What are the most embarrassing pregnancy symptoms? – गर्भावस्था के सबसे शर्मनाक लक्षण

गर्भावस्था की एक अच्छी और खुशनुमा बात यह होती है कि इस समय आप खूबसूरत और दमक से भरी हुई लगती हैं। हालाँकि गर्भावस्था से जुड़ी कई और बातें भी हैं जो वैसे तो सामान्य हैं, पर एक गर्भवती महिला के लिए इनका अनुभव करना काफी शर्मनाक हो सकता है।

गर्भावस्था के शर्मनाक लक्षण (Embarrassing pregnancy symptoms)

गर्भवती होने के बाद गैस की समस्या (Unruly gas hai grabhawastha ki muskiley)

यह काफी शर्मनाक हो जाता है जब कोई गर्भवती स्त्री किसी गंभीर वार्तालाप या मीटिंग के बीच में अचानक डकार ले ले या फिर किसी भीड़ भरे में एलीवेटर में वायु निकालने का कार्य करे। शरीर में उच्च मात्रा में प्रोजेस्टेरोन हो जाने से गैस की समस्या बढ़ जाती है। प्रोजेस्टेरोन गैस्ट्रो इन्टेस्टाइनल ट्रैक्ट (gastrointestinal tract) की मांसपेशियों को ढीला कर देता है तथा हाज़मे को भी धीमा कर देता है जिससे कि गैस बनती है। इस शर्मनाक स्थिति से बचने के लिए थोड़े थोड़े अंतराल पर कम कम भोजन करें तथा गैस बनाने वाले खाद्य पदार्थों जैसे बीन्स, ब्रॉकली, बंद गोभी और कार्बोनेटेड पेय पदार्थों से बचकर रहें।

गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षण, हॉर्मोन्स की समस्या (Unruly hormones)

महिलाओं के लिए गर्भावस्था के उपयोगी नुस्खे

गर्भावस्था के दौरान कुछ हॉर्मोन्स आपको चिड़चिड़ा बनाकर आपके गुस्से को और भी ज़्यादा बढ़ाते रहते हैं। एक गर्भवती महिला को पहली तिमाही में तथा गर्भावस्था के अंतिम समय में मूड में बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए। हालांकि कई महिलाएं मूड के इस तरह के बदलाव को अपनी गर्भावस्था के पूरे समय महसूस करती रहती हैं।

गर्भावस्था का पहला महीना – मॉर्निंग सिकनेस (Morning sickness)

ज़्यादातर गर्भवती महिलाएं पहली तिमाही में मतली (nausea) का अनुभव करती हैं जो कि हॉर्मोन का स्तर बढ़ने की वजह से पैदा होती है। कुछ ख़ास प्रकार की गंध, भोजन और खुशबुओं से भी कई बार मतली का अनुभव हो सकता है। इस समस्या से निपटने के लिए कोई ठोस कैंडी, आइस चिप्स या नींबू चूसने से काफी आराम मिलेगा। नींबू पानी (lemonade) का सेवन भी गर्भावस्था के समय मॉर्निंग सिकनेस की समस्या को दूर करने में काफी कारगर सिद्ध होता है।

  • गर्भावस्था के समय महिलाओं को बार बार बाथरूम जाना पड़ता है और लीकी ब्लैडर (leaky bladder) की यह समस्या एक गर्भवती महिला के लिए काफी शर्मनाक हो सकती है। गर्भावस्था और ब्लैडर की यह समस्या साथ साथ ही चलती है। गीलापन तब उभरता है जब महिलाओं का गर्भाशय उनके ब्लैडर से टकराता है जिससे कि मूत्र रोकना काफी मुश्किल हो जाता है। इससे बचने का एक ही तरीका है कि पेल्विक मांसपेशियों को टोन करने का व्यायाम करके अपने ब्लैडर को मज़बूत करें और सेनेटरी नैपकिन का प्रयोग करें।
  • पेट तथा चेहरे जैसे गलत हिस्सों में बालों का उगना गर्भावस्था के हॉर्मोन्स की वजह से होता है। ये बिलकुल सामान्य तथा अस्थायी होते हैं, अतः इन्हें देखकर बिलकुल भी घबराने की अाश्यकता नहीं है। पर अगर आप इनके होने की वजह से शर्म महसूस करती हैं तो आप इन्हें प्लकिंग, वैक्सिंग या डेपिलेटरी क्रीम्स की मदद से पूरी तरह निकाल भी सकती हैं। इन सबका प्रयोग करते समय काफी सावधान रहे क्योंकि एक गर्भवती महिला की त्वचा काफी संवेदनशील होती है।
  • कई महिलाएं कुछ ख़ास किस्म की महक बर्दाश्त नहीं कर पाती, और कई प्रकार के भोजन जैसे सीफ़ूड की महक से भी उन्हें काफी परेशानी हो सकती है।
  • इस समय डिस्चार्ज की एक सामान्य स्थिति होती है जो कि किसी भी प्रकार के इन्फेक्शन को गर्भाशय में जाने से रोकने का प्राकृतिक तरीका है। इन्हें परफ्यूम वाले जेल या साबुन से ना धोएं क्योंकि इससे गुप्तांग में पैदा होने वाले केमिकल्स का संतुलन बिगड़ सकता है। इस शर्मनाक स्थिति से बचने के लिए पैंटी लाइनर का परकाया किया जा सकता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए आहार

  • गर्भावस्था के समय (pregnancy me hone wali problem) पाइल्स काफी सामान्य रोग होता है और यह कब्ज़ की वजह से होता है। यह खुजली या किसी अन्य प्रकार की परेशानी से शुरू होता है और कई बार बोवेल मूवमेंट के समय भी इस परिस्थिति में दर्द होता है। इनसे बचने का सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि खूब पानी पियें और फाइबर से युक्त भोजन करें जिससे कि आपका मल नरम होगा।
  • गर्भावस्था की पहली तिमाही में हॉर्मोन्स के अत्याधिक उत्पादन से चेहरे पर धब्बों और मुहांसों का होना आम बात है। इनपर ध्यान ना दें क्योंकि ये दाग बिलकुल अस्थायी होते हैं।
  • महिलाएं इस समय अपने अत्याधिक वज़न और शरीर के अजीब आकार की वजह से काफी शर्म महसूस करती हैं और इसलिए अपने पति के साथ उनकी बातचीत और साथ समय बिताने के कार्य में समस्या आती है। इन्हें सामान्य तथा अस्थायी समस्या की तरह ही लें क्योंकि ये कोई गंभीर मामला नहीं है।
  • गंभीर हेमोर्रोइड्स आमतौर पर तीसरी तिमाही या लेबर के दौरान बच्चे के बाहर आने के समय होते हैं। ये सूजी हुई रेक्टल नसें होती हैं जो इस समय खुजली और दर्द से युक्त हो जाती हैं। यह तब होता है जब बढ़ता गर्भाशय पेल्विक नसों पर दबाव डालने लगता है। इस सम्बन्ध में चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि ये सूजन बच्चे के जन्म के बाद धीरे धीरे कम होने लगती है। गर्म पानी से स्नान या आइस पैक का प्रयोग करने से ये सूजन और दर्द दूर हो जाते हैं।
  • गर्भावस्था के दौरान सूजन या इडिमा अतिरिक्त रक्त और अन्य द्रव्यों की वजह से होते हैं। सूजन आमतौर पर हाथों, चेहरे, टखनों तथा पैरों पर तीसरी तिमाही के वक़्त देखी जाती है। इस सूजन को दूर करने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि आराम करते समय अपने पैरों को उपर उठाकर रखें। गर्भावस्था के समय ज़्यादा लम्बे समय तक खड़े होकर या हील पहनकर न रहें। सूजन के समय रोज़ाना जांच कराएं क्योंकि यह प्री एक्लेम्पसिया की चेतावनी होती है। सूजे पैरों के लिए चलना एक अच्छा व्यायाम होता है।
  • इस समय हार्मोनल परिवर्तनों की वजह से भूलने की भी समस्या उत्पन्न होती है। यह भी अस्थायी होता है, अतः घबराएं नहीं। इस स्थिति में हर रोज़ कैलेंडर में ज़रूरी चीज़ें लिखती रहें।