Miscarriages – Reasons, Prevention and Treatment – मिसकैरेज के कारण, बचाव और उपचार

मिसकैरेज (What is miscarriages?)

मिसकैरेज गर्भावस्था की उस अवस्था को कहते हैं जो कि गर्भधारण (gestation) के 20 हफ़्तों के अंदर अपने आप समाप्त हो जाती है। शोध के अनुसार 10 से 25% गर्भधारण मिसकैरेज में परिणत होता है। केमिकल गर्भावस्था (chemical pregnancies) सारे मिसकैरेज का 50 से 75% होती है। यह तब होता है जब रोपण के कुछ देर के बाद ही गर्भ में पल रहा भ्रूण मृत हो जाता है। इसके फलस्वरूप रक्तस्त्राव होता है,जो उसके मासिक धर्म (period) के समय होता है। जब एक महिला केमिकल गर्भावस्था की शिकार होती है, तो उसे पता भी नहीं होता कि वह माँ बनने वाली है।

ज़्यादातर मिसकैरेज गर्भावस्था के पहले 13 हफ़्तों में ही होते हैं। गर्भावस्था एक काफी आनंददायक समय होता है, पर क्योंकि इस समय मिसकैरेज भी काफी ज़्यादा होते हैं, अतः इसके बारे में जागरूक रहना काफी आवश्यक है।

मिसकैरेज के अंतर्गत भ्रूण (fetus) का जीवन उसके ठीक से विकसित होने से पहले ही अचानक समाप्त हो जाता है। यह एक माँ तथा उसके पूरे परिवार के लिए एक काफी गहरा आघात होता है। गर्भावस्था के 24 हफ़्तों तक कभी अगर भ्रूण का जीवन समाप्त हो, तो उसे मिसकैरेज कहते हैं। आमतौर पर पहली तिमाही में इसकी संभावना काफी ज़्यादा होती है। इसके बाद अगर यह स्थिति उत्पन्न हो तो इसे लेट मिसकैरेज (late miscarriage) कहा जाता है।

गर्भपात होने के कारण – मिसकैरेज होने के कारण  (Why do miscarriages occur? – garbhpat ke karan)

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मिसकैरेज के कई कारण होते हैं और ज़्यादातर ये पता नहीं चल पाते हैं। पहली तिमाही में आमतौर पर इसका कारण क्रोमोज़ोम की असामान्यता (chromosomal abnormality) होता है, जिसका मतलब है कि बच्चे के क्रोमोसोम (chromosome) के साथ कुछ समस्या है। इसका मुख्य कारण क्षतिग्रस्त अंडा या स्पर्म सेल (sperm cell) हो सकता है, या फिर ज़ाइगोट (zygote) के बंटवारे की प्रक्रिया के वक़्त ये समस्या उत्पन्न हो सकती है। मिसकैरेज के अन्य कारण हैं : –

  • हॉर्मोन की समस्या (hormonal problems), इन्फेक्शन या माँ के स्वास्थ्य की कोई समस्या।
  • जीवनशैली ( अर्थात धूम्रपान, ड्रग्स (drugs) का प्रयोग, पोषण का अभाव, अतिरिक्त कैफीन  (caffeine) लेना तथा रेडिएशन (radiation) या ज़हरीली चीज़ों के संपर्क में आना )
  • अंडे की गर्भाशय में जाकर जमने की प्रक्रिया का सही प्रकार से ना होना।
  • माँ बनने की उम्र।
  • माँ बनने से जुड़ी बेचैनी।

गर्भपात के लक्षण – मिसकैरेज के लक्षण (What are the Warning signs of Miscarriage? – miscarriage ke lakshan)

अगर आप नीचे दिए गए किसी भी या सारे लक्षणों का शिकार हुई हैं, तो तुरंत ही अपने डॉक्टर से ये जांच करने के लिए कहें कि कहीं आपका भी मिसकैरेज तो नहीं हुआ है : –

  • हलके से लेकर गंभीर पीठ का दर्द (मासिक धर्म (menstruation)  के क्रैंप्स (cramps) से भी ज़्यादा गंभीर दर्द
  • वज़न का घटना।
  • सफ़ेद या गुलाबी रंग का म्यूकस (mucus)।
  • मरोड़ें (true contractions) – हर 5 से 20 मिनट में होने वाला तेज़ दर्द )
  • क्रैंप्स के साथ या इसके बिना भूरे या चमकीले लाल रंग का खून निकलना 20 से 30% गर्भावस्था की स्थितियों में शुरुआती चरण में रक्त निकलता है, और इनमें से 50% स्थितियों में सामान्य डिलीवरी (delivery) होती है।
  • खून के थक्के (clot) जैसी वस्तु से युक्त टिश्यू (tissue) का गुप्तांग से गुज़रना।
  • गर्भावस्था के लक्षणों में अचानक कमी आना।

गर्भावस्था के दौरान कितनी बार डॉक्टर से जांच करवाएं?

मिसकैरेज के कारण (Probable reasons behind miscarriage – miscarriage ki wajah)

जब एक महिला मिसकैरेज का सामना करती है, तो इसका कारण भ्रूण का पूर्ण रूप से विकसित ना होना है। इसका एक अन्य कारण क्रोमोसोम्स (chromosomes) का प्रभाव भी हो सकता है। कई बार पूरी तरह बचाव के उपाय अपनाने के बाद भी इस बात के प्रति आश्वस्त नहीं हुआ जा सकता कि गर्भवती महिला अपना बच्चा नहीं खोएगी।

आपके गर्भ में पल रहे बच्चे को सही मात्रा में सामान्य क्रोमोसोम्स की आवश्यकता पड़ती है। माता और पिता दोनों से ही अगर उसे 23 क्रोमोसोम्स मिलें तो यह आदर्श स्थिति होती है। पर कई बार बच्चे को पूरे 23 क्रोमोसोम्स नहीं प्राप्त होते हैं। इसकी बजाय उसे अपनी माँ से 30 एवं पिता से 16 क्रोमोसोम्स प्राप्त होते हैं। यह वह स्थिति होती है जब एक महिला अपना बच्चा खो देती है। अगर बच्चे का जन्म किसी तरह हो भी जाता है तो वह कुछ आनुवांशिक कमियों के साथ पैदा होता है।

देर से होने वाले मिसकैरेज माँ, जिसने भ्रूण को गर्भ में रखा है, को होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़कर भी देखा जा सकता है। ऐसी भी कई स्थितियां उत्पन्न होती हैं जब एक महिला को कई कई बार मिसकैरेज का सामना करना पड़ता है। ऐसा होने का मुख्य कारण महिला की खराब जीवनशैली भी हो सकती है। क्योंकि आपके अंदर एक और जीवन पल रहा है, अतः आप अपनी पुरानी बुरी आदतों को जारी नहीं रख सकती। गर्भावस्था के समय के दौरान धूम्रपान तथा शराब पीना मिसकैरेज होने का काफी बड़ा कारण हो सकता है।

मिसकैरेज का इलाज (Treatment for miscarriage)

मिसकैरेज के इलाज का मुख्य उद्देश्य हैमेरेजिंग (hemorrhaging) या इन्फेक्शन को रोकना है। आपके गर्भावस्था की स्थिति जितनी जल्दी होगी, इस बात की संभावना उतनी ही अधिक बढ़ जाएगी कि आपका शरीर खुद ही भ्रूण के सारे टिश्यूस (fetal tissue) को बाहर निकाल लेगा और आपको इसके लिए किसी भी प्रकार की डॉक्टरी सहायता की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अगर शरीर खुद से सारे टिश्यूस को नहीं निकालता है तो आप खून और इन्फेक्शन को रोकने के लिए डाइलेशन (dilation) तथा क्यूरेटेज (curettage) का सहारा ले सकते हैं, जिसे D&C भी कहा जाता है।

डिलेटेशन तथा क्योरेटेज  (Dilatation and curettage)

गर्मियों में गर्भावस्था से जुड़े बचाव के उपाय

यह आमतौर पर उपचार की विधि तब बनती है जब एक गर्भवती महिला आंशिक (partial) मिसकैरेज से गुजरती है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत गर्भाशय से बची हुई कोशिका (tissue) को निकाल दिया जाता है। इसके अंतर्गत डॉक्टर आपकी गर्भाशय नाल (cervix) को चौड़ा करते हैं एवं क्रेट (cret) नामक एक औज़ार की मदद से कोशिका को निकाल देते हैं।

दवाई (Medicine)

कई बार सिर्फ दवाइयों की सहायता से ही मिसकैरेज की समस्या से परेशान महिला के शरीर से गर्भ की अनचाही कोशिका को निकाल बाहर किया जा सकता है। यह एक महिला की मिसकैरेज की समस्या का निवारण करने का काफी अच्छा तरीका है।

HCG उपचार (HCG treatment)

रक्त की मदद से गर्भावस्था के हॉर्मोन (hormone) की मात्रा का पता लगाने में मदद मिलती है, तथा इसकी मदद से मिसकैरेज की अवस्था का भी पता लगाया जा सकता है। जब खून का निकलना रूक जाता है तो आमतौर पर आप रोज़ाना के कार्य करने में सक्षम हो सकती हैं। इस उपचार के अंतर्गत अगर आपका गर्भाशय डाइलटेड (dilated) है तो परीक्षण में आपका गर्भाशय कमज़ोर निकल सकता है। इस समय अगर आपके गर्भावस्था की स्थिति सामान्य बनी रहती है तो गर्भाशय को बंद करने की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है। अगर आपके रक्त का प्रकार Rh नेगेटिव (Rh negative) है तो डॉक्टर आपको Rh इम्यून ग्लोब्युलिन (Rh immune globulin) नामक उत्पाद प्रदान करते हैं, जो आपके शरीर में एंटी बॉडीज़ (antibodies) का उत्पादन होने से रोकता है। यह आपके बच्चे तथा भविष्य में होने वाली आपके गर्भावस्था की स्थिति के लिए काफी हानिकारक साबित हो सकता है।

रक्त जांच (Blood tests)

रक्त जांच, आनुवांशिकता जांच तथा दवाइयाँ उन महिलाओं के लिए काफी आवश्यक हैं जो एक के बाद एक मिसकैरेज का शिकार हुई हैं। इसे रेकर्रेंट मिसकैरेज (recurrent miscarriage) कहा जाता है। ऐसी कई जांच की प्रक्रियाएं हैं जिनसे दोहरे मिसकैरेज की जाँच की जा सकती है।

  • पेल्विक अल्ट्रासाउंड(Pelvic ultrasound)
  • हिस्टेरोसल्पिंगोग्राम (Hysterosalpingogram)
  • हिस्टेरोस्कोपी (Hysteroscopy)

गर्भपात के घरेलू उपचार – मिसकैरेज से बचाव (Prevention of miscarriage – garbhpat se bachne ke upay)

जन्मोत्तर प्रेगनेंसी बेल्ट के प्रयोग के कारण/सर्वश्रेष्ठ जन्मोत्तर प्रेगनेंसी बेल्ट्स

ज़्यादातर मिसकैरेज का मुख्य कारण क्रोमोज़ोम की असामान्यता (chromosomal abnormality) होते हैं, अतः इनके बचाव के लिए ज़्यादा कुछ नहीं किया जा सकता। आपको गर्भधारण के पहले जितना हो सके उतना स्वस्थ रहने की आवश्यकता होती है, जिससे कि शरीर के अंदर इसे लेकर एक अच्छा और सकारात्मक माहौल तैयार हो सके।

  • गर्भपात से बचने के उपाय, रोज़ाना व्यायाम करें।
  • स्वस्थ खानपान बनाए रखें।
  • गर्भपात से बचने के उपाय, तनाव को नियंत्रण में रखें।
  • अपने वज़न को भी स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से नियंत्रित रखें।
  • गर्भपात से बचने के उपाय, रोज़ाना फोलिक एसिड (folic acid) की मात्रा ग्रहण करें।
  • धूम्रपान करना बंद कर दें।

एक बार जब आपको पता चले कि आप गर्भवती हैं, तो आपका लक्ष्य यही होना चाहिए कि शरीर को ज़्यादा से ज़्यादा स्वस्थ बनाए रखें, जिससे बच्चे को विकास के लिए अच्छा और स्वस्थ माहौल मिल सके।

  • गर्भपात रोकने के उपाय, अपने पेट के भाग (abdomen) को सुरक्षित रखें।
  • धूम्रपान ना करें तथा ऐसे लोगों के आसपास भी ना रहें।
  • गर्भपात से बचने के उपाय, शराब को हाथ भी न लगाएं।
  • गर्भपात रोकने के उपाय, दवाई की दुकान से कोई दवाई खरीदने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह कर लें।
  • कैफीन (caffeine) का प्रयोग कम या बिलकुल बंद कर दें।
  • पर्यावरण के हानिकारक (environmental hazards) जैसे रेडिएशन (radiation), फैलने वाली बीमारी और एक्सरे (x-ray) आदि।
  • गर्भपात रोकने के उपाय, ऐसे खेलों या गतिविधियों से दूर रहे, जिसमें चोट लगने की काफी संभावना हो।
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