In what cases consultation of doctor is important in pregnancy – गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर से संपर्क कब करें?

आदर्श रूप से आपको गर्भवती होने से पहले डॉक्टर के पास जाना चाहिए। इससे इस बात की पुष्टि होगी कि महिलाएं स्वस्थ हैं और गर्भावस्था से जुडी हर चीज़ बिलकुल ठीक है। अगर आप गर्भवती हैं और कुछ गंभीर बीमारियों जैसे हाइपरटेंशन, मधुमेह, अस्थमा, डिप्रेशन, ल्यूपस या किसी अन्य प्रकार की एलर्जी से पीड़ित हैं तो आपका किसी डॉक्टर से सलाह करना अनिवार्य है।

ल्यूपस और गर्भावस्था (Lupus and pregnancy me dekhbhal)

ल्यूपस एक जलन और सूजन देने वाली स्थिति है जो कि शरीर के कई भागों को प्रभावित करती है। ल्यूपस से ग्रस्त महिलाएं गर्भवती हो सकती हैं, पर उन्हें डॉक्टरी परामर्श की सख्त आवश्यकता है क्योंकि इस स्थिति में कई समस्याएं भी पेश आ सकती हैं। ल्यूपस के समय एंटी बॉडीज खुद के ही तंतुओं (cells) के विरुद्ध बढ़ते हैं जिससे कि कोशिकाओं में जलन होती है। यह शरीर के उन हिस्सों को प्रभावित कर सकता है जिनमें जोड़ों का भाग, त्वचा और अंदरूनी अंग शामिल हैं। ल्यूपस सामान्य या जानलेवा भी हो सकता है जो कि इस बात पर निर्भर करता है कि कौन सा भाग इनसे ग्रस्त है और यह कितना गंभीर है।

ल्यूपस के फूलने तथा गर्भावस्था के सामान्य लक्षणों में कोई ज़्यादा अंतर नहीं होता। अतः आपको किसी रियुमटोलॉजिस्ट (rheumatologist) या ऑब्स्टेट्रिशियन से अपनी गर्भावस्था के समय संपर्क करना चाहिए। गर्भावस्था और ल्यूपस के आम लक्षण हैं जोड़ों में द्रव्य का जमा होना, त्वचा के रैशेस तथा बच्चे के जन्म के बाद बालों का झड़ना।

गर्भावस्था के समय फिट रहने के नुस्खे

गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य, गर्भावस्था और ब्लड प्रेशर (Pregnancy and blood pressure)

अगर आपको गर्भावस्था के वक़्त उच्च रक्तचाप है तो आपको डॉक्टर से निरंतर संपर्क में रहना पड़ेगा। इस स्थिति में आपको काफी देखभाल और अच्छे उपचार की ज़रुरत है। ऐसा कोई कारण नहीं है कि उच्च रक्तचाप के होने की वजह से आप एक स्वस्थ बच्चे को जन्म नहीं दे सकती, पर यह तभी संभव है जब गर्भधारण के इन 9 महीनों में आप डॉक्टर के कहे अनुसार चलें।

गर्भावस्था के दौरान प्री इक्लेम्पसिया (Pre-eclampsia, grabhavastha me dekhbhal)

इसके अंतर्गत गर्भावस्था के दौरान या तो आपका ब्लड प्रेशर बढ़ता है या फिर आपके खून में प्रोटीन की मात्रा आती है या फिर दोनों। इस स्थिति के सामने आने से माँ और बच्चे दोनों की जान को ख़तरा हो सकता है। इसके अंतर्गत उच्च रक्तचाप, पैरों तथा त्वचा में सूजन और मूत्र से प्रोटीन निकलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस समस्या का इलाज और माँ बच्चे की जान बचाना तभी संभव है जब डिलीवरी जल्दी कराई जाए। इसे गर्भावस्था में टोक्सेमिया (toxemia) भी कहा जाता है।

गर्भावस्था के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational diabetes)

यह ऐसी स्थिति है जो आमतौर पर पहली तिमाही के बाद जन्म लेती है। भ्रूण (fetus) अपने लिए ऑक्सीजन और पोषक तत्व प्लेसेंटा से प्राप्त करता है। प्लेसेंटा कुछ ऐसे हॉर्मोन्स पैदा करता है जो कि पाचक ग्रंथि (pancreas) में बनने वाले इन्सुलिन के काम करने के तरीके तथा उत्पादन को प्रभावित करता है। इन्सुलिन शरीर की चीनी को जमाने में और इसका ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करने में मदद करता है। गर्भावस्था के समय के मधुमेह के अंतर्गत इन्सुलिन उच्च रक्तचाप के स्तर तक पहुँच जाता है।

गर्भावस्था में देखभाल, Rh से असामंजस्य (Rh incompatibility)

गर्भावस्था के दौरान खून निकलना गंभीर समस्या

यह गर्भावस्था के समय की वह स्थिति है जब माँ और बच्चे के Rh कारक अलग हो जाते हैं। Rh कारक एक ऐसा पदार्थ होता है जो ज़्यादातर लोगों की लाल रक्त कोशिकाओं (red blood cells) में पाया जाता है। अगर यह पदार्थ रक्त में ना पाया गया तो इसे Rh नेगेटिव कहते हैं। समस्या तब उत्पन्न होती है जब गर्भावस्था के वक़्त बच्चे का Rh पॉजिटिव होता है और माँ का नेगेटिव। बच्चे की रक्त कोशिकाएं माँ के खून में आकर एंटी बॉडीज का उत्पादन करती हैं जिनसे ऐसा प्रभाव उत्पन्न होता है, जो बच्चे के रक्त में प्रवेश करके उसके रेड ब्लड सेल्स को नष्ट कर देता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए खास टिप्स – डॉक्टर से सलाह करने लायक अन्य समस्याएं (Other problems to consult the doctor immediately during pregnancy)

  • खून निकलना, मरोड़ें उठना और मतली की गंभीर समस्या की स्थिति में तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ।
  • अगर आपके साथ पहले भी मिसकैरेज की घटना हो चुकी है तो दोबारा गर्भवती होते ही सबसे पहले डॉक्टर से सलाह मशविरा करें।
  • अगर आप गर्भवती हैं और मधुमेह से ग्रस्त हैं तो आपको डॉक्टर के निरंतर परामर्श की काफी आवश्यकता है।
  • सिर में दर्द, पेट में दर्द, नज़र कमज़ोर होना, मूत्र कम निकलना और वज़न का अचानक बढ़ना आदि समस्याओं की स्थिति में तुरंत जांच आवश्यक है।
  • अगर आप एक साथ दो या तीन बच्चों को जन्म देने वाली हैं तो निरंतर डॉक्टर से जांच करवाएं, क्योंकि ऐसी स्थिति में कोई गंभीर समस्या हो सकती है और इसमें समय से पहले बच्चे की डिलीवरी का ख़तरा भी बना रहता है।

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