Balance breast size during breast feeding – स्तनपान के दौरान स्तन के आकार को संतुलित कैसे रखे?

हर महिला चाहती है कि वह स्तनों के आकार को ठीक तरह से बनाये रखे। यह महिला के बाहरी रूप को अच्छा दिखने में मदद करता है, लेकिन एक बच्चे को जन्म देने के बाद स्तनपान महिला के द्वारा किया जाता है। बच्चे के लिए जमा दूध से स्तन का आकार धीरे धीरे बढता है। माँ बच्चे को अधिक अवधि के बाद स्तन से दूध पिलाती है तो दूध का संचय बहुत हद तक बढ़ जाता है। आपने कभी इस बारे में विचार नही किया होगा। सबसे पहले आप अपने स्तन से बच्चे को दूध पिला सकती है, लेकिन धीरे धीरे आसानी से माँ अपने बच्चे को दूध पिलाने के लिए उसका ध्यान केन्द्रित कर सकती है  लेकिन यह करने से आप अपने स्तन का उचित आकर खो सकती है। अपने बच्चे को दूध पिलाते हुए आपको अपने स्तन के बीच संतुलन साधने की तकनीक सिखने की जरुरत है।

बच्चे को जन्म देने के बाद कई जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। अगला कदम बच्चे की अच्छे से देखभाल करना होता है। आपको सिर्फ इस बात को सुनिश्चित करना है कि आपके बच्चे को अच्छा खाना, नींद और आराम प्राप्त हो। यह काम एक माँ से बेहतर कोई नहीं कर सकता। स्तनपान एक महत्वपूर्ण कार्य है जिसका अहसास हर माँ अपने बच्चे के लिए करती है। पर कई नयी माएं अपने बच्चे को स्तनपान करवाते समय काफी परेशानियों का अनुभव करती हैं। दूध जमा होने की वजह से महिलाओं के स्तन काफी भारी हो जाते हैं। अतः स्तनपान के समय दो स्तनों में बराबरी रखना अनिवार्य रखना अनिवार्य है। पर ऐसे कई तरीके हैं जिनकी मदद से आपके स्तनों का आकार संतुलित रह सकता है।

आपके स्तन संतुलन के लिए स्तनपान के तरीके (Ways to balance your breast while breast feeding)

जन्म के समय वज़न कम होने के कारण तथा कम वज़न वाले बच्चे की देखभाल

स्‍तनपान करवाने (stanpan karwana) के लिए टिप्‍स कम दूध वाले स्तन से शुरू करे (Start with the least full side)

आपके एक स्तन में दुसरे पक्ष की तुलना में कम दूध होता है। आपको बच्चे को दूध पिलाना कम दूध वाले स्तन से  शुरू करना चाहिए प्रकति ने इस तरह से बच्चे को माता के दूध पिलाने की प्रक्रिया बनायीं है, की यह कभी समाप्त नही होगा। जितनी अधिक अपने बच्चे को दूध पिलाएँगी उतना ही माँ के स्तन में दूध का उत्पादन होगा। आप ये कभी ना सोचे की इससे दूध स्तनो में खत्म हो जायेगा क्यों की यह थोड़े समय बाद फिर से बन जाता है।

स्तनपान के पक्ष में परिवर्तन (Switch sides while breast feeding)

स्तनपान कराने की युक्तियाँ, स्तन के एक ही पक्ष से बच्चे को दूध पिलाना मां के लिए अनुकूल नहीं होता है। इससे निपल्स में दर्द और स्तन बढ़ सकते हैं आपको स्तनों को बदलते रहना चाहिए। जब माँ के दूध का एक पक्ष समाप्त हो गया है तब स्तन से दूध दौकनी बाहर नही करना चाहिए। पक्ष को बदले और अपने बच्चे को माँ के दूध पिलाने की ख़ुशी का आनंद ले। जब माँ के दूध का एक पक्ष समाप्त हो गया है तो यह आपके शरीर का संकेत है कि विशेष पक्ष में दूध उत्पादन की गति धीमी हो गई है।

स्‍तनपान करवाने के लिए टिप्‍स 15 से 20 मिनिट के लिए स्तनपान (Breastfeeding ke liye tips feed for 15 to 20 minutes)

आपको स्तनपान में अपने बच्चे के लिए एक नियमित प्रक्रिया करनी चाहिए। आप अपने बच्चे को 15 से 20 मिनिट की अवधि पर अपने स्तन के दूध बच्चे को पिला सकती है, यह आपके शरीर के लिए भी नुक्सान नही होगा। यहाँ तक एक लम्बे समय के लिए माँ के दूध बच्चे को पिलाने में दर्द और पीड़ा मिलती है और अगर 15 से 20 मिनिट के अंतराल में बच्चे को स्तनपान कर रहे हो तो इससे बच्चे को अधिक पोषण मिलेगा।

ब्रेस्ट का आकर, स्तन का आकार बढने से (Increasing the size of breast)

बच्चे को चुप कैसे कराएं

पहले की तुलना में महिलाओ में स्तन का आकार बढता है हालाँकि कुछ महिलाओ के स्तन का आकार अभी भी छोटा ही है। और अगर आपके एक ही स्तन का आकर बढ़ रहा है तो बच्चे को कम दूध आने वाले स्तन से स्तनपान कराये इससे उस स्तन में भी दूध का उत्पादन बढ़ जायेगा और दोनों स्तनों के आकर सामान हो जायेंगे।

हर डॉक्टर माँ का दूध पिलाने की सिफारिश करते है । इस तरह नवजात शिशु को सभी प्रकार का पोषण माँ के दूध के द्वारा ही मिलता है, बाजार में उपलब्ध होने वाले दूध में यहाँ पोषक तत्व आपके बच्चो को नहीं मिलता है इसलिए अपने बच्चे को माँ का दूध ही पिलाये। लेकिन, कुछ महिलाये बच्चे को दूध पिलाने में असमर्थ होती है उनके लिए बाज़ार में पोषक तत्वों वाले दूध उपलब्ध है। जिन महिलाओ के निप्पल का आकर छोटा होता है पूरी तरह से विकसित नहीं हो पता वह महिलाये अपने बच्चे को दूध पिलाने में असमर्थ होती है। इन महिलाओ को अपने स्तन के आकर के लिए विशेष रूप से ध्यान  देने की जरुरत है। अगर स्तन के एक ही पक्ष में दूध का उत्पादन हो रहा है तो दुसरे स्तन को भी ध्यान दे। दोनों स्तनों को ध्यान दे कर आप अपने स्तनों के आकर को संतुलित कर सकती है।

छोटा स्तन पहले (Smaller breast first)

जब आप नया नया स्तनपान करवाना शुरू करती हैं तो आपको इस बात को लेकर काफी परेशानी होती होगी कि बच्चे को दूध पिलाते समय स्तनों को संतुलित कैसे किया जाए। इसके लिए सबसे पहला नुस्खा यह है कि सबसे पहले छोटे स्तन पर ध्यान केन्द्रित करें। अपने बच्चे को छोटे स्तन से दूध पिलाना आरम्भ करें, क्योंकि वहाँ दूध का जमाव कम होता है। बच्चों की आदत होती है कि वे पहली बार दूध पीते समय निपल्स (nipples) जोर से चूसते हैं। अतः छोटे स्तन से ही उन्हें दूध पिलाना सही रहेगा, क्योंकि इससे दूध का स्त्राव सही तरह से होगा।

स्तनों के विभिन्न आकारों के बारे में जानें (Know about different breast sizes)

जब आप एक बच्चे को जन्म देती हैं तो यह बात काफी सामान्य है कि आपके स्तनों का आकार एक जैसा नहीं होगा। एक बड़ा होगा तो दूसरा छोटा होगा। पर अगर आप इस बात को लेकर चिंता कर रही हैं, तो यकीन मानिए कि इसमें चिंता करने जैसा कुछ भी नहीं है। जब बच्चे दूध पीते रहते हैं तो हर बच्चे के दूध पीने वाले स्तन के चुनाव का तरीका अलग अलग हो सकता है। अतः ज़ाहिर तौर पर एक स्तन बड़ा और एक स्तन छोटा हो जाता है।

बच्चे का पहला टुकड़ा – बच्चे का पहला ठोस आहार

अपने बच्चे को दोनों स्तनों से दूध पिलाएं (Make your baby consume both sides)

अगर आप बच्चे की देखभाल करते हुए अपने दोनों स्तनों का आकार एक जैसा रखना चाहती हैं तो अपने बच्चे में ऐसी आदत का विकास करें कि वह आपके दोनों स्तनों से दूध पी सके। अगर आप उसे दोनों स्तनों से बारी बारी से दूध पिलाने में सफलता प्राप्त कर सकीं तो इससे बेहतर बात और कुछ हो ही नहीं सकती। इससे आपके बच्चे की मुद्रा में भी परिवर्तन आएगा और आपके दोनों स्तनों का आकार भी एक समान रहेगा। इसके अलावा जब आपका बच्चा स्तनों पर जोर से काटेगा तो आपको ज़्यादा दर्द का अनुभव भी नहीं होगा।

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