What is Ebola? What are its early signs? – एबोला वायरस एवं इससे बचाव के उपाय

इबोला वायरस क्या है? एक ख़ास तरह का वायरस जिसके शरीर पर आक्रमण करने के फलस्वरूप शरीर के बाहरी एवं भीतरी दोनों अंगों से खून निकलता हो उसे एबोला वायरस के नाम से जाना जाता है। एक बार यह वायरस अगर शरीर में फैलने लगता है तो मनुष्य के शरीर की रक्षा प्रणाली को नष्ट करके ही दम लेता है।

अतः एक बार शरीर में इस वायरस के फैलते ही खून की कोशिकाएं धीरे धीरे नष्ट होने लगती हैं जिसकी वजह से काफी रक्तपात भी होता है जो कि नियंत्रण में नहीं लाया जा सकता। शोधकर्ताओं के मुताबिक जिस तरह लोग एक देश से दूसरे देश में जाते हैं,उसी तरह एबोला का वायरस भी एक देश से दूसरे देश तक फ़ैल सकता है।

इसीलिए आजकल हर एयरपोर्ट पर अधिकारी हर यात्री की अच्छे से जांच करते हैं कि कंही वह एबोला के वायरस का शिकार तो नहीं। अगर कोई यात्री जांच में एबोला का शिकार पाया जाता है तो इस बात की पूरी संभावना है कि शायद उसे आगे बिलकुल यात्रा ही न करने दी जाय। हर एयरलाइन से सम्बंधित हर अधिकारी को एबोला से पीड़ित व्यक्ति का चाल चलन एवं लक्षण पहचानने की तकनीक सिखाई जाती है।

एबोला का स्त्रोत (Source of Ebola)

एबोला उतना भी संक्रामक वायरस नहीं है जितना कि खसरा और इन्फ्लुएंजा के वायरस होते हैं। एबोला एक व्यक्ति से दुसरे में छूने से, शारीरिक द्रव्यों से और यहां तक कि जानवरों जैसे चमगादड़ों एवं बंदरों से भी फैलता है। एक बार कोई व्यक्ति अगर इबोला से संक्रमित हो जाय तो ये एक व्यक्ति से दूसरे तक फैलता ही जाता है। जो व्यक्ति एबोला पीड़ित व्यक्ति की देखभाल करता है उसके भी इस वायरस से संक्रमित होने की काफी ज़्यादा संभावना होती है। ज़मीन छूने या दूषित सुइयां छूने से भी इबोला से संक्रमित हुआ जा सकता है परन्तु हवा, पानी एवं भोजन के द्वारा एबोला का वायरस आप पर हमला नहीं करता।

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एबोला के लक्षण (Early signs and symptoms of Ebola)

एबोला से संक्रमित व्यक्ति को लगता है कि उसे सर्दी या खांसी के वायरस ने चपेट में लिया है। एबोला के लक्षण संक्रमित होने के 2 से 21 दिनों में सामने आने लगते हैं। कुछ लक्षण (ebola virus ke lakshan) हैं :-

  • सिर दर्द
  • गले का दर्द
  • पेट में दर्द
  • तेज़ बुखार
  • मांसपेशियों में दर्द
  • कमज़ोरी
  • भूख ना लगना

एक बार इस वायरस के शरीर में फैलने की मात्रा बढ़ जाय तो और भी भयंकर लक्षण, जैसे कि अंदरूनी रक्तपात, सामने आते हैं। इबोला रोग, कई बार तो ऐसी स्थिति में नाक, कान एवं आँखों से भी खून निकलता है उलटी एवं दस्त में खून आना भी एबोला का लक्षण होता है। अगर आपके शरीर में एबोला का वायरस का वायरस 8 से 10 दिनों तक रह गया तो काफी ख़तरा हो सकता है।

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इबोला वायरस रोग – एबोला की जांच (Diagnosis of Ebola Virus)

कई लोग एबोला का असर प्राथमिक स्तर पर भांप नहीं पाते हैं जिसके फलस्वरूप बाद में काफी परेशानी होती है,अतः प्राथमिक स्तर पर ही मरीज़ की सही जांच होनी चाहिए। क्योंकि प्राथमिक लक्षण कुछ ख़ास नहीं होते हैं, अतः मरीज़ को यह मानने में असमर्थता का अनुभव होता है कि उसे एबोला के वायरस ने घेरा है, अतः डॉक्टरों को जांच करके सही नतीजे पर पहुंचना चाहिए। इबोला रोग, आपके डॉक्टर को आपकी कोशिकाओं एवं खून की जांच करनी चाहिए। एबोला से ग्रसित व्यक्ति को लोगों के बीच से हटा देना चाहिए क्योंकि वो दूसरों के लिए भी काफी ख़तरा बन सकता है।

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एबोला से बचाव (Prevention of Ebola virus infection – ebola virus se bachav)

बार बार हाथ धोना (Washing hands frequently)

किसी भी संक्रमण से बचे रहने के लिए बार बार हाथ धोएं। अगर इस तरह हाथ धोये जाएं तो एबोला समेत अन्य प्रकार के सारे वायरस से छुटकारा मिल सकता है। औषधीय साबुन या हैंड वाश द्वारा अपने हाथ धोएं।

मांस खाने से परहेज (Avoid bush meat)

कुछ लोगों को जंगली जानवरों का मांस खाना काफी पसंद होता है और इबोला का वायरस शरीर में फैलने की मुख्य वजहों में से यह एक है।

संक्रमण से बचाव की विधि मानें (Abide with infection control procedure)

स्वास्थ्य कर्मचारियों के इस वायरस के चपेट में आने की सबसे ज़्यादा संभावना होती है,पर इसका अर्थ यह नहीं कि वे अपना काम करना छोङ दें। सफाई के वक़्त दस्ताने तथा मरीज़ों के सामने मास्क लगाकर रहे।

संक्रमित व्यक्तियों से दूर रहे (Avoiding contact with infected people)

अगर आप एबोला से संक्रमित व्यक्ति की देखभाल कर रहे हैं तो सावधान रहे एवं उनके खून,कोशिकाओं एवं शारीरिक द्रव्यों से बचकर रहें।

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