What are the reasons for miscarriage in hindi ? – मिसकैरेज के लिए क्या कारण हैं? गर्भपात से कैसे बचा जाए?

हर औरत के लिए, गर्भपात विनाशकारी विकल्पों में से एक होगा। गर्भपात की खबर से महिला और उनका साथी उदास हो जाता है। बच्चे को खोने के बाद, कई महिलाओं को भावनात्मक रूप से चोट लगती है। वह शारीरिक रूप से भी तैयार नहीं होती हैं। इस प्रकार, वे मानसिक और शारीरिक स्थिति की विविधता से पीड़ित होती हैं।

इस पीड़ा का अनुभव एक महिला से दूसरे में अलग होता है। जब वे एक चिकित्सा पेशेवर से नुकसान को व्यक्त करते हैं, तो वे उन पेशेवरों के बीच सहानुभूति की कमी का अनुभव करते है। डॉक्टरों द्वारा गर्भपात के कारणों को जांचा गया है अगर महिला को गर्भपात कि समस्या 3 बार से अधिक होती है।

गर्भावस्था के दौरान, प्रत्येक महिला को भारी सामान उठाने के लिये मना किया जाता है। लेकिन मातायें इन बातों पर ध्यान नहीं देती है और लगातार भारी सामान उठाती रहती हैं। प्रत्येक महिला के लिये गर्भावस्था के प्रथम तीन माह बहुत ही मह्त्वपूर्ण होते हैं।

अगर आप गर्भावस्था के प्रथम तीन माह में अपनी गतिविधि में पर्याप्त देखभाल नहीं करती है तो गर्भावस्था के दौरान आपको कई समस्यायें हो सकती हैं। साथ ही बच्चा खोने का दर्द बच्चे को जन्म देने के दर्द से ज्यादा होता है।

मिसकैरेज के एक ऐसी स्थिति है जो होने वाली माँ को मानसिक रूप से कमजोर बना देती है. होने वाले बच्चे के बारे में कई तरह कि कल्पनाएँ करने के बाद यदि गर्भपात का सामना करना पड़े तो यह माँ को अन्दर से तोड़ कर रख देता है. मिसकैरेज के खतरे को कम करने के उपाय में महिलाएं अधिक से अधिक सावधानी बरतने की कोशिश करती हैं लेकिन कई बार शारीरिक कमी या किसी अन्य वजह से भी गर्भपात या मिसकैरेज की घटना घट जाती है.

कई बार कुछ महिलाओं को शुरुआत के तीन महीनों के अन्दर ही गर्भपात हो जाता है और वो मिसकैरेज के लक्षण पहचान भी नहीं पाती. ऐसी स्थिति को समझने के लिए यहाँ गर्भपात से जुडी कुछ जानकारियां दी जा रही हैं.

गर्भपात होने के कारण – मिसकैरेज के लक्षण (Reasons behind miscarriage in Hindi – miscarriage ki wajah)

  • गर्भपात होने के कारण है(miscarriage ki wajah) अतिरिक्त गर्भनिरोधक गोलियों का उपभोग गर्भवती होने से पहले
  • गर्भपात के लक्षण, अत्यधिक पीठ दर्द
  • योनि से खून बहने से लाल कपड़ा
  • पेट में ऐंठन
  • पेट में दर्द भी गर्भपात के लक्षण
  • योनि में खूनी म्युकस

क्या गर्भावस्था के समय एक्सरे कराना सुरक्षित है ?

अगर आप अपनी गर्भावस्था की अवधि के दौरान दिन की जीवन शैली से सतर्क नहीं है, तो आपको गर्भपात की समस्या से ग्रस्त होने की संभावना प्रबल है। अपनी गर्भावस्था की अवधि के दौरान बहुत भारी वजन न ले, यह गर्भावस्था के दौरान आपको न केवल शारीरिक तनाव देगा बल्कि आपके बच्चे के जन्म में कुछ बाधा और जटिलता पैदा कर सकता है। गर्भपात के लिए एक अन्य कारण सिगरेट या हार्ड ड्रिंक्स का उपभोग भी है। अगर मां को हानिकारक तत्व लेने की आदत है, तो यह भी उस बच्चे के जन्म के लिये खतरनाक है जो अभी तक इस दुनिया में नहीं आया है। यहाँ तक कि आपको अगर फास्ट फूड लेने की आदत है, तो बच्चे को बहुत ही होगी। चूंकि बच्चे को स्वस्थ भोजन की आवश्यकता है जो मां के प्लेसेंटा द्वारा आपूर्ति किया जाता है। आपको बहुत सावधान रहने की जरूरत होती है जब आप गर्भावस्था के दौरान कुछ भी उपभोग कर रही हैं।

गर्भपात के मुख्य कारण (Common causes of miscarriage – garbhpat ke karan)

शरीर की रचना संबंधी कारण (Anatomical causes)

एनाटॉमिकल कारण शारीरिक रचना से सम्बंधित होते हैं। विकृत गर्भाशय, अकर्मण्य गर्भनाल, गर्भाशय में बड़े फाइब्रॉइड्स (fibroids) का होना या गंभीर रूप से अशर्मन सिंड्रोम (Asherman’s syndrome) का होना गर्भपात होने के कारण होते हैं। इसके कई और कारण भी हो सकते हैं, जिनपर प्राकृतिक चिकित्सा करने से कोई भी  प्रभाव नहीं पड़ता है।

होमोसिस्टिन के स्तर का ज़्यादा होना (High homocysteine levels)

गर्भपात होने के कारण(miscarriage ki wajah) होमोसिस्टिन एक सामान्य सल्फर (sulfur) है जिसमें एमिनो एसिड (amino acid) होता है जो हमारे शरीर में भी पाया जाता है। पर अगर इसकी शरीर में मात्रा ज़्यादा हो जाए तो यह काफी हानिकारक हो सकता है, जिसके फलस्वरूप हाइपरकोएगुलाबिलिटी (hypercoagulability) की समस्या आपको घेर लेती है। इसके मात्रा ज़्यादा होने पर खून का थक्का भी जम सकता है तथा आपकी दिल का दौरा पड़ने की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। यह बच्चों के लिए भी काफी हानिकारक होता है।

आनुवांशिक कारण (Genetic causes)

गर्भावस्था के दौरान आने वाले विभिन्न सपने

गर्भपात होने के कारण, कई बार गर्भपात अंडे या शुक्राणुओं में आनुवांशिक खराबी होने की वजह से भी हो जाता है। जिन जोड़ों की उम्र 35 साल या इससे ज़्यादा है, उन्हें यह समस्या सबसे ज़्यादा सताती है क्योंकि उनके अंडे और शुक्राणु इस उम्र में पहले की तरह स्वस्थ नहीं रह जाते हैं। पर अगर आपकी जीवनशैली स्वास्थ्यकर हो जाएगी और आप पोषक पदार्थों का सेवन करने लगेंगे तो इससे आपके शुक्राणुओं और अण्डों की अवस्था में काफी सुधार होगा। इसके अंतर्गत ख़ास पूरक पदार्थों का सेवन करें और ऐसी पद्दतियों का प्रयोग करें जिससे कि आपके अण्डों और शुक्राणुओं की अच्छे से सुरक्षा हो सके। इससे आपकी प्रजनन क्षमता पर भी काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

खून का थक्का जमना (Blood clotting)

खून का थक्का काफी मात्रा में खून एक ही जगह पर आ जाने की वजह से होता है। इसकी वजह से महिलाओं को गर्भपात की समस्याओं से भी गुज़रना पड़ सकता है। आप अपने गर्भाशय में खून के छोटे छोटे थक्के जमते हुए देख सकते हैं। प्लेसेंटा (placenta) कट जाता है जिससे आपके भ्रूण को उतनी मात्रा में ऑक्सीजन (oxygen) और पोषक पदार्थ नहीं मिल पाते हैं, जिनसे वह जीवित रहने में सफल हो सके। इससे तुरंत गर्भपात का ख़तरा पैदा हो जाता है। अगर खून का थक्का जमने से पहले आपकी गर्भावस्था को 24 हफ्ते या इससे ज़्यादा हो गए हैं तो इससे मृत बच्चे के नाम या बच्चे के समय से पहले पैदा हो जाने की संभावना रहती है। आपके शरीर द्वारा इस सम्बन्ध में कोई चेतावनी भी नहीं दी जाती कि शरीर में खून के थक्के का उत्पादन हो रहा है। यह ख़तरा आमतौर पर तब ही सामने आ पाता है, जब काफी देर हो चुकी होती है। इस समस्या का पता लगाने के लिए कुछ परीक्षण होते हैं, पर ये परीक्षण आपको गर्भावस्था से पहले करवाने पड़ते हैं। यह गर्भावस्था के पहले के स्वास्थ्य उपायों के अंतर्गत आता है। पर इस तरह की समस्याओं को कुछ प्राकृतिक पद्दतियों की मदद से भी दूर किया जा सकता है।

प्रेगनेंसी टिप्‍स – गर्भपात से बचने के उपाय (Ways to avoid miscarriage in Hindi – garbhpat se bachne ke upay)

गर्भपात से बचने के उपाय के लिए अगर आप कुछ स्वस्थ आदतों को अपना सकती हैं। आपको खाद्य वस्तुओं का उपभोग करना चाहिये जैसे हरी सब्जियां, दूध, प्रोटीन और ऊर्जा देने वाले भोजन। लोहे से प्रचुर भोजन भी गर्भावस्था की पूरी अवधि के दौरान स्वस्थ रहने के लिए एक और महत्वपूर्ण तरीका है। जाँच के क्रम में गर्भावस्था की अवधि के दौरान कई परीक्षणों को करा लेना चाहिए जिससे किसी समस्या के बारे में पहले ही पता चल जाय। स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा आपकी नियमित जांच महत्वपूर्ण होगी।

कभी-कभी अपने पहले बच्चे को जन्म देने वाली महिलायें गर्भपात की स्थिति को  नहीं जान पाती है। वे अचानक से रक्त स्राव करती हैं और पता लगने के पहले ही बच्चे को खो देती हैं। अत: जब भी आप अपने गर्भावस्था की पहली तिमाही में खून का अनुभव पाती है तो तुरंत आप स्त्री रोग विशेषज्ञ को अवश्य दिखायें। गुणसूत्र असामान्यता को कुछ लोगों में गर्भपात की प्रवृत्ति को बताता है इस स्थिति से बचने के लिये किसी चिकित्सा विशेषज्ञ पेशेवर को अवश्य दिखाये।

गर्भनिरोधक दवाओं के साइड इफेक्ट्स

गर्भपात से बचने के उपाय, अगर आप अपने गर्भवस्था के प्रथम दिन से जन्म प्रत्याशा की तारीख तक सावधान रहती हैं तो समस्याओं और गर्भपात से बच पाना सम्भव होगा। आप पहाड़ी सड़कों पर यात्रा करने से बचें जहाँ गर्भावस्था के दौरान झटका लगने का मौका होता है। अगर आप गर्भावस्था के पहले तीन माह मे बच सकती है तो गर्भपात होने के मौकों को भी कम कर सकती हैं। अगर आप घर पर ज्यादा समय तक बिना टहले रह सकती हैं तो गर्भपात को आसानी से टाला जा सकता है। आप पोषक पूरकों का उपभोग बच्चे को स्वस्थ रखने के लिये कर सकती हैं जिससे भी गर्भपात के मौके कम होते हैं।