Healthcare facts on lesbian and bisexual individuals – समलैंगिक स्त्री और उभयलिंगी मनुष्यों के स्वास्थ्य सम्बन्धी तथ्य

हमारी पृथ्वी अलग अलग प्रकार के मनुष्यों से भरी पड़ी है। जिन लोगों की कामुक इच्छाएं सामान्य से अलग होती हैं वे भी हमारे बीच ही निवास करते हैं। डॉक्टरी पद्दति में अलग कामुक इच्छाएं रखने वालों के लिए भी चिकित्सा का विकल्प है। गे के लक्षण, सभी लोगों को पता है कि समलैंगिक स्त्री वो होती है जो कामुक रूप से दूसरी महिला के प्रति आकर्षित होती है।

जब उन्हें सम्भोग करने की भी इच्छा होती है तब भी वे पुरुष के बदले महिला (gay ke lakshan) को अपना साथी बनाना चाहती हैं। एक समलैंगिक स्त्री को ऐसी महिला कभी स्वीकार नहीं होगी जिसने कभी किसी पुरूष के साथ सम्भोग किया हो।

कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो कि पुरूषों और महिलाओं दोनों के प्रति आकर्षित होते हैं। उन्हें सम्भोग के क्षेत्र में भी पुरूष या स्त्री दोनों ही पसंद होती हैं।

समलैंगिक स्त्री और उभयलिंगियों के स्वास्थ्य सम्बन्धी बातें (Health issues for both lesbians and bisexual women)

हर महिला की स्वास्थ्य सम्बंधित समस्याएं सामान होती हैं भले ही उनके सम्भोग सम्बन्धी विकल्प जो भी हों। हर तरह की महिला, चाहे वो सिर्फ पुरूष साथी चुने या फिर दोनों लिंगों को अपना साथी चुने, को एक तरह की ही समस्या पेश आती है। अगर समस्या गंभीर हो तो उन्हें किसी डॉक्टर को दिखाना चाहिए। जो महिलाएं उभयलिंगी या समलिंगी होती हैं, उनमें अंडाशय का कैंसर होने की संभावना सामान्य तरह की अम्हिलाओं के मुकाबले ज़्यादा होती है।

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गे संबंध – गर्भावस्था से जुडी परेशानियां (Health issues related to pregnancy)

प्रकृति ने मनुष्य को ऐसा बनाया है कि प्रजनन तभी संभव है जब एक पुरूष और महिला आपस में सम्भोग करें। एक उम्र में गर्भवती होना भी किसी महिला के लिए काफी आवश्यक है। गर्भावस्था के दौरान महिलाएं ऐसे हॉर्मोन पैदा करती हैं जो कि उन्हें स्तन के कैंसर, अंडाशय के कैंसर तथा अंतर्गर्भाशय के कैंसर से बचाता है। पर क्योंकि एक समलैंगिक स्त्री प्रजनन क्रिया नहीं कर सकती, अतः सामान्य गर्भावस्था के दौरान पैदा होने वाले हॉर्मोन इनकी स्थिति में पैदा नहीं होंगे। उन्हें उपरोक्त तरह के कैंसर होने की काफी संभावना रहती है।

समलैंगिकता – स्तन कैंसर से जुडी समस्याएं (Issues related to breast cancer)

समलैंगिक महिलाओं के लिए यह काफी आवश्यक है कि वे नियमित अपना मेम्मोग्राम परिक्षण करवाएं जिससे कि वे स्तन कैंसर से बची रहे। कुछ अनैतिक डॉक्टर समलिंगी एवं उभयलिंगी मरीज़ों में भेदभाव करते हैं। पर सारे डॉक्टर एक जैसे नहीं होते और अगर आपको कोई खराब अनुभव हुआ है तो आप बेहिचक दुसरे डॉक्टर के पास जा सकती हैं।

धूम्रपान से जुडी समस्याएं (Health issues related to smoking)

हाल में हुए शोधों से पता चला है कि समलैंगिक महिलाएं आम महिलाओं की तुलना में ज़्यादा धूम्रपान करती हैं। उभयलिंगी महिलाओं में भी काफी मात्रा में धूम्रपान करने की काफी प्रवृत्ति होती है। फेफड़ों का कैंसर सिर्फ़ समलिंगी और उभयलिंगी महिलाओं तक सीमित नहीं है बल्कि उनके साथी भी इसके शिकार होते हैं।

ग्रीवा का कैंसर (Risk of cervical cancer)

महिलाओं एवं पुरुषों में सम्भोग के आदर्श साथी की उम्र अलग होती है

आम महिलाओं की तरह समलिंगी एवं उभयलिंगी महिलाओं को भी ग्रीवा के कैंसर का भी ख़तरा रहता है। अतः यह काफी आवश्यक है कि वे रोज़ाना के परिक्षण और पैप परिक्षण कराएं। आप इस परिक्षण को किसी भी अस्पताल या किसिस भी चिकित्सा संस्थान में करवा सकती हैं। जो वायरस ग्रीवा के कैंसर का कारक है वो तब भी फैलता है जब किसी महिला की साथी को यह बीमारी हो।

तनाव और बेचैनी (Depression and anxiety)

ऐसे कई कारक हैं जो कि एक महिला में बेचैनी की सृष्टि करते हैं। समलिंगी और उभयलिंगी महिलाओं में उभयलिंगी महिलाओं को बेचैनी की समस्या और मूड परिवर्तित होने की समस्या का ज़्यादा शिकार होना पड़ता है। बेचैनी और तनाव का कारण हैं दुराचार और हिंसा, स्वास्थ्य बीमा का न होना, सामाजिक कलंक,कानूनी व्यवस्था में असमानता होना, परिवार जनों द्वारा ध्यान ना देना आदि। यह बात लाज़मी है कि जो महिलाएं अपना साथी किसी महिला को चुनेंगी, उन्हें समाज और उनका परिवार काफी स्वीकार नहीं करेगा। इसलिए उनका समाज में बने रहना काफी बड़ा मुद्दा बन जाता है।

ऐसे कई सामाजिक कार्यशालाएं हैं जो कोगों को आपस में भेदभाव से मुक्त रहना सिखाती हैं। वे स्वास्थ्य से जुडी हर सुविधाएं भी हर वर्ग को देते हैं। उन्हें आम इंसान की जीने का पूरा हक़ होता है।

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