Is X-ray safe during pregnancy – क्या गर्भावस्था के समय एक्सरे कराना सुरक्षित है ?

एक्सरे एक तरह की ऊर्जा है जो शरीर के अंदर तक जाकर शरीर के अंदरूनी भागों की तस्वीर ले सकती है। एक्सरे की वजह से हमें शरीर के अंदर की कई तरह की बीमारियों का पता चलता है।

गर्भावस्था की समस्याएं – गर्भावस्था के समय एक्सरे (Is it safe to receive x-rays during pregnancy?)

एक समय था जब महिलाएं गर्भावस्था के समय एक्सरे करवाने से डरती थी। यह बात सही है कि ज़्यादा मात्रा में विकिरण के शरीर के संपर्क में आने से दिमागी अस्वस्थता एवं आँखों की समस्या पेश आती है। परन्तु आजकल गर्भावस्था के दौरान एक्सरे करवाने में कोई भी समस्या नहीं है। वैज्ञानिकों द्वारा किये गए नए शोध के अनुसार गर्भावस्था के समय एक्सरे करवाने से भ्रूण पर कोई असर नहीं पड़ता है। एक्सरे से होने वाली सुरक्षा एक्सरे के प्रकार एवं शरीर पर विकिरण की पड़ी मात्रा पर निर्भर करती है। गर्भावस्था के दौरान (pregnancy me hone wali problem) किये गए ज़्यादातर एक्सरे भ्रूण को अधिक मात्रा में विकिरण के संपर्क में नहीं लाते हैं। डॉक्टर भी किसी गर्भवती महिला का एक्सरे तभी लेते हैं जब यह अत्यंत आवश्यक होता है।

ज़्यादातर एक्सरे हाथ, पाँव, छाती एवं दांतों के किये जाते हैं एवं इनसे प्रजनन अंगों को किसी विकिरण का सामना नहीं करना पड़ता। पेट पर विकिरण की थोड़ी मात्रा के संपर्क में आने से भ्रूण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, पर कूल्हों, पेट के निचले हिस्सों एवं पीठ पर तथा गुर्दे पर विकिरण का असर ज़्यादा पड़ने पर भ्रूण पर भी इसका हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

गर्भावस्था में देखभाल (प्रेग्‍नेंसी केयर)

गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य – डायग्नोस्टिक एक्सरे एवं गर्भावस्था (Diagnostic x-rays and Pregnancy)

गर्भावस्था एक महिला के जीवन में बेचैनी एवं उत्सुकता का समय होता है। इस समय उन्हें अपने खानपान एवं व्यायाम पर काफी ध्यान देना चाहिए तथा धूम्रपान, शराब एवं कुछ ख़ास दवाइयों से परहेज करना चाहिए। इस स्थिति में उन्हें डायग्नोस्टिक एक्सरे एवं पेट के हिस्से में प्रयोग की जाने वाली अन्य दवाइयों पर भी काफी ध्यान देना चाहिए।

डायग्नोस्टिक एक्सरे किसी व्यक्ति की समस्या के बारे में काफी जानकारी देते हैं। आम स्थितियों में पेट के एक्सरे की कोई आवश्यकता नहीं होती, पर कई बार डॉक्टर किसी गंभीर अवस्था में मरीज़ के पेट का एक्सरे निकाल लेता है। इस समय बच्चे को कोई नुकसान पहुँचने की संभावना कम होती है एवं बीमारी की सही स्थिति जान पाने की संभावना काफी ज़्यादा। दूसरी तरफ एक्सरे ना करवाने के नुक्सान उनसे निकलने वाले विकिरणों से भी ज़्यादा होते हैं।

गर्भवती महिलाओं के लिए खास टिप्स – कौन सा एक्सरे गर्भावस्था में बच्चे के लिए नुकसानदायक है? (Which x-rays can affect the baby during pregnancy? – x ray ke prabhav)

माँ के पेट के निचले हिस्से, कूल्हे, पृष्ठ भाग तथा गुर्दे के एक्सरे से अजन्मे बच्चे को काफी नुकसान होता है। इन सब भागों के एक्सरे किसी गंभीर अवस्था में ही लिये जाने चाहिए।

एक्सरे के विकिरण से भ्रूण पर प्रभाव (How does radiation of the x-ray affect the development of the fetus in the womb?)

बच्चे के जन्म से पहले विकिरण के प्रभाव से बाद में कैंसर होने की काफी ज़्यादा संभावना रहती है। क्योंकि अजन्मे बच्चे विकिरण के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं अतः इसे टालना ही अच्छा है या फिर आप कोई और तरीका भी अपना सकती हैं। शुरू के दो महीनों में विकिरण से बच्चे के प्रभावित होने की संभावना काफी ज़्यादा होती है क्योंकि तब भ्रूण में काफी कम कोशिकाएं होती हैं और गर्भपात की संभावना भी बढ़ जाती है।

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2 से 18 हफ़्तों की गर्भावस्था के बीच भ्रूण एक बढ़ते बच्चे में बदलने लगता है और इस समय विकिरण के प्रभाव से मस्तिष्क में विकार का भी ख़तरा रहता है। 12 हफ़्तों से लेकर अंत तक भ्रूण पूरी तरह बच्चे में परिवर्तित हो जाता है और इस समय विकिरण की संभावना काफी कम होती है,पर इसका यह अर्थ नहीं कि बच्चा बिलकुल सुरक्षित हो। इस समय भी किसी गंभीर कारण के बिना एक्सरे नहीं लेना चाहिए।

गर्भावस्था में देखभाल – अल्ट्रासाउंड एक्सरे से ज़्यादा प्रभावी (Ultrasound is better than X-ray – garbhavastha ki samasya)

अल्ट्रासाउंड की प्रक्रिया में जो विकिरण प्रयोग में लाया जाता है वह एक्सरे से काफी अलग होता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान लागू की जाती है क्योंकि इस समय बच्चे को कोई नुक्सान होने की संभावना कम होती है। इसी तरह mri की प्रक्रिया भी काफी प्रभावी है। अल्ट्रासाउंड जिसे कि सोनोग्राफी भी कहा जाता है उच्च आवृत्ति की तरंगों के माध्यम से चित्र उत्पन्न करने की विधि है। सोनोग्राफी में विकिरण का प्रयोग नहीं किया जाता है। यह तरीका ज़्यादा अच्छा है क्योंकि यह आयनाइज़िंग विकिरण का प्रयोग नहीं करता जिससे गर्भ में भ्रूण को नुकसान पहुंचे। आजकल अजन्मे बच्चे की स्थिति देखने के लिए ct स्कैन का ही प्रयोग किया जाता है।

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