Early signs of Pregnancy – The surprising truth – गर्भावस्था की सबसे पहली निशानियाँ

आपको अपने गर्भवती होने का पता कुछ आम निशानियों तथा प्रेगनेंसी टेस्ट की मदद से चलता है। गर्भवती होने की सबसे सामान्य निशानी होती है एक महिला के पीरियड्स का छूटना। पर पूरी तरह आश्वस्त होने के लिए आपको अन्य प्रकार की निशानियों की भी ज़रुरत होगी, क्योंकि कई बार गर्भावस्था के 2 से 3 महीने के बाद भी कई महिलाओं में पीरियड्स का होना अनुभव किया गया है।

गर्भावस्था की अन्य निशानियाँ (Other signs of Pregnancy – pregnant hone ke tips hindi me)

  • मतली और उलटी के साथ मॉर्निंग सिकनेस एक महिला के लिए गर्भावस्था के पहले 3 महीनों में काफी कष्टकारी अनुभव होते हैं। ये सारी समस्याएं गर्भावस्था के बाद के चरणों के दौरान या तो पूरी तरह गायब हो जाती हैं, और या तो इनका असर काफी कम हो जाता है।
  • गर्भावस्था के दौरान हॉर्मोन्स के स्तर की वजह से स्तनों में नर्माहट तथा सूजन आती है, तथा इसके साथ ही थोड़ा सा दर्द भी होता है।
  • किसी महिला के गुप्तांग से अगर दूधिया सफ़ेद रंग के द्रव्य के बदले गुलाबी और भूरे रंग का मिश्रित द्रव्य निकलने लगे, तो यह इस बात का सबूत होता है कि वह महिला गर्भवती होने वाली है। इसके होने का मुख्य कारण शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर का बढ़ना है, जिसके फलस्वरूप गुप्तांगों में अतिरिक्त रक्त का संचार होने लगता है।
  • गर्भावस्था के दौरान HCG हॉर्मोन्स में वृद्धि होने की वजह से एक महिला के सूंघने और स्वाद लेने की इन्द्रियाँ काफी संवेदनशील हो जाती हैं। इसके फलस्वरूप कई बार ऐसा भी होता है कि जिस गंध को पहले आप पसंद करती थी, वे अब विषैली और असहनीय लगने लगती हैं।

गर्भावस्था के दौरान अच्छी डाइट और बचाव उपाय

  • थकान गर्भावस्था की एक और महत्वपूर्ण निशानी होती है। यह माना जाता है कि एक बच्चे को जन्म देना तथा उसे अपने गर्भ में बढ़ने देना काफी थकान भरा कार्य होता है। इसके अलावा शरीर में होने वाले कई हार्मोनल परिवर्तनों की वजह से भी कई बार शरीर को थकान का शिकार होना पड़ सकता है।
  • अगर आपको बार बार टॉयलेट जाने की ज़रुरत महसूस हो, तो यह भी आपके माँ बनने का संकेत है। शरीर में रक्त के बढ़े हुए प्रवाह की वजह से यह स्थिति उत्पन्न होती है।

प्रेगनेंसी टेस्ट गर्भावस्था की स्थिति को जानने का काफी सरल उपाय है। कई घरेलू प्रेगनेंसी टेस्ट्स आपके मूत्र में मौजूद गर्भावस्था के हॉर्मोन्स की जांच करने में सक्षम होते हैं। कई बार गर्भावस्था की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर के द्वारा खून की जांच करवाने की भी सलाह दी जाती है।

गर्भावस्था के सप्ताह है गर्भावस्था के शुरूआती चरणों की शारीरिक निशानियाँ (Physical signs of early pregnancy – grabvati hone ke sign)

गर्भावस्था के शुरूआती चरणों (pregnancy ke lakshan) की निशानियाँ शरीर में होने वाली कई तरह की हरकतें होती है, जिनकी पुष्टि तभी की जा सकती है जब यह आपने स्वयं देखा हो, प्रेगनेंसी किट का प्रयोग किया हो या पैथोलोजिस्ट से सही प्रकार से जांच करवाई हो। इन निशानियों में मुख्य हैं : –

  • गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण, पीरियड्स का मिस होना।
  • स्तनों में नर्माहट तथा सूजन आना और निपल्स का भी प्रभावित होना।
  • थकान की वजह से आलस आना।
  • गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण, बार बार बाथरूम जाने की ज़रुरत महसूस करना।
  • गर्भावस्था में उल्टी, मतली के साथ उलटी होना।
  • सही प्रकार से भोजन न करने की वजह से चक्कर आना।
  • अचानक ही भोजन और पेय पदार्थों से अरूचि होना।
  • कुछ ख़ास परफ्यूम, किसी भोजन की महक या किसी ख़ास गंध के प्रति काफी संवेदनशील होना।
  • मॉर्निंग सिकनेस।
  • गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण, भ्रूण में सूजन आना।

गर्भावस्था के दौरान पीठ में दर्द के कारण

  • गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षण, अचानक ही चिड़चिड़ापन छा जाना।
  • शरीर का तापमान बढ़ना।
  • गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षण, पीठ के निचले हिस्से में हलके दर्द और अकड़न का अनुभव होना।
  • अंडे के प्लांट होने की वजह से गुप्तांग से लाल या गुलाबी द्रव्य निकलना।
  • अचानक वज़न का बढ़ना।

गर्भावस्था के लक्षण है पेट का फूलना (Pregnant stomach)

गर्भावस्था की सबसे बड़ी निशानी एक महिला के पेट का बड़ा होना है। बच्चे का शरीर माँ के शरीर के सामने की ओर स्थित होता है, अतः बढ़ते बच्चे को पेट में जगह देने के लिए पेट के भाग में खिंचाव आने लगता है। पेट के खिंचाव के बढ़ने की स्थिति एक महिला के शारीरिक ढाँचे पर निर्भर करती है। जिन महिलाओं का डील डौल छोटा होता है, उनका पूरा पेट बाहर निकला हुआ होता है, जबकि जो महिला लम्बी होती है, उसके पेट का भाग चौड़ा होता है  बाहर निकला हुआ नहीं दिखता। गर्भावस्था के दौरान (garbhavastha ki dekhbhal) वज़न का बढ़ना भी हर महिला की स्थिति में अलग अलग होता है। कुछ महिलाओं का वज़न अतिरिक्त रूप से बढ़ता है, वहीँ अन्य महिलाओं का वज़न उतना ही ज़्यादा बढ़ता है, जितने की एक बच्चे को ज़रुरत होती है।

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