Diabetes early symptoms and prevention methods – जानें, डायबिटीज़ के लक्षण और बचाव के उपाय

डायबिटीज़ (Diabetes) पूरी दुनिया में आज एक गंभीर समस्या बन चुका है जिसके लिए लोग अब अधिक सतर्क भी हो गए हैं फिर भी आज प्रत्येक व्यक्ति को डायबिटीज़ के शुरुआती लक्षणों और उपचारों को समझना बहुत ज़रूरी है ताकि पहले चरण में ही इस पर नियंत्रण पाया जा सके। डायबिटीज़ दो प्रकार के होते हैं लेकिन टाइप 2 डाइबिटीज़ अधिक गंभीर होता है जिसमें शरीर इंसुलिन को पहचानने की क्षमता खो देता है। डाइबिटीज़ को वंशानुगत समस्या की दृष्टि से भी देखा जाता है, अगर किसी परिवार में पहले से ही किसी सदस्य को डाइबिटीज़ की समस्या हो तो यह किसी अन्य सदस्य में भी दिखाई दे सकती है और आने वाली पीढ़ियों को भी प्रभावित कर सकती है।

इस आलेख में आप डाइबिटीज़ के शुरुआती लक्षणों को कैसे पहचाना जाए, इस बात की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। और अगर आपके परिवार में पहले से ही किसी को डाइबिटीज़ की समस्या हो तो आपको भी 6 माह में कम से कम एक बार फास्टिंग ब्लड शुगर चेक अप ज़रूर करवाना चाहिए।

डायबिटीज़ के शुरुआती लक्षण (Early symptoms of Diabetes in Hindi)

अगर आपने डायबिटीज़ की पहचान कर ली है तो आप इस पर नियंत्रण और साथ ही उपचार भी करवा सकते हैं लेकिन अगर आप इसके लक्षणों को पहचान नहीं पाएँ हैं तो यह आपके लिए कई तरह से परेशानी का सबब बन सकता है। इसे शुरुआती समय में इसे पहचानने के लिए अपना शुगर टेस्ट करवाएँ।

प्यास का अनुभव (Feeling thirsty – Diabetes symptoms in Hindi)

बार बार प्यास लगने जैसे अनुभूति का होना, डायबिटीज़ या शुगर की बिमारी का एक सबसे सामान्य लक्षण है। सामान्य तौर पर गर्मी में या अधिक शारीरिक परिश्रम के बाद बार बार प्यास लगती है लेकिन डायबिटीज़ के मरीज को यह समस्या गर्मी और मेहनत के बिना भी हो सकती है और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के बाद भी प्यास बुझने का एहसास नहीं होता।

मूत्रत्याग में अधिकता (More urination)

बार बार पेशाब करने जन अभी शुगर की बिमारी का एक खास लक्षण है जिसमें सामान्य से अधिक बार पेशाब जाने की ज़रूरत पड़ती है। अगर रात में नींद के दौरान आपको 2 से 3 बार पेशाब के लिए उठना पड़े, जबकि आपने सोने के पहले ही मूत्रत्याग किया हो तो यह डायबिटीज़ का लक्षण है और आपको इसके लिए सतर्क हो जाने की ज़रूरत है।

थकान (Unexplained fatigue – Diabetes Sign in Hindi)

डायबिटीज़ के रोगियों में थकान का अनुभव एक सामान्य लक्षण है। अगर आपको डायबिटीज़ है तो आपका शरीर बॉडी ग्लूकोज का उचित रूप से उपयोग करने में समर्थ नहीं होता जो थकान के रूप में सामने आता है। तो पर्याप्त नींद के बावजूद आपको थकान का अनुभव हो तो इसे डायबिटीज़ का लक्षण समझें।

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अत्यधिक भूख का लगना (Extreme hunger)

डायबिटीज़ में हर समय भूख लगती रहती है। अगर आपको बार बार भूख लगने का अनुभव होता है जबकि आपने सही मात्रा में समय पर भोजन भी लिया है, तो अपना शुगर टेस्ट जरुर कार्वा लें, यह भी डायबिटीज़ का लक्षण है।

अचानक वजन में कमी या वृद्धि (Sudden weight gain or loss)

अपने शरीर के वजन पर ध्यान रखें, अगर नियमित और सामान्य दिनचर्या के बावजूद आपके वजन में अत्यधिक कमी या बढ़त होती दिख रही है तो इसे गंभीरता से लें। यह डाइबिटीज़ के लक्षणों में से एक है।

बार बार संक्रमण का होना (Frequent infections)

बार बार इन्फेक्शन या संक्रमण का होना भी डाइबिटीज़ की वजह से होता है। बढ़ा हुआ ग्लूकोज लेवल सामान्य इन्फेक्शन से भी लड़ने के योग्य नहीं रह पाता जिसकी वजह से स्किन और अन्य तरह के इन्फेक्शन शरीर को प्रभावित करते हैं।

घाव भरने की धीमी गति (Slow healing of wounds)

डायबिटीज़ के मरीजों में यह देखा गया है की शरीर के घावों को भरने में सामान्य से कहीं अधिक समय लगता है। इसमें घाव भरने की प्रक्रिया बहुत धीमी हो जाती है। इस दौरान अगर काही कोई मामूली घाव या चोट लग जाए तो उसकी गंभीरता से देखभाल ज़रूरी होती है नहीं तो यह बहुत तकलीफदेह हो सकता है।

डायबिटीज़ के इन सामान्य लक्षणों के बाद हम इसके बचाव के बारे में जानने की कोशिश करते हैं, इन सुझावों की मदद से आप डायबिटीज़ से बच सकते हैं।

वजन का ध्यान रखें (Maintaining the right body weight)

शोधो में यह प्रमाणित किया गया है की मोटापा या बढ़ता वजन डायबिटीज़ की संभावना को बढ़ा देता है। इसके प्राथमिक बचावों में यह पहला उपाय है कि, बॉडी वेट या शरीर के वजन पर नियंत्रण रखा जाए। लेप्टिन एक हार्मोन है जो शरीर की फैट सेल्स में बनता है। इसका सीधा संबंध इंसुलिन से होता है। अपने शरीर में लेप्टिन की मात्रा को जानकार वजन पर नियंत्रण रखा जाना चाहिए।

सही डाइट (Get a right diet)

भोजन या आहार का सीधा संबंध शरीर के शुगर लेवल से होता है। हम जो भी खा रहे है, वह हमारे शरीर के वजन पर भी असर डालता है। ऐसे बहुत से फूड और तरल पेय पदार्थ हैं जो लीवर, पेंक्रियाज़ आदि के सही संचालन में मददगार होते हैं। फैट बढ़ाने वाले आहार को लेने से बचें, अपने भोजन में शुगर और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को कम करें।

नियमित व्यायाम (Exercise is the key)

किसी भी तरह के रोग से शरीर की सुरक्षा करने के लिए एक्सर्साइज़ एक बेहतरीन तरीका है, इसके अलावा इसका असर मोटापे और वजन पर भी पड़ता है। अगर आपको डायबिटीज़ नहीं है लेकिन इसकी चिंता सता रही है तो नियमित रूप से व्यायाम द्वारा आप इस समस्या से दूर रह सकते हैं।

तनाव से रहें दूर (keep stress at bay)

डायबिटीज़ जैसी शारीरिक समस्या में तनाव का अहम रोल होता है। अक्सर देखा गया है कि अधिक तनाव का सामना करने वालों को डायबिटीज़ से जूझना पड़ता है। चिंता और तनाव शरीर के हार्मोन्स को असंतुलित कर देती है जो डायबिटीज़ के साथ ब्लड प्रेशर का भी कारण बन सकती है। चिंता व तनाव से दूर रहने के लिए अपने शौक के कामों में ध्यान दें, अच्छी नींद लें, योगा और व्यायाम का प्रयोग तनाव से राहत देता है

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