Do’s and don’ts of measles – खसरा होने पर क्या करें

खसरा (Measles) मीसल्स वायरस की वजह से होने वाला एक भयानक रोग है. खांसी और छींक के माध्यम से यह रोग बड़ी ही तेजी से एक व्यक्ति से दुसरे में फैलता है. इस रोग में तेज बुखार, सर्दी के साथ बहती नाक, खांसी और आँखों में सूजन दिखाई देती है. यही इस रोग या खसरे के लक्षण हैं. इस लक्षणों के दिखाई देने के 3 से 5 दिन बाद ही चेहरे पर इस बिमारी का प्रभाव दिखाई देना शुरू हो जाता है. इसके बाद यह लाल रैश के साथ फैलता हुआ पूरे शरीर को प्रभावित करता है.

खसरे के ये लक्षण दस्त के साथ स्थाई या आंशिक अंधेपन के साथ और भी अधिक नकारात्मक प्रभाव दिखाते हैं. कुछ मामलों में निमोनिया का शिकार होते हुए भी देखा गया है है. 90 प्रतिशत मामलों में एक ही वातावरण में रहने कि वजह से खसरा रोग फैलता है. इसके लिए बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है.

खसरे का कोई विशेष उपचार नहीं है इसीलिए जब समय बीतता जाता है उचित देखभाल से यह ठीक होने लगता है. आम तौर पर यह उन बच्चों को होता है जिनका टीकाकरण ना हुआ हो. अगर आप खसरे से पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आते हैं तो आपको भी तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए. खाने पीने की चीजें या रोगी के जूठे बर्तन साझा नहीं करने चाहिए.

जिन बच्चों में प्रोटीन की अधिक कमी होती है उन्हें भी खसरा होने का डर अधिक होता है. शरीर पर लाल चकत्ते दिखाई देते ही डॉक्टर से संपर्क करें.

खसरा होने पर क्या करें (Khasre se bachne ke upay Hindi me)

  1. जैसे ही आपको पता चले कि यह खसरे के लक्षण हैं तो इस घटक बिमारी से बचाव के लिए डॉक्टर के पास जायें और 72 घंटों के अन्दर खसरे के बाद का टिका लगवाएं.
  2. अपने आहार में विटामिन और प्रोटीन की अधिकता वाले भोजन लें. 6 दिन की अवधि के भीतर एंटीबॉडीज का इंजेक्शन लगवाना ज़रूरी है.
  3. बुखार को कम करने के लिए डॉक्टर के परामर्श से एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.
  4. आरामदायक तापमान वाले कमरे में रहे. भोजन में हरी सब्जियां, सूप और बिना मिर्च मसाले वाला भोजन लें. नियमित रूप से सभी ज़रूरी दवाएं लें.
  5. अपनी इस्तेमाल की वस्तुओं को किसी के भी साथ साझा करने से बचें. यह रोग को फैलने से रोकने का सरल उपाय है.

अगर आप खसरे से पीड़ित हैं तो ये ना करें (Measles ke lakshan aur upay Hindi me)

  1. अगर आपका बच्चा खसरे से पीड़ित है तो बिना देरी किये डॉक्टर से मिलें. रोग जटिल होने पर बहरापन, अंधापन और शारीरिक विकास में देरी जैसी भयानक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं.
  2. अगर रोगी को तेज बुखार, गले में खराश, नाक बहना और छोटे छोटे सफ़ेद डॉट्स या बिंदु दिखाई दें तो इसे सामान्य इन्फेक्शन ना समझें. इसे कोपलिक स्पॉट कहते हैं. इसमें किसी भी तरह की चीजों को आपस में इस्तेमाल करने या साझा करने से बचना चाहिए.
  3. अपने आप को किसी आरामदायक कमरे में रखें ताकि यह रोग न फैले. सार्वजनिक जगहों पर जानें से भी बचें.
  4. अगर आप गर्भवती हैं तो इसे सामान्य प्रेगनेंसी रैश समझने की गलती ना करें. आश्वस्त होने के लिए रक्त की जांच करवा लें. गर्भावस्था के दौरान खसरा होने पर इसका प्रभाव बच्चे में किसी जन्म दोष आदि के रूप में नहीं होता.
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