How to cure diabetes permanently – स्थायी रूप से मधुमेह किस प्रकार दूर करें

डॉक्टरों एवं शोधकर्ताओं के अनुसार यदि हमारे खानपान की आदतें जल्दी ना बदलीं तो हम सब मधुमेह के शिकार हो सकते हैं। यहाँ एक ध्यान देने योग्य बात यह है कि खराब भोजन हमेशा मधुमेह का कारण नहीं बनता, परन्तु अन्य आदतें जैसे कसरत ना करना एवं बाहर घूमने ना जाना भी मधुमेह का कारण हो सकती हैं।

मधुमेह की परिभाषा एवं इसके प्रकार (First, we will know what is diabetes and types of diabetes)

मधुमेह एक ऐसी स्थिति है जब हमारा शरीर इन्सुलिन का उत्पादन बंद कर देता है एवं हमारे शरीर में चीनी की मात्रा बढ़ जाती है।  इसके फलस्वरूप हमारी प्रतिरोधक क्षमता काफी कमज़ोर हो जाती है। अंतिम चरणों का मधुमेह जानलेवा भी हो सकता है एवं कैंसर, मोटापे, दिल की बीमारियों आदि का कारण भी बन सकता है।

ज़रूरत से अधिक मोटे व्यक्तियों में मधुमेह पनपने की काफी संभावना होती है।  मधुमेह मुख्यतः दो प्रकार का होता है:

टाइप 1 मधुमेह (Type 1 diabetes)

टाइप 1 मधुमेह तब होता है जब हमारी प्रतिरोधक प्रणाली हमारे अग्नाशय में मौजूद बीटा कोशिकाओं पर आक्रमण करती है।  बीटा कोशिकाएं हमारे शरीर में इन्सुलिन के उत्पादन के लिए ज़िम्मेदार होती हैं।  जब प्रतिरोधक प्रणाली in कोशिकाओं पर आक्रमण करती है तो इन्सुलिन का उत्पादन बंद हो जाता है।  इसके फलस्वरूप चीनी का स्तर बढ़ जाता है तथा हमें मधुमेह होने की संभावना में भी काफी वृद्धि होती है।  संक्रमित लोगों में से 10% व्यक्ति टाइप 1 मधुमेह के शिकार होते हैं।

टाइप 2 मधुमेह (Type 2 diabetes)

टाइप 2 मधुमेह हमें होने वाला सबसे सामान्य प्रकार का मधुमेह होता है।  इस स्थिति में हमारा शरीर हमारे अन्दर उत्पादित हो रहे इन्सुलिन पर प्रतिक्रिया नहीं करता जिससे कि यह इन्सुलिन का प्रभावी प्रयोग कर सके।  इससे हमारे शरीर में चीनी जमा होती रहती है एवं इसका प्रयोग ऊर्जा के उत्पादन के लिए नहीं हो पाता।  मधुमेह से ग्रस्त 90% मरीज़ इस प्रकार के मधुमेह से संक्रमित होते हैं।

मधुमेह का इलाज (Cure of diabetes)

ये दोनों मधुमेह एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं एवं उनके इलाज का तरीका भी भिन्न है।  टाइप 1 मधुमेह अंदरूनी शरीर द्वारा होता है जिसे ऑटोइम्यून (autoimmune) स्थिति के रूप में भी जाना जाता है।  परन्तु टाइप 2 मधुमेह हमारी जीवनशैली से अधिक जुड़ा हुआ है। टाइप 1 मधुमेह किशोरावस्था में होता है जबकि टाइप 2 आपकी जीवनशैली के हिसाब से किसी भी उम्र में हो सकता है।

कई स्थितियों में मधुमेह सम्पूर्ण रूप से ठीक नहीं हो सकता परन्तु आयुर्वेदिक पूरक पदार्थों एवं हमारी जीवनशैली को इस प्रकार नियंत्रित करने, कि हम चीनी का सेवन कम कर सकें,  के माध्यम से इसे नियंत्रित करना संभव है।

नीचे कुछ ऐसे पूरक पदार्थों के नाम दिए गए हैं जो मधुमेह स्थायी रूप से नियंत्रित करते हैं (Here are some of the supplements to control diabetes permanently):

क्रोमियम पाईकोलिनेट (Chromium Picolinate)

Chromium Picolinate

क्रोमियम पाईकोलिनेट के पक्ष में अधिक सबूत उपलब्ध नहीं हैं, परन्तु कई शोधों में देखा गया है कि क्रोमियम पाईकोलिनेट हमारे शरीर में इन्सुलिन की संवेदनशीलता को प्रभावित करता है। इसका अर्थ है कि टाइप 2 मधुमेह से ग्रस्त व्यक्ति इस औषधि को किसी भी रूप में ले सकते हैं।  यह हमारे शरीर की प्रभावी रूप से इंसुलि का प्रयोग करने में सहायता करता है।

दालचीनी (Cinnamon)

Cinnamon

दालचीनी एक जड़ीबूटी है जो काफी लम्बे समय से भारतीय घरों में प्रयुक्त होती रही है।  इसके हमारे शरीर पर कई सकारात्मक प्रभाव होते हैं।  यह शरीर में चीनी के स्तर को नियंत्रित करती है तथा भोजन का स्वाद भी बढ़ाती है।

मछली का तेल (Fish oil)

Fish oil

मछली के तेल में ओमेगा 3 फैटी एसिड्स (omega 3 fatty acids) होते हैं, जो इन्सुलिन के उपयुक्त प्रयोग के लिए आवश्यक होते हैं।  केवल इन्सुलिन ही अतिरिक्त चीनी का प्रभाव कम करके इसका प्रयोग ऊर्जा के स्त्रोत की तरह कर सकता है।  यदि इन्सुलिन ठीक से काम नहीं कर रहा तो मधुमेह होने की संभावना काफी अधिक हो जाती है।

बायोटिन (Biotin)

Biotin

पहले यह माना जाता था कि बायोटिन मानव शरीर में चीनी का स्तर नियंत्रित कर सकता है, परन्तु बाद में हुए और शोधों के बाद यह पाया गया कि बायोटिन मधुमेह के लिए उतना असरकारी नहीं है। परंतु जब बायोटिन का सेवन क्रोमियम पाईकोलिनेट के साथ किया जाए तो शरीर में चीनी का स्तर कम करने में सहायता प्राप्त होती है।

अल्फा लिपोइक एसिड (Alpha lipoic acid)

Alpha lipoic acid

अल्फा लिपोइक एसिड हमारे शरीर में चीनी के स्तर को नियंत्रित रखने में काफी सहायक होते हैं।  यदि आप मधुमेह से पीड़ित नहीं भी हैं तो भी आप मधुमेह के लक्षणों को दूर रखने के लिए इसका सेवन कर सकते हैं।  अल्फा लिपोइक एसिड मधुमेह के फलस्वरूप स्नायु में हो रहे दर्द पर काफी सकारात्मक प्रभाव छोड़ता है।