Babies in the womb of overweight mothers – अतिरिक्त वज़न वाली माओं के गर्भ में पल रहे बच्चे की देखभाल

बच्चे के जन्म से पहले हर माँ तनाव में रहती है। हर माँ चाहती है कि उनका बच्चा स्वस्थ हो और उसके जन्म में किसी किस्म की कोई दुश्वारियां ना हों। वे चाहती हैं कि बच्चे के पैदा होने के समय किसी प्रकार की कोई कठिनाई न आए। पर ये सारी चीज़ें संभव नहीं है अगर बच्चे की माँ का वज़न ज़्यादा है। स्त्री रोग विशेषज्ञ हर तिमाही में आपका एवं आपके बच्चे का वज़न नापती है। वो माँ का bmi जांचती हैं तथा उसे नोट करती हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है जिससे बच्चे की जन्म के पूर्व अच्छी देखभाल हो सके।

गर्भ में बच्चा – गर्भ में बच्चे की देखभाल के तरीके (Ways of caring baby in the womb, garbh me bacha ka vikas)

आप bmi कैलकुलेटर की मदद से घर पर ही bmi जान सकते हैं। आप गर्भावस्था के समय अच्छा कर रही हैं या नहीं इसका पता लगाने के लिए हर तिमाही में वज़न नापा जाता है। अगर गर्भवती होने से पहले किसी महिला की bmi ३० है तो इसका मतलब है कि बच्चे को जन्म देने में उसे थोड़ी परेशानी हो सकती है। इसका असर बच्चे के रीढ़ की हड्डी एवं मस्तिष्क पर पड़ता है। पर इस समस्या का भी समाधान है। गर्भावस्था के पहले १२ हफ़्तों में फोलिकल एसिड लेने से बच्चे को ntd से प्रभावित होने से बचाया जा सकता है। ऐसी भी कई स्थितियां होती हैं जब आपका bmi ३० से ज़्यादा हो जाता है। ऐसी स्थिति में उस महिला को कम ५ मिलीग्राम फोलिक एसिड का सेवन करवाना काफी आवश्यक है।

जिन महिलाओं का bmi ३० से ज़्यादा होता है उनमें विटामिन डी की कमी होती है। इससे बच्चे पर भी प्रभाव पड़ता है और उसके दांत और हड्डियां कमज़ोर हो जाते हैं। इस समय रोज़ाना विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा का सेवन करना काफी आवश्यक है जिससे कि गर्भ में पल रहे बच्चे की देखभाल हो सके।

गर्भावस्था के दौरान ग्रीन टी का सेवन

बच्चे के जन्म के बाद भी विटामिन डी लेना ना छोड़ें।एक बार बच्चे को स्तनपान करवाने के बाद वह आपके दूध से विटामिन डी प्राप्त करता है।

गर्भ में बच्चे का विकास – बच्चे के बड़े होने के नुकसान (The risk of having large baby)

ऐसा भी हो सकता है कि आपका वज़न सही न रहने की वजह से आपके बच्चे का आकार अन्य बच्चों की तुलना में बड़ा हो। ऐसा भी हो सकता है कि उसका आकार काफी छोटा हो। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नली से पोषक पदार्थ निकल नहीं पाते क्योंकि वहां अतिरिक्त मांस जमा होता है। अगर आपका bmi ३० से ज़्यादा है तो बच्चे को प्री इक्लेम्पसिया हो सकता है। अगर बच्चे का आकार बड़ा हुआ तो माँ और बच्चे दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

गर्भ में बच्चे का वजन – बच्चों के लिए स्वास्थ्यवर्धक भोजन (Healthy food for baby care)

गर्भ में भ्रूण का विकास, अगर आप अपने बच्चे को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो निम्नलिखित खानपान फायदेमंद होगा :-

1. पर्याप्त मात्रा में अंडे, ताज़ी मछली, दाल तथा ताज़ा मांस खाएं

2. काफी मात्रा में फल और सब्ज़ियाँ खाएं।

3. दुग्ध उत्पाद ग्रहण करें

4. स्वास्थ्यवर्धक कार्बोहाइड्रेट्स जैसे साबुत अनाज, पास्ता, ब्रेड आदि खाएं।

गर्भ में बच्चे की हलचल – इस स्थित्ति में करने लायक कार्य (Practice some activities)

गर्भधारण के लिए महीने का सबसे सही दिन कौन सा?

कुछ लोगों को गर्भावस्था के दौरान किये जाने वाले कार्य के बारे में ग़लतफ़हमी है। वे समझते हैं कि गर्भावस्था के दौरान सिर्फ आराम करना चाहिए। पर ये बिलकुल गलत है। इस समय भारी सामान उठाने और ऊंचा चढ़ने से मना किया जाता है। पर इस समय हलकी चहलकदमी तथा हल्का व्यायाम सेहत के लिए अच्छा होता है। इससे आपका बच्चा भी गर्भ में स्वस्थ रहेगा। बच्चा होने के समय भी बच्चा काफी आराम से माँ के गर्भ से निकलता है।

Subscribe to Blog via Email

Get Hindi tips to your inbox everyday