How to get rid of water retention in face? – चेहरे पर जल अवधारण से छुटकारा कैसे पाएं?

ऐसा होने के पीछे कई कारण है। जल अवधारण कई कारणों से हो सकता है।  यह सोडियम (sodium) की मात्रा बढ़ जाने, विटामिन (vitamin) की कमी, असमान संचार, तनाव, एलर्जी (allergy), किडनी, लीवर (kidney, liver), ह्रदय या फेफड़ों की समस्याओं, दवाइयों के साइड इफेक्ट्स (side effects), हॉर्मोन्स (hormones) या अन्य कारणों से हो सकता है। जल अवधारण एक समस्या है जो पानी की कमी की वजह से होता है। यह आमतौर पर पैरों एवं टखनों में अधिक होता है।  इस स्थिति में शरीर में अत्याधिक मात्रा में द्रव्य इकट्ठे हो जाते हैं।  जल अवधारण की समस्या तब उत्पन्न होती है जब शरीर 70 प्रतिशत के सामान्य अनुपात से अधिक पानी शरीर में जमा करने लगता है।

जल अवधारण की समस्या का इलाज निम्नलिखित कदमों के माध्यम से किया जा सकता है (The issue of water retention can be sorted with the following steps)

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शरीर में जल अवधारण पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर रोका जा सकता है। रोज़ाना कम से कम 8 गिलास पानी पियें। जहां पानी की कमी एक कारण होती है, इसके फलस्वरूप शरीर में पानी की कमी भी उत्पन्न हो सकती है। पर्याप्त पानी के सेवन से शरीर की प्रणालियों की अशुद्धियाँ बाहर निकलती हैं एवं जल अवधारण की संभावना काफी कम हो जाती है।

बड़े शोधों के अनुसार कुकरौन्धा के मूत्रवर्धक प्रभाव होते हैं। यह पोटैशियम (potassium) से भरपूर होता है जो शरीर में सोडियम का स्तर नियंत्रित करने में सहायता करता है। यह मैग्नीशियम (magnesium) की भारी मात्रा से युक्त होने के कारण मासिक धर्म से पूर्व बलूनिंग (ballooning) को भी रोकता है। कुकरौन्धा कई प्रकार से काम में लाया जा सकता है। आप कुकरौन्धा के 500 ग्राम पूरक पदार्थ के रूप में इसे दिन में तीन बार भी ले सकते हैं। एक और विकल्प के अनुसार आप कुकरौंधे की जड़ीबूटी को सुखाकर एवं 10 मिनट तक गर्म पानी में भिगोकर इसका सेवन कर सकते हैं।  इसका सेवन भी दिन में तीन बार किया जा सकता है।

जहां यह बात सही है कि खाने में अतिरिक्त नमक से शरीर में जल अवधारण अधिक होता है, वहीँ यह भी सच है कि चीनी की भी इसमें काफी बड़ी भूमिका होती है। क्योंकि चीनी पाचक ग्रंथि से इन्सुलिन (insulin) अतिरिक्त मात्रा में निकालता है, अतः इसकी अधिक मात्रा शरीर में सोडियम एवं द्रव्यों की मात्रा को बढ़ाता है। अतिरिक्त द्रव्यों को बाहर निकालने के लिए अपने खानपान में सलाद, पोल्ट्री (poultry), सब्जियों, अंडे, अवोकेडो (avocado), नारियल एवं जैतून के तेल को शामिल करें।

पोटैशियम की शरीर में मात्रा बढ़ाने के लिए केले, खुबानी, किशमिश, संतरे, पालक, आडू एवं मशरूम (mushrooms) आदि खाद्य पदार्थों का सेवन करें। यह काफी आवश्यक है क्योंकि शरीर में जल अवधारण का एक प्रमुख कारण पोटैशियम की कमी है।

पोटैशियम की शरीर में मात्रा बढ़ाने के लिए केले, खुबानी, किशमिश, संतरे, पालक, आडू एवं मशरूम (mushrooms) आदि खाद्य पदार्थों का सेवन करें। यह काफी आवश्यक है क्योंकि शरीर में जल अवधारण का एक प्रमुख कारण पोटैशियम की कमी है।

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विटामिन बी-6, बी-5 एवं डी (B-6, B-5 and D) शरीर में पानी के जमाव को कम करने में काफी सहायक होते हैं। जहां विटामिन बी-5 ताज़ी सब्जियों एवं मांस में पाया जाता है, वहीं बी-6 लाल मांस एवं ब्राउन राइस (brown rice) में पाया जाता है। विटामिन-डी सूरज की रोशनी से शरीर को प्राप्त होता है।

कई लोगों का मानना है कि आयुर्वेदिक चाय भी एक बेहतरीन मूत्रवर्धक है। यह ना सिर्फ शरीर की अशुद्धियाँ दूर करता है, बल्कि शरीर से अतिरिक्त पानी को भी बाहर करता है। अजवाइन आधारित इस हर्बल चाय का सेवन दिन में 3 बार करें। एक गिलास में करीब 5 से 10 मिनट के लिए अजवाइन को उबालें एवं हर बार आधा कप पियें।  नींबू एवं अजवाइन के रस का मिश्रण भी शरीर में जल अवधारण की समस्या को कम करने में फायदेमंद साबित होता है।

गर्म पानी में नींबू के रस एवं शहद का मिश्रण भी शरीर से अतिरिक्त द्रव्यों के जमाव को बाहर निकालने में सहायक होता है।

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