Family planning, risks, breast feeding, and best time for second pregnancy – परिवार नियोजन, खतरे, स्तनपान एवं दूसरी गर्भावस्था का सही समय

परिवार में पहले बच्चे के जन्म लेते ही कई सारे परिवर्तन आ जाते हैं। दुबारा गर्भवती होने का कोई निर्धारित समय या नियम नहीं है। यह बात उस महिला के समय, काम करने की शैली, शरीर की ऊर्जा एवं आर्थिक अवस्था पर निर्भर करती है। दंपत्ति को एक और बच्चे की ज़िम्मेदारी संभालने के लिए तैयार रहना चाहिए। दूसरी बार गर्भावस्था के दौर से गुजरने के लिए माँ का स्वास्थ्य अच्छा होना चाहिए।

बच्चे को जन्म देने के बाद महिलाओं के लिए मासिक धर्म का सही प्रकार से ना होना काफी आम बात है। कुछ महिलाओं में इस स्थिति में समस्या काफी गंभीर हो जाती है जब वे सालों तक मासिक धर्म की प्रक्रिया पूरी करने में असमर्थ होती है।

अतः इस समय महिलाओं के मन में दोबारा गर्भवती बनने को लेकर दुविधा उत्पन्न होती है। अगर कोई महिला अपने दो बच्चों के बीच अंतर रखना चाहती है तो वह गर्भनिरोधक दवाओं का इस्तेमाल कर सकती है। बच्चे के जन्म को रोकने तथा उर्वरता के समय के बारे में इंटरनेट पर काफी जानकारी दी गयी है।

परिवार नियोजन (What is Family planning?)

परिवार नियोजन के साधन, बच्चों में अंतर रखना परिवार नियोजन का अहम अंग है। अगली बार गर्भावस्था की प्रक्रिया से गुजरने के पहले कई चीज़ों के बारे में विचार करना चाहिए। बच्चों में काफी कम या काफी लंबा अंतर रखने से माँ और बच्चे दोनों पर ही हानिकारक असर पड़ता है।

गर्भावस्था के दौरान टालने योग्य खाद्य पदार्थ

गर्भावस्था की समस्याएं – बच्चों में अंतर न रखने के नुकसान (What are the risks of having close pregnancies?)

बच्चा पैदा होने के 12 महीने के अंदर दोबारा गर्भवती होने से कई नुकसान होते हैं, जैसे-

1. इससे गर्भनाल में छेड़छाड़ का ख़तरा रहता है तथा इसके अंतर्गत गर्भनाल पूरी तरह गर्भाशय से अलग भी हो जाने की भी संभावना रहती है।

2. पहले बच्चे का जन्म सिजेरियन प्रक्रिया से होने की स्थिति में दोबारा जल्दी गर्भवती होना मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

3. ऐसी गर्भावस्था में दूसरे बच्चे में आटिज्म के लक्षण पाए जाने की संभावना रहती है।

4. गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य, अगर अंतर कम हो तो बच्चा समय से पहले पैदा होने की और बच्चे का वज़न सामान्य से कम होने की भी संभावना रहती है।

5. दोबारा जल्दी गर्भवती हो पहली गर्भावस्था की मानसिक एवं शारीरिक थकान से उबरने का मौक़ा नहीं मिलता।

6. दूसरी गर्भावस्था (garbhavastha ki samasya) से पहले महिला की योनि को पहली गर्भावस्था से उबरने का समय नहीं मिलता।

मां के गर्भ के अंदर बच्चे की उत्तेजना तकनीक

बच्चों में ज़्यादा अंतर रखने के नुकसान (What are risks involved in space pregnancies too far apart?)

बच्चों में लम्बा अंतर माँ के लिए तथा उसके पहले बच्चे के लिए काफी चिंता की बात होती है। जो महिलाएं पहले और दूसरे बच्चे में 4 साल या उससे ज़्यादा का अंतर रखती हैं, उन्हें उच्च रक्तचाप तथा मूत्र में अतिरिक्त प्रोटीन निकलने की काफी अधिक संभावना रहती है। इस स्थिति में बच्चा समय से पहले पैदा होने तथा बच्चे का वज़न कम होने की काफी संभावना रहती है। कुछ डॉक्टरों के अनुसार पहले बच्चे के बाद महिलाओं की गर्भधारण करने की शक्ति में काफी इज़ाफ़ा होता है। परन्तु जैसे जैसे समय गुज़रता है, बच्चे के पैदा होने में मदद करने वाले गुण धूमिल पड़ने लगते हैं।

गर्भनिरोधक विकल्पों का प्रयोग करने का समय (Time of using contraceptives)

दोबारा बच्चे को जन्म देने से बचने का सबसे प्रभावी तरीका सेक्स (sex) से परहेज करना है। अगर आप अपने पहले बच्चे के जन्म के तुरंत बाद से ही दोबारा सेक्स करना शुरू कर देते हैं तो आपके फिर से गर्भवती होने की संभावनाएं काफी ज़्यादा हो जाती हैं। आप पहले बच्चे के जन्म के बाद से ही सेक्स के वक़्त गर्भनिरोधक विकल्पों का इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं।

दूसरा बच्चा पैदा करने का सही समय (What is the best time to have the second baby?)

पहली तिमाही में शरीर में आने वाले परिवर्तन

दुसरे बच्चे के जन्म सम्बन्धी सरे फैसले माँ बाप के हाथ में होते हैं। इसका कोई एक नियम नहीं है क्योंकि यह हर दंपत्ति की स्थिति में अलग अलग होता है। कुछ माएं सोचती हैं कि पहला बच्चा जितना बड़ा होगा, दूसरी बार गर्भधारण करना (pregnancy me hone wali problem,) उतना ही आसान होगा। इस समय तक पहला बच्चा अपने काम स्वयं करने लगेगा और उसे अधिक देखभाल की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे माँ बाप को दुसरे बच्चे पर ध्यान देने का ज़्यादा समय मिलेगा। वहीँ दुसरे तरह के माता पिता यह सोचते हैं कि दो बच्चों के बीच में अंतर कम रहने से दोनों को एक साथ पालना आसान रहेगा और बाद में आप खुद पर भी ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

कई शोधों द्वारा यह पाया गया है कि दो बच्चों के बीच का सबसे अच्छा अंतर दो वर्षों तक का होता है। यह अंतर एक माँ के शरीर को पिछले बच्चे के समय शरीर को हुई हानि को कम करने का अवसर प्रदान करता है।

एक दंपत्ति को आपस में बैठकर दुसरे बच्चे का निर्णय लेना चाहिए और यह निर्णय लेते समय यह ध्यान में रखना चाहिए कि वे वित्तीय, मानसिक और शारीरिक रूप से अगले बच्चे के आगमन के लिए तैयार हैं।

माँ की उम्र का दूसरी गर्भावस्था पर प्रभाव (Does the age of the mother affect second pregnancy?)

३८ की उम्र की हो जाने के बाद महिलाओं के लिए दो गर्भधारणों के बीच ज़्यादा समय देना उचित नहीं होता। ३० साल से कम उम्र की महिलाएं जिन्हें स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई समस्या नहीं है, बच्चों में अंतर रखने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र हैं। हालांकि महिलाओं के लिए ४० की उम्र की हो जाने के बाद भी गर्भधारण करने में कोई पाबंदी नहीं है।

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गर्भावस्था में अंतर रखने से बच्चों पर प्रभाव (How does spacing between two pregnancies affect the children?)

गर्भावस्था में अंतर का बच्चों के जीवन पर भी काफी प्रभाव पड़ता है। जो बच्चे दो साल या उससे कम अंतर के दौरान पैदा होते हैं, वे दो साल से ज़्यादा के अंतर में होने वाले बच्चों की तुलना में कई ज़्यादा कठिनाइयों का सामना करते हैं। यहाँ पर भी बच्चों में अंतर रखने का कोई एक नियम नहीं है। यह माता पिता द्वारा लिया जाने वाला एक निजी फैसला होता है। कई बार बच्चा ना चाहते हुए भी बच्चा पैदा हो जाता है। इस बार में कोई भी फैसला बच्चों में कम अंतर या ज़्यादा अंतर के फायदे तथा नुकसान सोचकर ही करें।

बच्चे के जन्म के बाद माँ के लिए सुझाव (Measures to take to mothers after giving birth)

जन्म देने के तुरंत बाद (Immediately after giving birth)

इस समय एक महिला और उसके साथी के लिए सबसे ज़रूरी कार्य है खुद की तथा नवजात शिशु की अच्छे से देखभाल करना। माँ को जहां स्वस्थ होने के लिए कुछ समय की दरकार होती है, वहीँ बच्चे को भी इस समय प्यार और दुलार की काफी ज़रुरत होती है। इस शुरूआती समय को आराम करके तथा माँ के शरीर को काफी मात्रा में पानी और पोषक पदार्थों से स्वस्थ बनाकर बिताना चाहिए। अस्पताल में रहने के दौरान तो एक माँ की देखभाल डॉक्टर और नर्सें कर लेंगी, पर घर वापस आने के बाद अच्छी देखभाल स्वस्थ होने के लिए काफी आवश्यक है।

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बच्चे के जन्म के बाद का खानपान (Postpartum Nutrition)

पहले बच्चे को जन्म देने के बाद खानपान का ध्यान रखना भी काफी ज़रूरी हो जाता है। सही और संतुलित खानपान बरकरार रखें, जिसमें काफी मात्रा में पोषक पदार्थों की मात्रा निहित हो। बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद पोषण का काफी महत्वपूर्ण स्थान होता है। एक महिला को अपने शरीर को अच्छी प्रकार से पोषित करने की ज़रुरत होती है, जिससे उसकी मरम्मत हो सके तथा सही प्रकार से दूध का उत्पादन हो सके। अपने बच्चे के लिए दूध का उत्पादन करने हेतु एक महिला को पोषक तत्वों की ज्यादा आवश्यकता होती है, जिसके अंतर्गत उसे हर रोज़ करीबन 300 कैलोरीज का सेवन करने की ज़रुरत होती है। जन्म देने के तुरंत बाद का समय वज़न घटाने की तरफ ध्यान देने का नहीं होता है। एक माँ को चाहिए कि वह इन पलों का आनंद उठाए तथा अपने नए बच्चे की तरफ ध्यान केन्द्रित करे।

प्रसव के बाद व्यायाम और स्वास्थ्य (Exercise and fitness)

थोड़ी सी चहलकदमी तथा अपने नवजात शिशु को गोद में उठाना ही वे दो व्यायाम हैं, जिन्हें करने की क्षमता पहले कुछ हफ्तों में एक महिला के अन्दर होती है। अगर एक महिला काफी ज्यादा चुस्त दुरुस्त है, तो उसे गर्भावस्था के समय से पहले और इसके दौरान व्यायाम अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने पर बच्चे को जन्म देने के बाद वह जल्दी ही वापस व्यायाम कर सकती है। इस समय इस बात को याद रखना काफी ज़रूरी है, कि एक माँ का शरीर कुछ दिनों पहले ही काफी थका देने वाले और दर्दनाक अनुभव से गुजरा है और उसे पूरी तरह से ठीक होने की आवश्यकता है। इसके अलावा अगर एक महिला की सिजेरियन (cesarean) प्रक्रिया से डिलीवरी (delivery) हुई है तो उसे ठीक होने में सामान्य गर्भावस्था के मुकाबले ज्यादा समय लगेगा। इस समय उसके द्वारा हर काम कर पाना संभव नहीं होगा। सामान्य रूप से बच्चे के जन्म की स्थिति में महिलाओं के लिए काफी ज़रूरी है कि वे 4 से 6 हफ़्तों के अन्दर व्यायाम करना शुरू कर दें।

अगले बच्चे की चाह ना होने पर गर्भनिरोधक का प्रयोग (If you don’t want another baby, then take contraceptives)

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यह काफी ज़रूरी है कि अभिभावक इस बारे में एक ठोस निर्णय अवश्य लें कि उन्हें अगला बच्चा चाहिए या नहीं। एक महिला बच्चे को जन्म देने के बाद किसी भी समय गर्भवती हो सकती है। अगर कोई महिला दोबारा माँ नहीं बनना चाहती, तो उसे अपने साथी के साथ इस विषय में बात करके गर्भनिरोधी विकल्पों के लिए अपने डॉक्टर से अवश्य मिलना चाहिए। जब एक महिला धीरे धीरे स्वस्थ होने की राह पर होती है, उस समय के लिए भी ऐसी स्थिति से बचने के लिए कई सुरक्षित और प्रभावी विकल्प मौजूद हैं। अभिभावकों को इन सारे उपलब्ध विकल्पों के बारे में अच्छे से जानकारी प्राप्त करनी चाहिए, जिससे कि उन्हें अपने परिवार के लिए सही निर्णय लेने में आसानी हो सके। अगर किसी जोड़े पर  दुसरे बच्चे को जन्म देने का दबाव है तो डॉक्टरों को सपोर्ट ग्रुप (support group) तथा अन्य ऐसे विकल्पों की जानकारी रहती है, जो ऐसे समय उपलब्ध होते हैं।

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