देने जा रही हैं तो आपको लाइटनिंग (lightning) नाम की प्रक्रिया के बारे में पता चलेगा। गौरतलब है कि यह प्रक्रिया बच्चे के जन्म से कुछ दिन पहले शुरू होती है। इस दौरान बच्चा कोख के निचले हिस्से में पहुंच जाता है। इसे ही लाइटनिंग कहते हैं। प्रसव के समय का निर्धारण करने की ये बहुत ही महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के दौरान बच्चे के निचले हिस्से में पहुंचने के कारण आपकी छाती की हड्डियों के नीचे दबाव काफी कम हो जाएगा और गर्भ ठहरने के बाद से ही जो साँस लेने में दिक्कत होती थी व दबाव महसूस होता था, वह अब समाप्त हो जायेगा। इससे आपको सांस लेने में भी आसानी होगी। जब भी ऐसा महसूस हो तो समझ जाये कि ये प्रसूति का लक्षण है और प्रसव का समय नजदीक आ गया है।

ब्रेक्सटन हिक्स कॉन्ट्रैक्शन में वृद्धि (Increment in Braxton hicks contractions) 

लेबर पेन की शुरुआत होने के दौरान आपको बार बार ब्रेक्सटन हिक्स वाली मरोड़े होंगी। यह इस बात का संकेत है कि शरीर में प्रसव की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस दौरान गर्भाशय ग्रीवा (cervix) पतली और चौड़ी होती रहती है। इसके बाद असल प्रसव पीड़ा की शुरुआत होती है। कई महिलाएं इस दौरान मासिक धर्म (menstruation) जैसी मरोड़ों का अनुभव करती हैं।

गर्भाशय ग्रीवा/ सर्विक्स के आकार में निरंतर बदलाव (Constant changes in cervix) 

बच्चे के जन्म लेने से कई दिन या कई हफ्तों पहले से गर्भाशय ग्रीवा को जोड़ने वाले तंतुओं में परिवर्तन होने के कारण यह नर्म और अंत में लंबी तथा चौड़ी हो जाती है। इस प्रक्रिया को डाईलेट(dilate) होना कहा जाता है। हालाँकि ये आपको बिलकुल पूरी तरह नहीं बताती है कि अब प्रसव का सही समय नजदीक आ गया है या नहीं। अगर आपने पहले कभी बच्चे को जन्म दिया है तो लेबर पेन शुरू होने से पहले यह डाईलेट होना शुरू कर देगी। लेकिन पहले बच्चे के जन्म के दौरान यह केवल कभी भी डाईलेट हो सकती है। डाईलेट होने से यह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि आप लेबर पेन में है या नहीं। 40 हफ्तों की गर्भावस्था के दौरान यह कभी भी डाईलेट हो सकती है। आने वाले बदलाव आपको पता नहीं चलेंगे, इस कारण डॉक्टर आपके गुप्तांग की जांच करके इस बात का पता लगाने का प्रयास करता है कि आपकी गर्भाशय ग्रीवा में बदलाव आना शुरू हुआ है या नहीं। डाईलेट होना दूसरे बच्चे के दौरान निश्चित ही लेबर पेन की निशानी है लेकिन पहले बच्चे के दौरान यह कभी भी डाईलेट हो जाएगी और आपको पता भी नहीं चलेगा, इस कारण पहले बच्चे के जन्म के दौरान इसे पुख्ता निशानी नहीं माना जा सकता। 

म्युकस प्लग का निकलना (Body start passing mucus plug or you notice “bloody show”) 

लेबर और डिलीवरी की समस्याओं से निजात

लेबर पेन के समय गर्भाशय ग्रीवा डाईलेट होती रहती है। डाईलेट होना एक ऐसी प्रक्रिया है जब गर्भाशय ग्रीवा निरंतर अपना आकार बदलती रहती है। इसी क्रम में डाईलेट होने के पश्चात आपका शरीर म्युकस प्लग छोड़ना शुरू कर देता है। म्युकस प्लग का निकलना भी प्रसव का संकेत है। यह गुप्तांग से निकलने वाला छोटी मात्रा में मौजूद गाढ़ा म्युकस होता है, जो गर्भनाल मे गर्भ धारण के समय से ही यानी कि पिछले 9 महीने से जमा हो रहा होता है। यह प्लग एक बार में भी पूरा निकल सकता है या फिर इसे निकलने में कुछ समय भी लग सकता है। म्युकस प्लग काफी गाढ़ा होता है और इसमें गुलाबी या लाल खून की मात्रा काफी अधिक होती है। खून की मात्रा होने के कारण इसे ब्लडी शो भी कहा जाता है। सेक्स करने या गुप्तांग की जांच करने से डिलाइट प्रक्रिया से पहले भी म्युकस प्लग निकल सकता है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि लेबर पेन शुरू होने वाला है। 

लेबर पेन या प्रसव पीड़ा के तुरंत शुरू होने की निशानियां

उपरोक्त बताए गए सभी लक्षण प्रसव पीड़ा के कुछ दिन पहले शुरू होने वाले लक्षण थे। अब आगे प्रसव पीड़ा के तुरंत शुरू होने की निशानियां दी गई हैं। ये निशानियां हैं :- 

आपकी मरोड़ों का तेजी से तीव्र होना (Your contractions become increasingly intense) 

ब्रेक्सटन हिक्स के दौरान होने वाली मरोड़े अचानक से तेज, काफी तीव्र और काफी कम अंतराल में होती हैं। इसकी वजह से आपको गर्भाशय ग्रीवा भी डाईलेट हो जाती है, जिससे बच्चे के जन्म में आसानी हो। ये प्रसव के तुरंत शुरू होने का संकेत है।

प्रसव पीड़ा के दौरान पानी का छूटना (Water breaks) 

गर्भ में बच्चे के बड़े होने के दौरान वो अमनियोटिक सैक (amniotic sac) के घेरे में होता है। लेकिन बच्चे के जन्म के दौरान, यह घेरा टूट जाता है। इसके फूटने के बाद आपके गुप्तांग से काफी तेजी से एक द्रव निकलने लगता है। इसकी मात्रा कम भी हो सकती है अथवा ये काफी ज्यादा मात्रा में भी निकल सकता है। इसकी मात्रा बिल्कुल भी निश्चित नहीं होती, लेकिन इसका होना निश्चित होता है। जब भी यह निकलने लगे तब यह प्रसव का संकेत है और अब डॉक्टर के पास जाने या दाई को बुलाने का सही समय आ गया है। 

अधिकांश बार यह देखा गया है कि पहले यह द्रव्य गुप्तांगों से निष्कासित होता है, उसके पहले मरोड़े उठती हैं लेकिन कई बार यह मरोड़े द्रव्य निकलने के बाद उठती हैं। 

क्या होगा अगर पानी छूटने लगा हैं मगर मरोड़े नहीं उठ रही हैं? (What happens if my water breaks and I don’t have contractions) 

गर्भावस्था के दौरान खून निकलना गंभीर समस्या

अगर पानी निकलने की एक निश्चित अवधि के बाद भी आपकी मरोड़े शुरू न हुई हों, तो आपको इंड्यूस (induce) करने की जरूरत पड़ेगी। गौरतलब है कि अमनियोटिक सैक के टूट जाने से उसके जीवाणुओं से सुरक्षा न मिलने की वजह से बच्चा संक्रमित भी हो सकता है। अगर इस दौरान आपके शरीर में ग्रुप बी स्ट्रेपटोकाकस(Group B streptococcus) पाया गया है तो एक बार पानी छूटने के बाद आपको अस्पताल जरूर जाना चाहिए, जिससे कि आपको सही दवाइयां दी जा सकें। 

प्रसव की तैयारी

असली व नकली लेबर में अंतर कैसे करें (How can I tell the difference between true labor and false labor)

कई बार ऐसा होता है कि अन्य किसी कारण से आने वाली मरोड़ को ही असली मरोड़ समझकर, लेबर पेन या प्रसव पीड़ा की शुरुआत मान लिया जाता है। दरअसल ऐसे कई लक्षण हैं जिनमें लेबर पेन के जैसा ही दर्द होता है लेकिन उन्हें लेबर पेन नहीं माना जा सकता। वास्तविक प्रसूति पीड़ा की गणना करना आसान नहीं है, क्यूंकि शुरुआती लेबर की मरोड़े, ब्रेक्सटन हिक्स में वाली मरोड़े जैसी ही होती हैं। कई बार जैसे जैसे असल लेबर की तिथि नजदीक आती रहती है, ब्रेक्सटन हिक्स वाली मरोड़े दर्दनाक और हर 10 या 20 मिनट के अंतराल पर ही होने लगती हैं। लेकिन अगर ये नियमित रूप से और लगातार नहीं होती तो इसे लेबर पेन नहीं माना जाएगा या इसे नकली लेबर पेन कहा जाएगा। असली लेबर की मरोड़ों के बारे में आगे बताया गया है। इनसे आप असली और नकली लेबर में अंतर कर सकते हैं।

असली लेबर की मरोड़ के लक्षण :-

  • वक्त के साथ तीव्र होती जाती है। 
  • असली लेबर पेन की मरोड़ें लंबे समय तक चलती हैं। 
  • असली प्रसव पीड़ा नियमित अंतराल पर होती हैं। 
  • यदि आप मरोड़ों के उठने के समय को ध्यानपूर्वक देखें तब आप पाएंगी कि ये धीरे धीरे काफी तेज होने लगती हैं।
  • शुरुआत में यह 10 मिनट के अंतराल पर होती हैं।
  • यह मासिक धर्म से भी ज्यादा दर्दनाक होती हैं और सब कुछ कर लेने पर भी ये बंद नहीं होती हैं।
  • समय के साथ यह काफी दर्द भरी हो जाती हैं और इनके उठने का समय धीरे धीरे काफी कम हो जाता है। 
  • लेबर पेन या प्रसव पीड़ा के दौरान महिलाओं को सबसे पहले पीठ की तरफ दर्द होता है और धीरे धीरे यह दर्द सामने की तरफ आता है। नकली लेबर के दौरान पीठ हरकत में नहीं आती और दर्द केवल आगे की तरफ ही होता है।
  • कई बार मरोड़े काफी कठोर और दर्दनाक रूप से आती हैं और गौरतलब है कि यह बिना किसी चेतावनी या लक्षण के अचानक ही आती हैं। हर महिला के लिए यह समय अलग अलग हो सकता है। 

डॉक्टर या दाई/ धाय को बुलाने का सही समय (When should I call my doctor or midwife?)

गर्भावस्था में करने वाले कार्यों की सूची

गर्भावस्था के अन्त में आपको डॉक्टर या दाई की तरफ से ये निर्देश दे दिए जाते हैं कि उन्हें किस स्थिति में बुलाया जाए। आपके द्वारा उन्हें दी गई जानकारी हमेशा ही आपकी निजी परिस्थिति पर निर्धारित होगी। जैसे कि यह आपका पहला बच्चा है या नहीं, आपका घर अस्पताल से कितनी दूर है, आपकी गर्भावस्था खतरों से भरी है या नहीं। 

अगर आप उन्हें जानकारी देने के समय को लेकर निश्चित नहीं है तो उन्हें बुला ही लें। डॉक्टर आपकी प्रसव पीड़ा संबंधी किसी भी शंका को शांत कर सकते हैं। यदि आपकी गर्भावस्था साधारण है, तब डॉक्टर आपको निर्देश देंगे कि उनको तब बुलाया जाए जब आपकी मरोड़े एक मिनट तक लगातार चलने लगे और करीब एक घंटे तक हर पांच मिनट के अंतराल में होने लगे। 

डॉक्टर को तब तुरंत बुलाएं जब :- 

  • गर्भावस्था के 37 हफ्ते पूरे होने से पहले जब आपके गुप्तांग से पानी छूटने लगे या आपको पेट में निरंतर कठोर मरोड़ महसूस होने लगें तो ये लेबर पेन की निशानी है। समय से पहले प्रसव पीड़ा के जो लक्षण प्रमुख है वो इस प्रकार है-
  • योनि में से खून निकलना,
  • योनि में से असामान्य द्रव का निरंतर निकलना,
  • पेट में दर्द, कूल्हों में दर्द,
  • कूल्हों में दबाव पड़ना या पीठ के निचले हिस्से में तेजी से असहनीय दर्द होना।
  • अगर डाईलेट होने के दौरान मरोड़ उठ जाए और गुप्तांग से द्रव छूटने लगे तब डॉक्टर को बुला लें। गौरतलब है कि यह द्रव अमनियोटिक द्रव है। प्रसव पीड़ा के दौरान अगर यह पीले, भूरे और हरे रंग जैसा हो तो तुरंत उन्हें बताएं, क्यूंकि यह मेकोनियम (meconium) की मौजूदगी की निशानी है। यह आपके बच्चे का पहला मल है और गर्भ के तनाव की निशानी होती है। अगर यह द्रव रक्त लेकर निकलता है तब भी उन्हें जरूर बताएं।
  • प्रसव पीड़ा के दौरान जब आपको लगे कि बच्चा कम क्रियाशील है, तो ये प्रसव का समय है। 
  • अचानक आपको बुखार की समस्या सताए या पेट में भारी दर्द हो या योनि से रक्त स्रावित होने लगे तो ये लेबर का संकेत हैं। 
  • सिर में भारी दर्द, नजर कमजोर होना, पेट के ऊपरी भाग में असहनीय दर्द होना, सूजन होना भी लेबर पेन की निशानियां हैं।

गर्भावस्था के सबसे शर्मनाक लक्षण

कई महिलाएं यह मानने लगती हैं कि शरीर में आने वाला हर बदलाव और हर नया दर्द, गर्भवती होने कि वजह से हुआ है, वहीं कुछ महिलाएं मानती है कि उनके शरीर में होने वाला हर बदलाव या हर परिवर्तन खतरे की निशानी है। अगर आपने लेबर पेन के लक्षणों को अच्छे से जान लिया है कि कौन से लक्षण नजरंदाज करने नहीं चाहिए तो आप सही समय पर उन लक्षणों को पहचान कर डॉक्टर को बुला सकती हैं। 

हर महिला का शरीर अलग होता है, और इसलिए हर महिला को गर्भावस्था के दौरान होने वाली समस्याएं भी अलग अलग हो सकती हैं। पहले वाले उदाहरण से समझा जा सकता है कि जिस प्रकार किसी भी बच्चे के जन्म लेने की अवधि अलग अलग हो सकती है, उसी प्रकार उस बच्चे के जन्म लेने के दौरान होने वाली प्रक्रिया भी अलग अलग हो सकती है। हर प्रकार की गर्भावस्था अलग होती है। अगर आपको समझ नहीं आ रहा है कि कोई लक्षण गंभीर है या नहीं तो खुद से फैसला न लें, डॉक्टर से परामर्श कर लें। ना जाने कितनी महिलाएं हर वर्ष हमारे देश में इन सामान्य से लक्षणों को नजरंदाज करके प्रसव के समय मृत्यु की शिकार हो जाती है। ये जीवन बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए अगर कोई समस्या है तो चिकित्सक की मदद तुरंत लें और चिंता मुक्त होकर अपने शिशु को जन्म दें।