Mahagouri poojan vidhi in Navratra – नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी की पूजा विधि

शारदीय नवरात्रि में पूरे नौ दिन माता की पूजा की वजह से विशेष होते हैं। इस नौ दिनों में माता की नौ अलग अलग रूपों में पूजा की जाती है जिसके विभिन्न फल मिलते हैं। नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी की पूजा का विधान है। महागौरी का रूप अत्यंत सौम्य और गौर है अत्यधिक गौर वर्ण की वजह से ही इनका नाम गौरी या महागौरी पड़ा। माँ ने श्वेत वस्त्र धारण कर रखा है। इनकी सवारी बैल है। महागौरी की चार भुजाएँ हैं।

इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपरवाले बाएँ हाथ में डमरू और नीचे के बाएँ हाथ में वर-मुद्रा हैं। इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है।  इस सौम्य रूप को देखने से ही मन में स्नेहरूपी भक्ति जागृत होने लगती है। मटा का मनमोहक रूप उपासन से और भी सुंदर हो जाता है। महागौरी सभी विपदाओं को टालने वाली और मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी हैं। माँ दुर्गा की इस आठवी शक्ति का बड़े ही विनम्र भाव से स्मरण करना चाहिए।

स्त्रियाँ अपने सुहाग की रक्षा और कुशलता के लिए महागौरी की पूजा करती हैं। महागौरी की पूजा में श्वेत फूलों का प्रयोग किया जाना उत्तम होता है। फल, धूप अगरबत्ती और कपूर से माँ की वंदना करें। अलौकिक सिद्धि की प्राप्ति के लिए महागौरी की पूजा विशेष रूप से की जाती है। एकाग्र होकर पंचोपचार द्वारा माँ की पूजा अर्चना करें। साथ ही माँ को काँच की चुड़ियाँ और चुनरी भेंट करें। माँ सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाली हैं।

महागौरी माता सभी प्रकार की सिद्धियों की अधीश्वरी हैं इनकी उपासना से घर में सौहाद्र और मंगल निवास करता है। सुखी वैवाहित जीवन और परिवार में शांति के लिए माँ के इस रूप की पूजा खास लाभप्रद होती है।

महागौरी मंत्र (Mahagouri mantra in Hindi)

सर्वमंगल मंग्ल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके। 

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते।।

इस मंत्र का यथाशक्ति जाप करने से माँ प्रसन्न होकर भक्तों को मनचाहा वरदान देती हैं, पूरे भक्ति भाव व श्रद्धा से माँ का वंदन करना चाहिए।

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