Mumps in children – Effective home remedies and symptoms of mumps – गलसुआ होने पर करें ये उपाय, मम्प्स के घरेलू इलाज

गलसुआ (mumps) एक वायरल इन्फेक्शन है, यह गले या कंठमाला में होने वाला एक संक्रामक रोग है जिसमें बिमारी गले में सूजन और दर्द के रूप में उभर कर आती है। यह दर्द व सूजन लार ग्रंथि में होता है जिसकी वजह से कई तरह की परेशानी महसूस होती है जिसमें बुखार, थकान और भूख की कमी आदि प्रमुख लक्षण हैं। मम्प्स रोग के लक्षण अधिकांश ऐसे 2 से 12 साल के बच्चों में अधिक दिखाई देते हैं जिन्हें वैक्सीन नहीं दी गई है।

मम्प्स या गलसुआ रोग के प्रमुख लक्षण हिन्दी में (Symptoms of mumps in Hindi)

गलसुआ रोग के लक्षण बच्चों में लगभग 14 दिनों तक प्रभावी रहते हैं, यह इस रोग का एक सामान्य लक्षण है जिसके द्वारा इसकी पहचान की जा सकती है।

  • मम्प्स रोग में चेहरे के एक तरफ के हिस्से में सूजन के साथ अत्यधिक दर्द महसूस होता है। कुछ बच्चों में यह चेहरे के एक तरफ और कुछ बच्चों में यह रोग दोनों तरफ के गाल को प्रभावित करता है।
  • गलसुआ रोग में बच्चे को बुखार आता है और सिर दर्द में कमी या बढ़ोत्तरी होती रहती है।
  • लड़कों में इसके साथ कुछ अन्य लक्षण भी नज़र आते हैं जैसे – उन्हें अंडकोष में दर्द, गांठ या अंडकोष में सूजन की शिकायत भी हो सकती है।

बच्चों में मम्प्स के उपचार के घरेलू उपाय हिन्दी में (Mumps ke gharelu ilaj Hindi me)

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नमक के पानी से गलसुआ का घरेलू उपचार (Salt water to prevent mumps)

गलसुआ रोग में दर्द को कम करने के लिए गरम पानी के साथ नमक का प्रयोग बहुत फायदेमंद होता है। यह दर्द को कम करता है और इसकी वजह से होने वाली तकलीफ भी कम हो जाती है। मम्प्स (mumps) होने पर एक कप गरम पानी में एक चम्मच सादा नमक मिलाएँ और इस पानी से बच्चे को कुल्ला करवाएँ। ऐसा करने से दर्द में काफी हद तक राहत मिलती है। इस प्रक्रिया को दिन में कई बार दोहराया जा सकता है। नमक का पानी दर्द को कम करने के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना गया है।

इसके अलावा एक अन्य प्रयोग भी किया जा सकता है जो मम्प्स के घरेलू इलाज के रूप में जाना जाता है। एक कप चावल को 2 कप पानी में उबाले और चावल के दानों के पक जाने पर बचे अतिरिक्त पानी को बच्चे को पीने के लिए दें। यह शरीर में ज़रूरी पोषण की कमी की पूर्ति में सहायक होता है। इसके अलावा इस गरम तरल पेय से गले की सिकाई भी होती है जो दर्द को कम करने में सहायता करता है। अगर पके हुये चावल के पानी या मांड को पीने में किसी तरह की समस्या हो रही हो तो इसमें थोड़ा नमक और मक्खन मिला कर भी सेवन किया जा सकता है।

मम्प्स के दर्द को कम करने के लिए पेरासिटामोल एलिक्सिर दवा का प्रयोग (Paracetamol elixir for Mumps)

मम्प्स रोग में होने वाले बुखार को कम करने के लिए पेरासिटामोल एलिक्सिर दवा का प्रयोग किया जा सकता है, यह दवा सभी मेडिकल स्टोर्स पर आसानी से उपलब्ध होती है और शरीर में बढ़े हुये तापमान को कम करने में मदद करती है। इसके साथ ही गलसुआ रोग में होने वाले सिर दर्द में भी यह दवा काफी आराम प्रदान करने वाली मानी जाती है। वैसे तो इस दवा के साइड इफ़ेक्ट नहीं होते लेकिन इसे बच्चे को देने के पहले अपने डॉक्टर से एक बार सलाह अवश्य ले लें।

सिकाई से गलसुआ का घरेलू इलाज हिन्दी में (Use compress best home remedy for mumps in Hindi)

गलसुआ में होने वाले दर्द को जितना हो सके प्राकृतिक तरीके से ही ठीक करने की कोशिश की जाए तो बेहतर है। दर्द में गरम और ठंडी सिकाई बहुत लाभदायक होती है। जब लार ग्रंथि में मम्प्स की वजह से सूजन आ जाती है तो उस स्थान पर अत्यधिक दर्द महसूस होता है। इस स्थान पर गरम और ठंडी पट्टी की सिकाई समय समय पर नियमित रूप से की जानी चाहिए। इसे दिन में कई बार दोहराते रहें, सिकाई से सूजन के साथ साथ दर्द में भी कमी आती है।

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कोल्डड्रिंक से करें मम्प्स का इलाज (Cold drinks without acidic soda for Mumps)

ऐसे कई कोल्डड्रिंक्स बाज़ार में मौजूद हैं जिनमें एसिडिक सोडा या एसिडिक तरल मौजूद नहीं होता। मम्प्स में आप ऐसे ही तरल पदार्थों या ड्रिंक्स का प्रयोग कर सकते हैं। खास तौर पर फ्रूट जूस आदि एसिडिक सोडारहित होते हैं जो किसी तरह का नुकसान पहुंचाए बिना मम्प्स को ठीक करने में मदद करते हैं। अक्सर गलसुआ रोग होने पर भूख या खाने की इच्छा खत्म हो जाती है जिससे जल्दी थकान और कमजोरी महसूस होने लगती है साथ ही रोग को ठीक होने में भी अधिक समय लगता है, ऐसी स्थिति से बचने के लिए ही इस तरह के फ्रूट जूस या तरल पदार्थों के सेवन की हिदायत दी जाती है। इसके साथ ही तरल भोजन जैसे पतली खिचड़ी, दलिया, दाल आदि का सेवन करना बेहतर होता है।

मम्प्स में ऐसे भोजन से बचें (How to prevent Mumps in Hindi and food to avoid)

मम्प्स होने पर ऐसे भोजन खाने से बचना चाहिए जो लार को बढ़ावा देते हों, जैसे सिट्रिक एसिड या सिट्रिक एसिडयुक्त फलों का सेवन नहीं करना चाहिए। इन सब के साथ ही ऐसे भोजन से भी बचना चाहिए जिसे चबाने में ज़्यादा समय और ताकत की ज़रूरत पड़ती है। ठोस या सख्त पदार्थ नहीं खाने चाहिए। इसे निगलने में भी परेशानी हो सती है जो दर्द को बढ़ा देता है।

अदरक से कैसे करें गलसुआ का रोग के उपाय (How to use ginger to recover from Mumps? Galsua ka gharelu upchar)

अदरक हमारे रोज के भोजन का एक अभिन्न अंग है इसमें दर्दनिवारक गुण पाया जाता है। इस प्रयोग को करने के लिए ताजे अदरक को धोकर साफ कर लें और इसे धूप में सूखा लें। इसे धूप में सुखाने के बाद पीस कर पाउडर बना लें। अगर यह विधि आपको मुश्किल लगती हो तो आप बाज़ार से सूखा अदरक या सोंठ खरीद सकते हैं जो आसानी से दुकानों में मिल जाता है। सोंठ या सूखे हुये अदरक के चूर्ण को पानी में मिलाकर पेस्ट की तरह बना लें और इसे गले और दर्द वाली प्रभावित जगह पर लेप की तरह लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें। इस प्रक्रिया को दोहराते रहें। इससे दर्द और सूजन को कम करने में मदद मिलती है।

एलोवेरा जेल से मम्प्स का प्राकृतिक इलाज (Way to reduce mumps with aloe vera gel)

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एलोवेरा संक्रमणरोधी होने के साथ साथ एक अच्छा एंटीबायोटिक और दर्दनाशक भी होता है। ताजे एलोवेरा के पत्तों से जेल निकाल कर उसमें एक चुटकी हल्दी का पाउडर मिला लें, इसे प्रभावित जगह पर हल्के हाथों से मसाज करें। मसाज के बाद 30 मिनट तक इसे ऐसे ही रहने दें और फिर हल्के गरम पानी से त्वचा को धोकर साफ कर लें। इस विधि को दिन में दो से तीन बार दोहराते रहें।

गलसुआ रोग में रखें ये सावधानी, गले को ढककर रखें (Cover the neck for relief from Mumps)                       

गलसुआ होने पर गले के हिस्से को ठंडी हवा के संपर्क में आने से रोकें। ठंडी हवा रोग को बढ़ने में मदद करती है इसीलिए गले को स्कार्फ या किसी मुलायम कपड़े से कवर कर के रखें। ठंडी हवा से बचे रहें और मम्प्स रोग में गले और उसके आस पास के हिस्से को  उचित सावधानी के साथ साफ सूत्र रखें ताकि संक्रमण फैलने का दर और अधिक न हो।

मम्प्स के सही उपचार के लिए आराम ज़रूरी (Get rest to decrease mumps in Hindi)

मम्प्स होने पर शरीर को पर्याप्त आराम की भी सख्त ज़रूरत होती है। तनाव या चिंता से बचे रहें क्योंकि तनाव से इस रोग में दर्द और बुखार के लक्षण कम होने की जगह बढ़ सकते हैं। मानसिक दबाव लेने से बचें। शरीर को उचित आराम दें और नींद के साथ दिन में थोड़ी थोड़ी देर की झपकी भी लेनी चाहिए।

पानी का प्राकृतिक उपचार (Meet the hydration home remedy)

किसी भी रोग में पानी की कमी समस्या को बढ़ाने में मदद करती है। मम्प्स के उपचार के साथ साथ शरीर में पानी का स्तर सही होना ज़रूरी होता है। किसी भी तरह से शरीर में पानी की कमी न होने दें। अधिक से अधिक पानी पीते रहें, इसके साथ साथ तरल पदार्थों का भी सेवन करें। इसके अलावा एलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक का भी सेवन बेहतर माना जाता है।

दालों और मछली का सेवन करें (Go with Beans and cold water fish)

ठंडे पानी की मछली और दालों में अत्यधिक मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है जो मम्प्स के लक्षणों को कम करने में सहायक होते हैं। गर आपके बच्चे में मम्प्स के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो उसे नियमित रूप से बीन्स, दालें और मछली का सेवन कराएं।

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फल व सब्जियों से करें मम्प्स रोग का मुक़ाबला (Prefer fruits and vegetables)

किसी भी रोग से लड़ने के लिए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता का बेहतर होना बहुत ज़रूरी है। प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होने से रोग में जल्दी सुधार आता है। विभिन्न तरह के फल व सब्जियाँ हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है जिसके द्वारा हम आसानी से रोगों का मुक़ाबला कर रोगमुक्त होते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियों के साथ, टमाटर, शिमला मिर्च, ब्लूबेरी और चेरी आदि का सेवन करना चाहिए।

गलसुआ में जौ का आहार लाभदायक (Liquid oatmeal to slow down digestion)

गलसुआ होने पर ठोस चीज़ें खाने में कठिनाई होती है। इसे निगलना भी आसान नहीं होता जो दर्द को बढ़ा सकता है। अगर बच्चे को भोजन निगलने में परेशानी हो रही  हो तो जौ का पतला आहार खाने के लिए दिया जा सकता है जिसे निगलने में भी किसी तरह की कोई समस्या नहीं होती। यह भूख को भी शांत करता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाए रखता है।

मेथी से मम्प्स के दर्द का प्राकृतिक उपचार (How to get rid of mumps with fenugreek seeds?)

मेथी के दानों में एंटी वायरल और दर्दनाशक गुण मौजूद होते हैं। इसके उपाय में मेथी के दानों को पीसकर महीन पाउडर बना लें और इसे पानी के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को दर्द वाली जगह पर लेपो की तरह लगा लें और 30 मिनट तक सूखने दें। इस उपचार को दिन में दो से तीन बार करने से दर्द में काफी कमी आती है। इसके अलावा मेथी का एक अन्य प्राकृतिक उपाय यह है कि, मेथी के दानों को गरम पानी के साथ सीधे सेवन किया जा सकता है जो दर्द को कम करने में सहायक होता है।

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