How eyesight changes according to age & height – क्या उम्र और लम्बाई के साथ आंखों की रौशनी भी बदलती है?

यह एक जाना माना तथ्य है कि जिस तरह उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक शक्ति घटती है, उसी प्रकार आँखें भी 60 या उससे ज़्यादा की उम्र आते आते कमज़ोर होने लगती हैं। उम्र बढ़ने के साथ आँखों में आई समस्याओं में प्रेसबायोपिया तथा मोतियाबिंद प्रमुख है। कई और समस्याएं भी हैं जो बढ़ती उम्र के साथ आँखों को अपना शिकार बनाती हैं जैसे ग्लूकोमा, मधुमेह सम्बन्धी रेटिनोपैथी तथा आँखों में धब्बे पड़ना। आँखों की देखभाल, नीचे उम्र बढ़ने के साथ आँखों में आए परिवर्तन सम्बन्धी तथ्य दिए गए हैं।

उम्र के साथ आँखों की रौशनी में बदलाव (Age-Related Vision Changes)

1. यह स्थिति करीब 40 साल के आसपास लोगों को होती है जिसमें हम पास की वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते और सामान्य मुद्रा में पढ़ना भी हमारे लिए संभव नहीं होता। यह एक सामान्य परेशानी है जो कि आँखों के लेंस के कड़े हो जाने की वजह से होती है। प्रेसबायोपिया की स्थिति उम्र बढ़ने के साथ और भी ज़्यादा खराब होती जाती है जिसके फलस्वरूप आपको पढ़ने के लिए एवं दूर नेत्र दृष्टि तथा पास नेत्र दृष्टि दोनों के लिए चश्मे बनवाने पड़ते हैं।

2. मोतियाबिंद भी बुढ़ापे में होने वाली एक काफी आम समस्या है। यह परेशानी 65 से 70 वर्ष की आयु में ज़्यादा सामने आती है। आजकल होने वाली मोतियाबिंद की सर्जरी पूरी तरह सुरक्षित एवं सौ फीसदी असरदार है। मोटियाबिंद का उपचार उसके कड़े होने के पहले ही करवा लेना चाहिए।

नेत्र रोग – आँखों में धब्बे पड़ने की समस्या (Macular degeneration)

बच्चों के लिये बेहतरीन आंखों की देखभाल की सलाह

वयस्क लोगों में अंधेपन की यह एक प्रमुख समस्या है। उम्र आधारित मैकुलर डिजेनरेशन या आँखों पर धब्बों की समस्या आँखों के मेक्यूला,जो की रेटिना का एक छोटा सा भाग होता है, में परेशानी की वजह से होती है। यह रेटिना का वो भाग है जो कि काफी संवेदनशील होता है और आँखों के पीछे की ओर होता है।

आंखों के रोग – ग्लूकोमा (Glaucoma)

ग्लूकोमा कुछ रोगों का समूह है जो कि आँखों के ऑप्टिक नसों पर हमला करता है और इन्हें उम्र के साथ और भी कमज़ोर बनाता है। यह आँखों पर दबाव बनाता है जिससे की ऑप्टिक नसें,जो कि मस्तिष्क से जुडी होती हैं,खराब होती हैं। अगर आँखों के ऑप्टिक नसों पर ये दबाव बनता रहता है तो एक समय ऐसा आता है जब व्यक्ति पूरी तरह देखने में असमर्थ हो जाता है। इस बीमारी के कोई लक्षण नहीं होते और एक बार कम दिखने की समस्या शुरू होने के बाद ही इसका पता चल पाता है।

कमज़ोर आंखों – मधुमेह आधारित रेटिनोपैथी (Diabetic retinopathy)

यह लम्बे समय तक मधुमेह रहने की वजह से होता है जिसका इलाज भी नहीं किया गया हो। मधुमेह के हर रोगी को थोड़ी मात्रा में यह बीमारी होती है पर कुछ रोगी ऐसे भी होते हैं जिनमें इस बीमारी का उच्च स्तर पाया जाता है।

उम्र के फलस्वरूप आँखों की अन्य समस्याएँ (Effects of age on other eye structures)

प्रेसबायोपिया तथा मोतियाबिंद के अतिरिक्त आँखों में उम्र बढ़ने के साथ कई और समस्याएं भी होती हैं :-

आंखों की बीमारी – पुतलियों का छोटा होना (Reduced pupil size)

आँखों की सुरक्षा के आसान और प्राकृतिक तरीके

जो मांसपेशियां पुतलियों का फैलना एवं रौशनी के संपर्क में आने पर इनकी क्रिया को तय करती है उनपर भी उम्र का काफी प्रभाव पड़ता है। इससे पुतलियां छोटी हो जाती हैं तथा सामान्य रौशनी भी सहन नहीं कर पाती हैं। यही कारण है कि ६० की उम्र से ज़्यादा के व्यक्ति तेज़ रौशनी का सामना करने में खुद को असमर्थ महसूस करते हैं। फोटोक्रोमिक लेंस तथा एंटी रिफ्लेक्टिव चश्मे इस समस्या किए निदान में सहायक सिद्ध होते हैं।

आंखों की समस्या – सूखी आँखें (Dry eyes)

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में आंसुओं का उत्पादन कम हो जाता है जिसकी वजह से आँखें सूखी हो जाती हैं। सूखी आँखें जलन एवं अन्य परेशानियां कड़ी करती हैं। नकली आँसुओं की बूँदें आँखों को नम रखने में काफी अहम भूमिका निभाती हैं और सूखी आँखों के लक्षण से मुक्ति दिलाती हैं।

रंग पहचानने में परेशानी (Decreased colour vision)

आँखों की रोशनी की समस्या, रेटिना में मौजूद कोशिकाएं जो रंग पहचानने का काम करती हैं उम्र बढ़ने के साथ अपनी संवेदनशीलता खोने लगती हैं। इससे रंग ज़्यादा चमकदार दिखते हैं तथा दो रंगों के बीच के अंतर को पहचानना भी काफी मुश्किल होता है।

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