Symptoms of jaundice in new born babies – नवजात बच्चों में जॉन्डिस (पीलिया) के लक्षण क्या क्या होते है ?

आपने नवजात बच्चों पर जॉन्डिस (पीलिया) के हमले के बारे में अवश्य सुना होगा। ये बच्चे के माँ बाप के लिए काफी चिंता की घडी होती है। हाल में हुए शोध के अनुसार जॉन्डिस का हमला उन बच्चों पर होने की आशंका अधिक होती है जिनका जन्म तयशुदा समय से पहले हो गया हो।

उदाहरण के तौर पर अगर बच्चे के जन्म की तिथि आज से 10 महीने बाद है और उस बच्चे का जन्म तयशुदा समय से 2 महीने पहले हो गया तो उसे प्रीमैच्योर या समय से पहले जन्म लेने वाला बच्चा कहा जाता है। इन बच्चों को जॉन्डिस होने की काफी ज़्यादा संभावना रहती है। शुरुआत में आपको बच्चे में जॉन्डिस के कोई लक्षण नज़र नहीं आएँगे, बल्कि ये लक्षण 5 से 7 दिन में आने शुरू होते हैं। ये जॉन्डिस 3 हफ्ते तक रहता है।

पीलिया के लक्षण – ऊपरी लक्षण (Superficial symptoms)

डॉक्टरों के अनुसार नवजात शिशु में जॉन्डिस में जॉन्डिस के कई लक्षण देखे जा सकते हैं। पहला लक्षण है बच्चे की त्वचा का रंग पीला पड़ना। यह पीलापन सिर से शुरू होता है और फिर शरीर के अन्य भागों में जैसे कि छाती और पेट में फैलता है। कुछ बच्चे काफी दुर्भाग्यशाली होते हैं क्योंकि उनके शरीर में यह पीलापन उनके हाथ और पैरों की उँगलियों तक फ़ैल जाता है। अगर आप शरीर का कोई ख़ास हिस्सा दबाएंगे तो वह हिस्सा और ज़्यादा गहरा पीला हो जाएगा।

सांवले बच्चों में रंग का बदलना (Changes of color with darker skin tone)

अगर किसी बच्चे की त्वचा का रंग गहरा है तो उसके शरीर में होने वाले परिवर्तनों का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है।

अतः आपको लक्षणों का पता करने के लिया अन्य तरीके अपनाने पड़ेंगे। इस स्थिति में पीला रंग उभरेगा :-

1. बच्चे के मुख के अंदर

2. बच्चे की हथेलियों पर

3. आँखों की सफेदी पर

4. पैरों की एड़ियों पर

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नवजात शिशु में जॉन्डिस के अन्य लक्षण (Other symptoms of Jaundice in new born baby)

1. शक्तिहीनता।

2. हमेशा नींद आना।

3.मल का रंग पीला पड़ना।

4. स्तनपान के दौरान दूध पीने में असमर्थ होना।

5.काफी ज़ोर से रोना।

6. गहरे पीले रंग का मूत्र निकलना।

डॉक्टरी सलाह लेने का समय (Time to seek medical advice)

अगर जन्म के 72 घंटों के अंदर ही जॉन्डिस के लक्षण साफ़ तौर पर दिखने लगते हैं तो आपको देर नहीं करनी चाहिए और जितनी जल्दी हो सके किसी डॉक्टर को दिखा देना चाहिए। पिलिया का इलाज, हालांकि जॉन्डिस में ज़्यादा चिंता करने का कोई कारण नहीं होता,फिर भी स्थिति विकट रूप से गंभीर होने से पहले ही आपको इलाज करवा लेना चाहिए। जब बच्चे के रक्त में बिलरुबिन की काफी अधिक मात्रा होती है तो इससे उसके जन्म के समय से ही उसे जॉन्डिस होने की संभावना बनी रहती है। बिलरुबिन और कुछ नहीं बल्कि एक पीला पदार्थ है जो लाल रक्त कोशिकाओं की जगह लेने का प्रयत्न करता है। लिवर इस पदार्थ को तोड़ने का तथा उसे मल के रूप में शरीर से बाहर निकालने का काम करता है। पर अगर बच्चे के शरीर में बिलरुबिन की मात्रा ज़्यादा है तो इससे उसकी त्वचा एवं अन्य अंगों में एक पीलापन सा आ जाता है।

जॉन्डिस के मुख्य कारण (Probable causes of Jaundice – piliya ke karan)

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अगर बच्चे के अंदर बिलरुबिन की मात्रा थोड़ी ज़्यादा है तो यह सामान्य है। बच्चा माँ के गर्भ में लगातार बढ़ता रहता है जहां गर्भनाल उसके शरीर से बिलरुबिन को निकालने में काफी अहम भूमिका निभाती है। गर्भनाल वो भाग है जो कि बच्चे को माँ के भोजन से हिस्सा देती है पर ये कार्य बच्चे के जन्म के पश्चात नहीं किया जा सकता है। इसके बाद गर्भनाल की जगह लिवर बच्चे को भोजन करवाना शुरू करता है। ज़्यादातर नवजात शिशुओं की त्वचा प्राकृतिक रूप से पीलापन लिए हुए ही होती है। इसे मनोवैज्ञानिक जॉन्डिस कहते हैं। पीलिया का इलाज, वैसे तो यह स्थिति बिलकुल सामान्य है परन्तु बच्चे के 2 से 4 दिन के होने पर ये स्थिति खराब भी हो सकती है।

नवजात बच्चों में जॉन्डिस के मुख्य कारण (The causes of Jaundice in new born baby include)

1. माँ और बच्चे के खून का प्रकार अलग होना

2. शरीर में एंजाइम और प्रोटीन की मात्रा कम होना

3. रक्त कोशिकाओं का आकार असामान्य होना

4. खोपड़ी के नीचे से खून निकलना

5. विभिन्न प्रकार के संक्रमण

6. औषधियों के साइड इफ़ेक्ट

7. ऑक्सीजन की मात्रा कम होना

8. माँ से बच्चे में आई कुछ खामियां

9. बच्चे के लिवर को प्रभावित करने वाली बीमारियां

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