Herbal Supplements for Muscle Building – मांसपेशियों में वृद्धि के लिए आयुर्वेदिक पूरक पदार्थ

कई लोग कहते हैं कि जिम (gym) जाते हुए पूरक पदार्थों का सेवन करना सही नहीं होता क्योंकि ये विकास की प्राकृतिक प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ करते हैं। यह रासायनिक पूरक पदार्थों की स्थिति में सही हो सकता है परन्तु प्राकृतिक पूरक पदार्थों की स्थिति में हमेशा यह बात सच नहीं होती। ये पूरक पदार्थ प्राकृतिक पौधों एवं जड़ीबूटियों से प्राप्त किये जाते हैं और इनमें बाहर का कुछ भी मिलाया नहीं जाता है।

नीचे मांसपेशियों में वृद्धि करने वाले कुछ आयुर्वेदिक पूरक पदार्थों की सूची दी जा रही है।

अश्वगंधा (Ashwagandha)

Ashwagandha

भारतीय जिनसेंग (ginseng) के नाम से जानी जाने वाली यह जड़ीबूटी ना सिर्फ मांसपेशियों के निर्माण में सहायता करती है, बल्कि मस्तिष्क से जुड़े रोगों में भी फायदा पहुंचाती है। इसका प्रयोग मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। अश्वगंधा एक संस्कृत शब्द है जो दो शब्दों अश्व एवं गंधा से बना है जहाँ अश्व मतलब घोड़ा एवं गंधा मतलब महक है। इसका यह नाम इसकी सुगंध घोड़े की महक जैसा होने के कारण पड़ा है। यह सीधे तौर पर मांसपेशियों के निर्माण में वृद्धि नहीं करती परन्तु टेस्टोस्टेरोन (testosterone) के निर्माण में वृद्धि करती है। टेस्टोस्टेरोन हमारे शरीर की उर्जा के स्तर को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। यह भारी व्यायाम के समय हमारे दिल की धड़कन को नियंत्रित करने में भी सहायता करता है। अतः आप एकाग्रता से अधिक व्यायाम कर सकते हैं। इस तरह से यह पुरुषों में अनुर्वरता (infertility) का इलाज भी करता है। अश्वगंधा एक प्रसिद्ध जड़ीबूटी है जिसका प्रयोग व्यायाम करने वालों द्वारा भारी मात्रा में किया जाता है।

शतावरी (Shatavari)

Shatavari

शतावरी एक भारतीय जड़ीबूटी है जो भारत एवं नेपाल के हिमालयी भागों में पायी जाती है। यह श्रीलंका एवं अफ्रीका के कुछ भागों में भी उगती है। शतावरी को ऐस्पैरागस रेसेमोसस (Asparagus racemosus) के नाम से भी जाना जाता है। शतावरी का प्रयोग प्राचीन आयुर्वेदिक औषधियों में लम्बे समय से किया जाता रहा है। शतावरी हमारे शरीर के लिए आवश्यक कई खनिज पदार्थों एवं पोषक तत्वों का अच्छा स्त्रोत है। यह हमारे शरीर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत में भी मदद करता है। शतावरी में पानी सोखने की क्षमता होती है। यदि इसकी सही खुराक ली जाए तो यह आपके शरीर में पानी सोखता है। जब यह पच जाता है तो आपके शरीर को सुगठित बना देता है। इसके अलावा शतावरी का प्रयोग कब्ज़, पेट के छाले, मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों जैसे बेचैनी, तनाव आदि का इलाज करने में भी किया जाता है।

गोखरू (Gokhru)

Gokhru

गोखरू को ट्राइबुलस टेरेस्ट्रिस भी कहा जाता है एवं यह व्यायाम करने वालों के बीच काफी लोकप्रिय है। यह हमारे शरीर में ऊर्जा का उत्पादन करने एवं मांसपेशियां बढाने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। इसे पंक्चर वाइन (puncture vine) भी कहा जाता है। इस जड़ीबूटी का हर एक भाग अपनी गुणवत्ता की वजह से काफी मात्रा में प्रयोग किया जाता है। कुछ शोधकर्ताओं ने इस बात की पुष्टि की है कि गोखरू का सेवन कुछ पूरक पदार्थों एवं संतुलित आहार के साथ करने पर शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा गोखरू का प्रयोग किडनी की समस्याओं, गुप्त रोगों, छाती में दर्द, दिल की धड़कन आधारित समस्याओं, रक्तचाप आदि में भी किया जाता है। कई महिलाएं गोखरू का प्रयोग बच्चे के जन्म से पहले अपने स्तन में दूध का उत्पादन करने के लिए करती हैं।

सफ़ेद मुस्ली (Safed Musli)

Safed Musli

यह उन प्रजातियों में से है जो आसानी से उपलब्ध नहीं होती। सफ़ेद मुस्ली प्राकृतिक रूप से भारत में पैदा होती है। यह लम्बे समय से भारतीय आयुर्वेद का हिस्सा रही है। इसका प्रयोग कई क्षेत्रों में किया जाता है। इसका अनुर्वरता, गुप्त रोगों आदि से ग्रस्त रोगियों पर काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है। अतः यह शरीर की ऊर्जा का स्तर बढ़ाता है। आजकल इसके अंश भी व्यायाम करने वालों के लिए उपलब्ध है। इसके अलावा सफ़ेद मुस्ली जोड़ों के दर्द एवं मधुमेह की समस्या से निपटने में भी प्रयुक्त होती है। यह शरीर में चीनी का स्तर कम रखती है।