Hormonal imbalance for men in Hindi – पुरुषों में हार्मोनल असमानता

आज के समय में पुरुषों में हार्मोनल असमानता काफी आम है एवं ज़्यादातर नज़रंदाज़ किया जाता है। आमतौर पर हॉर्मोन की असमानता महिलाओं के साथ जोड़ी जाती है, परन्तु पुरुष भी इस समस्या के शिकार होते हैं। 30 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में हॉर्मोन की कमी देखी जाती है एवं वे इस समय निराशा, स्वभाव में परिवर्तन एवं कमज़ोर काम जीवन की समस्या से जूझते हैं।

लक्षण (Symptoms)

वज़न बढ़ना (Gaining weight in the body)

महिलाओं में हार्मोनल असमानता

जाब शरीर में टेस्टोस्टेरोन (testosterone) नामक पुरुष सेक्स (sex) हॉर्मोन की कमी हो जाती है तो पुरुषों की मर्दानगी कम होने लगती है एवं उनकी मांसपेशियों का वज़न बढ़ने लगता है। शरीर में टेस्टोस्टेरोन कम होने से वसा का पाचन धीमा हो जाता है एवं इसके फलस्वरूप वज़न बढ़ जाता है। इसके अलावा काफी मात्रा में तनाव की वजह से शरीर में कोर्टिसोल (cortisol) की मात्रा बढ़ने से शरीर में वसा कोशिकाएं जमा हो जाती हैं।

कामेच्छा में कमी (Low libido)

टेस्टोस्टेरोन में कमी या असमानता के साथ शुक्राणुओं की संख्या कम होने लगती है। टेस्टोस्टेरोन एक लुटेनाइज़िंग एवं फॉलिकल स्टिमुलेटिंग (luteinizing and follicle-stimulating) हॉर्मोन है जो प्रजनन प्रणाली को काफी सुचारू स्थिति में रखता है। कोर्टिसोल की मात्रा के बढ़ने से पुरुष अपनी कामेच्छा खोने लगता है।

इरेक्टाइल डिसफंक्शन (Erectile dysfunction)

शरीर में थाइरोइड एवं टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन की असमानता से इरेक्टाइल डिसफंक्शन होता है। टेस्टोस्टेरोन का स्तर यह निर्धारित करता है कि आपका शरीर अपना कार्य करने में कितना प्रभावी है। पुरुषों में उच्च प्रोलेक्टिन (prolactin) की मात्रा से भी इरेक्टाइल डिसफंक्शन होता है। प्रोलेक्टिन दूध का उत्पादन करने वाला हॉर्मोन है जो महिलाओं में मुख्य रूप से पाया जाता है, पर पुरुषों में पीयूष ग्रंथि सामान्य स्थिति में प्रोलेक्टिन की कम मात्रा उत्पादित करती है। पर जब इसका उत्पादन अधिक होने लगता है तो यह इरेक्टाइल डिसफंक्शन का कारण बनता है।

थकान (Fatigue)

हार्मोनल असमानता से ग्रस्त पुरुष रात में 8 घंटे सोने के बाद भी थकान का अनुभव करते हैं। जब शरीर में टेस्टोस्टेरोन की मात्रा कम हो तो यह अनिद्रा एवं थकान का कारण बनती है। तनाव में वृद्धि से अधिक कोर्टिसोल उत्पादित होता है जो निद्रा चक्र को प्रभावित करता है। इस हॉर्मोन का उच्च स्तर थकान एवं कमजोरी का कारण बनता है।

चिंता (Depression)

घरेलू नुस्खे को अपनाएं और हार्मोनल असंतुलन से छुटकारा पाएँ

जब शरीर में टेस्टोस्टेरोन की मात्रा कम हो तो यह आपके स्वभाव को चिडचिडा एवं ख़राब बना देती है। इसका मुख्य करण अति कार्यशील थाइरोइड ग्रंथि है। थाइरोइड हौसला, दुःख, ख़ुशी आदि के पनपने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

घरेलू नुस्खे (Home remedies)

मक्का की जड़ की चाय पियें (Drink maca root tea)

मक्के की जड़ में एडाप्टोजेन्स (adaptogens) होते हैं जो पुरुषों के सेक्स हॉर्मोन्स का उत्पादन बढ़ाते हैं। यह उर्वरता बढ़ाता है एवं हाइपोथाइरोइडिस्म (hypothyroidism) का प्रभाव उलटता है। मक्के की जड़ पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन, आयोडीन, जिंक, फॉस्फोरस, स्टेरोल्स, फाइबर एवं प्रोटीन (potassium, calcium, iron, iodine, zinc, phosphorous, sterols, fiber, and protein) भरपूर मात्रा में होता है। यह शरीर में स्वास्थ्य एवं ऊर्जा का संचार करता है।

  1. एक कप आयुर्वेदिक चाय, योगर्ट (yogurt), रस या पानी एक चौथाई चम्मच मक्के के जड़ की पाउडर में मिलाएं।
  2. इस मिश्रण का सेवन कुछ हफ़्तों तक रोजाना करें।
  3. आप मक्के के पाउडर की मात्रा आने वाले कुछ हफ़्तों में एक चौथाई से 2 चम्मच कर सकते हैं।

धूप से संपर्क (Sunlight exposure)

पीयूष ग्रंथि मानव शरीर में काफी मात्रा में हॉर्मोन का उत्पादन करने के लिए जानी जाती है। इसका स्वास्थ्य शरीर में विटामिन डी (Vitamin D) की मात्रा से प्रभावित होता है। यह एस्ट्रोजन (estrogen) की मात्रा घटाता है तथा आपकी भूख एवं वज़न को प्रभावित करता है। विटामिन डी की कमी से पैराथाइरोइड (parathyroid) हॉर्मोन बाहर निकलता है, जो पीयूष ग्रंथि को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। अपने शरीर को रोजाना सूरज की रोशनी के संपर्क में लाएं जिससे कि इसे विटामिन डी मिल सके। दूध, कॉड लिवर (cod liver) तेल, तैलीय मछली एवं अंडे विटामिन डी से भरपूर होते हैं।