How to ask questions wisely – सही प्रश्न कैसे पूछें? समझदारी से कैसे करें सवाल?

प्रश्न पूछना कोई मुश्किल या पेंचीदा काम नहीं है, हालांकि प्रश्न पूछकर एक सही क्रम में उत्तर प्राप्त कर अपनी जिज्ञासा को शांत करना भी एक महत्वपूर्ण बात है जिसके लिए कुछ खास बातें दिमाग में रखनी पड़ती है। जब प्रश्न पूछने की बारी आती है तो इसके लिए उस व्यवस्था या संस्थानकी अहम भूमिका होती है।

अगर आप किसी शैक्षणिक संस्थान का हिस्सा हैं और आपका सवाल अपने प्रोफेसर या लेक्चरर से है तो इसके लिए आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि जवाब आपके ज्ञान की वृद्धि और आपकी जानकारी की ज़रूरत को पूरा करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा। इसके उलट, अगर आप एक संवाददाता हैं और आप किसी पोलिटिकल लीडर से सवाल कर रहे हैं तो आपके उद्देश्य और कारण बिल्कुल भिन्न होंगे। यह आपके प्रश्न पूछने के तरीके पर भी निर्भर करता है।

इस आलेख में हम कुछ ऐसे बिन्दुओं पर प्रकाश डालेंगे जो आपको यह समझने में मदद करेगा कि बुद्धिमानी के साथ कैसे प्रश्न किया जाये कि आपका प्रश्न महत्वपूर्ण और बुद्धिमान प्रतीत हो। इससे पहले यहाँ एक बात और भी बताना ज़रूरी है कि कैसे आपके द्वारा पूछा गया कोई सवाल या सवाल पूछने का तरीका आस पास के वातवर्ण या माहौल के प्रभाव से बदल सकता है और आपके पद या आपके प्रश्न पूछने के उद्देश्य को परिवर्तित कर सकता है।

बुद्दिमानी वाले प्रश्नों का चयन करें (How to ask a question correctly – Look for Intelligent Questions)

बुद्धिमानी के साथ कोई सवाल करने के लिए यहह सबसे पहले ज़रूरी है कि आप बुद्दिमान प्रश्न का चुनाव करें। ऐसे सवाल जिनका जवाब बिल्कुल स्पष्ट हो और जो अधिकांश लोगों के लिए सामान्य तौर पर साफ हो, ऐसे सवालों को पूछना आपको लोगों के सामने मूर्ख साबित कर सकता है। अगर आप किसी इंटरव्यूह के दौरान किसी उम्मीदवार के सामने हों या अगर आप संवाददाता हो और आपके समक्ष कोई नेता हो तो आपका सवाल क्या होना चाहिए? प्रश्न ऐसा होना चाहिए जो उत्तरदाता के दिमाग में कुछ उलझन पैदा कर दे जिसे सुनने वाले अधिकांश लोग उस आशय के प्रति स्पष्ट हो जाएँ जबकि सरोता वर्ग भी यह समझने में समर्थ हो जाए कि प्रश्न ज़रूर उलझाने वाला है लेकिन इसके बिन्दु बिल्कुल स्पष्ट व साफ हैं। आप इस प्रश्न को पूछने के बाद दोबारा भी पूछ सकते हैं ताकि आप भी आश्वस्त हो जाएँ कि आपने जो भी पूछा है उसका कोई हिस्सा या पहलू छूटा नहीं।

इसके साथ ही कोई होशियारी भरा सवाल पूछने के लिए यह बात भी दिमाग में रखना ज़रूरी है कि प्रश्न ऐसा हो कि प्रश्न पूछने से उसमें निहित सभी विषय स्पष्ट हो जाएँ। अगर आप किसी शैक्षणिक संस्थान में प्रश्न कर रहे हैं तो इससे यह भी प्रदर्शित होता है कि आप चर्चा में गंभीरता से ध्यान दे रहे हैं और उसके प्रत्येक बिन्दु को ध्यानपूर्वक सुन रहे हैं।

सही प्रश्न का ढांचा तैयार करें (How to ask questions the smart way – Frame the question correctly)

सही प्रश्न या सवाल ही सब कुछ नहीं होता। प्रश्न को पूछने के पहले सही और सटीक क्रम में जमाना और उसे उत्तरदाता की ओर प्रेषित करना भी एक महत्वपूर्ण काम है ताकि आपकी समस्या या उलझन को उत्तरदाता सटीक तरीके से समझ कर आपका समाधान कर सके। बहुत से लोग अच्छे प्रश्न करते हैं लेकिन उन प्रश्नों को सही क्रम में जमकर ठीक तरह से पूछ पान एमें असफल होते हैं जिससे उन्हें सही हल या उत्तर नहीं मिल पता इसके साथ ही जिससे सवाल पूछा गया है वह भी प्रश्न के प्रति पूरी तरह से साफ नहीं हो पाता। और इन सब का सबसे घातक परिणाम यह होता है की प्रश्नकर्ता मूर्ख साबित हो जाता है। तो अगर जब भी आपके मन में कोई सवाल हो तो उसे पूछने के पहले सही क्रम व ढांचे में तैयार कर लें, ताकि आपके द्वारा पूछे गए प्रत्येक बिन्दु पर प्रकाश पड़ सके और प्रश्न के साथ प्रश्न पूछने का क्रम भी बुद्धिमानी भरा हो।

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व्याकरण पर ध्यान दें (How to ask questions to get information – Take care of your grammar)

अगर आपने कोई ऐसा सवाल पूछा है व्याकरणसंबंधी अनेक त्रुटियाँ हों तो इसे समझना न केवल मुश्किल हो जाता है बल्कि यह श्रोताओं से समक्ष आपकी छवि को भी बिगाड़ देता है। तो जब भी आप कोई सवाल पूछें तो यह सुनिश्चित कर लें कि आपके कहे गए वाक्यों में किसी भी तरह की व्याकरणगत कोई गलती नहीं है। साथ ही एक बार इस बात पर भी गौर कर लेना उचित होगा कि आपको अपने पूछे जाने वाले प्रश्न में किस स्थान पर विराम चिन्ह लगाना है, ताकि सवाल को समझना और भी आसान हो जाए।

प्रश्नावली संक्षिप्त बनाएँ (Make your question short)

यह एक बहुत ही सामान्य नियम है, जब भी अप कोई प्रश्न पूछते हैं तो वह सारगर्भित होना चाहिए, इससे आपकी विद्वत्ता और समझदारी का भी पता चलता है। अगर आपका प्रश्न बहुत लंबा होगा तो ऐसा हो सकता है कि आप वास्तविक मुद्दे से भटक जाएँ और आपको अपने सवाल का सही जवाब न मिले। एक सही और संक्षिप्त रूप में प्रश्न तैयार करना भी एक कठिन काम है, लेकिन अगर आप सही प्रश्न नहीं पूछेंगे तो उत्तरदाता भी आपको सही जवाब नहीं बता पाएगा। तो ध्यान रखें कि आपका प्रश्न छोटा, स्पष्ट और संतुलित हो।

अपने प्रश्नों को सही तरीके से विस्तारित करें (Articulate your question in the right way)

अपने प्रश्न को सही रूप से विस्तार देना भी एक कला है जो यह दर्शाती है कि आप कितने समझदार है और आपको इस विषय में कितना ज्ञान है, साथ ही आप और अधिक जानने के भी इच्छुक हैं। अपने प्रश्नों के बीच में अनावश्यक विराम देने वाले शब्दों जैसे हम्म.. अहह.. आदि का प्रयोग न करें। इससे ऐसा प्रतीत होता है जैसे आप आगे बोलने के लिए शब्दों की तलाश कर रहे हैं। जहां पूर विराम लगा हो, वहाँ रुक जाएँ, न कि अनावश्यक शब्दों का प्रयोग करें। इन सब के साथ इस बात का भी खास ध्यान रखें कि आपकी आवाज साफ और ऊंची तो हो लेकिन इसमें शोर न झलके।

प्रश्न करते समय कॉन्फिडेंट रहें (Be confident while asking a question)

आप एक मूर्खतापूर्ण प्रश्न को भी सही बॉडी लैंगवेज़ की मदद से चतुराई से पूछ सकते हैं। आपकी आवाज में किसी तरह की थकान या कंपकपाहट नहीं होनी चाहिए। आप जो भी प्रश्न करें वह साफ और सही स्वर में होना चाहिए। आपकी आवाज में किसी भी प्रकार कि चिंता या नर्वसनेस न हो।

प्रश्न पूछते समय अपनी शैली या लहज़े का खास खयाल रखें (Be careful about the tone)

प्रश्न पूछते समय सही स्वर या टोन का होना बहुत महत्वपूर्ण मायने रखता है। जब आप किसी लेक्चरर से अपना प्रश्न पूछते हैं या फिर इंटरव्यूह के दौरान प्रतिभागी से प्रश्न करते हैं तो यह बात न=बहुत महत्वपूर्ण होती है कि किस लहजे में सवाल किया है। जैसे अगर अप पत्रकारिता के क्षेत्र से संबंध रखते हैं तो आपका सवाल जिस लहजे में पूछा जाता है उस पर निर्भर करता है कि आपको अपने सवाल का कैसा उत्तर मिलता है। हमेशा शालिन भाव से प्रश्न करना चाहिए। सवाल पूछते समय विनम्र बने रहें।

सही बॉडी लैंगवेज़ के साथ प्रश्न पूछें (Maintain the right body language)

जब भी आप किसी स्थान में कोई सवाल पूछते हैं तो इसमें आपका लहजा और आपका स्वर बहुत महत्व रखता है, साथ ही आप किस तरह अपना सवाल पूछ रहे हैं और आपका शारीरिक हाव भाव कैसा है, इस बात पर भी निर्भर करता है की आपका मानसिक स्तर किस तरह का है। प्रश्न करते समय बार बार जुबान का लड़खड़ाना, उंगली को होंठों से दबाना या नाखून काटना आदि नकारात्मक संकेत होते हैं जो आपके प्रश्न को मूर्खतापूर्ण साबित कर सकते हैं। यहाँ यह बात मायने नहीं रखती कि आप कितने बुद्धिमान हैं या आपका प्रश्न कितना चतुराई भरा है। इसके विपरीत जब आप सीधे बैठे हुये या खड़े होकर अपना प्रश्न सामने वाले से आंखे मिलाकर पूछते हैं तो इससे आपकी बुद्धिमानी और आत्मविश्वास का पता चलता है।

सुलझे व अनसुलझे तथ्यों को अपने प्रश्न में जोड़ें (Add what you understand before asking what you don’t)

यह एक बहुत ही सुलझा हुआ तरीउका है जिसमें आप यह साबित कर सकते हैं कि जिस बात या विषय पर चर्चा हो रही है आप उसे गंभीरता से सुन व समझ रहे हैं, इसके लिए आपको अपने सवालों में उन बातों का जिक्र करना चाहिए जो आपने पहले सुन कर समझ लिए, साथ ही उन बातों को भी अपने सवाल में जगह स=दें जो आपके समझ में नहीं आई, इसे उत्तरदाता को यह आभास होगा कि आप उनकी बातों को गंभीरता से ले रहे हैं।

अपने प्रश्नों को इस तरह रेखांकित करें (For example, frame your question in this way)

मैं समझ गया कि क्यों कई कंपनी नें अपने वाटर बोतल के प्लांट को इस खास जगह पर स्थापित किया लेकिन क्या आप मुझे एक बार फिर बताएँगे कि उन्होनें अचानक इसे स्थापित क्यों किया?

किसी प्रश्न को इस तरीके से रूपांकित करने से सामने वाले व्यक्ति को यह एहसास होगा कि आप उसकी बातों में रुचि ले रहे हैं और ज़्यादा से ज़्यादा इस बारे में जानने को उत्सुक हैं। आप बड़ी ही गहराई से सारी बातों को ध्यानपूर्वक सुन रहे हैं और इसका कोई ही हिस्सा मिस नहीं करना चाहते।

आस पास के माहौल के अनुकूल बनें (Adjusting with the environment)

जब कभी भी समझदारी से प्रश्न करने की बात आती है तो यह बात बहुत महत्व रखती है कि आप किस परिस्थिति में है। जैसे अगर आप एक छात्र हैं और अपना सवाल कक्षा में लेक्चरर से पूछ रहे हैं तो आपके सवाल में शालीनता और शिष्टाचार होना बहुत ज़रूरी है। ऐसे प्रश्न करने से हमेशा बचें जो लापरवाही प्रदर्शित करते हों, जिसे आपके प्रोफेसर कोई तवज्जो न दें। एक ही प्रश्न को बार बार घूमा फिरा के न पूछें।

आप किसी भी क्षेत्र में क्यों न हों, चाहे वो पत्रकारिया का क्षेत्र हो या वकालत का या शिक्षण संस्थान हो। आपको विषय के बारे में गहराई से जानने के बाद ही प्रश्न करना उचित होता है, उपर ऊपर कि साथी बातों को सुनकर प्रश्न करने से बचें।

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