Diwali safety tips for kids in Hindi – दिवाली सेफ़्टी टिप्स, दिवाली में रखें बच्चों का खास ध्यान

दिवाली का त्यौहार बच्चों के लिए बहुत खास होता है। इस समय ज़्यादातर स्कूलों में छुट्टियाँ रहती हैं और बच्चे बड़े ही उत्साह के साथ इस पर्व की तैयारी करते हैं। बच्चों को इस बात में सबसे ज़्यादा दिलचस्पी रहती है कि इस बार कौन सा नया पटाखा बाज़ार में आया है, जिसे दुकानों में देखकर वे बढ़ चढ़ कर घर में उसका बखान करते हैं और ज़रूरत पड़े तो खरीदने की ज़िद भी करते हैं।

दिवाली की यह तैयारी दिवाली के कई दिन पहले से शुरू होकर दिवाली के कुछ दिन बाद तक चलती है क्योंकि बच्चे इस खास त्यौहार की साल भर प्रतीक्षा जो करते हैं। घर के बड़े भी बच्चों के साथ इस उत्सव में बच्चे बन जाते हैं और उनकी हर ज़िद पूरी करने में उनका साथ भी देते हैं। यह त्यौहार यूं ही खास नहीं है हमारे देश में विशेष रूप से मनाए जाने वाले त्यौहारों में से एक यह दिवाली का त्यौहार भी बहुत खास और महत्वपूर्ण है।

और यही वह त्यौहार है जिसमें बच्चों का भी खास ध्यान रखना होता है। अगर इस खुशी के मौके पर कोई हादसा हो जाये तो रंग में भंग पड़ जाता है साथ ही इसकी वजह से शारीरिक क्षति और मानसिक आघात ही पहुंचता है, घर पर बच्चों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी पूरी तरह से माता पिता और घर के बड़ों पर होती है, तो अपनी इस ज़िम्मेदारी को कुछ साधारण सी सावधानियाँ रख कर अच्छी तरह निभाने का प्रयास करें।

दिवाली पर बच्चों की सुरक्षा के लिए कुछ खास सेफ़्टी टिप्स (Diwali safety tips for kids in Hindi)

दिवाली पर बच्चों के लिए सुरक्षा के तरीके – सूती के कपड़े पहनाएँ (Safety tips for kids in diwali – Use cotton clothes)

दिवाली की रात जब बच्चे आपके साथ पटाखे जलाएँ तब उनके कपड़ों का खास ध्यान रखें। उस समय उन्हें केवल सूती के कपड़े ही पहनाएँ इससे कपड़े में आग पकड़ने का खतरा कम ही रहता है, जबकि सिंथेटिक कपड़े आग के संपर्क में आने पर पिघल जाते हैं और त्वचा पर चिपक कर ज़्यादा नुकसान पहुँचते हैं।

दिवाली सेफ़्टी टिप्स हिन्दी में – बच्चों के साथ रहें (Diwali safety tips for kids – be with kids / children)

दिवाली के दौरान क्या करें और क्या नहीं?

दिवाली पर बच्चे आतिशबाज़ी के लिए बहुत उत्साहित रहते हैं, ऐसे में हो सकता है कि आपको किसी काम में व्यस्त देख कर वे सब्र न रख पाएँ और अकेले ही पटाखें छोड़ने लगें। तो शाम के पहले ही अपने सभी काम निपटा लें और आतिशबाज़ी के समय उनके साथ ही रहें। आपके साथ होने पर वे ज़्यादा आनंदित भी होंगे और साथ ही सुरक्षित भी रहेंगे।

दिवाली पर बच्चों कि सुरक्षा का रहें ध्यान – रखें खुली जगह में पटाखे छोड़ें (Use open space or ground for fireworks)

बच्चों को पटाखें दें और उनके साथ किसी मैदान या किसी खुली जगह पर उन्हें जलाएँ। खासकर अनार या चकरी जलाने के लिए किसी समतल और खुले स्थान का प्रयोग करें। इससे अगर कोई चिंगारी उड़ के इधर उधर गिर जाये तो किसी गंभीर हादसे कि संभावना कम रहती है।

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दिवाली पर बच्चों के लिए सेफ़्टी टिप्स – जेब में पटाखे न रखने दें (Diwali safety tips for kids – Don’t keep crackers in pocket)

बच्चों की आदत होती है कि जब वे अपने दोस्तों के साथ पटाखे जलाते हैं तो बारी बारी से जलाते हुए कुछ पटाखे हाथ में और कुछ जेब में रख लेते हैं, इस तरह की आदत सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है, ये आग वाली जगह या जलते हुये दीपक, मोमबत्ती के आस पास होने पर नुकसान दायक हो सकते हैं।

दिवाली में बच्चों के लिए खास सेफ़्टी टिप्स – बारूद से सावधानी रखें (Content of firecrackers are harmful for us)

जब बच्चे पटाखे जलाएँ तो ध्यान रखें कि पटाखे छूने के बाद वो अच्छी तरह हाथ धो रहे हैं या नहीं। पटाखों का बारूद हाथों के माध्यम से त्वचा, आँख या मुंह में जाकर नुकसान पहुंचाता है, इसका दुष्प्रभाव बच्चों की नाजुक त्वचा पर जल्दी पड़ता है इसीलिए जितना हो सके बच्चों को बारूद को सीधे तौर पर न छूने दें और पटाखे जलाने के बाद अनिवार्य रूप से हाथ पैर साबुन से धुलवाएँ।

दिवाली पर बच्चों के लिए टिप्स – पटाखे हाथ से न जलाने दें (Don’t burn crackers by hand)

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कई लोगों की आदत होती है कि उन्हें हाथ से पटाखे छोड़ने में मज़ा आता है। पर यह आदत जानलेवा भी हो सकती है। बच्चे अक्सर उत्साह में आकार इस तरह के करतब दिखाते हैं, परंतु इसके परिणाम बहुत भयावह हो सकते हैं। आप उन्हें सख्त निर्देश दें कि वे पटाखों को हाथ से न जलाकर किसी लकड़ी या कागज की सहायता से दूर रखकर जलाएँ।

पटाखे छोड़ते वक़्त कुछ खाने को न दें (Do not let them eat while burning crackers)

दिवाली की रात को हर घर में लक्ष्मी पूजा, दीपदान, आतिशबाज़ी आदि होना एक आम बात है। बच्चों के साथ बड़े भी इस उत्सव को उत्साह के साथ मनाते हैं। इस दौरान घर में लोगों का आना जन अभी लगा रहता है। इस समय आतिशबाज़ी के दौरान बच्चों को उन हाथों से कुछ खाने न दें बल्कि आतिशबाज़ी के पहले या बाद में कुछ भी खिलाएँ। इस समय व्यस्तता के बीच हम ध्यान नहीं दे पाते और बच्चे बिना हाथ धोए ही प्रसाद या मिठाई आदि खा लेते हैं जिससे हाथों में लगे बारूद के कण मुंह के जरिये पेट में जा सकते हैं और सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

जूते पहना कर करने दें आतिशबाज़ी (Diwali safety tips for kids – Give them shoes)

बच्चे आतिशबाज़ी के दौरान किसी तरह की सावधानी नहीं रखते और अपने दोस्तों के साथ उनका यह उत्साह और भी बढ़ जाता है। इस उत्साह में किसी तरह का विघ्न न पड़े इसके लियी आपको बच्चों का पूरी तरह से ध्यान रखना पड़ता है। पटाखें छोड़ते समय इस बात का भी ध्यान रखें कि बच्चों ने पैरों में जूते पहने है या नहीं। खाली पैर होने से कोई अधजला पटाखा या फुलझरी की गर्म सलाख पैरों में लग सकती है जो बच्चों के कोमल पैरों को बहुत नुकसान पहुंचा सकते हैं।

सेफ और हेल्दी दिवाली – नए प्रयोग न करने दें (Diwali safety tips in Hindi – Do not allow experiments)

बच्चे स्वभाव से ही बहुत जिज्ञासु होते हैं और उत्साह के दौरान उन्हें नए नए प्रयोग करना अच्छा लगता है। पटाखे जलाने के लिए सेफ तरीका कितना ज़रूरी है, इस बात का आभास उन्हें पहले से कराएं ताकि वे सतर्क रहें, साथ ही बच्चों में किसी बात को दोहराने की प्रवत्ति भी देखी जा सकती है। आपने देखा होगा कि बच्चे अपने साथ  वालों को जैसा करते हुए देखते हैं वे खुद भी वैसा ही काम करने की कोशिश करते हैं। आपने भी देखा होगा कि कुछ लोग टीन के डिब्बों और खाली मटकों का प्रयोग बड़े आकार के पटाखे फोड़ने के लिए करते हैं, बच्चे भी ऐसे रोमांचक प्रयोगों की तरफ जल्दी आकर्षित होते हैं तो बच्चों को ऐसा करने से रोकें और इससे होने वाले नुक़सानों को विस्तार से उन्हें बताएं।

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दिवाली सेफ्टी टिप्स – सड़क पर पटाखे न फेंकने दें (Diwali safety tips – Don’t let them throw on road)

कुछ बच्चे हाथ से जलाकर खाली सड़क कि ओर पटाखे फेंक देते हैं यह राहगीरों के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है, उन्हें ऐसा करने से रोकें। इसके अलावा कई बच्चे खाली सड़क देखकर कागज आदि में पटाखा रखकर जलने के लिए छोड़ देते हैं जो कुछ देर बाद पूरे कागज में आग पकड़ने के बाद फटता है, यह भी किसी राह चलते व्यक्ति के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है, इस तरह के कामों से किसी भी व्यक्ति को बड़ी शारीरिक क्षति हो सकती है।

दिवाली में रहें सुरक्षित – बिजली के तारों से सावधान रहें (Be aware of electric wires)

दीपावली रोशनी का उत्सव है और इस उत्सव को सभी प्रकाश से मनाते हैं। हर घर में दीये या रंग बिरंगी लाइटें जलाकर घर को सजाया जाता है। बच्चों को पहले से सावधान करें कि, इन तारों से वे दूर रहें और बिजली के तारों को गीले हाथों से बिल्कुल न छूएँ। इसके अलावा आप भी इस बात का ध्यान रखें की अगर आपके घर में छोटे बच्चे हैं तो बिजली के तार या झालर इत्यादि ज़मीन में न पड़े हों और सही तरीके से उनका कनैक्शन किया गया हो।

दीपावली में बरतें सावधानी – बाहर का भोजन ज़्यादा न करने दें (Don’t give too much outside food and sweets)

त्यौहार के दिनों में घरों में कुछ न कुछ पकवान बनते ही रहते हैं औए इसके अलावा पड़ोसी और रिश्तेदार भी मिठाई आदि लेकर उपस्थित हो जाते हैं। आजकल ज़्यादातर मिठाइयाँ लोग बाहर से ही खरीदकर गिफ्ट करते हैं जिनकी गुणवत्ता का कोई निश्चित मापदंड नहीं होता। खासकर बच्चों को बाज़ार की इन मिठाइयों से बचा कर रखें अगर देनी ही पड़े तो एक सीमित मात्रा में ही मिठाई या अन्य बाहर बनी चीज़ें खाने दें। ज़्यादा चॉकलेट खाने से भी उन्हें मना करें और इनके दुष्प्रभावों के बारे में उनसें चर्चा करें।

दिवाली पर बरतें सावधानियां – प्राथमिक उपचार की व्यवस्था रखें (Prepare First aid Box at home)

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वैसे तो इतने सारे उपाय करने के बाद किसी अनचाही दुर्घटना की संभावना बहुत ही कम होती है, फिर भी आपको अपनी तरफ से बच्चों की सेहत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त होना चाहिए। दीपावली के समय वैसे भी ज़्यादातर जगहों में छुट्टियाँ रहती है और दुकानें आदि भी शाम को जल्दी ही बंद हो जाते हैं, ऐसे में रात के वक़्त पटाखे जलाते समय कोई बुरी घटना घट जाये और आपके पास कोई साधन न हो तो यह एक बड़े तनाव का कारण बन सकता है, अपने घर में हल्की चोट और जले आदि पर लगाने वाली क्रीम व दवाएं पहले से चेक कर लें। पर्याप्त मात्रा में एंटीसेप्टिक और दर्दनाशक दवाएं घर में रखें।

दीपावली बच्चों के लिए खास त्यौहार है जिसका वे साल भर इंतज़ार करते हैं और दिवाली कि छुट्टियों में वे अपने स्कूल से कुछ रहता पाकर अपने बचपन का वास्तविक आनंद उठा सकते हैं, अगर आप इसमें उनकी मदद करें तो बच्चे सुरक्षित तरीके से यह पर्व मना सकते हैं साथ ही आप भी उनके लिए थोड़ी खास सावधानियाँ रखकर निश्चित होकर अपने परिवार के साथ थोड़ी खुशियाँ बांट सकते हैं। घर के बड़े या बच्चों के माता पिता होने के कारण आपकी यह ज़िम्मेदारी भी बनती है कि आपके बच्चों के लिए यह दिवाली का पर्व सेहतमंद और सुरक्षित भी हो।

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