How to manage cardiac disease during pregnancy? – गर्भावस्था के दौरान हृदय रोग को कैसे संभाले करें?

दिल की बीमारी आजकल काफी गंभीर समस्या बन गयी है। यह समस्या खासतौर पर तब बढ़ जाती है जब आप अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों का सेवन करने लगते हैं। आपके लिए ऐसे विकल्प खुले रखना काफी ज़रूरी है जिससे आपको दिल की बीमारी की समस्या से छुटकारा प्राप्त होता है। शोधकर्ताओं ने यह पाया है कि गर्भवती महिलाओं के लिए दिल की बीमारी काफी गंभीर समस्या मानी जाती है। इससे माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंचता है। ऐसे कई तरीके हैं जिनकी मदद से आप गर्भावस्था के दौरान होने वाली दिल की समस्याओं को दूर भगा सकते हैं।

गर्भावस्था को हृदय प्रणाली की महत्वपूर्ण जरूरत होती है। गर्भावस्था के दौरान हृदय प्रणाली में कई शारीरिक परिवर्तन होते हैं। हृदय रोग का उपचार, गर्भवती महिला को यदि हृदय रोग की समस्या हो रही है तो इसका कारण अपने परिवार में हृदय रोग से पीड़ित किसी व्यक्ति या वंशानुगत की वजह से होता है। इसलिए गर्भवती महिला को प्रसव के बाद और पहले विशेष प्रबंधन और देखरेख की जरूरत होती है।

हृदय की समस्या के साथ गर्भवती महिला में परिवर्तन और प्रभाव, बीमारी के प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्री-डिलीवरी (समय से पहले प्रसव) (Pre-delivery)

गर्भावस्था के दौरान उचित परामर्श दिया जाना चाहिए। ह्रदय रोग की समस्या जन्मजात है जिसकी जानकारी प्रजनन आयु में सभी महिलाओं को दी जानी चाहिए। समय समय पर डॉक्टर से परामर्श लेते रहना चाहिए। गर्भवती महीला का इलाज एक ऐसे डॉक्टरो की टीम के अंतर्गत होना चाहिए जिसमे की प्रसूति, हृदय रोग विशेषज्ञों, और एनेस्थेटिस्ट शामिल हो।

समुचित व्यवस्था पास के स्थानीय अस्पतालों में किया जाना चाहिए। प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य हृदय प्रणाली की देखरेख, ओवरलोडिंग की संभावना को कम करने के लिए और दवाओं द्वारा मौजूदा हालत का ख्याल रखना होता है।

हृदय रोग से बचाव – डिलिवरी की विधि (Mode of Delivery)

गर्भावस्था के चौथे महीने में रक्त्स्राव के कारण

दिल की बीमारी के कारण ज्यादातर महिलाओं को योनि प्रसव पसंद आता है। प्रसूति संकेत  और हृदय की समस्याओं के कारण जल्दी प्रसव की माँग की जाती है। योनि प्रसव मे दर्द से राहत के लिए एनलजेसिया की खुराक देना, श्रम उत्प्रेरण, और दवाव बढ़ाने के लिए उपकरणों की सहायता ली जाती है ताकि माँ को प्रसव के लिए ज़्यादा ज़ोर न लगाना पड़े।

गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य – प्रसवोत्तर (Post-partum – pregnancy me dekhbhal)

प्रसवोत्तर अवधि या प्रसव के उच्च स्तर की देखभाल और अवलोकन के बाद के समय में कम से कम दो सप्ताह के लिए अस्पताल में रहना ज़रूरी है। छाती में संक्रमण या अन्य समस्याए प्रसव का एक माह पूर्व या प्रसव के बाद 5 महीने तक कभी भी हो सकते है।

विशिष्ट उच्च जोखिम स्थितियों (Specific high-risk conditions – garbhavastha ki samasya)

प्रेगनेंसी के दौरान रोधगलन (Myocardial infarction)

रोधगलन पिछले कुछ वर्षों से महिलाओं की हृदय से मौत का एक प्रमुख कारण था। प्रसव के समय में थ्रंबोलाइसिस के कारण रक्तास्राव का जोखिम हो सकता है। गर्भवती महिलाओं में तीव्र कोरोनरी सिंड्रोम के उपचार के लिए पहली पसंद परक्यूटेनीयस कोरोनरी हस्तक्षेप है।

महाधमनी विच्छेदन (Aortic dissection)

गर्भावस्था के दौरान अपनी खूबसूरती और अपनी देखभाल

महाधमनी विच्छेदन मार्फन सिंड्रोम के साथ महिलाओं में एक विशेष जोखिम है यह जोखिम प्रसव के तुरंत बाद और भी ज़्यादा बढ़ जाने की संभावना होती है। मित्राल प्रकार के रोग से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के तृतीयक केंद्रों को विशेषज्ञों के द्वारा प्रबंधित किया जाना चाहिए।

गर्भावस्था में देखभाल – पल्मोनरी उच्च रक्तचाप (Valvular heart disease)

पल्मोनरी धमनी उच्च रक्तचाप गर्भावस्था के दौरान बहुत ही उच्च जोखिम वहन करती है और मृत्यु दर 50% तक बढ़ जाती है। इस हालत की चर्चा गर्भाधान से पहले की जानी चाहिए।यदि गर्भावस्था जारी रखा जाना है, तो उचित व्यवस्था के द्वारा एक बहु विशेषज्ञ टीम को सारी इंतज़ामो के द्वारा देखरेख की जानी चाहिए।

गर्भावस्था में देखभाल – उपसंहार (Pulmonary hypertension – pregnancy me dekhbhal)

समाज मे ऐसा माना जाता है की जिन महिलाओ को ह्रदय से संबंधित बीमारी है उन्हे गर्भ धारण नही करना चाहिए। लेकिन आज के आधुनिक उपचारो द्वारा इस समस्या का निदान गर्भावस्था के दौरान आसानी से किया जा सकता है।अगर महिला गर्भवती है तो सभी प्रकार की जाँचे पहले से कर ली जानी चाहिए। कुछ विशेषज्ञ कहते है की अगर ह्रदय संचालन ठीक तरह से नही हो रहा हो तो ,गर्भावस्था के दौरान परिवर्तित होने वाले हारमोन ह्रदय के अच्छी तरह से संचालन मे मदत करते है। अगर कोई भी समस्या हो तो विशेषज्ञ के द्वारा पूरी तरह से विचार विमर्श और जाँच करा लिया जाना चाहिए।

पेरीपार्टम कार्डियोमायोपैथी (Peripartum cardiomyopathy)

पेरीपार्टम कार्डियोमायोपैथी गर्भवती महिलाओं को होने वाला ऐसा ह्रदय का रोग है जिसका कोई ठोस कारण पकड़ में नहीं आ पाता। यह समस्या बच्चे के जन्म से 1 महीने पहले शुरू होकर बच्चे के जन्म के 5 महीने तक रह सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

गर्भावस्था के दौरान परहेज करने वाले भोजन और पेय पदार्थ

अमाज में एक गलत धारणा फैली हुई है कि जिस महिला को दिल की कोई बीमारी है, उसका गर्भवती होना उचित नहीं है। पर आजकल के चिकित्सक इस बात की पुष्टि करते हैं कि दिल की बीमारी को गर्भावस्था के दौरान सही प्रकार से नियंत्रित किया जा सकता है। इस समय एक महिला के दिल की समस्या की जांच करना और इस बात का पता लगाना आवश्यक है कि गर्भावस्था सही विकल्प है भी या नहीं। ऐसे काफी कम मामले सामने आए हैं जब दिल की बीमारी की वजह से किसी गर्भावस्था के मामले में कोई गड़बड़ हुई हो। कई विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में आए हार्मोनल (hormonal) परिवर्तनों की वजह से दिल में कोई समस्या होने पर भी यह ठीक से काम करता है। पर जिन महिलाओं को दिल की बीमारी हो, वे बच्चा पैदा करने की बात सोचने से पहले किसी डॉक्टर को दिखाएं, जिससे कि उनकी गर्भावस्था के चरण और बच्चा दोनों ही स्वस्थ हों।

दिल की बीमारी को गर्भावस्था के समय नियंत्रित करने के उपाय (Ways to manage cardiac disease during pregnancy)

गर्भावस्था के दौरान वसा से परहेज करें (Avoid fat during pregnancy)

जब आप गर्भवती हों तो आपको अपने खानपान का ख़ास ख्याल रखना चाहिए। आपको अपने गर्भ में पल रहे बच्चे को स्वस्थ रखने के साथ ही खुद को भी स्वस्थ रखना ज़रूरी है। कई लोगों का मानना है कि एक महिला को गर्भावस्था के दौरान वसा का सेवन करवाने से वह और उसका बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं। पर यह बिल्कुल गलत तथ्य है। जो महिला गर्भवती हो, उसके लिए आदर्श भोजन तालिका बना लें जिसमें सैचुरेटेड वसा (saturated fat) की मात्रा बिलकुल ना हो।

दिल की समस्या का जल्दी पकड़ में आना (Early diagnosis of cardiac problem)

दिल की समस्या की जांच शुरूआती चरण में ही हो जानी चाहिए जिससे कि इसे तुरंत पकडकर इससे छुटकारा पाने की तरकीबें इजाद की जा सकें। एक बार बीमारी का कारण पता चल जाने पर इसका इलाज भी अच्छे से होता है। दिल की बीमारी को नियंत्रित करना तब काफी आसान होता है, जब आप इसकी जांच शुरूआती चरणों में ही कर लें।

गर्भावस्था के दौरान कुछ स्वास्थ्य समस्याएँ

देखभाल के चरण (Levels of care)

इस बात को सुनिश्चित करना काफी ज़रूरी है कि क्या गर्भावस्था के दौरान एक महिला को दिल की बीमारी की जांच की ज़रुरत पड़ेगी या नहीं। इस स्थिति में देखभाल के 3 चरण होते हैं, जिसका पहला चरण उन महिलाओं के लिए होता है, जो दिल की बीमारी की काफी गंभीर समस्या से जूझ रही हैं। ऐसे मरीजों के लिए किसी ख़ास क्लिनिक (clinic) में अलग से देखभाल की व्यवस्था की जानी ज़रूरी है। इसके बाद दूसरे चरण का उपचार आता है, जिसमें उन मरीजों पर ध्यान दिया जाता है, जिनके दिल का मर्ज़ ज़्यादा गंभीर नहीं है। यहाँ इस समस्या का निदान प्रसूति विशेषज्ञों और दिल की बीमारी के विशेषज्ञों के आपसी तालमेल से पूरी तरह संभव है। तीसरा चरण काफी सामान्य चरण होता है, जहां दिल की बीमारी से पीड़ित महिला का इलाज घर पर ही होता है। कुछ मामलों में बीमारी का इलाज क्षेत्रीय अस्पतालों में भी हो सकता है।

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