Waterborne cholera remedies in Hindi – जल से उपजी कॉलरा की बीमारी को प्राकृतिक रूप से दूर करने के घरेलू नुस्खे

कॉलरा पानी की गन्दगी से होने वाली सबसे आम बीमारी है। कॉलरा आँतों को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाली बीमारी है। इससे काफी गंभीर संक्रमण हो सकते हैं और पेट का निचला हिस्सा सबसे अधिक प्रभावित होता है। यह पानी से उपजी बीमारी है जो बारिश के मौसम में काफी आम है। यह काफी सामान्य है एवं इसके होने की संभावना काफी ज़्यादा है। कॉलरा के लक्षणों में दस्त, बार बार गीली, पतली एवं भूरे रंग की दस्त होना प्रमुख है। दस्त के साथ मतली एवं उल्टी भी होती है।

प्रभावित व्यक्ति के पेट में काफी ज्यादा मरोड़ें उठती हैं तथा शरीर में पानी की कमी के करण वह काफी प्यासा एवं थका हुआ अनुभव करता है। उसके शरीर का तापमान ज्यादा होता है, पर उसे ठण्ड लगती है एवं नब्ज़ कमजोर हो जाती है। उसका शरीर ठंडा एवं त्वचा सूखी एवं झुर्रियों युक्त हो जाती है। आवाज़ भारी एवं मूत्र गहरे रंग का आता है। रक्तचाप कम हो जाता है एवं मरोड़ें असहनीय हो जाती हैं। कॉलरा एक प्रकार के जीवाणुओं के कारण होता है, जिन्हें विब्रियो कॉलरा (Vibrio cholera) कहा जाता है। ये एक शक्तिशाली विष या एंडोटोक्सिन (endotoxin) छोड़ते हैं। अतः यह बीमारी मक्खियों या जीवाणुओं द्वारा पानी दूषित होने की वजह से फैलती है।

कॉलरा के श्रेष्ठ घरेलू नुस्खे (Top best home remedies for cholera)

कॉलरा के इलाज हेतु नींबू (Lemon to treat cholera)

दिल की सुरक्षा के टिप्स हिंदी में

नींबू की मदद से कॉलरा का श्रेष्ठ इलाज किया जा सकता है क्योंकि यह कॉलरा बैसिली (cholera bacilli) को ख़त्म करने में मदद करता है। नींबू में एंटीबैक्टीरियल (antibacterial) गुण होते हैं जो कॉलरा उत्पन्न करने वाले एवं आँतों में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को समाप्त करते हैं। यह काफी कम समय में काम करता है। यह महामारी के दौरान कॉलरा की रोकथाम करने में काफी प्रभावी एवं भरोसेमंद है। नींबू विटामिन सी (Vitamin C) से भरपूर होता है एवं प्रतिरोधक प्रणाली में सुधार करने में मदद करता है। यह मीठे अथवा नमकीन पेय पदार्थों के रूप में ग्रहण किया जा सकता है। कॉलरा से बचाव के लिए नींबू को अपने खानपान में शामिल करें।

अदरक का इलाज (Ginger treatment)

अदरक में काफी मात्रा में एंटीबायोटिक (antibiotic) गुण होते हैं। अदरक कॉलरा के संक्रमणों के खिलाफ लड़ता है। यह दस्त, पेट की मरोड़ों एवं पेट के दर्द को दूर करने में सहायता करता है। अदरक का छोटा टुकड़ा लें एवं इसमें एक चम्मच शहद मिलाएं। इन्हें अच्छे से मिश्रित करके पी लें। अदरक एवं शहद का मिश्रण आपकी पाचन प्रक्रिया में सुधार लाने में मदद करता है। वैकल्पिक रूप से अदरक की चाय बनाएं एवं इसमें अदरक के छोटे टुकड़े डाल दे। इसमें एक कप पानी, थोड़ी सी काली मिर्च, तुलसी के पत्ते एवं पुदीने के पत्ते मिश्रित करें। इन सबको कुछ देर तक अच्छे से उबालें। इस मिश्रण को छानकर थोड़ा सा शहद मिलाएं। इसे अच्छे से पियें एवं इसमें आयुर्वेदिक चाय के कुछ कप मिश्रित करें। इससे आपको बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।

अमरुद के जड़ की छाल का इलाज (Guava root bark treatment)

अमरुद के पत्तों के जड़ की छाल कॉलरा की रोकथाम करने में काफी प्रभावी साबित होती है। इसका मुख्य कारण इसमें भरपूर मात्रा में मौजूद टैनिंस (tannins) हैं। इसे बनाने के लिए अमरुद के जड़ की छाल को पानी में डाला जाता है एवं एक घना काढ़ा बनाया जाता है। यह उल्टी एवं दस्त के लक्षणों में कमी लाता है। तीस ग्राम अमरुद के जड़ की छाल लें एवं इसे आधा लीटर पानी के साथ उबालें। सुनिश्चित करें कि पानी अच्छे से उबले एवं अंत में एक तिहाई कम हो जाए। त्वरित आराम के लिए इसका सेवन दिन में दो बार करें।

कॉलरा के लिए मेथी के बीज (Fenugreek seeds for cholera)

मेथी के बीज कॉलरा का इलाज करने में काफी उपयोगी साबित होते हैं। मेथी के बीजों में काफी उच्च मात्रा में म्युसिलेज (mucilage) मौजूद होता है जो दस्त पर काफी अच्छा काम करता है। यह दस्त की गंभीरता को भी कम करता है। एक चम्मच मेथी के बीज का पाउडर, 2 चम्मच सादी दही एवं भुने जीरे का पाउडर लें एवं इन्हें अच्छे से मिलाएं। तुरंत परिणामों के लिए इसका सेवन दिन में 2-3 बार करें। एक चम्मच मेथी पाउडर को एक गिलास गर्म पानी में डालें एवं दस्त से मुक्ति पाने के लिए इस मिश्रण के एक गिलास का सेवन दिन में दो बार करें।

loading...